वीआईपी रोड पर तान दिया है अवैध बंगला
नोटिस देने पहुंचे निगमकर्मी पर थाने में झूठी शिकायत भी कर चुका है आरोपी
खान आशु
भोपाल। राजधानी का नगर निगम मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंची शिकायत पर गंभीर नहीं है। एक अवैध निर्माण की शिकायत पर चार माह में सिर्फ नोटिस भेजकर निगम ने इतिश्री कर ली है। जबकि आरोपी खुद को इतना बलशाली मानता है कि नोटिस देने पहुंचे निगमकर्मी पर थाने में झूठी रिपोर्ट लिखा चुका है।
जानकारी के मुताबिक वीआईपी रोड पर एक अवैध निर्माण निगम के पूर्व कर्मचारी बशीर ने कर लिया है। इस निर्माण का आधार एक फर्जी हिबानामे को बनाया गया है। बशीर ने यह संपत्ति विक्रय करने में भी झूठे शपथ पत्रों और दस्तावेज का सहारा लिया है। अदालती कार्यवाहियों में निर्माण किए गए मकान नशेमन को अवैध मानते हुए इसे तोड़ने के निर्देश दिए थे। लेकिन नगर निगम ने वर्षों में इस अदालती आदेश पर कोई कार्यवाही नहीं की है।
यह हुई थी शिकायत
वीआईपी रोड पर हुए इस अवैध निर्माण को लेकर कई अदालती मामले भी चल रहे हैं। इसको लेकर सितम्बर माह में सीएम हेल्पलाइन पर एक शिकायत दर्ज कराई गई थी। जिसमें कहा गया था कि भोपाल के वीआईपी रोड पर स्थित खसरा नंबर 78 पर स्थित अधिकांश प्रॉपर्टी शत्रु संपत्ति में शामिल हैं। इनमें शामिल संपत्ति पर नशेमन विला का निर्माण किया गया है। बिना वाजिब अधिकार के हिबा की गई इस विला की भवन अनुज्ञा और निर्धारित नक्शा मौजूद नहीं है। नगर निगम, अदालत और अन्य सरकारी कार्यालयों में प्रस्तुत नक्शा अलग अलग लगाया गया है। अदालत के एक मामले में मकान के मौजूदा मालिक ने यह जवाब भी प्रस्तुत किया है कि उनके कागजों से भरा बैग गुम हो चुका है। अदालत एक मामले में इस निर्माण को अवैध मानकर गिराने के आदेश भी दे चुका है। लेकिन कार्यवाही अब तक लंबित है। शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच कर विधि पूर्वक कार्यवाही की है।
नोटिस की नौटंकी
सीएम हेल्पलाइन पर सितम्बर माह में हुई शिकायत पर दो माह बाद नवंबर में सिर्फ नोटिस जारी किया गया है। आरोपी की हठधर्मिता यह है कि उससे नोटिस देने पहुंचे निगमकर्मी पर थाने में झूठी रिपोर्ट दर्ज कर दी। जिसके बाद नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा खामोशी धारण कर बैठ गई है। उसने इस अवैध मकान के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की है।
पूर्व कर्मचारी को रियायत या मामला लेनदेन का
नगर निगम में पूर्व कर्मचारी बशीर के नाम पर यह निर्माण है। वे अपने पुराने ताल्लुकात और निगम में रसूख के चलते कोई कार्यवाही नहीं होने देते हैं। सूत्रों का कहना है कि निगम की भवन अनुज्ञा शाखा ने इस मामले में लेनदेन कर भी इस अवैध निर्माण के खिलाफ कार्यवाही रोक रखी है।
