रिक्की सिंह खजुराहो
खजुराहो।आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) विश्व प्रसिद्ध खजुराहो के मंदिरों के रखरखाव का काम कर रहा है। हर 10 साल में ASI का साइंस डिपार्टमेंट मंदिरों के पत्थरों पर एक खास तरह के केमिकल का छिड़काव करता है, ताकि मंदिर के पत्थरों की चमक बरकरार रहे, लेकिन इसके उल्टे नतीजे दिखाई दे रहे हैं।
एएसआई जिस केमिकल का इस्तेमाल कर रहा है वह मंदिरों की सुंदरता को खराब रहा है। कई जगहों पर मूर्तियों की ऊपरी परत खराब होकर सफेद पड़ गई है। केमिकल एक्सपर्ट का कहना है कि मंदिर बलुआ पत्थर (सेंड स्टोन) से बने हैं। इनके रखरखाव के लिए जो केमिकल इस्तेमाल हो रहा है वो क्षारीय (बेस) प्रकृति का है।
एएसआई के अधिकारियों का कहना है कि रखरखाव का काम उनकी साइंस विंग करती है। जिस केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है वो पूरी तरह से जांचा परखा है।
10 साल में एक बार होती है पत्थरों की सफाई
यूनेस्को के विश्व धरोहर में शामिल खजुराहो के मंदिर बलुआ और ग्रेनाइट पत्थरों से बने हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया) 10 साल में एक बार इनकी सफाई करता है। इसके लिए खास तरह के केमिकल का इस्तेमाल होता है। इस केमिकल से काले पड़ चुके पत्थरों की सफाई होती है। इसकी एक पूरी प्रक्रिया है।
एक मंदिर की सफाई में करीब 2 साल का वक्त लगता है। यहां 25 मंदिर हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो हर दिन किसी ना किसी मंदिर की सफाई का काम एएसआई की तरफ से किया जाता है। इस समय मतंगेश्वर मंदिर में सफाई का काम चल रहा है।

मूर्तियों पर चढ़ी सफेद परत, घिसने से टूट रहा पत्थर

न्यूज़ डायरी ने खजुराहो के मंदिरों का जायजा लिया तो पाया कि भले ही मंदिरों की मूर्तियों की साफ-सफाई का काम किया जा रहा है, लेकिन सफाई के कुछ सालों बाद पत्थर पर सफेद रंग की परत चढ़ रही है। इनकी चमक भी पहले से कम हो रही है। कई मंदिरों की परतें भी उखड़ी हुई देखने को मिली।
सिलिकॉन बेस्ड केमिकल का किया जा रहा इस्तेमाल
मंदिर की साफ-सफाई के लिए जिस केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है वह सिलिकॉन बेस्ड है। सॉल्वेंटलैस प्रक्रिया के लिए इसी केमिकल का इस्तेमाल होता है। ये केमिकल सिलेन और सिलोक्सेन नाम के केमिकल के मिश्रण से बना है। इसे कार्बनिक सॉल्वेंट्स के साथ पतला किया जाता है। केमिकल को जल विरोधी माना जाता है। एक तरह से ये पानी को पत्थर के भीतर जाने से रोकने के लिए लगाया जाता है।

एक्सपर्ट के मुताबिक खजुराहो के मंदिर एक के ऊपर एक कर रखे गए पत्थरों के ब्लॉक से बनाए गए हैं। पत्थरों को लोहे के क्लैंप (एक तरह का तार) से जोड़ा गया है। इस कारण मंदिर में बारिश का पानी आसानी से घुस जाता है, जिससे नमी की मात्रा बढ़ जाती है। नमी को बाहर निकालने के लिए मंदिरों में हवा के प्रवेश का रास्ता भी सीमित हैं। यदि नमी बनी रहेगी तो इससे पत्थर कमजोर होगा और मूर्तियों के खराब होने का खतरा बना रहेगा।
केमिकल एक्सपर्ट बोली- केमिकल सीमेंट कंक्रीट के लिए सही मगर पत्थर के लिए नहीं
मूर्तियों के रखरखाव के लिए इस्तेमाल किए जा रहे केमिकल को लेकर भास्कर ने इंस्टीट्यूट ऑफ एक्सीलेंस इन हायर एजुकेशन भोपाल की केमिस्ट्री प्रोफेसर डॉ. पुष्पा मूलचंदानी रावतानी से बात की। उन्होंने बताया कि खजुराहो के मंदिर सेंड स्टोन से बने हैं। ये नेचुरल स्टोन नाजुक होता है। इनकी साफ-सफाई के लिए अमोनिया और जिस केमिकल का इस्तेमाल हो रहा है वो अम्लीय (एसीटिक) प्रकृति का है। इस केमिकल में सिलिकॉन है जो लंबे समय बाद पत्थरों को नुकसान पहुंचाता है।
उनके मुताबिक ऐसे पत्थरों के रखरखाव के लिए न्यूट्रल सिलिकॉन से बने केमिकल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमोनिया की प्रकृति भी क्षारीय (बेस) होती है। उसकी जगह भी किसी ऐसे केमिकल का इस्तेमाल होना चाहिए जो अम्लीय या क्षारीय प्रकृति का न हो।
एएसआई के अधिकारी ने कहा- साइंस टीम बेहतर काम कर रही है
जबलपुर मंडल के इंचार्ज ASI अधिकारी शिवकांत वाजपेयी का कहना है कि खजुराहो के सभी मंदिरों का फाउंडेशन ग्रेनाइट से बना हुआ है। बाकी मूर्तियां सेंड स्टोन यानी बलुआ पत्थरों से बनी हुई हैं। ग्रेनाइट बहुत हार्ड होता है, इसलिए उस पत्थर में मूर्तियों को उकेरना कठिन होता है, इसलिए इन्हें सेंड स्टोन में बनाया गया है उनके मुताबिक खजुराहो मंदिर के संरक्षण के लिए एएसआई की एक अलग टीम है। सफाई का जिम्मा इसी टीम के पास होता है। उन्होंने कहा कि एएसआई की साइंस ब्रांच मंदिरों की मॉनिटरिंग करती है। सभी मंदिरों की सफाई का काम क्रमानुसार चलता है। पहले एक मंदिर की सफाई होती है फिर दूसरे
मंदिर की। जहां ज्यादा जरूरत होती है उस मंदिर की
सफाई प्राथमिकता के आधार पर होती है।
सफाई के लिए इस्तेमाल हो रहे केमिकल को लेकर उन्होंने कहा कि जिस केमिकल का इस्तेमाल हो रहा है उसकी पूरी जांच की गई है। टीम जो काम कर रही है वो बेहतर है। विश्व धरोहर होने की वजह से खजुराहो के मंदिरों की अतिरिक्त देखभाल की जाती है।
