भगवान विश्वकर्मा के जयकारों से गुंजायमान होगी राजधानी, घरों से कारखानों तक में पूजे जाएंगे निर्माण के देवता

हवन, पूजन, चल समारोह, कलश यात्रा समेत होंगे वैदिक अनुष्ठान

भारत भूषण।
7400794801

भोपाल। 17 सितंबर को पूरे भारत में निर्माण और शिल्प के देवता भगवान विश्वकर्मा के पूजन दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन निर्माण, शिल्प कला और अभियांत्रिकी सेवाओं से जुड़े हर वर्ग के लोग अपने घरों और कारखानों में आदिदेव भगवान विश्वकर्मा का प्रतिरूप मानकर मशीनों तथा औजारों की पूजा करते हैं। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में भी विश्वकर्मा पूजन को उत्सव के रूप में मनाया जाता है, शहर के भेल और गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र स्थित कारखानों व फैक्ट्रियों में धूमधाम से भगवान विश्वकर्मा की सामूहिक पूजन का आयोजन किया जाता है। विश्वकर्मा पूजन के इस क्रम में राजधानी में निवासरत विश्वकर्मा समाज भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती है और बड़े उत्साह और उमंग से अपने आराध्य देव का पूजन दिवस मनाती है। भोपाल में भगवान विश्वकर्मा को समर्पित कुछ मंदिरों में पूजन दिवस की पूर्व संध्या से ही भजन संध्या रात्रि जागरण से कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं, तो कई मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देवदर्शन को उमड़ पड़ती है। इस वर्ष भी राजधानी में विश्वकर्मा पूजन के उपलक्ष्य में जगह-जगह विभिन्न आयोजन किये जा रहे हैं।

भोपाल के प्राचीन विश्वकर्मा मंदिरों में से एक भगवान श्री विश्वकर्मा म॑दिर बटट्लाल सूरज बाई न्यास में विश्वकर्मा पूजन की पूर्व संध्या को भजन कीर्तन शाम 6 बजे से आरंभ होगा। भगवान विश्वकर्मा का अभीषेक एवं पूजन रात्रि 8 बजे तथा महा आरती 17 सितंबर को सुबह 11 बजे सम्पन्न होगी। दोपहर में हवन पूजन एवं आरती महा प्रसादी हलवा का भोग अर्पित किया जाएगा। न्यास के पदाधिकारियों ने मीडिया के माध्यम से समाजजनों से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है।

श्री विश्वकर्मा समाज सेवा समिति के संस्थापक तथा मध्यप्रदेश के वरिष्ठ समाजसेवी अवध नारायण विश्वकर्मा ने बताया कि, समिति द्वारा प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी आराध्य देव भगवान विश्वकर्मा का पूजन दिवस धूमधाम से मनाया जाएगा। समिति के अध्यक्ष महेंद्र विश्वकर्मा “रामू भैया” के अनुसार करोंद चौराहा स्थित हनुमान मंदिर के हाल में सुबह 8 बजे भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर विशेष अभिषेक किया जाएगा। वैदिक अनुष्ठान संपन्न होने के उपरांत 11 बजे से हवन पूजन के बाद महा आरती और प्रसादी वितरण किया जाएगा। इसके बाद बड़ी संख्या में समाज बंधुओ की उपस्थिति में भगवान विश्वकर्मा की शोभायात्रा निकाली जाएगी, शोभायात्रा में मातृशक्ति और युवाओं की खासी संख्या शामिल होगी।

विश्वकर्मा पूजन दिवस को अयोध्या बायपास रोड स्थित विश्वकर्मा मंदिर में भी धूमधाम से मनाया जाएगा, जानकारी साझा करते हुए विश्वकर्मा विकास उत्सव समिति के सुरेश विश्वकर्मा ने बताया कि गोविंदपुरा विधायक कृष्णा गौर मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में सम्मिलित रहेंगीं और अखिल भारतीय विश्वकर्मा महासभा ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम अवध विश्वकर्मा की अध्यक्षता में आयोजन सम्पन्न होगा। उन्होंने बताया कि प्रातः 09 बजे से भगवान विश्वकर्मा की पूजा कर हवन आरती की जाएगी, चल समारोह दोपहर 1 बजे मंदिर से प्रारंभ होगा। चल समारोह क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से होते हुए मंदिर पर वापस आकर सम्पन्न होगा, तत्पश्चात महा आरती के बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा।

भगवान विश्वकर्मा मंदिर बैरागढ़ (संत हिरदाराम नगर) में भी विश्वकर्मा समाज के युवाओं द्वारा भव्य आयोजन की तैयारी की जा रही है। अध्यक्ष राजेश विश्वकर्मा एवं संयोजक सुनील विश्वकर्मा के अनुसार सोमवार की शाम भजन संध्या एवं जागरण के माध्यम से देवशिल्पी विश्वकर्मा की आराधना की जाएगी। पूजन दिवस मंगलवार को सुबह 10 बजे से मंदिर में हवन पूजन कार्यक्रम एवं 12 से 1 बजे तक अतिथि स्वागत किया जाएगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संत श्री 1008 महामंडलेश्वर उज्जैन स्वामी भागवतानंद महाराज (भगवान बापू) क्रांतिकारी सन्त तरुण मुरारी बापू सारंगपुर एवं हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा होंगे। दोपहर 1 बजे बैरागढ़ मंदिर से चल समारोह एवं कलश यात्रा प्रारंभ होगी जो बैरागढ़ थाने से होते हुए विश्वकर्मा मंदिर पर सम्पन्न होगी। अध्यक्ष राजेश विश्वकर्मा एवं कार्यक्रम के मुख्य संयोजक सुनील विश्वकर्म ने बताया कि कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति रहेगी।

माँ कंकाली धाम गुदावल प्रांगण में निर्मित भव्य विश्वकर्मा मंदिर में हर साल की तरह इस साल भी पारंपरिक तरीके से भगवान विश्वकर्मा को पूजा जाएगा। संयोजक संतोष विश्वकर्मा ने बताया कि सुबह से ही दूर दूर के श्रद्धालु यहाँ दर्शन करने आते हैं, उनकी सुविधा को देखते हुए सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठान शुरू कर दिए जाएंगे। विद्वान ब्राह्मणों द्वारा सम्पन्न होने वाले वैदिक अनुष्ठान में कई गणमान्य नागरिक सम्मिलित रहेंगे। संतोष विश्वकर्मा के अनुसार हवन पूजन आदि के बाद महाप्रसादी वितरण किया जाएगा।

श्री विश्वकर्मा एकता समिति एकता पुरी सेमरा का पूजन अभिषेक कार्यक्रम सुबह 8 बजे आरंभ होगा, हवन के बाद महाआरती एवं प्रसाद वितरण सम्पन्न होगा। इसके बाद मंदिर प्रांगण से भव्य झांकी चल समारोह के रूप में निकाली जाएगी, जो सेमरा चौराहा, रेल्वे स्टेशन विश्वकर्म चौराहा से होकर इमामी गेट स्थित विश्वकर्मा मंदिर के भव्य आयोजन में शामिल होगा।

विश्वकर्मा युवा संगठन सेमरा द्वारा भव्य शोभायात्रा भगवान विश्वकर्मा मंदिर एकता पुरी से सुबह 10 बजे प्रारंभ होगी। संस्थापक महेश विश्वकर्मा तथा अध्यक्ष हरिसिंह विश्वकर्मा ने बताया कि शोभायात्रा को समाज के वरिष्ठ नेता, क्षेत्रीय पार्षद पूजा अर्चना कर प्रांरभ करायेंगे जिसमें ढोल नगाड़ों धर्म ध्वजा और डीजे के साथ रायसेन से बुलाई गई लगेंगी पार्टी भी चल समारोह में अपनी कला का प्रर्दशन करेगी। आयोजन में सामाजिक महिलाओं द्वारा गरबा नृत्य प्रस्तुति के माध्यम से आराध्य देव की उपासना की जाएगी। शोभायात्रा एकता पुरी से सेमरा, दुर्गा नगर, बाबू कालोनी, विजय नगर, चाँदबड़ होते हुए स्टेशन पर महाआरती के बाद भगवान विश्वकर्मा मंदिर भवानी चोक पीरगेट पर मुख्य आयोजन में शामिल होगी ।

भगवान विश्वकर्मा की आराधना के क्रम में कोलार रोड के कजली खेड़ा में हरिओम विश्वकर्मा के नेतृत्व में सुबह 7 बजे से भगवान विश्वकर्मा का अभिषेक होगा 8 बजे महा आरती एवं हवन पूजन के पश्चात 11 से प्रसाद वितरण किया जाएगा। इसके बाद बड़ी संख्या में समाज बंधु 12 बजे बाइक रैली के रूप में विश्वकर्मा मंदिर पीरगेट जे लिए प्रस्थान करेंगे। यहाँ पहुंचकर सभी समाजजन चल समारोह में सम्मिलित होंगे।

बैरसिया में हिंदू संगठनों का बड़ा प्रदर्शन।

अश्लील मैसेज भेजने वालों की गिरफ्तारी की मांग थाना घेरा।कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह पहुंचे मौके पर जीतेन्द्र सेन
भोपाल:-राजधानी भोपाल के बैरसिया में हिंदू संगठनों का बड़ा प्रदर्शन चल रहा है। हजारों की संख्या में लोग बैरसिया थाने को घेरकर 11वीं की छात्रा को अश्लील मैसेज भेजकर परेशान करने वाले युवक की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। वही बैरसिया  विधायक विष्णु खत्री भी मौके पर पहुंचे हैं। स्थिति को देखते हुए कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह भी बैरसिया पहुंचे और कार के बोनट पर खड़े होकर उन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझाया। आपको बता दें कि इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस दौरान कलेक्टर ने दो दिन में कार्रवाई करने का आश्वासन भी वहां मौजूद लोगों को दिया।

जानकारी अनुसार संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि इस मामले में चार युवक शामिल हैं, लेकिन पुलिस ने एक को ही गिरफ्तार किया है। थाना घेरने की सूचना मिलने पर सबसे पहले एसपी प्रमोद कुमार सिन्हा मौके पर पहुंचे। उन्होंने संगठन के लोगों को समझाइश दी। साथ ही अन्य आरोपियों के खिलाफ भी जल्द कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। हालांकि, प्रदर्शनकारी मानने को तैयार नहीं है। कलेक्टर सिंह ने भी उन्हें समझाया।

संगठन के लोगों ने की मांग, जल्द अन्य आरोपियों की हो गिरफ्तारी
मां भवानी हिंदू संगठन से दीपक चौधरी ने बताया, हम अभी मौके पर ही मौजूद हैं। हम अन्य तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग पर कलेक्टर सिंह मौके पर पहुंचे और उन्होंने समझाइश दी है।

यह है मामला

आपको बता दें कि राजधानी भोपाल के बैरसिया में 11वीं की छात्रा को अश्लील मैसेज भेजकर एक युवक कई दिनों से परेशान कर रहा था। बात नहीं करने पर वीडियो वायरल कर बदनाम करने की धमकी देता था। इससे पहले 11 सितंबर को हिंदू संगठनों ने शिकायत दर्ज करने में पुलिस ने लेटलतीफी को लेकर थाने का घेराव कर दिया। थाने के बाहर जमकर नारेबाजी की। जिसके बाद पुलिस ने तत्काल केस दर्ज कर आरोपी को हिरासत में ले लिया। इसके बाद करीब दो घंटे तक चले प्रदर्शन को समाप्त  किया था, लेकिन गुरुवार को हिंदूवादी संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता फिर से थाने पर पहुंचे और घेराव कर दिया।

जानना जरूरी है….
क्या है वक्फ, क्यों है वक्फ संशोधन बिल पर बवाल…?

जफर आलम खान
भोपाल। वक्फ और वक्फ की संपत्तियों को लेकर हिंदुस्तान में गाहे ब गाहे चर्चा होती रहती है। आपको वो विवाद याद होगा ही, जब ये बहस चल पड़ी थी कि ताजमहल वक्फ की संपत्ति है या नहीं। यदा-कदा किसी मुस्लिम धर्मस्थल को लेकर होने वाले विवादों में भी सबसे पहले यही तय किया जाता है कि अमुक इमारत वक्फ की है या नहीं। अब तो वक्फ बोर्ड एक्ट में ही बदलाव की बात चल पड़ी है। कहा जा रहा है कि भारत सरकार जल्द एक कानून लाने वाली है, जिसके तहत वक्फ बोर्ड एक्ट को बदल दिया जाएगा। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा है कि अब महिलाएं भी बोर्ड में शामिल की जाएंगी, वक्फ संपत्तियों का ज़िला प्रशासन के यहां रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाएगा। अदालतों को ये हक दिया जाएगा कि वो तय कर सकें कि अमुक संपत्ति वक्फ है या नहीं।
हममें से ज़्यादातर लोगों ने वक्फ सुना तो है, लेकिन जानते नहीं कि वक्फ होता क्या है। किसी मस्जिद या दूसरे धर्मस्थल के वक्फ होने का मतलब क्या है? और क्या वक्फ बोर्ड में तब्दीली का असर मुस्लिम धर्मस्थलों के स्टेटस पर पड़ सकता है? चूंकि भारत में रेलवे और रक्षा मंत्रालय के बाद सबसे बड़ा भूस्वामी वक्फ बोर्ड ही है। इसलिए हम इन सारे सवालों का जवाब जानने की कोशिश करेंगे।

क्या है वक्फ
वक्फ अरबी भाषा के वकुफा शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है ठहरना। इसी से बना वक्फ। वक्फ एक ऐसी संपत्ति होती है, जो जन-कल्याण को समर्पित हो। इस्लाम के मुताबिक वक्फ दान का ही एक तरीका है। देने वाला, चल या अचल संपत्ति दान कर सकता है। माने एक साइकिल से लेकर एक बहुमंज़िला इमारत, कुछ भी वक्फ हो सकता है, बशर्ते वो जनकल्याण के मकसद से दान कर दिया गया हो। ऐसे दानदाता को कहा जाता है ‘वाकिफ’। वाकिफ ये तय कर सकता है कि जो दान दिया गया है, मिसाल के लिए इमारत, उसका या उससे होने वाली आमदनी का इस्तेमाल कैसे होगा। उदाहरण के लिए कोई वाकिफ ये कह सकता है कि अमुक वक्फ से होने वाली कमाई गरीबों पर ही खर्च होगी।
मान्यता है कि पैगंबर मोहम्मद के समय 600 खजूर के पेड़ों का एक बाग बनाया गया था, जिससे होने वाली आमदनी से मदीना के गरीब लोगों की मदद की जाती थी। ये वक्फ के सबसे पहले उदाहरणों में से एक है। अरब संस्कृति और भाषा की पढ़ाई के लिए सबसे उम्दा माना जाता है, मिस्र की राजधानी काहिरा में स्थित अल अज़हर यूनिवर्सिटी को। ये 10वीं सदी में बनी थी और ये भी एक वक्फ है।
भारत में इस्लाम की आमद के साथ यहां भी वक्फ के उदाहरण मिलने लगे। दिल्ली सल्तनत के वक्त से वक्फ संपत्तियों का लिखित ज़िक्र मिलने लगता है। उस ज़माने में क्योंकि ज़्यादातर संपत्ति बादशाह के पास ही होती थी, इसीलिए प्रायः वही वाकिफ होते और वक्फ कायम करते जाते। जैसे कई बादशाहों ने मस्जिदें बनवाईं, वो सारी वक्फ हुईं और उनके प्रबंधन के लिए स्थानीय स्तर पर ही इंतज़ामिया कमेटियां बनती रहीं।

भारत में कब बना वक्फ बोर्ड
1947 में आज़ादी के बाद पूरे देश में पसरी वक्फ संपत्तियों के लिए एक स्ट्रक्चर बनाने की बात हुई। इसी तरह साल 1954 में संसद ने वक्फ एक्ट 1954 पास किया। इसी के नतीजे में वक्फ बोर्ड बना। ये एक ट्रस्ट था, जिसके तहत सारी वक्फ संपत्तियां आ गईं। 1955 में यानी कानून लागू होने के एक साल बाद, इस कानून में संशोधन कर राज्यों के लेवल पर वक़्फ बोर्ड बनाने का प्रावधान किया गया। इसके बाद साल 1995 में नया वक्फ बोर्ड एक्ट आया और 2013 में इसमें संशोधन किये गए। फिलहाल जो व्यवस्था है, वो इन्हीं कानूनों और संशोधनों के तहत चल रही है। प्रायः मुस्लिम धर्मस्थल वक्फ बोर्ड एक्ट के तहत ही आते हैं। लेकिन इसके अपवाद भी हैं। जैसे ये कानून अजमेर शरीफ दरगाह पर लागू नहीं होता। इस दरगाह के प्रबंधन के लिए दरगाह ख्वाजा साहिब एक्ट 1955 बना हुआ है।

मैनेजमेंट कैसे होता है?
वक्फ संपत्तियों के एडमिनिस्ट्रेशन के लिए सेंट्रल वक्फ कॉउंसिल है। ये भारत सरकार को वक्फ से जुड़े मुद्दों पर सलाह देती है। राज्यों के स्तर पर राज्य सरकारें वक्फ बोर्ड्स को नोटिफाई करती हैं। इसमें दो तरह के बोर्ड्स बनाने का अधिकार दिया गया है। एक सुन्नी वक्फ बोर्ड और दूसरा शिया वक्फ बोर्ड। आदर्श स्थिति में वक्फ बोर्ड की संरचना कुछ ऐसी होती है। इसके एक चेयरमैन होते हैं। दो मेंबर राज्य सरकार नियुक्त करती है। इसके अलावा इसमें मुस्लिम विधायक, मुस्लिम सांसद, मुस्लिम टाउन प्लानर, मुस्लिम एडवोकेट और मुस्लिम बुद्धिजीवी भी शामिल होते हैं। बोर्ड में एक सर्वे कमिश्नर भी होता है, जो संपत्तिओं का लेखा-जोखा रखता है। बोर्ड के सभी मेंबर्स का टेन्योर 5 साल का होता है।
इसके अलावा राज्य सरकार एक मुस्लिम IAS अधिकारी को भी बोर्ड का मेंबर बनाती है। ये बोर्ड का CEO यानी चीफ एक्सक्यूटिव ऑफिसर होता है। ये बोर्ड के फैसलों को इम्प्लीमेंट करता है और बोर्ड के अधीन आने वाली प्रॉपर्टी का इंस्पेक्शन भी करता है। कानून ये कहता है कि ये अधिकारी न्यूनतम डिप्टी सेक्रेटरी रैंक का IAS अधिकारी होना चाहिए।

वक्फ ट्रिब्यूनल
वक्फ बोर्ड एक्ट के जरिये वक्फ से जुड़े मामलों के लिए कोर्ट भी बनवाया गया है। इसे वक़्फ़ बोर्ड ट्रिब्यूनल कहते हैं। इसमें वक्फ प्रॉपर्टी से जुड़े मसलों पर सुनवाई होती है।

यह हैं वक्फ बोर्ड की जिम्मेदारियां
वक्फ के जरिये आए दान से एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स, कब्रिस्तान, मस्जिद और शेल्टर होम्स बनाए जाते हैं। वक्फ बोर्ड वक्फ के जरिये हुई आमदनी का सोर्स, कुल आमदनी और उससे किन लोगों का भला किया गया, उसका लेखा-जोखा रखता है। वह ये सुनिश्चित करता है कि सेंट्रल वक्फ काउन्सिल के नियमों का ठीक से पालन हो।

बोर्ड से जुड़े विवादित क्लॉज
वक्फ बोर्ड एक्ट 1995 के सेक्शन 40 के मुताबिक अगर वक्फ बोर्ड को लगता है कि किसी सम्पत्ति पर वक्फ बोर्ड का हक़ है तो वक्फ बोर्ड स्वतः संज्ञान लेते हुए उसके बारे में जानकारी इकट्ठी कर सकता है। वक्फ बोर्ड खुद सम्पति की इंक्वायरी करता है और इसपर फैसला सुनाता है। अगर किसी को वक्फ बोर्ड के फैसले से दिक्कत हो, तो वो वक्फ बोर्ड ट्राइब्यूनल में आवेदन दे सकता है लेकिन ट्राइब्यूनल का फैसला फाइनल होगा। माने उस फैसले के खिलाफ अपील करने का प्रॉसेस काफी कॉम्प्लेक्स है। आप हाईकोर्ट जा तो सकते हैं, लेकिन एक जटिल कानूनी प्रक्रिया के बाद ही।

सरकार एक्ट में क्या बदलाव चाहती है?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मौजूदा वक़्फ बोर्ड एक्ट में केंद्र सरकार करीब 40 संशोधन करना चाहती है। कई रिपोर्ट्स के मुतबिक सरकार का जोर वक्फ में महिलाओं का पार्टिसिपेशन बढा़ने पर है। साथ ही सरकार की वक्फ बोर्ड की सम्पति से जुडी ताकत पर भी कंट्रोल करने की बात कही जा रही है। सबसे ज़्यादा विवाद इसी बात को लेकर है।

क्या वक्फ बोर्ड पर नियंत्रण बढ़ाना जरुरी है?
अगर हां, तो किन प्रावधानों में बदलाव की जरुरत है और सरकार को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इसको लेकर हमने फैक्ल्टी ऑफ लॉ, डीयू के रिसर्च स्कॉलर विजय त्यागी से बात की। विजय त्यागी ने बताया कि दो चीजें हैं, जो काफी ज्यादा प्रॉब्लमेटिक है और उसके उदाहरण हमने देखे हैं। सबसे पहला जो सेक्शन 40 है, वह बोर्ड को पावर देता है कि अगर उसके पास रिजन टू बिलीव है कि कोई प्रॉपर्टी वक्फ की प्रॉपर्टी है तो वो खुद से एक इंक्वायरी करके ये कह सकते हैं कि ये उनकी प्रॉपर्टी है। उसके बाद उस जमीन पर जो करेंटली ओनरशिप क्लेम कर रहा है उसको कोई आपत्ति है तो वो ट्रिब्यूनल के पास जाए।
पहली समस्या तो ये है कि मान लीजिए किसी सामान्य आदमी की संपत्ति है तो उसके पास टाइटल सूट लड़ने के लिए उतनी पावर या वक्फ बोर्ड जितना संसाधन नहीं हो पाता है।
दूसरा ये है कि बर्डेन ऑफ प्रूफ शिफ्ट हो जाता है, उस पर कि वो ये प्रूफ करे कि ये उसकी संपत्ति है, वक्फ की संपत्ति नहीं है। दूसरा प्वाइंट ये है कि इनका सेक्शन 14 वक्फ की कंपोजिशन की बात करता है। तो कंपोजिशन में विविधता आनी चाहिए। ये मांग मुस्लिम समाज के अलग-अलग सेक्शन से आती रही है। जिसमें शिया एक सेक्ट है, बोहरा एक सेक्ट है और मुस्लिम महिलाओं का प्रतिनिधित्व तो होना ही चाहिए।

लाखों करोड़ की प्रॉपर्टी
वक्फ बोर्ड चाहे सालाना 200 करोड़ ही कमाता हो, लेकिन उसके पास पूरे देश में अकूत संपत्तियां हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में वक्फ बोर्ड के पास कुल 8 लाख 72 हज़ार 292 संपत्तियां हैं, जो 8 लाख एकड़ से ज्यादा में फैली हुई हैं। इनमें से कई इमारतें भारत के लिए सांस्कृतिक धरोहर की तरह हैं। कुछ वक्फ संपत्तियों को लेकर विवाद भी चले आ रहे हैं। ऐसे में सरकार वक्फ बोर्ड में जो भी बदलाव करेगी, उसे बहुत बारीक नज़र से देखा जाएगा।

MP News : शिमला की हवा मप्र होते हुए दिल्ली पहुंची, कंग्रेसाध्यक्ष ने ली मंत्री अनिरुद्ध की क्लास

खान आशु
भोपाल। हिमाचल प्रदेश की संजौली मस्जिद को लेकर जारी विवाद में मप्र की भूमिका भी दर्ज हो गई है। हिमाचल के मंत्री अनिरुद्ध सिंह द्वारा मस्जिद को अवैध कहे जाने पर मप्र विधानसभा के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने ऐतराज जताया है। उनकी नाराजगी को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तक पहुंचाने में राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भूमिका निभाई। जिसके बाद खरगे ने मंत्री अनिरुद्ध सिंह को फटकार लगाते हुए ऐसी बयानबाजी से बचने की ताकीद की है।
सूत्रों का कहना है कि हिमाचल प्रदेश के मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने शिमला की संजौली मस्जिद को अवैध करार देते हुए इसको हटाने और निर्माण कार्य को रोकने की बात कही थी। कांग्रेस सरकार द्वारा किए जाने वाले इस तरह के व्यवहार पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने नाराजगी जताई है। उन्होंने इस मामले में राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी से चर्चा कर अपना ऐतराज व्यक्त किया। सूत्रों का कहना है कि इमरान ने इस मुद्दे को कांग्रेस अध्यक्ष के सामने रखा। उन्होंने इस तरह के व्यवहार से होने वाले नुकसान से भी उन्हें अवगत कराया। बताया जा रहा है कि इस चर्चा के बाद खरगे ने हिमाचल प्रदेश के मंत्री अनिरुद्ध सिंह से सख्त लहजे में बात की। उन्होंने मंत्री को भविष्य में इस तरह की बयानबाजी से बचने की ताकीद की है। बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को भी जरूरी हिदायतें दी हैं।

ओवैसी भी हुए हमलावर
संजौली मस्जिद मामले को लेकर एआईएमआईएम के असद उद्दीन ओवैसी ने भी X पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा है कि हिमाचल प्रदेश की मुहब्बत की दुकान में नफरत ही नफरत है।

क्या है मामला
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में कथित रूप से अवैध मस्जिद निर्माण को लेकर बवाल मचा हुआ है। शिमला के चौड़ा मैदान में हिंदू संगठनों के लोगों द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा है। वहीं शिमला के संजौली में बनी मस्जिद को लेकर मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने अवैध निर्माण को तुरंत हटाने की बात कही है। इधर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी इस मामले को लेकर अपना बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों का हिमाचल प्रदेश में सम्मान होता है। मस्जिद को गिराने की मांग करने को लेकर सड़क पर उतरी भीड़ को लेकर कहा कि किसी को भी कानून हाथ में लेने का हक नहीं है। इस मामले में संविधान के हिसाब से कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की जाएगी। इसे सांप्रदायिक नजर से मत देखिए। अगर मस्जिद अवैध तरीके से पाई गई तो कार्रवाई होगी।

Bhopal News : केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने में जुटे एक रिटायर सरकारी अधिकारी,

इनका वक्फ से रहा है लंबा नाता

खान आशु
भोपाल। जिस थाली में खाना, उसी में छेद… कहावत चरितार्थ करते हुए एक पूर्व सरकारी अधिकारी केंद्र सरकार के एक फैसले को चुनौती देने में जुटे हुए हैं। बरसों वक्फ बोर्ड रहे, एक एक कर दो बोर्ड अध्यक्ष बनवाने में महती भूमिका निभा चुके हैं और अब भी पिछले दरवाजे से वक्फ बोर्ड में ही अघोषित सेवाएं दे रहे हैं। अब इन्होंने केंद्र सरकार के वक्फ संशोधन बिल को रिजेक्ट करने की मुहिम में बढ़चढकर हिस्सा लेना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे “बिल रिजेक्शन” मुहिम के मैसेज लोगों को भेजकर यह इस अभियान में शामिल होने की अपील कर रहे हैं।
नाम है दाऊद अहमद खान। लंबे समय तिलहन संघ की सेवा इन्होंने की। जब यह विभाग विघटित हुआ तो दाऊद अहमद अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के तत्कालीन पीएस स्व जब्बार ढाकवाला के सहयोग से अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में पहुंच गए। शुरुआती पोस्टिंग मप्र वक्फ बोर्ड में मिली। मप्र राज्य हज कमेटी का अतिरिक्त प्रभार भी उन्हें मिल गया। वक्फ बोर्ड में पदस्थ रहते हुए उन्होंने तत्कालीन विभागीय मंत्री अजय विश्नोई की पसंद के अध्यक्ष को पद पर आसीन कराने में जुट गए। इसके लिए उन्होंने जिला मुतावल्ली कमेटी के प्रभावशाली नियमों में भी कई परिवर्तन कर दिए।

प्रयास यहां तक जारी
सूत्रों का कहना है कि मप्र वक्फ बोर्ड के वर्तमान बोर्ड के गठन में आईं कानूनी मुश्किलों को दूर करने की जिम्मेदारी भी दाऊद अहमद ने ही निभाई हैं। इसी कड़ी को मजबूत करने के लिए उन्होंने रिटायर होने के बाद भी बोर्ड चुनाव के लिए रिटर्निंग ऑफिसर बनने की जुगत लगा ली थी। लेकिन बाद में अदालत के हस्तक्षेप से उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त होना पड़ा था। सूत्रों का कहना है कि वक्फ बोर्ड के अनुभव और नियमों से खेलने की कला के चलते उन्होंने तत्कालीन अध्यक्ष डॉ सनव्वर पटेल की ताजपोशी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कई मामलों के घेरे में
जानकारी के मुताबिक मप्र वक्फ बोर्ड में सीईओ रहते हुए दाऊद अहमद खान ने कई नियमविरुद्ध कामों को संधारित किया है। जिसके चलते उनके खिलाफ कई विभागीय जांचें प्रचलन में हैं। इसके अलावा लोकायुक्त से लेकर कई अदालती मामले भी उनसे जुड़े हुए हैं।

काम अब भी बोर्ड का
सूत्रों का कहना है कि सरकारी नौकरी से निवृत्त होने के बाद भी दाऊद अहमद की अब भी मप्र वक्फ बोर्ड कार्यालय में बदस्तूर हाजिरी जारी है। यहां वे किस अधिकार से पहुंच रहे हैं और सरकारी फाइलों को किस नियम के तहत मूवमेंट दे रहे हैं, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि दाऊद की बोर्ड दौड़ महज अपने पुराने मामलों को सम्मानजनक खात्मे की कोशिश के लिए है। इसके बदले वे बोर्ड को नियमों से खेलने की कला सिखा रहे हैं।

और साथ यह मुहिम भी
केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए वक्फ बोर्ड संशोधन बिल को लेकर सियासी और सामाजिक घमासान मचा हुआ है। इसको लेकर एक कमेटी गठित की है। कमेटी ने बिल के पक्ष और विरोध में आमजन से उनके विचार, मत और सुझाव मांगे हैं। इन सुझाव और मत के आधार पर ही जेपीसी अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। जिससे बिल को लागू करने या न करने का बल मिलने वाला है। इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए अलग अलग लोगों, संस्थाओं, संगठनों द्वारा अपील की जा रही हैं। रिटायर्ड शासकीय अधिकारी और वर्तमान में मप्र वक्फ बोर्ड में अघोषित सेवाएं दे रहे दाऊद अहमद खान ने भी खुद को “रिजेक्ट बिल” अभियान से जोड़ लिया है। वे सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर इससे संबंधित मैसेज भेज रहे हैं। इन मैसेज के मार्फत लोगों से ई मेल, व्हाट्स ऐप और अन्य माध्यम से बिल का विरोध करने की अपील दाऊद अहमद खान द्वारा की जा रही है !

MP News : भारत इकलौता देश, जहां अल्पसंख्यकों को मिले एक्स्ट्रा अधिकार : डॉ महताब आलम

खान आशु
भोपाल। हमारे देश में लागू संविधान शिक्षा को लेकर कई रियायतें, राहतें, अधिकार देता है। जिनमें यह भी शामिल है कि किसी भी धर्म, जाति, संप्रदाय को उसके मजहब की मान्यताओं के लिहाज से शिक्षा हासिल करने की छूट होगी। देश और प्रदेश में बने ताजा हालात में सरकारों ने मदरसा शिक्षा को बेड़ियों में जकड़ने की मुहिम छेड़ रखी है। वैध अवैध, कानूनी गैर कानूनी, मान्य या अमान्य की सीमाओं में बांधकर मजहबी तालीम को बंद करने जैसे हालात बनाए जा रहे हैं।
राजधानी भोपाल में गांधी नगर नई बस्ती में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मदरसों के प्रबंधक, शिक्षक, शिक्षाविद और शहर के फिक्रमंद लोग जुटे। कार्यक्रम एएम हाई सेकेंडरी स्कूल द्वारा आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी, मुफ्ती मोहम्मद अहमद, मानू के प्रो अहसान, मप्र मदरसा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष प्रो हलीम खान, वरिष्ठ पत्रकार डॉ महताब आलम, मप्र मुस्लिम विकास परिषद अध्यक्ष एड माहिर खान आदि मौजूद थे।
इस मौके पर शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी ने कहा कि देश का कानून और संविधान सबके लिए समान है। लेकिन अल्पसंख्यकों के लिए कुछ अतिरिक्त व्यवस्थाएं भी हैं। संविधान की धारा 28, 29 और 30 ने शिक्षा के विशेष अधिकार दिए हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ महताब आलम ने मदरसों को लेकर मची खलबली पर कहा कि रजिस्ट्रेशन में प्रोटेक्शन है। नियमों का पालन करते हुए किए गए काम में सबकी भलाई और आसानी है। इस मौके पर प्रो हलीम खान ने भी मदरसों को संचालित करने के नियम और ताजा हालात पर बात की। कार्यक्रम को मुफ्ती मोहम्मद अहमद, प्रो अहसान, मोहम्मद माहिर आदि ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम संयोजक सआदत हलीम, मोहम्मद सुहैब कुरैशी आदि ने कार्यक्रम का उद्देश्य बताया। इस मौके पर विभिन्न रजिस्ट्रेशन आदि की प्रक्रिया की जानकारी देने के लिए स्टॉल भी लगाए गए थे।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के चाचा चैन सिंह चौहान का निधन, शाम 4 बजे होगा अंतिम संस्कार

शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पर साझा की जानकारी

भोपाल | मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के चाचा चैन सिंह चौहान का निधन हो गया है। वह बीते कुछ समय से अस्वस्थ थे और उनका इलाज बंसल अस्पताल भोपाल में चल रहा था, उन्होंने अस्पताल में ही अपनी अंतिम सांस ली। गौरतलब है कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कक्षा चौथी से लेकर ग्यारवी तक की पढ़ाई अपने चाचा चैन सिंह चौहान के घर रहकर ही पूरी की थी।

छलक गयी शिवराज सिंह चौहान की भावनाएं
चाचा के निधन पर प्रदेश के पूर्व मुखिया ने X पर भावनात्मक पोस्ट कर इसकी जानकारी साझा की, उन्होंने लिखा की “मेरे प्रिय चाचाजी श्री चैन सिंह चौहान जी, जिनके पास भोपाल में रहकर चौथी से लेकर ग्यारहवीं कक्षा तक पढ़ा, जिनका आशीर्वाद सार्वजनिक जीवन में मेरी प्रेरणा रहा, जो सदैव मेरे ऊपर प्रेम की वर्षा करते रहे, वह आज हमें छोड़कर अनंत यात्रा पर चले गए।” इसके आगे उन्होंने लिखा कि “वो मेरी शक्ति थे, भावनात्मक सहारा थे, प्रेरणा थे। आज वो साथ छूट गया, सहारा टूट गया, हृदय-घट सूना हो गया। पूज्य चाचाजी के चरणों में प्रणाम!” जानकारी के अनुसार स्वर्गीय चैन सिंह चौहान का अंतिम संस्कार गृह ग्राम जैत में शाम 4 बजे किया जाएगा।

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से हुनरमंद बन रहे कारीगर, अब तक 31 हजार 612 से अधिक कारीगरों की प्री-बेसिक ट्रेनिंग पूरी

योजना में अब तक 29 लाख 40 हजार से अधिक पंजीयन हुए

सर्वविदित है कि इस संसार को भगवान विश्वकर्मा ने यह सुन्दर स्वरूप दिया है। वे इस सृष्टि के पहले वास्तुकार एवं शिल्पज्ञ थे। केन्द्र सरकार ने ‘प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना’ के नाम से एक अभिनव योजना प्रारंभ की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितम्बर 2023 को योजना का शुभारंभ किया था। योजना में अपने हाथों और औजारों से काम करने वाले पारम्परिक कारीगरों एवं शिल्पकारों को सभी प्रकार की सहायता दी जायेगी।
योजना में 18 प्रकार के परम्परागत व्यवसायों जैसे बढ़ई, नाव-निर्माता, कवच निर्माता, लोहार, हथौड़ा और टूल-किट निर्माता, ताला बनाने वाले, सुनार, कुम्हार, मूर्तिकार (मूर्तिकार व पत्थर तराशने वाले), पत्थर तोड़ने वाले, मोची (चर्मकार)/जूते बनाने वाले, राज-मिस्त्री, टोकरी/चटाई/झाड़ू निर्माता/कॉयर बुनकर, गुड़िया और खिलौने निर्माता (पारम्परिक), नाई, माला निर्माता, धोबी, दर्जी और मछली पकड़ने के जाल बनाने वाले कारीगरों को शामिल किया गया है। इच्छुक आवेदकों को योजना में पंजीयन कराने के लिये ‘पीएम विश्वकर्मा पोर्टल’ भी बनाया गया है।
इस पोर्टल में मध्यप्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों में एक सितम्बर 2024 तक कुल 29 लाख 40 हजार 426 से अधिक कारीगरों ने अपना पंजीयन करा लिया है। कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग द्वारा इन पंजीयन आवेदनों में से पात्र कारीगरों एवं शिल्पकारों को प्रशिक्षण देकर दक्ष बनाया जायेगा और उनके उत्पादों को बेचने के लिये ‘सेल प्लेटफार्म’ भी मुहैया कराया जायेगा।


आयुक्त, हाथकरघा एवं हस्तशिल्प ने बताया कि मूलत: केन्द्र सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की “पीएम विश्वकर्मा योजना” में कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग ‘ट्रेनिंग पार्टनर’ के रूप में काम करेगा। योजना के घटकों में पीएम विश्वकर्मा प्रमाण-पत्र एवं आईडी कार्ड के जरिये कारीगरों और शिल्पकारों का पात्रता पंजीयन किया जाएगा। इन पात्र कारीगरों को 5 से 7 दिनों का बुनियादी प्रशिक्षण और 15 दिन या इससे अधिक दिन का उन्नत प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान 500 रूपये प्रतिदिन की दर से शिष्यवृत्ति (Styfund) भी दी जाएगी। इसके अलावा बुनियादी कौशल प्रशिक्षण की शुरूआत में ई-वाऊचर के रूप में 15 हजार रूपये तक का टूलकिट प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। योजना में कारीगरों एवं शिल्पकारों को व्यवसाय/दुकान/आऊटलेट स्थापित करने के लिये बैंक लिंकेज व पात्रतानुसार स्व-रोजगार के लिये लोन लिंकेज, डिजिटल लेन-देन के लिये प्रोत्साहन और विपणन सहायता भी दी जाएगी।
आयुक्त, हाथकरघा एवं हस्तशिल्प ने जानकारी दी कि कारीगरों से प्राप्त कुल पंजीयन आवेदनों में से अबतक 12 लाख 76 हजार 646 कारीगरों के आवेदन प्रशिक्षण के लिये मान्य कर लिये गये हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 37 जिलों में 15 ट्रेड्स में 39 ट्रेनिंग प्रोवाईडर्स के माध्यम से कौशल विकास की प्री-बेसिक ट्रेनिंग देकर 128 प्रशिक्षण केन्द्रों में कारीगरों को टूल-किट देने के लिये चयनित कर लिया गया है। इसी प्रकार 38 जिलों में 15 ट्रेड्स में 107 ट्रेनिंग प्रोवाईडर्स के जरिये 80 बैचेस में कारीगरों को कौशल विकास की बेसिक ट्रेनिंग दी जा रही है। उन्होंने बताया कि अब तक 31 हजार 612 कारीगरों को प्री-बेसिक ट्रेनिंग दी जा चुकी है और वर्तमान में 2 हजार 941 कारीगरों की ट्रेनिंग जारी है।

MP News : मुस्लिम त्यौहार कमेटी को मिला आकार, देशभर के युवा शामिल, जानें किसे क्या मिली जिम्मेदारी

खान आशु
भोपाल। ऑल इण्डिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी ने अपनी कार्यकारिणी को विस्तार दे दिया है। देशभर के युवाओं की मौजूदगी वाली इस कमेटी में मार्गदर्शक मंडल भी तय कर दिया गया है। देश और प्रदेश में गंगा जमुनी तहजीब को बरकरार रखने और सभी त्योहारों में सामाजिक समरसता, सांप्रदायिक सौहार्द और सबकी सहभागिता की नीयत के साथ काम करने की मंशा को कमेटी ने दोहराया है।
ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष दानिश खान ने सोमवार को राजधानी भोपाल में पत्रकारवार्ता को आयोजित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारे देश की संस्कृति आपसी सौहाद्र और मेल मुलाकात की है। एक दूसरे के त्योहारों में खुशियां बांटने की हमारी परंपरा है। उन्होंने कहा कि इसी परंपरा को निरंतर रखने के लिए मुस्लिम त्यौहार कमेटी काम कर रही है। दानिश ने बताया कि व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने की मंशा के साथ इसकी टीम में युवाओं को जगह दी गई है।

यह है कार्यकारिणी
ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के संरक्षक मंडल में शमसुल हसन बल्ली, हिफजुर्रहमान, जफर आलम खान, असद पठान, तौकीर निजामी आदि को शामिल किया गया है।

इनको जिम्मेदारी
मो. दानिश खान (राष्ट्रीय अध्यक्ष),
2. गुलाम हुसैन (नागपुर), राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
3. मो. सरफराज अंसारी (उ.प्र.), राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
4. मो. अरशद (मुम्बई), राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
5. मो. वसीम खान दिल्ली, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
6. पीर मीर अफरोज अली (तेलंगाना), राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
7. काजी रशीद उद्दीन (म.प्र), राष्ट्रीय सचिव
8. इंजी. जिशान अली (उ.प्र.), राष्ट्रीय सचिव
9. मो. राशिद खान,
        राष्ट्रीय सचिव
10. पीर गुलाम जिलानी (गुजरात), राष्ट्रीय महासचिव
11. मो. शकील (कटनी),
राष्ट्रीय महासचिव
12. काज़ी आसिफ (रतलाम),
राष्ट्रीय महासचिव
13. मो. कमाल अंसारी (उ.प्र.),
राष्ट्रीय महासचिव
14. माजिद पहलवान (बुरहानपुर), राष्ट्रीय महासचिव
15. काजी इफ्तेखार अहमद (महाराष्ट्र), राष्ट्रीय महासचिव
16. मंजूर बैग,
राष्ट्रीय प्रवक्ता
17. नौशाद खान
राष्ट्रीय प्रवक्ता

श्री विश्वकर्मा महापंचायत की महिला संगोष्ठी सम्पन्न

“सनातन धर्म: आस्था, परंपराएं और सामाजिक एकता का परिचय” रहा विषयभोपाल। राजधानी में श्री विश्वकर्मा महापंचायत के महिला मोर्चा द्वारा सनातन संस्कृति में अहम भूमिका रखने वाले पर्व शिव चौदस के अवसर पर गणेश पूजन कर शिवशक्ति की आराधना की गई। इस अवसर पर महिला संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया, आयोजन में संगठन की महिला पदाधिकारी एवं सदस्यों ने भजनों की मधुर प्रस्तुति दी। संगोष्ठी में विषय पर चर्चा के दौरान महिलाओं ने अपने अपने विचार साझा किए, आयोजन में उपस्थित महिला मोर्चा की सदस्यों ने संगठन की मजबूती पर बल दिया। इस अवसर पर संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष महिला मोर्चा उमा विश्वकर्मा सहित संगठन एवं समाज की अनेक महिलाएं एकत्रित हुईं ।उन्होंने संगठन की एकजुटता और सामाजिक योगदान को बढ़ावा देने के लिए प्रेरणादायक संदेश दिए। इस मौके पर महिला सदस्यों ने संगठन को और भी मजबूत बनाने की दिशा में प्रतिबद्धता व्यक्त की। यह संगोष्ठी न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण थी, बल्कि इसमें महिलाओं के संगठनात्मक सशक्तिकरण और समाज की एकता पर भी जोर दिया गया। आयोजन ने इस बात को भी रेखांकित किया कि कैसे महिलाएं सनातन धर्म की परंपराओं को जीवित रखते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।

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