नया नज़रिया और महमूद ज़की वेलफेयर फाउंडेशन ने सिलसिला अदब कार्यक्रम आयोजित किया
भोपाल, सिलसिला अदब जैसे आयोजनों का चलन कम हो गया है, नया नज़रिया इस बात के लिए बधाई का पात्र है कि उसने पुरानी परंपरा को मजबूती के साथ आगे बढ़ाने का काम किया है। ऐसी साहित्यिक परंपराएं हमारी साझी विरासत को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं। ये विचार जाने-माने पत्रकार और कार्यक्रम अध्यक्ष उमेश त्रिवेदी ने नया नज़रिया और महमूद ज़की वेलफेयर फाउंडेशन के संयुक्त बैनर तले आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उमेश त्रिवेदी ने कहा कि नया नज़रिया ने जिस तरह सिलसिला अदब के माध्यम से भारतीय सभ्यता और संस्कृति को पुनर्जीवित किया है, वह सराहनीय है। यहां आकर मेरी 50 साल पुरानी साहित्यिक यादें ताज़ा हो गई हैं। प्रोग्राम के मेहमान खास सीनियर जर्नलिस्ट और शायर इनामुल्लाह खान लोधी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि मैंने महमूद ज़की साहब के साथ मुशायरा पढ़ा है और मुझे यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि महमूद ज़की की तरबियत रंग ला रही है। उनके बेटे डॉ. मज़हर महमूद, डॉ. ज़फ़र महमूद, डॉ. इशरत नाहिद और डॉ. नज़र महमूद भाषा और साहित्य के रक्षक के तौर पर अपना फ़र्ज़ निभा रहे हैं।

नया नज़रिया और महमूद ज़की वेलफ़ेयर फ़ाउंडेशन के बैनर तले साहित्य सीरीज़ का लगातार आयोजन इस बात का सबूत है कि नई पीढ़ी अपनी भाषा और संस्कृति को लेकर कितनी फिक्रमंद है। जिस भाषा और संस्कृति के रक्षक ऐसे दिग्गज हों, वह कभी खत्म नहीं हो सकती। इससे पहले, डॉ. मेहताब आलम ने प्रोग्राम के मकसद और उद्देश्यों पर रोशनी डालते हुए कहा कि डॉ. नज़र महमूद के पिता महमूद ज़की ने कई अख़बारों और मैगज़ीनो के संपादन का काम किया। उन्होंने शायरी, पत्रकारिता और आलोचना के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई। महमूद ज़की ने कई सामाजिक, साहित्यिक और धार्मिक संगठनों में भी अहम पदों पर काम किया। डॉ नजर महमूद को पत्रकारिता अपने पूज्य पिता से पत्रकारिता विरासत में मिली है। डॉ. नज़र महमूद ने दिल्ली में दो केंद्रीय मंत्रियों के मीडिया सलाहकार के तौर पर काम किया उसके बाद उन्होंने उर्दू में नया नज़रिया शुरू किया, यह मध्य प्रदेश का पहला उर्दू अख़बार है जो एक साथ पाँच जगहों से छपता है।

इसके बाद रोज़नामा नया नज़रिया के एडिटर और पब्लिशर डॉ. नज़र महमूद ने मेहमानों का स्वागत तोहफ़े देकर किया। प्रोग्राम के अध्यक्ष सीनियर जर्नलिस्ट उमेश त्रिवेदी का स्वागत पंकज पाठक ने, मुख्य अतिथि सीनियर जर्नलिस्ट इनामुल्लाह खान लोधी का स्वागत ज़फ़र सेहबाई ने, अयाज़ कमर का स्वागत सैयद नुसरत अली ने, सीनियर जर्नलिस्ट अजय बोकिल का स्वागत इकबाल मसूद ने, राजेश चंचल का स्वागत डॉ. एहसान आज़मी ने, शाहिद कामिल का स्वागत प्रकाश गांधी ने, और लघु कथा लेखक खान आशु का स्वागत डॉ. नज़र महमूद और डॉ. मेहताब आलम ने किया। नया नज़रिया और महमूद ज़की वेलफेयर फाउंडेशन के सिलसिला अदब प्रोग्राम की खास बात यह थी कि प्रोग्राम में जर्नलिज़्म, पोएट्री और लिटरेचर से गहरा नाता रखने वाले उर्दू और हिंदी के जाने-माने जर्नलिस्ट शामिल हुए। प्रोग्राम की शुरुआत सीनियर जर्नलिस्ट शाहिद कामिल की शायरी से हुई। शाहिद कामिल ने अपने शायरी से महफ़िल की शान बढ़ाई। शाहिद कामिल के बाद सीनियर जर्नलिस्ट राजेश चंचल ने अपनी गज़लें और कविता पेश की और महफ़िल से तारीफ़ें बटोरीं। खान आशु ने अपनी लघु कथा से महफ़िल को कामयाब बनाया। खान आशु ने अपनी चुनी हुई छोटी कहानियां पेश कीं और सब से तारीफ़ पाई। सीनियर जर्नलिस्ट अजय बोकिल ने मां पर कविताएं पेश करके लोगों का ध्यान खींचा, जबकि सीनियर जर्नलिस्ट अयाज़ कमर ने अपनी अलग-अलग कविताओं के साथ ग़ज़लें भी पेश कीं, जिन्हें मौजूद लोगों ने खूब पसंद किया और सराहा। प्रोग्राम के मुख्य अतिथि इनामुल्लाह खान लोधी और अध्यक्ष उमेश त्रिवेदी ने भी अपनी ग़ज़लों और कविताओं से महफिल की शान में इज़ाफ़ा किया।

कार्यक्रम के अंत में दैनिक नया नज़रिया के संपादक और प्रकाशक डॉ नज़र महमूद ने आभार व्यक्त किया। डॉ नज़र महमूद ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि दैनिक नया नज़रिया और महमूद ज़की वेलफेयर फाउंडेशन सिलसिला ए अदब के तहत हर महीने एक काव्य गोष्ठी का आयोजन करता है। इस बार हमने पत्रकारों को शामिल करके एक अनूठी गोष्ठी आयोजित करने का फैसला लिया था जो कामयाब रहा जिसके लिए मै आप सब का शुक्रिया अदा करता हूं।








