सुस्त ननि की चाल, चार माह में कार्यवाही के नाम पर सिर्फ नोटिस

वीआईपी रोड पर तान दिया है अवैध बंगला
नोटिस देने पहुंचे निगमकर्मी पर थाने में झूठी शिकायत भी कर चुका है आरोपी

खान आशु
भोपाल। राजधानी का नगर निगम मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंची शिकायत पर गंभीर नहीं है। एक अवैध निर्माण की शिकायत पर चार माह में सिर्फ नोटिस भेजकर निगम ने इतिश्री कर ली है। जबकि आरोपी खुद को इतना बलशाली मानता है कि नोटिस देने पहुंचे निगमकर्मी पर थाने में झूठी रिपोर्ट लिखा चुका है।
जानकारी के मुताबिक वीआईपी रोड पर एक अवैध निर्माण निगम के पूर्व कर्मचारी बशीर ने कर लिया है। इस निर्माण का आधार एक फर्जी हिबानामे को बनाया गया है। बशीर ने यह संपत्ति विक्रय करने में भी झूठे शपथ पत्रों और दस्तावेज का सहारा लिया है। अदालती कार्यवाहियों में निर्माण किए गए मकान नशेमन को अवैध मानते हुए इसे तोड़ने के निर्देश दिए थे। लेकिन नगर निगम ने वर्षों में इस अदालती आदेश पर कोई कार्यवाही नहीं की है।

यह हुई थी शिकायत
वीआईपी रोड पर हुए इस अवैध निर्माण को लेकर कई अदालती मामले भी चल रहे हैं। इसको लेकर सितम्बर माह में सीएम हेल्पलाइन पर एक शिकायत दर्ज कराई गई थी। जिसमें कहा गया था कि भोपाल के वीआईपी रोड पर स्थित खसरा नंबर 78 पर स्थित अधिकांश प्रॉपर्टी शत्रु संपत्ति में शामिल हैं। इनमें शामिल संपत्ति पर नशेमन विला का निर्माण किया गया है। बिना वाजिब अधिकार के हिबा की गई इस विला की भवन अनुज्ञा और निर्धारित नक्शा मौजूद नहीं है। नगर निगम, अदालत और अन्य सरकारी कार्यालयों में प्रस्तुत नक्शा अलग अलग लगाया गया है। अदालत के एक मामले में मकान के मौजूदा मालिक ने यह जवाब भी प्रस्तुत किया है कि उनके कागजों से भरा बैग गुम हो चुका है। अदालत एक मामले में इस निर्माण को अवैध मानकर गिराने के आदेश भी दे चुका है। लेकिन कार्यवाही अब तक लंबित है। शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच कर विधि पूर्वक कार्यवाही की है।

नोटिस की नौटंकी
सीएम हेल्पलाइन पर सितम्बर माह में हुई शिकायत पर दो माह बाद नवंबर में सिर्फ नोटिस जारी किया गया है। आरोपी की हठधर्मिता यह है कि उससे नोटिस देने पहुंचे निगमकर्मी पर थाने में झूठी रिपोर्ट दर्ज कर दी। जिसके बाद नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा खामोशी धारण कर बैठ गई है। उसने इस अवैध मकान के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की है।

पूर्व कर्मचारी को रियायत या मामला लेनदेन का
नगर निगम में पूर्व कर्मचारी बशीर के नाम पर यह निर्माण है। वे अपने पुराने ताल्लुकात और निगम में रसूख के चलते कोई कार्यवाही नहीं होने देते हैं। सूत्रों का कहना है कि निगम की भवन अनुज्ञा शाखा ने इस मामले में लेनदेन कर भी इस अवैध निर्माण के खिलाफ कार्यवाही रोक रखी है।

अनूपपुर में कार्रवाई:599 किलो गांजा जब्त; उड़ीशा से लाकर इंदौर और आसपास सप्लाई का था प्लान

भोपाल एसटीएफ की नए साल से पहले बड़ी कार्रवाई

भोपाल|नए साल के जश्न से 5 दिन पहले मप्र एसटीएफ ने नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एसटीएफ ने ओडिशा से मप्र लाए जा रहे 599 किलो गांजा ट्रक सहित जब्त किया है। इसकी कीमत 1.80 करोड़ रुपए बताई जा रही है। ट्रक के मप्र में प्रवेश करते ही एसटीएफ ने 16 किमी तक पीछा किया और जेसीबी की मदद से उसे रोका।
ट्रक सवार सीधी निवासी अंकित विश्वकर्मा व सतना निवासी धनंजय पटेल को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि गांजे की खेप इंदौर और आसपास के शहरों में सप्लाई की जानी थी। सटीक सूचना मिलने पर स्पेशल डीजी एसटीएफ पंकज श्रीवास्तव के निर्देश और एसपी एसटीएफ राजेश सिंह भदौरिया के नेतृत्व में दो टीमें तैनात की गई थीं।
ओडिशा: ‘ग्रीन गोल्ड’ का गढ़
ओडिशा के मलकानगिरी और कोरापुट जैसे जिले गांजे की खेती के लिए कुख्यात हैं। वहां से 5-8 हजार रुपए किलो में खरीदा गया गांजा, मप्र और दिल्ली के बाजारों तक पहुंचते-पहुंचते 30 से 50 हजार रु. प्रति किलो तक बिकता है।
मप्र खुद बड़ा उत्पादक नहीं है, लेकिन ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश का गांजा मप्र के जरिए इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, यूपी–राजस्थान तक पहुंचता है। यानी मप्र ब्रिज स्टेट बन चुका है, यहीं से खेप बंटती है।
गुप्त केबिन में छुपा रखा था गांजा
तस्करों ने ट्रक में गुप्त केबिन बनाकर गांजा छिपाया था। इसके अलावा तस्कर नेशनल और स्टेट हाईवे से बचते हजंगल के रास्तों से ट्रक ले जा रहे थे। यह कार्रवाई छग-मप्र सीमा के पास अनूपपुर जिले के जंगल क्षेत्र में की गई।

27 दिसंबर को भोपाल में सेन समाज का प्रांतीय महाअधिवेशन |

युवा प्रदेशाध्यक्ष सुरेश आचार्य सहित पूरी टीम करेगी पदभार ग्रहण

भोपाल। सेन समाज विकास संगठन का प्रांतीय महाअधिवेशन कल 27 दिसंबर को राजधानी भोपाल में भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक आयोजन में सेन समाज विकास संगठन के नवनियुक्त युवा प्रदेशाध्यक्ष सुरेश आचार्य अपनी पूरी प्रदेश कार्यकारिणी टीम के साथ औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करेंगे।
महाअधिवेशन के दौरान युवाओं को सामाजिक एकता, संगठनात्मक मजबूती, शिक्षा, रोजगार और समाज सुधार के लिए प्रेरित करते हुए समाज को नई दिशा देने का संकल्प लिया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेशभर से हजारों सेन युवा राजधानी भोपाल में एकत्रित होकर सेन समाज की एकजुटता और शक्ति का प्रदर्शन करेंगे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि
कमलेश सेन, सदस्य – रेल सलाहकार समिति, पश्चिम मध्य रेल, भोपाल
विशिष्ट अतिथि
पवन सेन, थाना प्रभारी, इंडस्ट्रीज एरिया, भोपाल
की गरिमामयी उपस्थिति आयोजन को और भी गौरवपूर्ण बनाएगी।
युवा प्रदेशाध्यक्ष सुरेश आचार्य ने कहा कि सेन समाज के युवाओं को संगठित कर उन्हें नेतृत्व, सेवा और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना ही संगठन का प्रमुख उद्देश्य है। यह महाअधिवेशन सेन समाज के भविष्य की दिशा तय करने वाला मील का पत्थर सिद्ध होगा।
महाअधिवेशन को लेकर सेन समाज एवं सेन युवा संगठन में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। आयोजकों ने समाज के सभी वर्गों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है।

ली सुशासन की शपथ, अटल जी के आदर्शो पर चलने का संकल्प

भोपाल। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा स्थापित सुशासन के उच्चतम मापदण्डों के महत्व को प्रतिपादित करते हुए उनके जन्म दिवस 25 दिसम्बर 2025 के एक दिन पूर्व 24 दिसम्बर 2025 को संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय भोपाल के पुरालेख अधिकारी पदम सिंह मीणा द्वारा समस्त अधिकारी एवं कर्मचारियों को सुशासन की शपथ दिलाई गई।

माज़िन अली ने क्वालीफाई किया 68वीं नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप

भोपाल। कैंपियन स्कूल, शाहपुरा के सातवीं कक्षा के छात्र माज़िन अली ने 68वीं नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप प्रतियोगिता में राइफल प्रोन पोजीशन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए नेशनल स्तर के लिए क्वालीफाई कर लिया है। कम उम्र में प्राप्त यह उपलब्धि उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास का परिणाम है।
माज़िन अली की इस सफलता में उनके कोच साद शाह एवं उनकी पूरी टीम का विशेष योगदान रहा है। साथ ही परिवार के निरंतर समर्पण, सहयोग और मार्गदर्शन ने भी उनकी इस उपलब्धि को संभव बनाया। माज़िन की मेहनत और लगन के चलते उन्होंने यह महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है।
इस उल्लेखनीय सफलता पर शहरवासियों, विद्यालय प्रबंधन, परिवारजनों एवं शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए माज़िन अली को बधाई दी तथा उनके उज्ज्वल भविष्य और खेल जीवन में और अधिक सफलता के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। माज़िन की यह उपलब्धि न केवल विद्यालय बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।

GI टैग उल्लंघन का मामला: धार सभा में नकली मशीन से बने बाग प्रिंट स्टॉल जेपी नड्डा-सीएम को भेंट, शिल्पियों में रोष

भोपाल। मध्य प्रदेश के धार जिले में आयोजित भव्य सभा में GI टैग प्राप्त बाग प्रिंट हस्तशिल्प कला का गंभीर उल्लंघन हुआ। बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उप मुख्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल, कैलाश विजयवर्गीय, सावित्री ठाकुर सहित अन्य गणमान्य अतिथियों को मंच पर मशीन से बने नकली बाग प्रिंट स्टॉल भेंट किए गए। इस घटना से पारंपरिक शिल्पियों में भारी रोष व्याप्त है।
सभा के दौरान मुख्य मंत्री डॉ. मोहन यादव ने जे.पी. नड्डा को और अन्य अतिथियों को भी ये स्टॉल भेंट किए गए, जो हाथ की ठप्पा छपाई की बजाय मशीन/स्क्रीन प्रिंटिंग से तैयार किए गए थे। बाग प्रिंट कला GI टैग प्राप्त होने के बावजूद इस तरह के नकली उत्पादों का प्रचार सरकारी मंच पर होना एक गंभीर अपराध है, जो शिल्पियों की आजीविका पर सीधा प्रहार है।

शिल्पियों की चिंता: कला लुप्त होने का खतरा
राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बाग प्रिंट शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री ने बताया, “यदि नकली मशीन से बने बाग प्रिंट उत्पादों का यह चलन बढ़ता रहा, तो असली हाथ की ठप्पा छपाई कला और इससे जुड़े हजारों शिल्पी लुप्त हो जाएंगे। बाग प्रिंट शिल्पियों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी। सरकार एक तरफ GI टैग का गुणगान कर रही है, वहीं नकली उत्पादों को बढ़ावा देकर शिल्पियों का अपमान कर रही है।”
बिलाल खत्री ने मांग की है कि नकली स्टॉल सप्लाई करने वाले अपराधियों पर GI टैग उल्लंघन के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई हो, जिसमें जुर्माना और जेल की सजा शामिल हो। उन्होंने कहा, “मशीन एवं स्क्रीन प्रिंट बाग प्रिंट नहीं हो सकता। प्राकृतिक रंगों, हाथ के ठप्पों और महीनों की मेहनत से बनने वाली यह कला ग्राम बाग की पहचान है।”

GI टैग का महत्व और उल्लंघन के परिणाम
बाग प्रिंट GI टैग प्राप्त होने से केवल धार जिले के विशिष्ट शिल्पियों द्वारा ही इसका उत्पादन और बिक्री वैध है। मशीन से बने नकली उत्पाद बाजार में सस्ते दामों पर बिकते हैं, जिससे असली कारीगरों को आर्थिक नुकसान होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी आयोजनों में नकली उत्पादों का सम्मान मिलना इस कला के लिए घातक साबित होगा।
शिल्पी समुदाय ने सरकार से तत्काल जांच, नकली उत्पाद सप्लायरों पर FIR और असली बाग प्रिंट को संरक्षण देने की मांग की है। इस घटना ने ODOP (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) योजना और हस्तशिल्प संरक्षण प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिल्पी समुदाय आशावान है कि सरकार इस मामले में त्वरित कार्रवाई करेगी, ताकि बाग प्रिंट की सांस्कृतिक धरोहर बची रहे।

‘राहत की बात’ ; एक नाम नहीं, एक दौर, आयोजन नए साल की पहली शाम

भोपाल। कुछ लोग दुनिया से चले जाते हैं तो उनके साथ उनकी आवाज़, उनके क़दमों की आहट और उनके लफ़्ज़ भी ख़ामोश हो जाते हैं लेकिन कुछ लोग दुनिया से जाते नहीं, वो दुनिया के अंदर उतर जाते हैं। लोगों की सोच में, उनके सवालों में, उनके हौसलों में और उनके इंकार में। डॉ. राहत इंदौरी उसी दूसरी क़िस्म के इंसान थे। वो मिट्टी में नहीं उतरे बल्कि ज़हनों में बस गए।
उनकी आवाज़ आज भी कानों में गूंजती है, उनका लहजा आज भी सवाल करता है और उनकी शायरी आज भी डरती नहीं है। राहत साहब ने कभी महफ़िल के हिसाब से शेर नहीं पढ़े, उन्होंने वक़्त के हिसाब से बात की।
इंदौर की गलियों, चौराहों और दिलों में ही नहीं बल्कि दुनिया में जहाँ भी उर्दू बोली और सुनी जाती है, वहाँ आज भी राहत साहब ज़िंदा हैं। कभी किसी शेर की शक्ल में, कभी किसी नारे की तरह और कभी किसी नौजवान की बेबाक ज़ुबान पर।
‘राहत की बात’ असल में किसी एक शाम या किसी एक मंच का नाम नहीं है। यह उस जुर्रत का नाम है जो राहत साहब की पहचान थी। यह उस बेबाकी का नाम है जो उन्होंने शायरी को दी और यह उस एहसास का नाम है जिसे उन्होंने अपने बाद भी मरने नहीं दिया।
आज के दौर में जहाँ शायरी भी एक महफ़ूज़ खेल बनती जा रही है, जहाँ लफ़्ज़ बोलने से पहले तराज़ू पर तौले जाते हैं और सच को मुलायम काग़ज़ में लपेटकर पेश किया जाता है, वहाँ राहत साहब की याद एक चेतावनी नहीं बल्कि एक ज़रूरी दख़ल की तरह सामने आती है।
वो याद दिलाते हैं कि शेर महज़ ताली बजवाने का हथकंडा नहीं होता, वो सजावट की भी कोई चीज़ नहीं होता बल्कि शेर आईना होता है और वक़्त से किया गया बेबाक सवाल भी।
राहत साहब ने शायरी को किताबों से निकालकर आम आदमी की सांसों में रख दिया। उन्होंने सिखाया कि लफ़्ज़ अगर सच्चे हों तो माइक की ऊँचाई मायने नहीं रखती और अगर बात दिल से निकली हो तो वो दिल तक पहुँच ही जाती है।
‘राहत की बात’ दरअसल उस रूह को ज़िंदा रखने की एक कोशिश है जिसने शायरी को सिर्फ़ लफ़्ज़ नहीं दिए बल्कि जसारत दी। यह एक याद है जो बताती है कि राहत साहब को महज़ किताबों में बंद नहीं किया जा सकता क्यूंकि वो सिर्फ़ पढ़े नहीं जाते बल्कि हर उस जगह महसूस किए जाते हैं जहाँ सच बोलने की ज़रूरत पड़ती है।
आज जब हम उन्हें याद करते हैं तो सिर्फ़ उनका माज़ी नहीं दोहराते। हम अपने आज को कसौटी पर रखते हैं, उसे थोड़ा और मज़बूत बनाते हैं। हम अपने लफ़्ज़ों को आईना दिखाते हैं और ख़ुद से सवाल करते हैं कि क्या हम भी सच बोलने का वही हौसला रखते हैं जो राहत साहब ने हमें सिखाया था क्योंकि राहत साहब का जाना, किसी एक शायर का जाना नहीं था बल्कि वो एक पूरे दौर का जाना था और ‘राहत की बात’ दरअसल उसी दौर को फिर से ज़िंदा करने की एक संजीदा कोशिश है।
राहत सिर्फ़ एक नाम नहीं थे। राहत एक आवाज़ थे और आवाज़ें अगर बेबाक हों, ज़मीर से निकली हों और सच का बोझ उठाने का हौसला रखती हों तो वो कभी ख़ामोश नहीं होतीं। वो वक़्त से टकराती हैं, हर दौर को अपना पता देती हैं और ज़हनों में गूंजती रहती हैं।
‘राहत की बात’ दरअसल उसी गूंज की एक कड़ी है जो बताती है कि राहत साहब आज भी हमारे बीच हैं, अपने लफ़्ज़ों में, अपने असर में और हमारी ज़ुबान पर।

पहली जनवरी की शाम, राहत के नाम
डॉ. राहत इंदौरी की विरासत को संजोने के लिए ‘राहत इंदौरी फाउंडेशन’ नए साल की पहली किरण के साथ एक बार फिर अदबी रवायतों का परचम लहराने जा रहा है। डॉ. राहत इंदौरी की 76 वीं जयंती के उपलक्ष्य में फाउंडेशन द्वारा लगातार छठे वर्ष भव्य अखिल भारतीय मुशायरा एवं कवि सम्मेलन ‘राहत की बात’ का आयोजन किया जा रहा है। 1 जनवरी की शाम, आनंद मोहन माथुर ऑडिटोरियम देश के नामचीन रचनाकारों की आवाज से गुंजायमान होगा। इस महफ़िल में सम्पत सरल (जयपुर), व्यंग्य की धार से व्यवस्था पर प्रहार करेंगे। शकील आज़मी (मुंबई), सलीम सिद्दीकी (बाराबंकी) व खुर्शीद हैदर (मुजफ्फरनगर), आदिल राशिद (नई दिल्ली), डॉ. संदीप शर्मा (धार) शब्दों के शिल्पी, पूर्व पुलिस अधिकारी महेंद्र सिंह सिकरवार (इंदौर), तबरेज़ मुनव्वर राना (लखनऊ), अनवर कमाल (मधुबनी) व रिजवान मलिक (नई दिल्ली) की शायरी पेश करेंगे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध कव्वाल रईस अनीस साबरी अपनी टीम के साथ डॉ. राहत इंदौरी की कालजयी शायरी को सूफियाना रंग में रंगकर एक रूहानी समां बांधेगे।

अटल स्मृति वर्ष : विचार जो अटल थे, संकल्प जो मोदी जी ने साकार किए
-हेमन्त खण्‍डेलवाल

25 दिसंबर केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की वैचारिक यात्रा का स्मरण दिवस है। यह वह दिन है, जब राष्ट्र अटल बिहारी वाजपेयी जी जैसे युगद्रष्टा नेता की जन्मजयंती मनाता है। उनका जन्मशताब्दी वर्ष हमें उनके विचारों, संकल्पों और सपनों को और गहराई से आत्मसात करने का अवसर देता है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा अटल स्मृति वर्ष के रूप में इस कालखंड को मनाना, अतीत के गौरव को वर्तमान की जिम्मेदारी और भविष्य के संकल्प से जोड़ने का सशक्त प्रयास है।

अटल जी का व्यक्तित्व विचार और संवेदना का दुर्लभ संगम था। वे दृढ़ राष्ट्रवादी थे, किंतु संवाद और सहमति के पक्षधर भी। सत्ता में रहते हुए भी उनकी भाषा में मर्यादा और व्यवहार में विनम्रता रही। कविता उनकी आत्मा थी और राष्ट्रसेवा उनका जीवन-संकल्प। यही कारण है कि वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि लोकतंत्र की गरिमा के प्रतीक के रूप में स्मरण किए जाते हैं।

प्रधानमंत्री के रूप में अटल जी ने सुशासन को व्यवहार में उतारा। पोखरण परमाणु परीक्षणों से भारत की सामरिक आत्मनिर्भरता स्थापित हुई, तो कारगिल जैसे कठिन समय में उन्होंने पूरे देश को एकजुट नेतृत्व दिया। स्वर्णिम चतुर्भुज, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और दूरसंचार क्षेत्र में किए गए सुधार-ये सभी उस विकसित भारत की आधारशिला बने, जिसकी दूरदृष्टि अटल जी ने वर्षों पहले देख ली थी।

अटल बिहारी वाजपेयी जी का मध्यप्रदेश से रिश्ता केवल राजनीतिक नहीं, ऐतिहासिक और भावनात्मक भी था। ग्वालियर को कर्मभूमि बनाकर उन्होंने इस प्रदेश से आत्मीय संबंध स्थापित किया। ग्वालियर की जनता ने उन्हें लोकसभा में भेजा, तब यह केवल एक चुनावी विजय नहीं थी, बल्कि कठिन समय में दिया गया वह विश्वास था जिसने अटल जी को राष्ट्रीय नेतृत्व की नई ऊर्जा प्रदान की।

श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्मभूमि ग्वालियर को यह भी गौरव प्राप्त है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी द्वारा प्रतिपादित “एकात्म मानवदर्शन” की वैचारिक धारा को यहीं प्रथम स्वर मिला। अटल जी की विचारशील राजनीति और एकात्म मानवदर्शन की यह संगति ग्वालियर को भारतीय लोकतंत्र की वैचारिक चेतना का विशेष केंद्र बनाती है।

अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्मशताब्दी के अवसर पर ग्वालियर की धरती का पुनः राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बनना कोई संयोग नहीं, बल्कि वैचारिक निरंतरता का प्रतीक है। 25 दिसंबर को माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी का ग्वालियर आगमन और “अभ्युदय एमपी ग्रोथ समिट–2025” जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उनकी सहभागिता, अटल जी की विकास-दृष्टि को वर्तमान भारत से जोड़ने वाला सशक्त संदेश है। जिस ग्वालियर ने अटल जी को राष्ट्रनेतृत्व की नई दिशा दी थी, वही ग्वालियर आज उनके विचारों के अनुरूप विकास,सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के नए अध्याय का साक्षी बन रहा है।

अटल जी का सपना था-एक ऐसा भारत जो मजबूत भी हो और संवेदनशील भी; जो विकास करे, पर मूल्यों से विमुख न हो; जो आत्मनिर्भर बने, पर विश्व के साथ संवाद बनाए रखे। आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में आगे बढ़ता राष्ट्र उसी अटल दृष्टि का आधुनिक और सशक्त विस्तार है। डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, मजबूत आधारभूत संरचना और वैश्विक मंच पर भारत की निर्णायक भूमिका ये सभी अटल जी के स्वप्न को साकार करते हुए दिखाई देते हैं।

अटल जी के विचारों की दृढ़ता को यदि किसी ने निकट से जिया है, तो वह हमारी पीढ़ी है। मुझे स्मरण है वर्ष 1980 का वह समय, जब मैं मात्र 16 वर्ष का था। उसी वर्ष मेरे पिताजी स्वर्गीय विजय खंडेलवाल जी बैतूल जिले के पहले निर्वाचित भाजपा जिला अध्यक्ष बने। जनता पार्टी से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई थी। संख्या बल सीमित था,कार्यकर्ताओं पर दबाव था,सत्ता का आकर्षण त्याग कर हम एक कठिन वैचारिक यात्रा पर निकले थे।

उसी दौर की एक स्मृति आज भी मन में ताज़ा है। अटल बिहारी वाजपेयी जी हमारे घर आए थे,साधारण माहौल, खाने की मेज़ पर बातचीत, कभी हल्की मुस्कान, कभी आत्मीय ठहाका। अटल बिहारी वाजपेयी जी कभी बोझिल नहीं दिखते थे। चुनौतियाँ थीं,लेकिन उनके चेहरे पर निराशा नहीं होती थी। वे बड़े सहज भाव से कहते थे कि आज हम कम ज़रूर हैं, पर हमारा भरोसा मजबूत है,और यही भरोसा आगे चलकर ताक़त बनेगा। उनका विश्वास यही था कि यह रास्ता भले कठिन हो, पर सही है-क्योंकि यह सत्ता का नहीं, राष्ट्रसेवा का मार्ग है।
उनकी वही सहजता, आत्मबल और भविष्य पर अडिग भरोसा हम जैसे युवाओं के लिए उस समय सबसे बड़ा संबल बन गया।

आज पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो लगता है कि अटल जी की वही अडिग दृष्टि आज यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में पूर्ण सिद्धि को प्राप्त हुई है। भारतीय जनता पार्टी आज विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। यह केवल संगठनात्मक विस्तार नहीं, बल्कि विचार की विजय है। भाजपा आज सत्ता की राजनीति नहीं, बल्कि जनकल्याण, लोककल्याण और सेवा-आधारित सुशासन का पर्याय बन चुकी है। अटल जी का वह विश्वास, जो 1980 में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में व्यक्त हुआ था, आज विकसित भारत के संकल्प के रूप में साकार खड़ा है-आत्मविश्वास से भरा, संकल्पबद्ध और राष्ट्रहित को समर्पित।

अटल स्मृति वर्ष हम सभी के लिए अवसर है अपने सार्वजनिक जीवन,सामाजिक आचरण,और राष्ट्रीय कर्तव्यों में उन मूल्यों को अपनाने का ,जिनका प्रतिनिधित्व अटल जी करते थे।
उनके विचारो को स्मरण में नहीं आचरण में उतारना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

लेखक भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश के अध्यक्ष हैं।

हमारे अटलजी: राष्ट्र सेवा और सुशासन के युगपुरुष।
देश के लिए जीने वाले अटल इरादों वाले नेता- हितानंद शर्मा

भारत ने करवट ले ली है। देश अब अतीत की कमियों को दूर कर स्वाकभिमान और स्वाेवलंबन के साथ ‘विकसित भारत’ के संकल्पि को पूर्ण करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र  मोदी वर्ष 2047 तक भारत को विकसि‍त राष्ट्रद बनाने के संकल्पर के साथ पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की विरासत को और आगे ले जा रहे हैं। अटलजी के स्वशप्नोंक का लोक-कल्यावणकारी, शक्ति संपन्न, अडिग, अजेय, समर्थ और विश्व् का मार्गदर्शन करने वाले राष्ट्रश का उत्था‍न होते दुनिया देख रही है।
भारतीय लोकतंत्र के लिए 25 दिसंबर एक जननायक की जन्मतिथि मात्र नहीं है। यह उस विचार,  संस्कार और राजनीतिक परंपरा का स्मरण दिवस है, जिसने सत्ता को सेवा, राजनीति को मर्यादा और राष्ट्रनीति को नैतिक बल प्रदान किया है। राष्ट्रीवय स्वरयंसेवक संघ के प्रचारक से लेकर जनसंघ और फिर भाजपा की उनकी राजनैतिक यात्रा सर्वसमावेशी व्यैक्तित्वव की प्रतीक रही है। यही कारण है कि विश्वा ने उन्‍हें अजातशत्रु के रूप में जाना। अटल जी का जन्मदिवस आज अटल स्मृति वर्ष के रूप में मना जा रहा है। यह इस बात का संकेत है कि भारत केवल व्यक्तियों को नहीं बल्कि  उनके विचारों और मूल्यों का भी स्मरण करता है। 
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के उन दुर्लभ नेताओं में थे जिनका व्यक्तित्व सत्ता से बड़ा और समय से आगे दिखाई देता था। वे ऐसे राजनेता थे जो विचारधारा में अडिग रहते हुए भी संवाद में उदार थे। अटल जी के लिए राजनीति लोकतांत्रिक विमर्श की साधना की भांति रही। संसद में भले ही विषय कितना ही संवेदनशील क्यों न हो अटलजी का वक्तव्य कभी कटु नहीं होता था। वे शब्दों से आघात नहीं करते थे, बल्कि तर्क, तथ्य और भाव से अपनी बात रखते थे। संसदीय परंपरा में अटल बिहारी वाजपेयी का आचरण एक आदर्श की तरह दिखाई देता है। उनकी यह विशेषता भारतीय लोकतंत्र को एक नैतिक ऊँचाई प्रदान करती है जि‍समें असहमति शालीनता से व्य क्तक की जा सकती है और विरोध भी गरिमामय तरीके से किया जा सकता है।
25 दिसम्बहर 1924 को ग्वाीलियर में जन्मेंक अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रीेय स्वकयंसेवक संघ के प्रचारक फि‍र जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के माध्यनम से राष्ट्रा सेवा करते हुए एक प्रकाशवान नक्षत्र की तरह भारतीय लोकतंत्र में प्रेरणा की तरह स्थायपित हो गए। अटल जी को भाजपा का प्रथम अध्यएक्ष होने का गौरव भी प्राप्त् है। मुंबई अधिवेशन में दिया गया उनका वह भाषण प्रत्येीक कार्यकर्ता के लिए मानों संकल्पक और संबल बन गया जिसमें उन्होंरने कहा था – अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा। और उनकी वाणी सत्यि हुई, आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व  में सूर्य अपनी छंटा बिखेर रहा है, कमल खिल रहा है और अंधेरा छंट चुका है।
अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वैचारिक परंपरा से आए थे। उन्होंने राजनीति में रहते हुए विचारधारा को समावेशी राष्ट्रीयता  का स्वरूप दिया। वे जानते थे कि राष्ट्रनिर्माण के लिए संवाद, विश्वास और सहभागिता आवश्य क तत्वा हैं। उनकी राजनीति में राष्ट्र सर्वोपरि था और  राष्ट्र का अर्थ केवल सीमाएँ नहीं बल्कि जनता, संस्कृति और मानवीय संवेदना भी थी। यही कारण है कि वे दृढ़ निर्णय लेने वाले नेता थे और करुणा से भरे कवि भी थे।
प्रधानमंत्री के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी का कार्यकाल आज के भारत के विकास की नींव का कालखंड माना जाता है। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना ने देश को भौगोलिक रूप से जोड़ा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने गाँवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा, किसान फसल बीमा योजना ने किसानों को संबल प्रदान किया, दूरसंचार क्रांति ने भारत को डिजिटल भविष्य की ओर अग्रसर किया। अटलजी जब 1996 में देश की पहली गैर कांग्रेसी सरकार के प्रधानमंत्री बने तो भारत की जनता ने महसूस किया कि लोकतंत्र की अवधारणा के अनुसार जनता के द्वारा, जनता के लिए, जनता की सरकार सही अर्थों में क्याक होती है। जनता से जाना कि दीनदयाल जी और डॉ. श्याजमाप्रसाद मुखर्जी की वैचारिक विरासत का सुशासन सही अर्थों में क्या। होता है।
अटलजी गठबंधन की सरकार के प्रधानमंत्री थे। इससे पूर्व राजनीतिक दलों के गठबंधन इसलिए सफल नहीं हो पाते थे क्यों कि आशंकाएं, अविश्वा स, महत्वांकांक्षाएं और संवाद की कमी उन्हें मजबूत नहीं होने देती थी। परिणामस्वेरूप गठबंधन की सरकारें अस्थिर रहती थीं। यह अटलजी की ऐतिहासिक सफलता थी कि उन्हों ने गठबंधन की राजनीति को स्थायित्व दिया और यह भी सिद्ध किया कि सहयोग से चलने वाली सरकारें भी निर्णायक और प्रभावी हो सकती हैं। यह भारतीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण मोड़ था।
एक समर्थ, सक्षम और शक्ियह शाली भारत उनके स्व प्नोंर में रहता था। वे जानते थे कि राष्ट्रहित में कठोर निर्णय भी आवश्यक हैं और मानवीय पहल भी जरूरी हैं। राष्ट्रश प्रथम की नीति पर चलते हुए पोखरण परमाणु परीक्षण-2 का निर्णय लेकर अटलजी ने भारत की सामरिक क्षमता को वैश्विक मंच पर दमदार तरीके से स्थापित किया। यह निर्णय साहस, आत्मविश्वास और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक था। अटलजी ने लाहौर बस यात्रा कर यह संदेश भी दिया कि भारत की नीति में शक्ति का उद्देश्य युद्ध नहीं बल्कि। शांति है। वहीं करगिल घाटी से दुश्मसन की सेनाओं को खदेड़ने की उनकी दृढ़ इच्छा्शक्ति के लिए उन्हेंब युगों-युगों तक याद किया जाएगा।
केवल राजनीतिक निर्णयों के माध्यम से अटल बिहारी वाजपेयी के पूरे व्यकक्तित्वि को नहीं समझा जा सकता। वे एक संवेदनशील कवि थे, जिनकी कविताओं में राष्ट्र गुनगुनाता था। उनकी रचनाओं में आशा, विश्वा।स, दृढ़ता के साथ राष्ट्रव के पुनर्निर्माण का संकल्प भी है। वे शब्दों के माध्यम से समाज का जागरण करते थे तो भारत के स्वसर्णिथम भविष्यस के प्रति आश्वस्त भी करते थे। आज भी उनकी कविताएँ भारतीय चेतना को जागृत करती हैं और यह याद दिलाती हैं कि राष्ट्र केवल वर्तमान नहीं बल्कि इतिहास की स्मृति और भविष्य के संकल्पोंक दोनों का सम्मिलित स्वरूप है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जिस दृढ़ संकल्प  के साथ देश को एक सक्षम और निर्णायक नेतृत्व‍ प्रदान करते हुए सच्चेन अर्थों में अटल जी के 21 सदी भारत की सदी बाने के स्व प्नृ को साकार कर रहे हैं। निर्णायक  और पारदर्शी शासन, भ्रष्टाीचार मुक्ती अर्थव्येवस्थाय और तकनीकि आधारित पारदर्शी लोक कल्याकणकारी योजनाएं अटल जी की विरासत को संभालने और उसे आगे ले जाने के महत्व पूर्ण प्रयास हैं। आज भारत का जो चित्र सामरिक, आर्थिक और सांस्कृेतिक रूप से विश्वी पटल पर उभर रहा है।
अटल स्मृति वर्ष और 25 दिसंबर हमें यह विचार करने का अवसर देते हैं कि हम अटल जी के बताए मार्ग पर कितनी दृढ़ता से चलते हुए उनसे प्रेरणा प्राप्तृ कर रहे हैं। उनका जीवन यह सिखाता है कि लोकतात्रिक परंपराओं, राष्ट्री यता, व्यरक्तिगत जीवन में शुचिता, सकारात्माकता और धैर्य के साथ राष्ट्रन व समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन किस प्रकार करना है। अटल जी किसी एक दल या कालखंड के नहीं, बल्कि समूचे भारतीय लोकतंत्र की धरोहर हैं। उनका स्मरण केवल अतीत की ओर देखने का नहीं, बल्कि भविष्य के लिए मार्गदर्शन लेने का अवसर है। 25 दिसंबर और अटल स्मृति वर्ष हमें यह संकल्प दिलाते हैं कि राजनीति राष्ट्रसेवा और लोककल्याण का साधन है।

लेखक भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश के प्रदेश संगठन महामंत्री हैं।

भोपाल जिले के सभी शासकीय कार्यालयों की छतों पर सोलर पैनल लगाएं जाएं

समय सीमा पत्रों की समीक्षा बैठक संपन्न

जीतेन्द्र सेन
भोपाल।। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निर्देशन में जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी ने सोमवार ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के सभाकक्ष में टीएल बैठक की समीक्षा की। टीएल बैठक में ऊर्जा विकास निगम के संभागीय अधिकारी साहू ने बताया कि भोपाल जिले के सभी शासकीय कार्यालयों की छतों पर सोलर पैनल लगाएं जाना है, जिसकी एजेंसी फाइनल हो गई है जिसकी 3.78 रूपए प्रति यूनिट की दर निर्धारित की गई है। सभी विभागों को लगाने की सहमति पत्र देना होगा जिसके अनुसार सर्वे किए जाएंगे। इसके साथ ही सुशासन सप्ताह अंतर्गत प्रशासन गांव की समीक्षा की गई। सभी विभागों को ग्रामीण क्षेत्रों में शिविरों के माध्यम से हितग्राहियों को योजनाओं की जानकारी एवं सभी पात्र लोगों को लाभान्वित करना है।
सीईओ इला तिवारी ने  पशुपालकों की आय में वृद्धि के लिए जिले में चलाया जा रहा दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान चरण-2 की समीक्षा कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

एडीएम प्रकाश नायक ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के अंतर्गत विभागवार शिकायतों की निरंतर समीक्षा कर लंबित प्रकरणों का संतुष्टिपूर्वक निराकरण करने के निर्देश दिए। साथ ही समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम हेतु चयनित विषयों की शिकायतों के शीघ्र निराकरण पर बल दिया। उन्होंने सभी एसडीएम एवं तहसीलदारों को आरसीएमएस पोर्टल पर लंबित नामांतरण, बंटवारा एवं सीमांकन के प्रकरणों, फार्मर रजिस्ट्री, ई-केवाईसी तथा स्वामित्व योजना में प्रगति लाने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त सभी विभागों को ई-ऑफिस प्रणाली पर कार्य संपादन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में एडीएम प्रकाश नायक,एसडीएम सहित समस्त विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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