मंत्री डा. शाह ने पद्मश्री सम्मानित जोधइया बाई के निधन पर जताया  दुःख !

भोपाल :- बैगा चित्रकला की पहचान रहीं उमरिया जिले की जनजातीय (बैगा) चित्रकार पद्मश्री श्रीमती जोधइया बाई का रविवार को निधन हो गया है। वे 86 वर्ष की थीं। उमरिया जिले के ग्राम लोधा निवासी जोधइया बाई गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। 
उनके निधन पर जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डा कुंवर विजय शाह ने गहन दुःख व्यक्त किया है।
शाह ने कहा है कि जोधइया बाई का जीवन संघर्ष, प्रतिभा और समर्पण की मिसाल है। शिक्षा से वंचित होते हुए भी उन्होंने अपने अद्भुत हुनर से बैगा जनजाति की चित्रकला को देश और दुनिया में एक नई पहचान दिलाई। कला जगत में उनका योगदान अद्वितीय था। उन्होंने जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री सम्मान और राष्ट्रीय नारी शक्ति सम्मान जैसे प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कार प्राप्त कर उन्होंने मध्यप्रदेश और देश को गौरवान्वित किया।


मंत्री शाह ने जोधइया बाई के शोक संतप्त परिजन और प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने परमपिता परमेश्वर से आत्मा की शांति और परिजन को यह दुःख वहन करने का संबल देने की कामना की है।

Bhopal News : कभी नवाबों के बेड़े में शामिल हुआ करती थीं, अब युवाओं की पसंद बनी विंटेज जीप, भोपाल से तैयार जीप जा रहीं दुबई तक

खान आशु
भोपाल। कभी नवाबों की नजरों की चमक हुआ करने वाली विंटेज जीप का शौक और खुमार अब भी नवाबों के इस शहर भोपाल के सिर चढ़कर बोलता है। चमचमाती लग्जरी कारों को नजरअंदाज कर इन जीपों की सवारी अब भी यहां शान मानी जाती है। मड रैली से लेकर जंगल तफरीह तक में इस्तेमाल और दोस्तों के साथ बड़ी झील का चक्कर लगाने में जो मजा विंटेज के साथ है, वह किसी बेशकीमती कार से भी भोपाल के बाशिंदों को नहीं मिल पाता है।
नवाबों के शहर भोपाल में जीप का क्रेज हमेशा से रहा है।
नवाब हमीद उल्लाह खां को  विंटेज जीप रखने का शौक रहा है। उनके वाहन बेड़े में दर्जनों जीप शामिल थीं। कई दशक के बाद भी लोगों में यह क्रेज जिंदा है। शहर में अब भी बड़ी संख्या में मोडिफाइड जीप शौक से चला रहे हैं। इन चाहतमंदों में युवाओं की संख्या बड़ी है। जानकारी के मुताबिक शहर में इस समय करीब 200 से ज्यादा विंटेज जीप सड़कों पर दौड़ रही हैं।

भोपाल की कला पहुंच रही विदेशों तक

सलमान खान, विंटेज मैकेनिक

विंटेज जीप के मैकेनिक सलमान खान बताते हैं कि इस समय इन जीपों की कीमत 3 से 30 लाख रुपए तक है। भोपाल में तैयार की जा रही यह जीप मुंबई, बैंगलोर, जयपुर, दिल्ली समेत देश के कई शहरों तक पहुंच रही हैं। हाल ही में दुबई के एक शौकीन शेख ने भी भोपाल से विंटेज जीप तैयार करवाई है।
सलमान बताते हैं कि
1942 से लेकर 1957 तक के मॉडल पर यहां काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बरसों पुरानी इन जीपों के पार्ट्स मिलना मुश्किल होता है। ऐसे में ज्यादातर काम कबाड़ख़ाने से लाए गए सामान के जुगाड से किया जाता है।

पुराना है जीप का इतिहास
फोर्ड जीपीडब्लू (जिसे आम तौर पर जीप या जीप के नाम से जाना जाता है, औपचारिक रूप से यूएस आर्मी ट्रक, 1/4 टन, 4×4 के नाम से जाना जाता है) और इसका विली एमबी समकक्ष, चार पहिया ड्राइव यूटिलिटी वाहन हैं जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान निर्मित किए गए थे। 1941 से 1945 तक निर्मित, जीप युद्ध के बाद नागरिक जीप सीजे में विकसित हुई और मनोरंजक चार पहिया ड्राइव वाहनों की एक पूरी श्रेणी को प्रेरित किया। माना जाता है कि “जीप” नाम आमतौर पर फोर्ड के वाहन के शुरुआती अक्षरों – जीपी से लिया गया है। यह फोर्ड जीपीडब्लू जीप 1943 में बनाई गई थी।

जोड़ती है गतिशीलता से
अपनी सेना में गतिशीलता जोड़ने की चाहत में, 1937 में अमेरिकी सेना ने अपने मौजूदा, पुराने हल्के मोटर वाहनों के प्रतिस्थापन के लिए घरेलू ऑटोमोबाइल निर्माताओं से प्रस्ताव मांगे। सेना ने 11 जुलाई 1940 को अपनी आवश्यकताओं को औपचारिक रूप दिया और उन्हें 135 अमेरिकी मोटर वाहन निर्माताओं को सौंप दिया। शुरुआत में, केवल अमेरिकन बैंटम कार कंपनी और विलीज-ओवरलैंड मोटर्स ने प्रतिस्पर्धा में प्रवेश किया; बाद में फोर्ड मोटर कंपनी शामिल हुई। विस्तारित विकास और परीक्षण के बाद, विलीज को एक उत्पादन अनुबंध दिया गया। अक्टूबर 1941 तक, यह स्पष्ट हो गया कि विलीज उत्पादन की मांग को पूरा नहीं कर सकता और फोर्ड को उनके उत्पादन का भी अनुबंध दिया गया। तब फोर्ड कार को GPW नामित किया गया था विलीज एमबी और फोर्ड जीपीडब्लू दोनों मॉडल जमीन पर बहुत प्रभावी थे, जिनमें कई मानकीकृत विशेषताएं थीं जैसे 6.00×16 टायर, 4,000 आरपीएम पर 60 हॉर्स पावर, बाईं ओर पीछे एक गैसोलीन कैन ब्रैकेट, ट्रेलर लाइट के लिए प्रावधान, स्पार्क इंटरफेरेंस सप्रेशन, एक ब्लैकआउट लाइट सिस्टम, ट्विन टॉप बो और सीलबंद स्प्रिंग शैकल्स।
अमेरिकी सेना की हर सेवा द्वारा जीप का इस्तेमाल किया जाता था। सेना की पैदल सेना रेजिमेंटों को औसतन 145 जीपें दी जाती थीं। जीपों का इस्तेमाल कई उद्देश्यों के लिए किया जाता था, जिसमें टोही, बंदूक खींचना, केबल बिछाना, आरा मिलिंग, अग्निशमन पंपर्स, फील्ड एम्बुलेंस, ट्रैक्टर और उपयुक्त पहियों के साथ रेलवे पटरियों पर भी चलना शामिल था।

जीप लवर कहते हैं

फरहान खान, विंटेज लवर

विंटेज जीप के शौकीन फरहान खान का मानना, जिस तरह विरासत को बचाने के प्रयास हो रहे हैं, विंटेज को सहेजने की कोशिश भी की जाना चाहिए।

Bhopal News : द ट्रेड बुक और फेसबुक मामले में कोर्ट में आज होगी सुनवाई, जानें क्या है मामला

खान आशु
भोपाल। भारतीय कंपनी के कान्सेप्ट और बिजनेस मॉडल को फेसबुक द्वारा चुराए जाने के आरोप लगाते हुए जिला अदालत में प्रस्तुत किए गए प्रकरण में फेसबुक इण्डिया की मामला सुनवाई योग्य न होने से खारिज किए जाने की याचिका पर शुक्रवार को दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा बहस पेश की जाएगी। पिछली पेशी पर नोटिस तामील होने के बावजूद हाजिर नहीं होने पर कोर्ट ने फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबग, फेसबुक के शीर्ष अधिकारी आर्चिबॉन्ग एवं मेटा को एक्स पार्टी घोषित कर दिया है। द ट्रेड बुक नामक भारतीय कंपनी के संस्थापक स्वप्निल राय ने वर्ष 2015 में द ट्रेड बुक को दुनिया भर में प्रसारित करने हेतु फेसबुक के अमेरिका स्थित ऑफिस में ट्रेड बुक प्रोजेक्ट के बारे में फेसबुक से संपर्क किया था। फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकेरबर्ग के वर्ष 2015 में भारत की यात्रा के दौरान फेसबुक के शीर्ष अधिकारी आर्चिबांग से प्रोजेक्ट पर बातचीत की थी । फेसबुक अधिकारी ने प्रोजेक्ट एवं आईडिया ईमेल द्वारा लिया था। जब ट्रेड बुक इंडियन पेटेंट एंड ट्रेड मार्क जर्नल में पब्लिश हुआ तो फेसबुक द्वारा कंपनी को नोटिस भेज कर प्रोजेक्ट को बंद करने का दवाब डाला। फेसबुक के शीर्ष अधिकारी पहले प्रोजेक्ट में अपनी रूचि दिखा रहे थे ,बाद में उन्होंने  वकील के माध्यम से नोटिस भेज कर कंपनी को अपना प्रोजेक्ट बंद करने एवं भविष्य में इस तकनीक पर काम न करने हेतु दबाव डाला। दवाब में नहीं आने पर फेसबुक द्वारा भारतीय कंपनी के विरुद्ध तीन केस भारतीय पेटेंट एंड ट्रेड मार्क ऑफिस में दायर कर भारतीय कंपनी के इंटेलेक्टुअल प्रॉपर्टी मार्क्स को रोकने की मांग की । एक तरफ फेसबुक भारतीय कंपनी को रोकने की कोशिश कर रही थी, वहीं दूसरी और भारतीय कंपनी के प्रोजेक्ट को खुद शुरु करते हुए कंपनी के प्रोजेक्ट के समस्त फीचर्स को अपने प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया । भारतीय कंपनी के विरूद्ध केस दायर करने के बाद भी फेसबुक खुद अपने पोर्टल पर द ट्रेड बुक प्रोजेक्ट को भारतीय कंपनी से पैसे लेकर प्रदर्शित कर रही थी, लेकिन फिर फेसबुक ने इस भारतीय कंपनी को अचानक बंद कर दिया। फेसबुक ने इस प्रोजेक्ट से जुड़े छात्र आर्यन राय के प्रोजेक्ट फीचर एवं क्लास बुक विरूद्व भी केस दायर कर दिया।

MP News : एक कदम शिक्षा की तरफ… वक्फ बोर्ड कर रहा लगातार प्रयास, प्रदेशभर में चल रहा अभियान

खान आशु
भोपाल। शिक्षा के बिना समाज सुधार न तो संभव है और न देश प्रदेश की कल्पना की जा सकती है। मप्र वक्फ बोर्ड ने इसी धारणा को आगे रखते हुए शिक्षा के क्षेत्र में अपना योगदान देने का बीड़ा उठाया है। इस मंशा को पूरा करने के लिए वक्फ संपत्तियों से होने वाली आमदनी का आधा हिस्सा जरूरतमंद विद्यार्थियों पर खर्च करने का फैसला लिया है। प्रदेश के कई बड़े वक्फ से इसकी तहरीर लिखी चुकी है। बाकी बड़े शहरों में भी यह कोशिश जारी है।
मप्र वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ सनव्वर पटेल ने बताया कि इस मुहिम से उन गरीब और जरूरतमंद बच्चों को फायदा मिल रहा है, जो अपनी शिक्षा के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते इसको पूरा नहीं कर पा रहे हैं।

अगला कदम उज्जैन में
मप्र वक्फ बोर्ड का शिक्षा विस्तार का अगला चरण उज्जैन में पूरा किया जाएगा। इसके तहत जिला वक्फ कमेटी एवं प्रबंध समितियों द्वारा वर्ष 2023-24 में कक्षा 10वीं में 65%या उससे अधिक अंक लाने वाले छात्र-छात्राओं को
आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस दौरान कक्षा 11वीं एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं तथा नीट(NEET) आदि की तैयारी करने वाले
छात्र-छात्राओं को भी छात्रवृत्ति दी जाएगी। मप्र वक्फ बोर्ड मेंबर फैजान खान ने बताया कि
यह शैक्षणिक मदद जिला स्तरीय मेरिट के आधार पर भौतिक सत्यापन के पश्चात उनकी इन्टीटूयूट को बैँकिंग के माध्यम से दी जानी है। छात्रवृत्ति हेतु आवेदन फॉर्म एवं विस्तृत जानकारी मप्र वक्फ बोर्ड द्वारा बनाए गए जिला इकाई कार्यालय मदार गेट कॉम्प्लेक्स, तोपखाना, उज्जैन
स्थित कार्यालय से कार्यालयीन समय सुबह 11 से  शाम 5 बजे तक प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि आवेदन फार्म जमा करने की अंतिम तिथि 23 दिसंबर तय की गई है। विस्तृत जानकारी के लिए दूरभाष 9691232299 पर सम्पर्क किया जा सकता है।

अनुमति” से मिलने वाला है अपनी धरोहर का एक नया अहसास, मिलेंगी जानकारी, होंगी आसानी

भोपाल। बीते  कुछ समय में राज्य पुरातत्व विभाग के पास राज्यभर के विभित्र विरासत स्थलों पर  प्री -वेडिंग शूट, फोटोग्राफी , वीडियोग्राफी, ड्रोन शूट, ऑडिटोरियम, ग्राउंड बुकिंग  और फोटोग्राफी के लिए इन दिनों प्रदेश के ऐतिहासिक विरासत स्थलों को बहुत पसंद किया जा रहा है, जिसके चलते बुकिंग के लिए पूछताछ और अनुमति के लिए आवेदन मैं बढ़ोत्तरी हुई है । वर्त्तमान में संचालनालय द्वारा मैन्युअल रूप से अनुमति प्रदान की जाती है, आवेदन पहले स्थानीय ऑफिस और फिर भोपाल में अनुमति के लिए जाते हैं।

इसे देखते हुए संचालनालय पुरातत्व द्वारा अनुमतियों को मंजूरी देने की प्रक्रिया को सुव्यव्स्थिल करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया गया है। जिसके माध्यम से आम नागरिक घर बैठे अनुमति  प्राप्त कर सकते है, अब लोगों को कार्यालय के चक्कर नहीं लगाना होंगे। 
इसके के साथ ही संचालनालय पुरातत्व द्वारा ई-गवर्नेंस सेवाओ में व्हाट्सएप्प चैटबॉट जिसके माध्यम से आम नागरिक घर बैठे संग्रहालय और स्मारकों को भ्रमण करने के लिए टिकट बुक कर सकते है | ऑनलाइन अनुमति प्राप्त करने हेतु विभागीय वेबसाइट https://archaeology.mp.gov.in के माध्यम से आवेदन कर सकते है, इसके साथ ही ऑनलाइन टिकट बुक करने हेतु व्हाट्सएप्प चैटबॉट नंबर +91-9522840076 से कर सकते है |

मध्य प्रदेश में फिलहाल करीब 500 संरक्षित स्मारक, जिनमें छोटे-बड़े मंदिर, गुफाएं, किले, छत्रियां और महल आदि शामिल हैं, मौजूद हैं। वहीं राज्य, जिले और स्थानीय स्तर को मिलाकर करीब 45 संग्रहालय मौजूद  हैं, जहां इस तरह की मांग लगातार बनी रहती है।

स्ट्रॉबेरी की खेती से जनजातीय किसानों के जीवन में आई मिठास !

मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले में जब पारम्परिक खेती से आगे बढ़ने की बात आई, तो जनजातीय किसानों ने एक नई दिशा में कदम रखा। जिले के प्रगतिशील किसान श्री रमेश परमार और साथी अन्य किसानों ने अपनी हिम्मत, मेहनत और नवाचार से असंभव को संभव बना दिया है।

पारम्परिक खेती से उद्यानिकी की ओर

जिले के जनजातीय बहुल क्षेत्र में पहली बार स्ट्रॉबेरी की खेती का प्रयोग शुरू हुआ। परम्परागत रूप से ज्वार, मक्का और अन्य सामान्य फसलों के लिए जाने जाने वाले इस इलाके में अब किसानों ने उद्यानिकी फसलों की ओर रुख किया है। जिले के रामा ब्लॉक के तीन गांवों भुराडाबरा, पालेड़ी और भंवरपिपलिया में आठ किसानों के खेतों में स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए गए।
झाबुआ में स्ट्रॉबेरी सामान्यतः ठंडे इलाकों की फसल है, को यहां अनुकूलित परिस्थितियों में उगाने का प्रयोग किया गया। महाराष्ट्र के सतारा जिले से 5000 पौधे मंगवाकर हर किसान के खेत में 500 से 1000 पौधे लगाए गए। हर पौधे की कीमत मात्र 7 रुपये थी, लेकिन इसे उगाने की प्रक्रिया ने किसानों को बागवानी की उन्नत और आधुनिक तकनीकों से रूबरू कराया।
रोटला गांव के रमेश परमार ने अपने खेत में ड्रिप और मल्चिंग तकनीक का उपयोग कर 1000 स्ट्रॉबेरी पौधे लगाए। वे बताते हैं कि “पहले बाजार में इन फलों को देखा था, लेकिन खरीदने की हिम्मत कभी नहीं हुई। अब जब खुद के खेत में उगाए, तो इसका स्वाद भी चखा और इसकी उच्च कीमत का महत्व भी समझा।”
रमेश ने 8 अक्टूबर 24 को पौधों की बुवाई की थी और केवल तीन महीनों में फलों की पैदावार शुरू हो गई। वर्तमान में बाजार में स्ट्रॉबेरी की कीमत 300 रुपये प्रति किलो है। फिलहाल उन्होंने अपनी पहली फसल घर के सदस्यों और रिश्तेदारों के साथ बांटी है।

समूह की सफलता

रमेश अकेले नहीं हैं। उनके साथ अन्य किसान भंवरपिपलिया के लक्ष्मण, भुराडाबरा के दीवान, और पालेड़ी के हरिराम ने भी अपनी जमीन पर स्ट्रॉबेरी उगाई है। सभी किसानों के पौधों में फल लगने शुरू हो गए हैं। ये किसान अपनी उपज को लोकल हाट-बाजार और हाईवे के किनारे बेचने की योजना बना रहे हैं।

नवाचार और आत्मनिर्भरता का प्रतीक

झाबुआ जिले की यह पहल न केवल कृषि नवाचार का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत की ओर एक ठोस कदम भी है। यह झाबुआ जिले के जनजातीय किसानों ने साबित किया है कि सही मार्गदर्शन, तकनीक और मेहनत से किसी भी क्षेत्र में अपार संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं।

आर्थिक और सामाजिक बदलाव की ओर बढ़ रहे जनजातीय किसान

स्ट्रॉबेरी की खेती से न केवल इन किसानों की आमदनी बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि यह दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनेगी। यह पहल झाबुआ जिले के लिए उद्यानिकी खेती का एक नया अध्याय खोलेगी। झाबुआ के जनजातीय किसान सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े बदलाव की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री जन कल्याण अभियान   को साकार करने में जुटे एसडीएम, खंड स्तरीय अधिकारियों की बैठक एवं प्रशिक्षण संपन्न।

बैरसिया।। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बैरसिया में 11 दिसंबर 2024 से 26 जनवरी 2025 तक चलने वाले मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान को लेकर बैरसिया विकासखंड स्तरीय अधिकारियों की बैठक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया ! जिसमें विभिन्न विभागों के उपस्थित अधिकारीयों को अभियान के दौरान अभियान में शामिल होकर विभिन्न विभागों की हितग्राही मूलक योजनाओं को शत प्रतिशत पात्र हितग्राहियों को शासकीय योजनाओं का लाभ शासन की मंशानुसार पहुंचाने हेतु एसडीएम आशुतोष शर्मा द्वारा निर्देशित किया जिसमें नगरीय निकाय मुख्य कार्य पालन अधिकारी नगर पालिका परिषद बैरसिया को निर्देशित किया !
बैरसिया नगर में पृथक से कार्यक्रम की रूप रेखा बना कर मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान के कार्यों का शत प्रतिशत निराकरण सुनिश्चित करें एवं प्रगति पोर्टल पर भी दर्ज कराएं मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान में विभिन्न विभागों की हितग्राही मूलक 45 योजनाओं एवं विभिन्न विभागों की 63 सेवाओं को शामिल किया गया है जिसमें  संपर्क दलों का गठन कर एवं  शिविरों का आयोजन कर प्रत्येक ग्राम ओर शहरी क्षेत्र के वार्डों में हितग्राहियों का चिन्हांकन किया जायेगा एवं पात्र हितग्राहियों को योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ दिलाया जाएगा !

MP News : होना है राहत की 75वीं सालगिरह का जश्न, पखवाड़ा पहले दलजीत ने बना दिया माहौल, जानें क्या था आयोजन

खान आशु
भोपाल। दुनिया के महबूब शायर डॉ राहत इंदौरी की 75वीं सालगिरह का जश्न नए साल की पहली शाम को इंदौर में मनाया जाने वाला है। कार्यक्रम की तैयारियां चरम पर हैं। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम को लेकर देशभर से मुबारकबाद और शुभकामना संदेश का दौर जारी है। ऐसे में डॉ. राहत की धरती इंदौर में रविवार रात आयोजित एक कार्यक्रम में नए साल में होने वाले कार्यक्रम को लेकर माहौल बना दिया। मशहूर गायक दिलजीत दोसांज ने श्रोताओं से खचाखच भरे अपने  प्रोग्राम को राहत इंदौरी को समर्पित कर दिया। सिलसिला आगे बढ़ा तो दिलजीत ने राहत साहब के कई मशहूर शेर मंच से पढ़कर महफिल को उत्साह से भर दिया।
मशहूर गायक दिलजीत दोसांज रविवार रात को इंदौर में अपना लाइव कंसर्न देने के लिए मौजूद थे। उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत में उस बात का खंडन किया, जिसमें उनके कार्यक्रमों के टिकट की कालाबाजारी की बात कही जाती है। दलजीत ने अपनी बात को डॉ राहत इंदौरी के एक शेर के साथ पूरा किया। दिलजीत ने कहा :
मेरे हुजरे में नहीं और कहीं पर रख दो,
आसमाँ लाए हो ले आओ ज़मीं पर रख दो
अब कहाँ ढूँढने जाओगे हमारे क़ातिल
आप तो क़त्ल का इल्ज़ाम हमीं पर रख दो

दिलजीत ने इस शेर के साथ कार्यक्रम डॉ राहत इंदौरी को समर्पित किया तो पूरा समां तालियों की गड़गड़ाहट और सीटियों की पुकार से गुंजायमान हो गया। हर तरफ खलबली और दलजीत के लिए वाहवाही गूंज उठीं।

दिलजीत के लिए श्रोताओं की दीवानगी जब चरम पर पहुंची तो उन्होंने शहर भर में उनके कार्यक्रम को लेकर किए जा रहे प्रदर्शन और विरोध पर भी अपनी बात रखी। इसके लिए फिर दलजीत ने राहत इंदौरी के शेर का सहारा लेकर पूरी महफिल को अपने साथ जोड़ लिया। दलजीत ने राहत का मशहूर शेर पढ़ा और विरोध करने वालों को जवाब दिया।

उन्होंने पढ़ा :
गर ख़िलाफ़ हैं होने दो, जान थोड़ी है
ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है
सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है।

पहली जनवरी को होना है जश्न ए राहत
दिलजीत ने जिस दौर में अपने चाहने वालों के बीच इंदौर और इंदौरी की तारीफ के पुल बांधे हैं, उससे कुछ कदम की दूरी पर ही इंदौर में एक बड़ा आयोजन रखा हुआ है। नए साल की पहली शाम को यहां डॉ राहत इंदौरी की 75वीं सालगिरह का जश्न बड़े आयोजन के साथ मनाया जाएगा। दुनिया के बड़े शायरों की मौजूदगी, किताबों का विमोचन, सूफियाना महफिल के अलावा यहां राहत इंदौरी की शख्सियत पर बात होने वाली है। राहत इंदौरी फाउंडेशन के इस आयोजन को लेकर शहर ही नहीं पूरे प्रदेश में उत्साह का माहौल बना हुआ है। ऐसे में दलजीत ने इस जोश में और इजाफा कर दिया है।



सोशल मीडिया पर लहराए दलजीत और राहत
अपने शहर के लिए हमेशा जोश से भरे रहने वाले इंदौरियों ने दिलजीत के कार्यक्रम को सोशल मीडिया पर जमकर वायरल किया है। सोशल मीडिया के हर साइट पर दिलजीत का इंदौर के लिए समर्पण, यहां के शायर डॉ राहत इंदौरी के लिए अपनापन अब हर इंदौरी की वॉल पर दिखाई दे रहा है।

MP News : सिर पर टोपी, हाथ में बल्ला… मदरसा स्टूडेंट्स दिखाएंगे खेल मैदान में जौहर, जानिए क्या है प्रोग्राम

खान आशु
भोपाल। आमतौर पर मदरसा तालीम और मदरसा स्टूडेंट्स का दायरा एक अलग मर्यादा में बंधा दिखाई देता है। सामाजिक, शारीरिक और खेल गतिविधियों में इनकी सहभागिता शून्य जैसी नजर आती है। इसी धारणा को तोड़ने के लिए राजधानी भोपाल में एक अलग तरह के स्पोर्ट्स इवेंट की तैयारी की जा रही है। जिसमें मदरसा स्टूडेंट्स खेल गतिविधियों से जुड़े दिखाई देंगे। आयोजन में अलग अलग आयु वर्ग के स्टूडेंट्स के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
राजधानी भोपाल के टीटी नगर स्टेडियम में इस अनोखे टूर्नामेंट का आयोजन 29 और 30 दिसंबर को किया जाएगा। इस “मदरसा ओपन एथलेटिक मीट 2024-2025” का आयोजन इंसानी बिरदारी ऑर्गेनाइजेशन एवं अन्य सहयोगी संगठनों द्वारा किया जा रहा है । इस अनूठे आयोजन का उद्देश्य मदरसों के विद्यार्थियों को खेलों के प्रति जागरूक करना और उनके शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास को बढ़ावा देना है।

यह होगा आयोजन में खास
1. खेल प्रतियोगिताएँ:
100 मीटर, 200 मीटर और 400 मीटर, रिले दौड़, बाधा दौड़, लंबी कूद, गोला फेक, जैवलिन थ्रो ( भाला फेक )
2. आयु वर्ग:
4 से 8 वर्ष 9 से 13 वर्ष 14 से 17 वर्ष
3. प्रतिभागी:
प्रत्येक मदरसे से एक स्पर्धा में 4 प्रतिभागी हिस्सा ले सकते हैं।
4. स्थान और तिथि:
स्थान: टीटी नगर स्टेडियम, भोपाल
तिथि: 29 और 30 दिसंबर
समय: प्रातः 9:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक
5. पुरस्कार और सम्मान:
प्रत्येक स्पर्धा में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर आने वाले प्रतिभागियों को मेडल और प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले मदरसे को विशेष ट्रॉफी से सम्मानित किया जाएगा।

यह है आयोजन का मकसद
इस एथलेटिक मीट का मुख्य उद्देश्य मदरसे के बच्चों को खेल-कूद और शारीरिक फिटनेस के प्रति प्रेरित करना है। यह आयोजन बच्चों में अनुशासन, टीम भावना और प्रतिस्पर्धा के गुणों का विकास करेगा। साथ ही, यह उनके आत्मविश्वास और व्यक्तित्व निर्माण में भी सहायक होगा।
आयोजन समिति में इंसानी बिरादरी ऑर्गेनाइजेशन, इल्म, आधुनिक मदरसा कल्याण संघ, Ahtc समिति आदि शामिल हैं।
प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए इच्छुक मदरसे इन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं :
9039248563, 9893626617, 9827071826

MP News : अपनी धरोहर को देखना, जानना, समझना होगा आसान, सब कुछ मिलेगा सिंगल क्लिक पर, जानिए क्या है तैयारी

खान आशु
भोपाल। प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर के लिए अब किताबें या इंटरनेट खंगालने की मशक्कत से निजात मिलने वाली है। एक समग्र जानकारी वाली पोर्टल तैयार की गई है, जिसमें वांछित धरोहर की हर बात महज एक सिंगल क्लिक पर उपलब्ध होगी। किए गए इन प्रयासों से पुरातत्व प्रेमियों के लिए आसानी तो होगी ही, साथ ही इससे स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद भी की जा रही है।
संस्कृति विभाग के तहत कार्यरत पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय निदेशालय के प्रयासों से यह आसानियां हो पाई हैं। इन कोशिशों के बीच प्रदेश के 502 ऐतिहासिक स्मारकों और 46 संग्रहालयों का संपत्ति मानचित्रण पूरा कर लिया है। इस मानचित्रण को मध्यप्रदेश के भू-स्थानिक पोर्टल (Geo Portal) के साथ एकीकृत किया गया है, जो अब सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है।

ताकि आए पारदर्शिता
इस पहल का उद्देश्य राज्य के ऐतिहासिक धरोहरों को अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाना है। अब लोग इस पोर्टल के माध्यम से इन स्मारकों और संग्रहालयों का स्थान, उनकी स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह प्रयास राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने और इन स्थलों पर आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि करने के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

जानकारी होगी सुलभ
निदेशालय के अधिकारियों ने बताया कि इस कदम से राज्य के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों की महत्ता को जागरूक करना और उन्हें विश्वस्तरीय मानक पर पेश करना संभव हो पाएगा। इस एकीकृत पोर्टल की मदद से लोग अब सरलता से इन स्मारकों और संग्रहालयों का दौरा कर सकेंगे, जिससे प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जानने का अवसर मिलेगा।
साथ ही इस पहल से न केवल ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण सुनिश्चित होगा, बल्कि इससे स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था में भी सुधार होगा।

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