पत्रकार जब कविता लिखता है तो वह कुछ अलग साहित्य होता है… पुस्तक का विमोचन

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भोपाल। सारादिन खबरों को लपकने की होड़ में जुटे रहने वाले पत्रकारों के मन का एक कोना साहित्य से भी सजा ही होता है। मन इसी हिस्से से निकलकर कागजों पर बिखरने वाले शब्द कभी कविता, गीत, गजल का रूप भी ले लेते हैं। राजधानी के दुष्यंत संग्रहालय के राजुस्कर राज स्मृति सभागार में ऐसे ही पत्रकारों की रचनाओं को लेकर उकेरी गई पुस्तक का लोकार्पण किया गया। बुधवार को सजी इस महफिल खास का आयोजन संस्था हम विक्रम ने किया था।
अष्ठाछाप के अर्वाचीन कवि शीर्षक से प्रकाशित इस पुस्तक को संजोने में वरिष्ठ पत्रकार पंकज पाठक ने मशक्कत की है। उन्होंने समंदर से चुने हुए मोतियों की तरह खबरों से ताल्लुक रखने वाले राजधानी भोपाल के आठ पत्रकारों की काव्य रचनाओं को इसमें शामिल किया है। इन पत्रकारों में शिल्पा शर्मा, उमेश त्रिवेदी, पंकज पाठक, डॉ वंदना शुक्ला, अजय बोकिल, कौशल किशोर चतुर्वेदी, आरिफ मिर्जा और आरती शर्मा शामिल हैं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ समाजसेवी हेमंत मुक्तिबोध थे। अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार उमेश त्रिवेदी ने की। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार महेश श्रीवास्तव मौजूद थे। इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी भी खासतौर से मौजूद थे। इस मौके पर एक लघु काव्य पाठ का आयोजन भी किया गया।

विक्रम से जुड़े पत्रकार और कवि
कार्यक्रम संयोजक डॉ नजर मेहमूद ने बताया कि पत्रकार और कवि/शायर की दोहरी भूमिका निभाने वालों की बड़ी फेहरिस्त है। इस पुस्तक में शामिल सभी पत्रकारों का संबंध उज्जैन की विक्रम यूनिवर्सिटी से रहा है। उन्होंने कहा कि यह एक शुरुआत मात्र है, प्रयासों का यह सिलसिला सतत रहने वाला है।

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