एमडी व ऊर्जा मंत्री तक पहुंचाने की तैयारी।
जीतेन्द्र सेन
बैरसिया। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के बैरसिया क्षेत्र में तैनात अधिकारियों लाइनमैनों और आउटसोर्स कर्मचारियों की कथित लापरवाही और मनमानी से घरेलू एवं सिंचाई कनेक्शन धारक उपभोक्ताओं में गहरी नाराज़गी व्याप्त है। उपभोक्ताओं का कहना है कि स्थिति सुधारने के लिए वे जल्द ही विभाग के एमडी और ऊर्जा मंत्री से औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे।
24 घंटे वाली अटल ज्योति स्कीम में गड़बड़ियों का आरोप
सूत्रों के अनुसार विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से कुछ लाइनमैन और आउटसोर्स कर्मचारी रातों रात अटल ज्योति लाइन से मनचाहे किसानों को अवैध रूप से जंपर जोड़कर सिंचाई के लिए बिजली आपूर्ति कर रहे हैं। इस अवैध सप्लाई से विभाग को हर महीने लाखों रुपये का नुकसान पहुंचने की बात सामने आ रही है।
स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक कई ऐसे स्थान भी हैं जहाँ कर्मचारियों के खुद के नाम से बिजली कनेक्शन नहीं हैं फिर भी वहां अनधिकृत रूप से तार डालकर बिजली ली जा रही है।
आरोप यह भी है कि कुछ कर्मचारी फसल आने पर गेहूं और चने के रूप में ‘वसूली’ तय कर लेते हैं। ललरिया डीसी व अन्य क्षेत्रों में आधा दर्जन गांव प्रभावित ललरिया डीसी सहित कई जगहों पर ऐसे मामलों की चर्चाएं ज़ोरों पर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध सप्लाई और मिलीभगत के कारण नियमित उपभोक्ताओं के बिलों में भी गड़बड़ियां देखने को मिल रही हैं।
रीडिंग और खपत में भारी अंतर
सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि शहर और गांवों में विद्युत खपत और मीटर रीडिंग में बड़ा अंतर पाया जा रहा है। खपत अधिक लेकिन रीडिंग कम बताई जा रही है जिससे विभाग को राजस्व हानि हो रही है। घरेलू और पंप कनेक्शनों के बिलों की वसूली लगातार घट रही है।
बिना जांच जारी कर दिए कमर्शियल मीटर
विभागीय सूत्रों का कहना है कि नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में कई गुमठियों डेयरियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बिना जांच पड़ताल के घरेलू व कमर्शियल मीटर जारी कर दिए जाते हैं। समय-समय पर चेकिंग न होने से यह भी बिजली चोरी और अत्यधिक खपत का एक बड़ा कारण बन चुका है।
ईमानदार उपभोक्ता नाराज़ भ्रष्ट कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग
नियमित रूप से बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं का कहना है कि ऐसे अधिकारी और कर्मचारी विभाग के लिए दीमक साबित हो रहे हैं। कई लाइनमैन और आउटसोर्स कर्मचारियों के किसानों व आम नागरिकों से अभद्रता और अवैध वसूली के वीडियो ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
इसके बावजूद विभागीय अधिकारी उदासीन बने हुए हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि उच्च अधिकारी तुरंत हस्तक्षेप करें और भ्रष्ट कर्मचारियों को हटाकर कड़ी कार्रवाई करें तो विभाग की साख और राजस्व दोनों बचाए जा सकते हैं।
