भिंड की घटना से हुआ पूरी व्यवस्था का अनादर, आईएएस एसोसिएशन

जीतेन्द्र सेन
भोपाल।। भिंड के भाजपा विधायक नरेन्द्र सिंह कुशवाह और भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव के बीच विगत दिवस हुई तीखी बहस का मामला अब सीएम डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। इस घटना की आईएएस एसोसिएशन ने कड़ी निंदा की और सीएम से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई।
एसोसिएशन का कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों का सार्वजनिक रूप से अपमान करना केवल व्यक्ति नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था का अनादर है। उन्होंने सीएम को ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट कहा कि इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों और सुशासन की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं।

आईएएस एसोसिएशन ने मांग की कि ऐसी घटनाओं पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में पुनरावृत्ति न हो। साथ ही, अधिकारियों की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु ठोस कदम उठाए जाएं। एसोसिएशन ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच संवाद और सम्मान का माहौल बनाए रखना ही सुशासन की पहली शर्त है।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों से प्राप्त शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि सरकार निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
यह घटना केवल भिंड तक सीमित नहीं, बल्कि यह सवाल पूरे प्रशासनिक तंत्र और जनप्रतिनिधियों के बीच आपसी सम्मान पर उठता है। यदि अधिकारी सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में काम करेंगे तभी जनता तक बेहतर सेवाएं पहुंच पहुंचेगी।

अदालत में चल रहा था केस, भ्रष्टाचार से हो गई बिक्री, नामांतरण भी…

विवादित भूमि पर धड़ल्ले से चल रहा खरीद बिक्री का खेल

भोपाल। कई विवादों में उलझी हुई एक शत्रु संपत्ति का आसानी से सौदा भी हो गया और इसी रफ्तार से इसका नामांतरण भी कर दिया गया। विवादों के बीच चल रहे अदालती मामलों को इस दौरान भ्रष्टाचार से दबा दिया गया है।
मामला राजधानी भोपाल के वीआईपी रोड पर स्थित खसरा नंबर 78 का है। शत्रु संपत्ति में शामिल इस जमीन पर बसा हुआ है नशेमन नामक आलीशान भवन। सूत्रों का कहना है कि सन 1974 में इस भूमि को लेकर अदालत में केस दर्ज किया गया था।
इस दौरान प्रकरण क्रमांक 53A/74 बेगम सुरैया रशीद w/o रशीद उज्जफर विरुद्ध बेगम साजिदा सुल्तान प्रचलन में था। हाइकोर्ट में प्रचलित यह प्रकरण आज भी चलन में है और इस पर किसी तरह का फैसला नहीं लिया गया है।

कैसे हुआ नामांतरण
सूत्रों का कहना है कि अदालत में केस के प्रचलित होने के बावजूद इस जमीन पर स्थित मकान नशेमन का सौदा दर्शाया गया है। साथ ही इसका नामांतरण सौलत बसीर के नाम पर कर दिया गया है। नामांतरण की इस कार्यवाही में तहसीलदार द्वारा आर्थिक भ्रष्टाचार करने की बात कही जा रही है। साथ ही इसे न्यायालय की अवमानना मानते हुए सभी पक्षों के खिलाफ कार्यवाही की मांग उठाई जा रही है। इस मामले से जुड़े सभी अधिकारी भी बराबर के दोषी माने जा रहे हैं। इनके लिए अधिक सजा मुकर्रर की जाना चाहिए, क्योंकि अदालती मामले को जानते हुए जानबूझकर नामांतरण की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया है।

अभी तय नहीं जगह किसकी
सूत्रों का कहना है वर्ष 1974 से अदालती मामलों में उलझे खसरा नंबर 78 के वास्तविक मालिक अब तक तय नहीं हुआ है। खसरों के मुताबिक वर्ष 2024 तक बेगम साजिदा सुल्तान इस संपत्ति की मालिक हैं। अब 2025 में इसके लिए हिबानामा या इनायतनामा किस तरह तैयार हो सकता है, इस बात के सवाल बाजार में लहरा रहे हैं।

छूटी अंतिम तारीख की आस, नहीं बढ़ी किस्त की मोहलत

बाकी रह गए बड़ी संख्या में हज चाहतमंद

भोपाल। हज 2026 के लिए आठ महीने पहले मांगी गई पहली किस्त हज आवेदकों की मुश्किल बनी हुई है। छुट्टी भरे शेड्यूल में तय की गई आखिरी तारीख बिना इजाफे के सोमवार शाम को खत्म हो गई है।
ऐसे में विभिन्न वजह से बड़ी संख्या में हज चाहतमंद अपनी किस्त की राशि जमा करने से चूक गए हैं। इस स्थिति के चलते इनका चयनित हज फॉर्म कैंसिल भी हो सकता है।
सेंट्रल हज कमेटी ने हज आवेदकों से 25 अगस्त तक पहली किस्त की राशि जमा करने के लिए कहा था।  एक लाख, 52 हजार, 300 रुपए की राशि जमा करने के लिए पहले 20 अगस्त तय की गई थी। बाद में इस तारीख में इजाफा कर 25 अगस्त कर दिया गया था। इसके साथ जरूरी दस्तावेज जमा करने के लिए 30 अगस्त तय की गई थी।

बाकी रह गए कई आवेदक
सूत्रों का कहना है कि आखिरी तारीख तक बड़ी संख्या में हज चाहतमंद अपनी किस्त जमा नहीं कर पाए हैं। समय पूर्व मांगी गई राशि के अलावा कई कारण हैं, जिनके चलते हजयात्री अपनी पहली किस्त जमा नहीं कर पाए हैं।

जमा हुए अरबों रुपए
जानकारी के मुताबिक हज कमेटी ऑफ इंडिया ने फिलहाल एक लाख हाजियों का सिलेक्शन किया है। सऊदी अरब सरकार से कोटा जारी न होने के चलते यह स्थिति बनी है। हाजियों के कोटे की एक और सूची सऊदी अरब सरकार से कोटा जारी होने के बाद होगी। फिलहाल हाजियों से पहली किस्त के रूप में प्रति हाजी एक लाख, 52 हजार रुपए जमा कराए गए हैं। इस लिहाज से हज कमेटी को करीब 15 अरब रुपए की आमद हुई है। यह रकम करीब आठ महीने बाद होने वाले हज सफर पर खर्च की जाएगी। तब तक बैंक से मिलने वाले ब्याज पर हज कमेटी का अधिकार रहेगा। कारण यह है कि कोई भी हाजी अपनी रकम के बदले ब्याज की रकम नहीं लेता है।

फर्जी हिबानामा कर दिया शत्रु संपत्ति का सौदा, तोड़ने के हो चुके हैं आदेश

खान आशु

भोपाल। राजधानी भोपाल की जिस शत्रु संपत्ति का बरसों से अदालती विवाद चल रहा है, उस पर मकान भी बन गया और इस निर्माण के साथ कई फर्जीवाड़े भी जुड़ गए हैं। जिस संपत्ति से इसके फर्जी हिबानामा के हालात जुड़े हुए हैं,  इसके नक्शे के नकलीपन और नियमविरुद्ध हस्तांतरण के मामले भी जुड़ गए हैं। सरकारी विभागों की साठगांठ और भ्रष्टाचार ने इस फर्जीवाड़े पर पर्दे डाल दिए हैं।
मामला राजधानी के वीआईपी स्थित खसरा नंबर 78 का है। शत्रु संपत्ति का हिस्सा इस जमीन को लेकर कई अदालती मामले प्रचलित हैं। बावजूद तहसीलदार ने यहां के एक ऐसे मकान का हस्तांतरण कर दिया है, जो पहले ही कई विवादों में था। इस नियम विरुद्ध हस्तांतरण में बड़े भ्रष्टाचार की बात कही जाती है।

नक्शा बना हवा हवाई
वर्ष 1984 में निर्मित इस भवन के लिए भवन अनुज्ञा के लिए जो नक्शा लगाया गया है, वह कागजी है। खानापूर्ति के नाम पर नक्शा प्रदर्शित किया जरूर गया था, लेकिन बाद में नगर निगम के रिकॉर्ड से इसे गायब कर दिया गया है। नगर निगम के रिकॉर्ड में भवन अनुज्ञा शाखा में अब कोई नक्शा मौजूद नहीं है।

जिसके नाम नहीं, उसने कर दी हिबा
खसरा नंबर 78 की यह भूमि इनाम उल्लाह खान ने हिबा की है, जबकि यह जमीन इनाम के नाम पर है ही नहीं। जब जमीन किसी के नाम पर अंकित ही नहीं है तो वह व्यक्ति किसी को तोहफे में वह जमीन कैसे दे सकता है। एसडीएम कोर्ट में चल रहे विवाद में इस बात पर आपत्ति भी दर्ज की गई है।

जितने केस, उतनी तरह के डॉक्यूमेंट
सूत्रों का कहना है कि अलग अलग अदालतों में इस जमीन के विवाद को लेकर कई मामले प्रचलन में हैं। बताया जाता है कि अलग अलग अदालत में एक ही संपत्ति से संबंधित अलग अलग दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं। जो इस मकान के  फर्जीवाड़े की दास्तां बयान करते हैं।

और कर दिया किसी और ने ही सौदा
शत्रु संपत्ति में शामिल खसरा नंबर 78 की इस जमीन पर बनाया गया है नजारा विला नामक आलीशान भवन। कागजों पर इसका मालिकी हक फराज आजम के नाम पर दर्शाया गया है। इस नाते वे जमीन या इस घर के बेचने या इस्तेमाल के अधिकारी हैं। लेकिन बदनीयती के एक सौदे में इस भवन का विक्रेता जरीना बसीर को बताया गया है। जबकि क्रेता उनके ही बेटे सौलत बसीर को दर्शाया गया है।

हो चुके टूटने के आदेश
वर्ष 2011 और 2013 में इस भवन के फर्जीवाड़े को लेकर अदालती मामले चले हैं। इस दौरान अदालत ने खसरा नंबर 78 की जमीन के इस निर्माण को अवैध माना था। अदालत ने इसे तोड़ने के आदेश भी पारित किए हैं। लेकिन अवैध निर्माण अब भी बरकरार है और अपने फर्जीवाड़े और सरकारी सिस्टम में घुले भ्रष्टाचार की कहानी कह रहा है।

सीखे, बनाए, साथ ले गए मिट्टी के गणेश…

भोपाल। मध्यप्रदेश की विपुल पुरासम्पदा की सुरक्षा रख-रखाव एवं इसके प्रचार प्रसार के उद्देश्य से संचालनालय पुरातत्व द्वारा प्रदेश में बिखरी उत्कृष्ट एवं पुरातत्वीय दृष्टि से महत्वपूर्ण कलाकृतियों को संग्रहालयों में संरक्षित किया गया है। इन्हीं कलाकृतियों में से उत्कृष्ट कोटि की विलक्षण एवं अ‌द्भुत पुरातत्वीय प्रतिमाओं की प्रतिकृतियों का निर्माण प्रतिकृति शाखा द्वारा किया जाता है। इसके प्रचार-प्रसार एवं जनसामान्य में पुरातत्वीय प्रतिमाओं के प्रति जगरूकता के लिए यह आयोजन प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है।

“मेरे माटी के गणेश” के निर्माण की प्रसांगिकता हमारे आदिकाल प्रकृति जिस तरह पृथ्वी पर 71 प्रतिशत पानी और 29 प्रतिशत मिट्टी की अवधारण को अंगीकृत करते हुये मिट्टी के गणेश निर्माण की यह कार्यशाला सोमवार को प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं जनसामान्य उपस्थित हुये उनके द्वारा स्वयं मिट्टी के गणेश तैयार किये गये यह ईको फ्रेंडली गणेश वे अपने साथ ले गये, साथ ही विभागीय प्रतिकृतियों को तैयार करने के शैली से भी सभी को परिचित कराया गया। उक्त सम्पूर्ण आयोजन आयुक्त, पुरातत्व उर्मिला शुक्ला के मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर ज्योति सुन्हरे, मुख्य नगरपालिका अधिकारी, सारंगपुर जिला-राजगढ़ ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया एवं स्वयं ने गणेश प्रतिमा निर्मित की एवं विभागीय गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की।

गुनाह उनका भी कम नहीं, सज़ा उनके लिए तय क्यों नहीं…?

चकरघिन्नी.कॉम
खान आशु

नेता जी बड़े ताव में हैं.. इनके गुनाह गिनाते नहीं थक रहे… मौका मिला तो पिछले एक शख़्स को भी घसीट रहे हैं… पावन मौकों पर भी पतित कामों को गिनाने से नहीं चूक रहे…! भाववेश में यह भूल जाते हैं कि जिस मगरमच्छ ने मछलियों को पोषित होने में सहयोग किया, वह भी उनके साथ का ही है…! कर्म से भी, और धर्म से भी…! जब नेस्तनाबूद करने का हलक उठाते हैं, तो इस गुनहगार को क्यों भुला दिया जाता है…!
याद यह यह भी रखा जाना चाहिए कि मछली की गिरफ्त से न कौम गमजदा है न अफसोस में… क्योंकि ब्लैक मेलिंग से नशे तक, क्लब से लेकर मछली के ठेके तक में इनकी कोई भागीदारी नहीं थी..! किसी को क़ौम की तरफ ले जाने की बात इसलिए गले नहीं उतारी जा सकती है कि गुनाहगारों के खुद कौम के होने में संशय बना हुआ है…! वे अगर क़ौम की बताई राह पर होते तो यहां तक कतई नहीं पहुंचते, जहां पहुंच गए हैं…!
बात सज़ा की है, तो गुनाह- गुनाह बराबर तोले जाना चाहिए..! मेरा-पराया मानकर किसी को छोड़ा जाना भी गुनाह- ए-अज़ीम माना जाना चाहिए…!
सिर्फ बोलने के लिए बोलना आसान है…! तराज़ू के पलड़े पर अपने मेंढक तोलना मुश्किल…! बकौल फिल्म दीवार, श्री अमिताभ बच्चन का एक डायलॉग… जाओ पहले उस आदमी का साइन लाओ, जिसने मुझे इस बुराई के दलदल में धकेल दिया था… जाओ पहले उस आदमी का साइन लाओ, जिसने मेरे हाथ पर लिख चोर दिया था…!
बात फैसले की ही आ गई है तो चोरी करने वाला भी चोरी… चोरी के लिए उकसाने वाला भी चोर…! तो फिर किसी सज़ा में भेदभाव क्यों…?

पुछल्ला
दो हंसों का जोड़ा बिछड़ गया
कभी साथ था। कारोबार की बात थी। यहां से वहां तक हमकदम थे। दो हंसों के जोड़े की तरह साथ ही दाना चुगते थे। अब हालात बदल गए हैं। साथी बिछड़ गए हैं। एक पद पर पग जमवाने के इरादे भी छिटक गए हैं। साहब ने दूसरे साहब से नाता यहां तक तोड़ लिया है कि साथ दिखने में भी किसी आफत का खौफ है। लेकिन पिछले साल को कैसे झुठलाएं, यह समझ नहीं आ रहा।
25/अगस्त/2025

गणेश उत्सव एवं डोल ग्यारस समेत त्योहारों को लेकर शांति समिति की बैठक संपन्न

जीतेन्द्र सेन
बैरसिया।। आगामी त्योहारों को लेकर तहसील कार्यालय बैरसिया में शाति समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता एसडीएम आशुतोष शर्मा ने की। इस दौरान नगर की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। नगर में लगने वाला सब्जी बाजार व्यवस्थित रूप से शिफ्ट किया जाएगा ताकि यातायात और भीड़ प्रबंधन में आसानी रहे। आगामी 27 अगस्त को गणेश स्थापना, अनंत चौदस के अवसर पर होने वाले गणेश चल समारोह तथा अन्य धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में एसडीएम आशुतोष शर्मा तहसीलदार दिलीप चौरसिया थाना प्रभारी वीरेन्द्र सेन नपा सीएमओ राजेन्द्र सक्सेना,  हिन्दू उत्सव समिति अध्यक्ष श्याम साहू पूर्व अध्यक्ष शुभम रत्नाकर समेत कई गणमान्य नागरिक ओर पत्रकार गण उपस्थित रहे।

म.प्र.में स्कूल शिक्षा विभाग ने दिखाई सख्ती आदेश हुआ जारी

लापरवाह व गैर जिम्मेदार शिक्षकों में आदेश से मचा हड़कंप

जीतेन्द्र सेन
भोपाल।। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षिकों की उपस्थिति के लिए ई-अटेंडेंस सुविधा पर सख्ती कर दी है स्कूल शिक्षा विभाग की तरफ से जारी आदेश में बताया गया है कि अगर कोई शिक्षक ई-अटेंडेंस पर उपस्थिति दर्ज नहीं करता  है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। जानकारी अनुसार आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर अब सख्त रुख अपनाया है

भोपाल स्थित लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर दिया है कि वे अपने-अपने जिले में कार्यरत प्राचार्यों और शिक्षकों की ई-अटेंडेंस हर हाल में सुनिश्चित करें. 22 अगस्त को जारी आदेश के बाद अब सभी सरकारी स्कूलों के शिक्षक और प्राचार्य को अपनी उपस्थिति मोबाइल एप पर दर्ज करनी पड़ेगी. इससे लापरवाह और गैर जिम्मेदार शिक्षकों में हड़कंप मच गया है तो वहीं दूसरी तरफ इस तरह के आदेश की प्रशंसा भी खूब हो रही है।

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर राजधानी में दिखीं विज्ञान की झलकियां

भोपाल। मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (एमपीसीएसटी) के सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग (सीसीएल), भोपाल ने द्वितीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया। इस अवसर पर 105 छात्रों ने प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में भाग लिया, जहाँ उन्होंने आर्यभट्ट से गगगनयान तक भारत के अंतरिक्ष मिशनों की रोचक जानकारी प्राप्त की।

शैक्षिक गतिविधियों का व्यापक आयोजन
कार्यक्रम के दौरान सीसीएल भोपाल के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर पंकज गोदारा ने STEM शो का संचालन किया, जबकि टीम सदस्य अंजलि पांडेय और नीलू काची ने इसरो द्वारा संचालित अंतरिक्ष गतिविधियों पर सत्र लिया। टीम सदस्य करण सिंह भिंडे ने छात्रों के बीच वाटर रॉकेट लॉन्च शो का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में साइंस शो और लिक्विड नाइट्रोजन प्रदर्शन भी आयोजित किया गया, जिसने छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान की जटिल अवधारणाओं को समझने में मदद की।

पुरस्कार वितरण
समापन समारोह में डॉ. विवेक कटारे (कार्यकारी निदेशक एवं वरिष्ठ मुख्य वैज्ञानिक, एमपीसीएसटी) ने छात्रों को पुरस्कार वितरित किए। डॉ. कटारे ने अंतरिक्ष विज्ञान में युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के महत्व पर जोर दिया कार्यक्रम का समापन वाटर एवं नाइट्रोजन रॉकेट के शानदार प्रक्षेपण के साथ हुआ, जो भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों का प्रतीक था।

पार्षद ने दिखाई सरकारी स्कूल की हकीकत, कलेक्टर बोले कार्यवाही होगी

स्कूल से नदारद थे शिक्षक, डीईओ ने दिए जांच के निर्देश

भारत भूषण विश्वकर्मा
भोपाल। राजधानी के वार्ड 48 के शाहपुरा क्षेत्र स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों के शाला से नदारद रहने का मामला सामने आया है। क्षेत्रीय पार्षद अरविंद वर्मा ने बताया कि उन्हें लंबे समय से शिक्षकों की मनमानी की शिकायतें मिल रही थीं जिस पर उन्होंने शुक्रवार को शाला जाकर निरीक्षण किया। इस दौरान पार्षद ने पाया कि कक्षाओं से शिक्षक गायब हैं और विद्यार्थी कक्षा में बैठे हैं, और आश्चर्यजनक बात यह है कि गायब शिक्षकों की हाजिरी रजिस्टर में मिली है।

पार्षद अरविन्द वर्मा


इस पूरे मामले का वीडियो बनाकर पार्षद द्वारा सोशल मीडिया पर वायरल किया गया है। पार्षद अरविंद वर्मा के अनुसार शिक्षकों का रवैया न सिर्फ लापरवाही पूर्ण है बल्कि अपने दायित्व के विरुद्ध भी है, पार्षद का कहना है कि शिक्षकों का ऐसा करना न सिर्फ शासकीय धन की बर्बादी है बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है।

डीईओ बोले हर बिंदु पर होगी जांच, दोषी पाए जाने पर गिरेगी गाज
भोपाल के शहरी क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय का वीडियो वायरल होने से कई सवाल उठ रहे हैं। वहीं लोगों का कहना है कि जब राजधानी के स्कूल के हालात ऐसे हैं तो दूर दराज के स्कूलों में लापरवाही होना स्वाभाविक है। भोपाल के जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र अहिरवार का कहना है कि इस संबंध में जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि लापरवाही पाए जाने पर कार्यवाही की जाएगी।

जो उपस्थित ही नहीं उनकी हाजिरी कैसे लगी
शाहपुरा छावनी के प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों की मनमानी का वीडियो वायरल होते ही राजधानी में चर्चा का विषय बन गया है। लोगों के बीच चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि जो शिक्षक शाला में अनुपस्थित पाए गए हैं उनकी हाजिरी शाला के उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज कैसे हुई। अनुपस्थित स्टाफ की हाजिरी रजिस्टर में मिलने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं जिनके जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।

इनका कहना है –

मामला संज्ञान में है, जांच के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही पाए जाने पर कार्यवाही की जाएगी।

कौशलेंद्र विक्रम सिंह
भोपाल कलेक्टर

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