अमित सेन
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भोपाल। कभी इस्तेमाल किया जाने वाला जुमला “दिल्ली दूर है…” इस आधुनिक तकनीक और फास्टेस्ट ट्रेनों के दौर में लागू होता दिखाई दे रहा है। अव्यवस्थाओं भरे रेलवे के इंतजाम ने जहां इस सफर को मुश्किल बना दिया है, वहीं सटीक जानकारी समय पर न देकर यात्रियों को मुश्किल में भी डाला जा रहा है।
दिल्ली भोपाल के बीच मथुरा और आगरा स्टेशन के आसपास जारी सुधार और नवीनीकरण कार्य के चलते पिछले कई दिनों से सफर मुश्किल बना हुआ है। घंटों की देरी से चल रही ट्रेनों के बीच दो दर्जन से ज्यादा ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। जबकि जो ट्रेनें अब तक पटरी पर हैं, उनका सफर बेहद थकाऊ और मुश्किलभरा हो गया है।
अव्यवस्थाओं का राज
भोपाल और दिल्ली के बीच चल रही कई दर्जन ट्रेनों को घंटों की देरी लगी हुई है। लेकिन इनकी सटीक जानकारी न तो रेलवे इंक्वारी से मिल रही है और न ही वेबसाइट पर ही संतोषजनक जानकारी अपडेट की जा रही है। नतीजा यह है कि यात्रियों को अपनी ट्रेन के इंतजार में घंटों प्लेटफार्म पर परेशान होना पड़ रहा है।
ली जा रही सब्र की परीक्षा
शान ए भोपाल का खिताब रखने वाली रानी कमलापति निजामुद्दीन सुपर फास्ट ट्रेन का भोपाल से चलने का निर्धारित समय रात 10.40 बजे है। बुधवार रात को इसको रीशेड्यूल कर रात 2.40 बजे कर दिया गया। इस लिहाज से स्टेशन पर पहुंचे लोगों को जानकारी मिली कि ट्रेन 5.20 घंटे की देरी के साथ रात 4.13 बजे रवाना किया जाएगा। लेकिन ये समय गुजर जाने के बाद स्टेशन से अपडेट जानकारी की उद्घोषणा ही बंद कर दी गई। इधर रेलवे वेबसाइट पर इस ट्रेन का नया समय अगले दिन सुबह 9.45 बजे दर्शा दिया गया। यात्री इस समय के लिहाज से प्लेटफार्म छोड़ने का मन बनाने लगे तो ऐसे में अचानक अनाउंसमेंट हो गया कि ट्रेन कुछ देर में प्लेटफार्म पर लग रही है। जिसके बाद सुबह 5.13 बजे ये ट्रेन भोपाल स्टेशन से रवाना हुई। लेकिन ट्रेन ने अपने सुपर फास्ट तमगे को दरकिनार कर लोकल से भी निचले दर्जे की स्पीड अपना ली। जिसके चलते पूरी रात परेशान हुए यात्री सारा दिन सफर कर देर शाम दिल्ली दर्शन कर पाए।
प्लेटफार्म पर इंतजाम नहीं
राजधानी के महत्वपूर्ण स्टेशन पर पहुंचे यात्रियों के लिए न तो बैठक के इंतजाम मौजूद हैं और न ही माकूल सफाई की कोई व्यवस्था यहां है। रात गहराते ही यहां आवारा कुत्तों की भरमार भी शुरू हो जाती है। प्लेटफार्म के बीच बने फूड स्टॉल ने इतनी घेराबंदी कर रखी है कि ट्रेन लगने पर यहां यात्रियों का यहां से वहां जाना भी मुश्किल है। इस बीच स्टॉल के किसी समान को धक्का लग जाने से स्टॉल संचालक बदतमीजी और गुंडागर्दी पर भी उतारू हो जाते हैं।
और बदल जाता है प्लेटफार्म
वेबसाइट की जानकारी और डिस्प्ले की सूचना थामे यात्री किसी प्लेटफार्म पर अपनी ट्रेन का इंतजार कर रहे होते हैं। ऐसे में अचानक उद्घोषणा होती है कि किन्हीं कारणों से प्लेटफार्म में बदलाव कर दिया गया है। अचानक होने वाले इस ऐलान से एक ही समय में कई ट्रेनों के यात्रियों को जूझना पड़ता है। जिसके चलते प्लेटफार्म पर भागमभाग और अफरा तफरी का माहौल दिखाई देने लगता है।
