सड़क हादसाः पिकअप ने मारी बाइक को टक्कर- किशोरी की मौत, भाई व मां घायल

बिशनखेड़ी रोड गांधी नगर में हादसा मामा के घर से लौट रहे थे सभी

जीतेन्द्र सेन
भोपाल।। गांधी नगर थाना क्षेत्र इलाके में रविवार शाम रांग साइड से आ रही तेज रफ्तार पिकअप वाहन ने  मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि उस पर सवार 17 साल की कॉलेज छात्रा उछलकर दूर जा गिरी। सिर फटने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई जबकि उसका छोटा भाई और मां गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक ग्राम डुंगरिया थाना बैरसिया जिला भोपाल निवासी शिम्पी राजपूत पुत्री स्व. परमोल सिंह राजपूत (17) बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। राज नगर कॉलोनी करोंद में शिम्पी के मामा रहते हैं। रविवार शाम करीब साढ़े पांच बजे शिम्पी और उसका छोटा भाई मोहित राजपूत (16) मां रेखा राजपूत के साथ पल्सर मोटरसाइकिल पर सवार होकर मामा के घर से अपने गांव डुंगरिया लौट रहे थे। जैसे ही वह
बिशनखेड़ी रोड पहुंचे, सामने से आ रही तेज रफ्तार पिकअप वाहन के चालक ने लापरवाही से गाड़ी चलाते हुए उनकी मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही मोटरसाइकिल पर सवार शिम्पी राजपूत, मोहित व रेखा राजपूत उछलकर दूर जा गिरे। पत्थर से टकराने से शिम्पी का सिर फट गया। उसकी घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
लोगों ने पुलिस को सूचना देकर घायल मोहित व उसकी मां रेखा राजपूत को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रधान आरक्षक चन्द्रमोहन साहू का कहना है कि मोहित राजपूत 11 वीं कक्षा का छात्र है और अहमदपुर जिला सीहोर के स्कूल में पढ़ाई कर रहा है। पिता का निधन हो चुका है। जिस मोटरसाइकिल से हादसा हुआ है वो नई थी। अभी उस पर रजिस्ट्रेशन नंबर भी नहीं लिखे गए है।

भोपाल ज़िले के सभी शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों के समय में हुआ परिवर्तन

सुबह 8.30 बजे के बाद लगेंगे पहली से आठवीं तक के स्कूल


जीतेन्द्र सेन
भोपाल।। भोपाल ज़िले के सभी शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों के समय में परिवर्तन किया गया है जहां सुबह 8.30 बजे के बाद लगेंगे पहली से आठवीं तक के स्कूल गौरतलब हैं कि भोपाल ज़िले में तापमान में गिरावट के चलते सभी शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों के समय में ज़िला शिक्षा अधिकारी एन.के.अहिरवार द्वारा परिवर्तन के आदेश जारी किए गए हैं। जारी हुआ  आदेश में कहा गया है कि तापमान में गिरावट होने से संस्थाओं में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पढ़ने की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए भोपाल जिले में संचालित समस्त शासकीय अशासकीय,केन्द्रीय विद्यालय,जवाहर नवोदय विद्यालय,आई.सी.एस.ई सी.बी.एस.ई,अनुदान प्राप्त एवं अन्य मान्यता प्राप्त कक्षा नर्सरी से कक्षा आठवी तक की कक्षाएं  प्रातः 08:30 बजे से पूर्व संचालित नहीं की जायें।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से प्रभावशील होगा।

दुनिया में अमन हो, सबकी भलाई के फैसले हों, हर शख्स रहे खुशहाल…

देश, दुनिया, प्रदेश की तरक्की की दुआओं के साथ इज़्तिमा का समापन

आखिरी दिन उठे दुआ के लिए लाखों हाथ
• अल्लाह के रास्ते निकलीं सैकड़ों जमातें
• फटाफट कचरा सफाचट, खटाखट यातायात भी क्लियर

इज़्तिमागाह से खान आशु
ए अल्लाह, हम गुनाहगार हैं, खतावार हैं, तेरे हुक्म से गाफिल हैं, तेरी राह से भटके हुए हैं, तेरे नाफरमान हैं… लेकिन जो हैं, जैसे हैं तेरे बंदे हैं, तेरी किताब के कायल हैं, तेरे पैगंबर की सीरत को मानने वाले हैं….! ए अल्लाह हम सभी पर रहम फरमा दे….!
पिछले तीन दिनों से ईंटखेड़ी में चल रहे 78वें आलमी तबलीगी इज्तिमा का समापन सोमवार सुबह इन दुआओं के साथ हुआ। मौलाना सआद कांधालवी साहब ने यह दुआ कराई। दुआ ए खास के दौरान मौलाना ने पहले अरबी में दुआ की। इसके बाद मौजूद मजमे को जोड़ते हुए उर्दू में भी दुआओं का निजाम चला।
आयोजन स्थल से लेकर तीन किमी तक सड़क खेत और घरों में बैठे लोगों ने आमीन कहा। दुआ ए खास में शिरकत के लिए बड़ी तादाद में लोगों ने रात से ही इज्तिमागाह पहुंचना शुरू कर दिया था। कुछ लोगों ने अल सुबह इज्तिमागाह का रुख किया। सुबह से दुआ के लिए दौड़ ने शहर की अधिकांश सड़कों को वाहनों से भर दिया। हर शख्स इस मजमा ए खास में शामिल होने के लिए उतावला दिखाई दे रहा था। जिस दौरान मौलाना सआद साहब दुआ कर रहे थे, सारा मजमा पिन ड्रॉप साइलेंट की मुद्रा में दिखाई दे रहा था। दूर दूर तक सिर्फ मौलाना की आवाज गूंज रही थी और बीच बीच में लोगों की आमीन की आवाज़ें इसमें शामिल हो रही थीं।

तय वक्त पर हुई दुआ
आलमी तबलीगी इज्तिमा के आखिरी दिन सोमवार को सुबह 10.30 बजे दुआ ए खास होने का ऐलान किया गया था। इस लिहाज से लोगों का इज्तिमागाह पहुंचने का सिलसिला भी अल सुबह से शुरू हो गया था।  मौलाना सआद साहब ने अपना बयान पूरा करने के बाद दुआ ए खास की शुरुआत की। मजमे में मौजूद करीब 13 लाख से भी ज्यादा लोगों दुआ के साथ आमीन की सदाएं गुंजायमान की। खामोशी के दुआ ए खास और आमीन का सिलसिला करीब 30 मिनट तक जारी रहा। सुबह करीब 10.24 बजे शुरू हुई दुआ करीब 10.54 बजे तक चला। दुआ पूरी होने के बाद भोपाल मरकज के इकबाल हफीज ने जमातियों को वापसी का शेड्यूल समझाया।

शुरू हुआ रवानगी का सिलसिला
दुआ के बाद लोगों की रवानगी का सिलसिला शुरू हो गया। यहां से कुछ लोग अपने घरों को लौटे तो कुछ दीन सीखने के मकसद से चार माह और चालीस दिन की जमातों में निकले। 14 नवंबर को हुई  शुरूआत के बाद सोमवार को इस मजहबी समागम का समापन हुआ। जिसमें करीब 13 लाख लोगों ने शिरकत की।

71 पार्किंग में वाहन, ट्रैफिक इंतजाम में हजारों लोग
चार दिन के आलमी तब्लीगी इज्तिमा में 13 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे। हजारों वाहन थे। इज्तिमा स्थल ईटखेड़ी पहुंचने के रास्ते भी सीमित। बावजूद इसके न तो कहीं जाम लगा और न ही कहीं यातायात रुका। इन इंतजामों में लगे पुलिस, प्रशासन के अधिकारियों के साथ हजारों वॉलेन्टियर्स की कई दिनों की मेहनत के चलते ये आसान हो पाया। इज्तिमा के समापन के बाद रास्तेभर वॉलेन्टियर्स ने यातायात इंतजाम संभाले रखा। गोलखेड़ी से होकर कई गांवों को लांघते हुए अचारपुरा बायपास तक आने वाले मार्ग की व्यवस्था हिन्दू भाइयों ने संभाल रखी थी। इनमें एक पूर्व सरपंच भी शामिल थे।

चला तकरीरों का दौर
चार दिन के इस आयोजन में देशभर से उलेमाओं की तकरीर हुई। सोमवार सुबह फजिर की नमाज के बाद की तकरीर में फिर से उन बातों को दोहराया गया। सुबह फजिर की नमाज के बाद बयान किया गया। इनके बाद तबलीग की मुख्य 6 बातों की तालीम दी गई। दुआ ए खास से पहले मौलाना सआद साहब ने जमात में निकलने वालों को खास ताकीद देते हुए बयान किया। चार दिन चलीं इन मजलिसों में उलेमा बोले अल्लाह की मर्जी के बिना कोई काम नहीं होता। ये अकीदा तोड़ने से खराब हालात होंगे। नेक राह जो बताई गई है, उस पर चलने वाले बनो तो तुम्हारी हर परेशानी खत्म हो जाएगी। आपसी रिश्ते बेहतर रखने और सबके काम आने की हिदायत भी मजमे को दी गई।

सबका शुक्रिया, सबका आभार
आलमी तब्लीगी इज्तिमा के दौरान सहयोग करने वाले सभी लोगों और संस्थाओं का इज्तिमा इंतेजामिया कमेटी ने आभार जताया। जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, पीएचई, विद्युत विभाग, रेलवे, स्वास्थ्य विभाग के सभी जमीनी कर्मचारियों व आला अधिकारियों का शुक्रिया अदा किया।

झलकियां
• आलमी तबलीगी इज्तिमा के पूरा होने पर होने वाली दुआ ए खास में शामिल होने लोगों ने अल सुबह से दौड़ लगा दी थी।
आमतौर पर ईद और बकरीद पर इतनी सुबह साफ सुथरे कपड़े, खुशबू लगाए और सिर पर टोपी सजाए मुस्लिम धर्मावलंबी सड़कों पर दिखाई देते हैं।
• आलमी तबलीगी इज्तिमा इस कड़ी का तीसरा आयोजन कहा जा सकता है।
• इज्तिमागाह के आसपास स्थित खानपान दुकानों में नारायण नाश्ता हाउस और सहाय फूड कॉर्नर पर भी ग्राहकों की खासी भीड़ दिखाई दी।
• इज्तिमा परिसर में अनिल केतली में चाय लिए घूम घूम कर लोगों की खिदमत कर रहा था। जबकि सुरेश ने यहां मीठे लच्छे बेचता दिखा।
• वापसी सफर के दौरान लोगों ने सड़क किनारे अस्थाई दुकानों से किसानों द्वारा बेची जा रही अमरूद, मूली, संतरे, मैथी आदि की जमकर खरीदी की।
• दुआ ए खास के बाद पहले पैदल मुसाफिरों को निकाला गया। उसके बाद दो पहिया वाहन, फिर चार पहिया निकाले गए। बड़े माल वाहकों को सबसे आखिर में।
• वापसी के समय लोगों का हुजूम इज़्तिमागाह से बायपास, गांधी नगर, करोंद और काजी कैंप के अलावा bmhrc और मंडी होते हुए छोला की तरफ रहा।
• इज़्तिमागाह आने जाने वाले मार्ग पर हर तरफ टोपियां ही टोपियां दिखाई दे रही थीं।

आलमी तबलीगी इज्तिमा का दूसरा दिन:
अल्लाह की बनाई मशीन को इसके लिए बनाई किताब से चलाना आसान…

उलेमाओं ने अल्लाह के हुक्म की पाबंदी पर दिया जोर

सारे शहर में मजहबी समागम की चहल पहल
खिदमत में जुटे वोलेंटियर जमातियों की कर रहे मदद
स्टेशन से इज्तिमागाह के बीच कई जगह पानी, चाय नाश्ता, खाने के इंतजाम

इज्तिमागाह से खान अशु
भोपाल। आलमी तबलीगी इज्तिमा का दूसरा दिन शनिवार भी उलेमाओं के बयान और तकरीर से शुरू हुआ। सुबह फजिर की नमाज़ के बाद मौलाना सईद साहब ने अल्लाह और इंसान की मिसाल एक कारीगर और मशीन से करते हुए अपनी बात आगे बढ़ाई। मौलाना ने कहा कि जिस तरह कोई मशीन बनाई जाती है तो उसके इस्तेमाल के लिए एक बुकलेट तैयार की जाती है। इस बुकलेट में बताए गए तरीकों से मशीन को चलाना आसान होता है। इसी तरह अल्लाह ने इंसान को बनाया और उसके व्यवस्थित संचालन के लिए कुरआन भी दिया। कुरआन में बताए गए तरीके से चलने पर इंसान रूपी मशीन कामयाब और इसके इतर चलने पर इसमें खराबी आना लाजमी है। मौलाना सईद ने कहा कि आज का इंसान अल्लाह के खजानों से फायदा उठाने वाला नहीं है। वह अगर अल्लाह के तरीकों, कुरआन की सीख और नबी के बताए रास्तों पर चलने का नियम बना ले तो वह दुनिया में भी कामयाब होगा और आखिरत में भी उसके लिए आसानियां होंगी।
आलमी तबलीगी इज्तिमा के दूसरे दिन इज्तिमागाह पर पिछले दिन से बढ़ी हुई तादाद दिखाई दी। देश दुनिया से आई जमातों में शामिल लोग हाथ में तस्बीह और जुबां पर अल्लाह का जिक्र लिए दिखाई दे रहे हैं। उनकी सुबह नमाज के साथ होती है और रात भी इसी के साथ पूरी हो रही है। सारा दिन बयान और तकरीर के दौर के बीच सीखने सिखाने का दौर भी जारी है। बड़ी तादाद में पहुंचे बुजुर्ग, जवान और बच्चे अलग अलग तालिमी खेमों में बेहतरी की बातें सीख रहे हैं।

दुनिया भर से आए लोग
आलमी तबलीगी इज्तिमा में बड़ी तादाद में विदेशी जमातें भी पहुंची हैं। करीब 300 से ज्यादा विदेशी मेहमानों में किर्गिस्तान, मलेशिया, इथोपिया, बर्मा (म्यांमार), श्रीलंका, सउदी अरब, कंबोडिया, इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका, सीर्रा लोन, फ्रांस, जॉर्जिया, तुर्की, आयरलैंड, जॉर्डन, ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड, ट्यूनिशिया, इजिप्ट आदि देशों के लोग शामिल हैं। इज्तिमा दुआ से पहले कुछ और विदेशी जमातों के पहुंचने की उम्मीद की जा रही है। इज्तिमा प्रबंधन ने विदेशी मेहमानों के ठहरने के इंतजाम अलग से किए हैं। इन खेमों में ट्रांसलेटर भी मौजूद हैं, जो उलेमाओं के बयान को इन अलग अलग देशों के लोगों को उनकी भाषा में अनुवाद करके बताते हैं।

बात सिर्फ जमीन के नीचे और आसमान के ऊपर की
आलमी तबलीगी इज्तिमा के दौरान होने वाली तकरीरों में तबलीग के छह सूत्रों पर ही बात की जाती है। कहा जाता है यहां होने वाली तकरीरों में सिर्फ मौत के बाद जमीन के नीचे (कब्र) की बात की जाती है या फिर आखिरत के हिसाब के लिए होने वाली आसमान के ऊपर की जिंदगी पर चर्चा होती है। दुनिया के मसलों, सामाजिक या राजनीतिक बातों के लिए यहां कोई स्थान नहीं होता।

उलेमाओं की तकरीरें
दीन का रास्ता सच्चा
जौहर की नमाज के बाद हुए बयान में मुफ्ती जौहेर उल इस्लाम ने कहा कि दीन का रास्ता सच्चा है, बाकी सब गुमराह करने वाले हैं। दुनिया में जिंदगी बिताने का हर तरीका इस्लाम ने सिखाया है, लेकिन इस रास्ते से लोग भटक रहे हैं। जिंदगी बिताने का कुरान का बताया रास्ता ही जिंदगी की कामयाबी की सीढी है, इससे ही आखिरत की जिंदगी संवर पाएगी।

अब नहीं आएगा कोई पैगंबर
असीर की नमाज के बाद मुख्तसिर बात करते हुए मुफ्ती अब्दुल अजीज साहब ने कहा कि इस्लाम में कई पैगंबर आए और उन्होंने दीन की बात लोगों तक पहुंचाई। हजरत मोहम्मद सअ के बाद ये सिलसिला बंद हो गया है। लेकिन इस्लाम की अच्छी बातों को लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी अब आपके हमारे जिम्मे है। जमातों, मुलाकातों और इज्तिमा के जरिए इसी बात की मेहनत की जा रही है। नबियों के इस काम को करने में आने वाली मुश्किलों से घबराने की बजाए हमें उन तकलीफों का ख्याल करना चाहिए, जो हमसे पहले नबियों ने इस्लाम के लिए उठाई हैं।

अच्छी बात सब तक पहुंचाना भी ईमान का हिस्सा
मगरिब की नमाज के बाद मौलाना मोहम्मद सआद साहब कंधालवी की तकरीर हुई। बड़े मजमे को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे पास जो बेहतर है, वह लोगों तक पहुंचे और उसको भी इससे फैज हासिल हो, इससे बड़ी बात क्या हो सकती है। हमें कोशिश करना चाहिए कि भलाई की बात, बेहतरी की बात और किसी के काम आने वाले नुस्खे खुद के पास महदूद रखने की बजाए इसको आगे बढ़ाकर इसमें इजाफा करें। सआद साहब ने कहा कि अब दौर आसान हो चुका है, नए दौर की टेक्नोलॉजी बेहतरी को फैलाने में मददगार हो सकती है। उन्होंने लोगों से अच्छे अखलाक, किसी का दिल न दुखाने और सबके लिए बेहतरी के काम करते रहने की ताकीद भी की।

अगर कुछ गुम हो जाए!
इज्तिमागाह पर मौजूद बड़े मजमे में लोगों के सामान की गुमशुदगी के हालात भी बन रहे हैं। जिसको व्यवस्थित करने के लिए यहां 7 केंद्र स्थापित किए गए हैं। गुमशुदा सामान केंद्रों पर अब तक डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों का सामान पहुंचा है, जिनको तस्दीक के बाद इनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिया गया। इन केंद्रों के व्यवस्थापक ने बताया कि इस व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए करीब 1500 वालेंटियर्स तैनात किए गए हैं, जो पूरे क्षेत्र में सतत निगरानी रख रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक मिलने वाले सामानों में सबसे ज्यादा मोबाइल फोन और घड़ियां हैं, जिन्हें लोग वजू खाना और बॉथरूम या टॉयलेट के आसपास भूल गए थे। इसके अलावा कई लोगों के पर्स और नगद राशि भी निगरानी करने वालों को मिली, जिन्हें उचित तफ्तीश कर उनके असल मालिकों तक पहुंचा दिया गया है।

इज्तिमा से जुड़ी खास चीजें, जो साल में एक बार ही होती हैं
आलमी तबलीगी इज्तिमा मजहबी तकरीरों, बेहतरी की बातों, नमाज और इबादत के साथ आपस में जुड़ने के अलावा कुछ और यादें भी छोड़कर जाता है। ये खास बातें आमतौर पर सालभर में एक बार ही देखने को मिलती हैं:

एक सबक :
ट्रैफिक कंट्रोल और
पार्किंग व्यवस्था
शहर की बिगड़ैल यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए पुलिस का बड़ा अमला भी असफल साबित हो चुका है। कलेक्टर को खुद इसकी फिक्र में सड़क पर उतरना पड़ रहा है। ऐसे में लाखों लोगों की मौजूदगी वाले मजमे के दौरान चंद वोलेंटियर पूरी तरह व्यवस्थित आवाजाही बरकरार रखते हैं। इसी तरह इज्तिमा में शामिल होने वाले बड़े छोटे वाहनों की पार्किंग और समापन के बाद इनकी सुगम वापसी भी सराहनीय है। आमतौर पर कोई छोटा जमावड़ा होने पर भी वाहनों की रेलमपेल से पूरा शहर अस्त व्यस्त दिखाई देने लगता है।

एक इलाज : काढ़ा
इज्तिमागाह और शहर के कई स्थानों पर जमातियों को इलाज मुहैया कराने एलोपैथिक, आयुर्वैदिक, होम्योपैथिक और यूनानी चिकित्सा के कैंप लगाए गए हैं। इनमें शामिल यूनानी चिकित्सा द्वारा तैयार किया जाने वाला काढ़ा एक खास असर लिए होता है। आम दिनों में तैयार किए जाने वाले काढ़े से अलग ये होता है कि इसमें कई अतिरिक्त और प्रभारी दवाओं और जड़ी बूटियों का मिश्रण सिर्फ इज्तिमा के दौरान ही किया जाता है। 4 दिन के आयोजन में हजारों खुराक लोग गटक जाते हैं और अपने साथ इसको ले जाने की ललक भी नहीं छोड़ पाते हैं।

एक स्वाद :
खानपान के शौकीन नवाबों के इस शहर भोपाल में वैसे तो हर दिन चटोरेपन के लिए कई आइटम्स मौजूद होते हैं। लेकिन इज्तिमा आयोजन के दौरान कई ऐसे आइटम्स भी होते हैं, जो सिर्फ इस अवधि में ही मिल पाते हैं। इनमें हलवा मांडा और सोहन हलवा खास है। जबकि मुंबई की खास मिठाई कही जाने वाली अफलातून भी लोगों को इस सीजन में ही खाने को मिल पाती है।

एक यादगार :
आलमी तबलीगी इज्तिमा जिस दौर में ताजुल मसाजिद में हुआ करता था, उसी दौर से इस परिसर में एक मेला लगने की परंपरा रही है। गर्म कपड़े के लिए सारे प्रदेश में मशहूर ये बाजार अब भी ताजुल मसाजिद में लगता है। दुआ के बाद शुरू होने वाला ये खास बाजार करीब दो माह चलता है। इस बाजार में बिकने वाले मुरादाबादी बर्तन भी आम दिनों में मिलना मुश्किल होते हैं। साथ ही यूपी हैंडलूम के विभिन्न उत्पाद भी इस बाजार की खासियत होते हैं।

झलकियां
शनिवार और रविवार की छुट्टी की वजह से इज्तिमागाह में हुजूम बढ़ने लगा है। सुबह से पहुंच रही सैकड़ों जमातें सोमवार को होने वाली दुआ तक मौजूद रहेंगे
पुराने शहर के अधिकांश इलाकों में बंद जैसे पड़े बाजार, सन्नाटे के हालात
ताजुल मसजिद परिसर में लगने वाले कपड़ा मार्केट ने आकार लेना शुरू किया। 17 नवम्बर से शुरू होकर करीब दो माह तक जारी रहेगा
स्थानीय लोग भी व्यक्तिगत रूप से और जमात की शक्ल में इज्तिमागाह पहुंच रहे हैं
हमीदिया रोड, भोपाल टाकीज, सिंधी कॉलोनी, काजी कैंप, करोंद चौराहे से लेकर कई मार्गों पर टोपी लगाए जमाती ही दिखाए दे रहे हैं
सारे रास्तों पर पुलिस की बड़ी मौजूदगी। उनके सहयोग में जुटे हुए हैं हजारों वालेंटियर

19वें वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए श्री यशोधर मठपाल  नामांकित

भोपाल। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार संग्रहालय, मध्य प्रदेश द्वारा “पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय विज्ञान के क्षेत्रों में अद्यतन प्रगतियाँ”  विषय पर एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 09 से 11 जनवरी, 2026 में मिंटो हॉल भोपाल में किया जाएगा।
यह सम्मान प्रतिवर्ष/द्विवार्षिक डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के योगदान के उपलक्ष्य में आयोजित किया जाता है।
डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर (1919-1988), जिन्हें प्यार से ‘हरिभाऊ’ कहा जाता था और  भारतीय शैल कला अध्ययन का “पितामह” कहा जाता है, एक प्रख्यात भारतीय पुरातत्वविद्, कला इतिहासकार, मुद्राशास्त्री, पुरालेखशास्त्री और सांस्कृतिक शोधकर्ता थे। उनका जीवन और कार्य भारत के समृद्ध प्राचीन इतिहास और प्रागैतिहासिक कला को उजागर करने और संरक्षित करने के लिए समर्पित था। उन्हें जनवरी 1975 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया था।
डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार, जिसे वाकणकर सम्मान के नाम से भी जाना जाता है, एक राष्ट्रीय पुरस्कार है, जो  संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय , भोपाल, मध्य प्रदेश द्वारा वार्षिक या द्विवार्षिक रूप से, वर्ष के आधार पर, प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार किसी सक्रिय भारतीय नागरिक या संस्था को पुरातत्व के क्षेत्र में उनके रचनात्मक, प्रभावी और विशिष्ट उपलब्धियों के लिए दिया जाता है।
इस पुरस्कार में एक प्रशस्ति पत्र, एक पट्टिका और 2 लाख रुपये का नकद पुरस्कार शामिल होता है।
पुरस्कार समारोह आयोजित करने और प्राप्तकर्ता का चयन करने के लिए अधिकृत, भोपाल स्थित संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, मध्य प्रदेश ने श्री यशोधर मठपाल को 19वें वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित किया गया  है।
डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के योगदानों को स्मरणीय बनाने के लिए, संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय , भोपाल, 09 से 11 जनवरी, 2026 तक मिंटो हॉल, भोपाल में  “पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय विज्ञान के क्षेत्रों में अद्यतन प्रगतियाँ”
पर एक राष्ट्रीय स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन कर रहा है।
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में, जिसमें पूरे भारत से प्रशासक, नीति निर्माता, क्षेत्रीय कार्यकर्ता, प्रख्यात वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, शोधकर्ता और छात्र भाग लेंगे, पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालयों के क्षेत्रों में उभरते विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी और पुरातात्विक धरोहरों के प्रभावी  संरक्षण, प्रबंधन और विकास के लिए साक्ष्य-आधारित रणनीतियों की सिफारिश की जाएगी।
राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्देश्य नीचे सूचीबद्ध शोध-पत्र विषयों पर प्रस्तुति और चर्चा के माध्यम से संबोधित किया जाएगा।

  विषय
पुरातत्व, नृ-पुरातत्व, पुरातात्विक मापिकी (आर्कियोमेट्री), कलाकृति विश्लेषण, सांस्कृतिक संसाधन प्रबंधन आदि में नई सफलताएँ
हाइब्रिड प्रणालियों सहित अभिलेखागार और रिकॉर्ड प्रबंधन में उभरती प्रौद्योगिकियाँ।
मूर्त और अमूर्त विरासत के संग्रह, भंडारण, पहुंच और संरक्षण में नवीनतम विकास और डिजिटल क्यूरेशन में रुझान।
अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारी वेबसाइट www.archaeology.mp.gov.in पर जाएँ।

मध्य प्रदेश को अद्वितीय और समृद्ध पुरातात्विक खजानों का आशीर्वाद प्राप्त : उर्मिला शुक्ला

भोपाल। मध्य प्रदेश को अद्वितीय और समृद्ध पुरातात्विक खजानों का आशीर्वाद प्राप्त है। प्रत्येक मूर्ति, अभिलेखागार दस्तावेज़, भवन, स्मारक एक असाधारण कहानी कहता है।
संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, मध्य प्रदेश की आयुक्त, उर्मिला शुक्ला (आईएएस) ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य इतिहास प्रेमियों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बने रहना है, साथ ही नई पीढ़ी, विशेषकर छात्रों में हमारे समृद्ध अतीत के प्रति जागरूकता की भावना जगाना है। यही मेरी पूरी टीम का दृष्टिकोण है। वे मध्य प्रदेश संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय:  विरासत संरक्षण और तकनीक एक साथ कार्यक्रम में बात कर रही थीं। कार्यक्रम संचालनालय, इंटैक भोपाल अध्याय के सहयोग से किया गया था। 7 और 8 नवंबर 2025 को राज्य संग्रहालय, भोपाल में मध्य प्रदेश के सिक्के विषय पर एक दो दिवसीय संगोष्ठी (सेमिनार) का आयोजन कर रहा है। यह संगोष्ठी क्षेत्र की समृद्ध मुद्राशास्त्रीय विरासत को प्रदर्शित करेगी और विद्वानों, शोधकर्ताओं व उत्साही लोगों के बीच चर्चा को बढ़ावा देगी।

संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय की आयुक्त, उर्मिला शुक्ला (आईएएस) ने वरिष्ठ अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में, आज राज्य संग्रहालय, भोपाल में नए  इंटरप्रिटेशन सेंटर  का उद्घाटन किया है। इस सेंटर का उद्देश्य मध्य प्रदेश की विविध पुरातात्विक संपदा, जिसमें मूर्तियां, शिलालेख और संबंधित सामग्री शामिल हैं, उसी को आकर्षक प्रदर्शनियों और छोटे वीडियो क्लिप्स के माध्यम से आगंतुकों के लिए सुलभ बनाना है, ताकि राज्य की समृद्ध पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक विरासत जनता तक पहुंच सके। यह इंटरप्रिटेशन सेंटर नवीनतम सॉफ्टवेयर और उपकरणों से लैस, तकनीकी रूप से उन्नत है। इंटरप्रिटेशन सेंटर वह सुविधा है जो आगंतुकों को किसी विशेष स्थान, घटना या संस्कृति को समझने और सराहने में मदद करती है।
राज्य संग्रहालय, भोपाल हाल के वर्षों में विरासत को प्रौद्योगिकी के साथ एकीकृत करते हुए एक गतिशील शिक्षण स्थान के रूप में उभरा है। मुख्यमंत्री द्वारा 18 मई 2025 को टेलमी डिजीइन्फोटेक के सहयोग से ‘आँखों देखा’ वर्चुअल रियलिटी सेंटर का उद्घाटन किया गया था। यह केंद्र वर्चुअल रियलिटी, इल्यूजन आर्ट और कहानी सुनाने के माध्यम से अत्यधिक सजीव अनुभव प्रदान करता है। इस पहल को जनता, विशेषकर स्कूलों से, सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और इसने मध्य प्रदेश को विरासत नवाचार में अग्रणी बनाया है।
विभाग का मॉडलिंग अनुभाग ‘नो-प्रॉफिट, नो-लॉस’ के आधार पर बिक्री के लिए और प्रदर्शन व शिक्षा के उद्देश्य से उच्च गुणवत्ता वाली प्रतिकृतियां बनाता है। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, मध्य प्रदेश ने स्टार्टअप वराह हेरिटेज के सहयोग से भारत का पहला संग्रहालय-प्रमाणित विरासत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह मंच देश भर के नागरिकों को संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, मध्य प्रदेश द्वारा प्रमाणित प्रतिकृतियां और आधिकारिक प्रकाशन ऑनलाइन प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय मध्य प्रदेश की स्थापना 1956 में हुई थी। इसके प्रमुख कार्यों में 44 संग्रहालयों और 499 से अधिक राज्य-संरक्षित स्मारकों के माध्यम से राज्य की विरासत का अन्वेषण, संरक्षण, प्रलेखन और प्रदर्शन करना शामिल है।

सीएम हेल्पलाइन के हाल : स्कूल को बचाने में शिक्षा विभाग ने बदल दिए 14 जांच अधिकारी

खान आशु
भोपाल। सरकारी विभागों में होने वाली दिक्कतों, परेशानियों और अव्यवस्थागत शिकायतों के निवारण के लिए बनाए गए सीएम हेल्पलाइन प्लेटफॉर्म के हालात नाजुक हैं। यहां होने वाली शिकायतों को विभाग अपने तौर पर ट्रीट कर रहे हैं। जिसके चलते न तो शिकायत होने का डर लोगों में बाकी रह गया है और इससे भ्रष्टाचार की रवानी बढ़ गई है, सो अलग।
सूत्रों का कहना है कि राजधानी भोपाल में स्थित एक स्कूल, इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में यहां के एक शिक्षक ने एक मासूम बच्ची के साथ सेक्सुअल असाल्ट की कोशिश की। प्रबंधन ने कोशिशें कर इस मामले की शिकायत पुलिस में नहीं होने दी। इस मामले को मीडिया के बड़े प्लेटफॉर्म तक जाने से भी रोक दिया गया। लेकिन अगस्त माह में इसको लेकर सीएम हेल्पलाइन पर एक शिकायत दर्ज कर दी गई। सूत्रों का कहना है कि तभी से इस शिकायत पर शिक्षा विभाग द्वारा टालमटोल की जा रही है। बताया जाता है कि करीब तीन माह से जारी इस शिकायत पर अब तक जांच तो दूर, अभी तक जांच अधिकारी ही तय नहीं हो पाया है। बताया जाता है कि अब तक करीब 14 अधिकारियों को यह जांच सौंपी जा चुकी है, लेकिन इस पर फैसला अब तक नहीं हो पाया है।

भरोसा आरोपी पर
सूत्रों का कहना है कि इस मामले में इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल के प्रबंधन से जवाब तलब किया गया है। जिसमें उसने साफ तौर पर इस तरह की कोई घटना होने से इनकार कर दिया है। बताया जाता है कि स्कूल शिक्षा विभाग, स्कूल प्रबंधन के इस जवाब को ही अंतिम मान रहा है। वह शिकायतकर्ता को इसी बात मान्य करने पर दबाव बना रहा है कि स्कूल प्रबंधन ऐसे कृत्य के होने से इनकार कर रहा है।

दिक्कत यहां है
आमतौर पर किसी शिकायत की जांच उसी विभाग को सौंप दी जाती है, जिससे संबंधित यह शिकायत होती है। ऐसी स्थिति में संबंधों के आधार पर एक दूसरे को बचाने में लग जाने की कोशिशें शुरू हो जाती हैं।

उलझाने का एक तरीका यह भी
सूत्रों का कहना है कि सीएम हेल्पलाइन पर हुई अधिकांश शिकायतों में जांच अधिकारी ही गलत दर्ज कर दिया जाता है। जिससे जांच प्रभावित भी होती है और उसको समय पर कोई समाधान नहीं मिल पाता है।

बघेली संस्कृति को मिलेगी नई पहचान: वंदना द्विवेदी

विंध्य क्षेत्र के लिए रेल यात्रा अधिक सुगम बनाएंगे की मांग

भोपाल। विंध्य क्षेत्र के लोगों को एक मंच पर लाना, उनकी समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाना और बघेली संस्कृति को बढ़ावा देना ही संगठन का मुख्य उद्देश्य है।
विंध्य एकता परिषद मध्यप्रदेश ने सोमवार को भोपाल में प्रेसवार्ता कर संगठन की गतिविधियों और योजनाओं की जानकारी दी। संगठन की प्रदेशाध्यक्ष वंदना द्विवेदी ने बताया कि परिषद द्वारा हर साल विंध्य एकता परिषद का वार्षिक सम्मेलन, विंध्य महोत्सव, प्रतिभा सम्मान समारोह, होली मिलन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन आयोजनों के जरिए बघेली बोली, लोककलाओं और परंपराओं को नई पहचान दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि परिषद की पहल पर भोपाल दक्षिण-पश्चिम विधायक भगवान दास सबनानी ने अपनी विधायक निधि से एक एम्बुलेंस प्रदान की है, जो विंध्य क्षेत्र के लोगों की सेवा में लगातार सक्रिय रहेगी।
वंदना द्विवेदी ने कहा कि केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल के सहयोग से भोपाल–रीवा (22145/22146) द्विसाप्ताहिक ट्रेन शुरू की गई है। अब परिषद इसकी मांग कर रही है कि यह ट्रेन सप्ताह में सातों दिन चले।
उन्होंने बताया कि परिषद भोपाल में विंध्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सस्ती दरों पर भूखंड और मकान उपलब्ध कराने हेतु भोपाल विकास प्राधिकरण से भूमि आवंटन की मांग कर रही है। साथ ही, परिषद के कार्यालय भवन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए सभागार निर्माण की दिशा में भी प्रयास जारी हैं।
वंदना द्विवेदी ने कहा कि विंध्य एकता परिषद सिर्फ संगठन नहीं, यह विंध्य क्षेत्र की अस्मिता, संस्कृति और एकता की प्रतीक है।

आलमी तब्लीगी इज्तिमा: पाकिस्तान की जमात को रही है पाबंदी, अब भी बरकरार रहेगी

अधिकारी जुटे इज्तिमागाह पर दिए समय पर काम पूरा करने के निर्देश

भोपाल। 78 बरस से मजहबी रौशनी फैला रहे आलमी तब्लीगी इज्तिमा में दुश्मन देश पाकिस्तान के लिए कभी जगह नहीं रही है, न वहां की जमाते ही यहां शामिल हुई हैं। यह सिलसिला अब भी बरकरार रहेगा। पाकिस्तान से किसी जमात के इज्तिमा में शामिल होने की कोई अनुमति नहीं है।
आलमी तब्लीगी इज्तिमा के प्रवक्ता डॉ. उमर हफीज ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि इस समागम में विदेश से जो भी जमाते आती हैं, उन्हें भारत से मिली हुई अनुमति, वीजा और अन्य दस्तावेज हासिल करने होते हैं। इसकी एक प्रति वे हमेशा अपने पास भी रखते हैं और एक कॉपी इज्तिमा प्रबंधन को भी जमा करते हैं।

अपनों से व्यवहार…
चार दिन के इज्तिमा आयोजन के दौरान लगने वाली सीमित दुकानों में खानपान, स्वास्थ्य, रेलवे आदि के ही स्टॉल लगाए जाते हैं। बावजूद इसके भी हर धर्म के लोगों का सहयोग इसमें होता है। दूध, सब्जी, स्वास्थ्य या सुरक्षा में सभी धर्मों के लोग शामिल होते हैं। इधर ताजुल मसाजिद में भी लगने वाले मेले में किसी धर्म के दुकानदार के लिए पाबंदी नहीं होती है। न किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति को यहां आने पर कोई प्रतिबंध लगाया जाता है। डॉ उमर हफीज का कहना है कि वैसे तो इज्तिमा प्रबंधन का इस मेले में कोई दखल नहीं होता है, लेकिन ऐसी किसी पाबंदी की अब तक खबर नहीं आई। जबकि हिंदू उत्सव समिति अध्यक्ष इस बात को लेकर झूठा प्रचार कर समाज में वैमनस्यता फैला रहे हैं।

हुई बैठक, दिए निर्देश
जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की संयुक्त बैठक मंगलवार को ईंटखेड़ी में आयोजित की गई। इस दौरान सभी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे। इस समीक्षा बैठक में किए जा चुके कामों की समीक्षा की गई। साथ ही बाकी बचे कामों को समयावधि में पूरा करने के लिए निर्देशित किया गया।

जिनका चलता है मसाजिद कमेटी में सिक्का, उन सीईओ की नियुक्ति ही अवैध और नियमाविरुद्ध

कई उलेमाओं समेत कई की शिकायत

भोपाल। तीन जिलों की मस्जिदों एवं इमाम-मुअज्जिन की देखरेख करने वाले विभाग मसाजिद कमेटी की नियुक्तियों पर सवाल उठे हैं। यहां कार्यरत दर्जनों लोगों की नियुक्ति की शिकायत की गई है। इनमें एक शिकायत इस कमेटी के सचिव को लेकर भी शामिल है। नियमों से बांधे रखने वाले इस कर्मचारी की नियुक्ति भी अवैध बताई गई है। साथ ही कई उलेमाओं को भी इस दायरे में शामिल किया गया है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को की गई शिकायत में मसाजिद कमेटी में नियमों की अवहेलना का हवाला दिया गया है। शिकायत में कहा गया है कि वर्ष 2001 में मोहतमिम (अधीक्षक) द्वारा इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्ति की गई थी। जबकि उन्हें इस नियुक्ति का अधिकार नहीं था। सूत्रों का कहना है कि वास्तविक तौर से कमेटी में इंस्पेक्टर के पद की स्वीकृति ही नहीं है। मसाजिद कमेटी नियम 1960 के नियम8-1 के (VI) के अनुसार बिना इस पद की स्वीकृति के यह नियुक्ति कर दी गई। कालांतर में इस पद पर कार्य करते हुए सम्बंधित व्यक्ति सैयद उवैस अली कमेटी के प्रभारी सचिव के पद तक पहुंच गए हैं। बताया जाता है कि बिना शासकीय स्वीकृति के हुई इस नियुक्ति पर उवैस इस कार्यालय के सर्वाधिक प्राप्त करने वाले कर्मचारी भी बन गए हैं।

नियुक्ति का आसान रास्ता
सूत्रों का कहना है कि मसाजिद कमेटी द्वारा एक स्कूल का संचालन भी किया जाता है। इस कमेटी में जगह हासिल करने का सबसे आसान तरीका इस स्कूल को ही माना जाता है। बताया जाता है कि कमेटी में किसी व्यक्ति को दाखिला देने के लिए पहले उसे स्कूल में कर्मचारी बनाया जाता है। इसके बाद पिछले रास्ते से उसे कमेटी कार्यालय में शामिल कर लिया जाता है। शिकायत में ऐसे कई कर्मचारियों का हवाला दिया गया है, जिनकी नियुक्ति स्कूल के लिए की गई थी, लेकिन अब वे मसाजिद कमेटी में कार्य कर रहे हैं।

कई उलेमाओं का भी जिक्र
सूत्रों का कहना है कि शिकायत में मसाजिद कमेटी से संबद्ध कई उलेमाओं का भी जिक्र किया गया है। जिनकी नियुक्ति नियमों को दरकिनार कर की गई है। इनमें काजी, नायब काजी, मुफ्ती और नायाब मुफ्ती का भी उल्लेख है।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu