युवाओं को मिला नेतृत्व, संपादक आचार्य ने संभाली युवा प्रदेश अध्यक्ष की कमान |

राजधानी भोपाल में संपन्न हुआ सेन समाज विकास संगठन का प्रांतीय महाधिवेशन

भोपाल| मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सेन समाज विकास संगठन का भव्य प्रांतीय महाधिवेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर खुलासा न्यूज़ के संपादक सुरेश आचार्य को संगठन का युवा प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया। जैसे ही आचार्य को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई, पूरे प्रदेश के युवाओं और नारी शक्ति में नया जोश और ऊर्जा देखने को मिली।
कार्यक्रम स्थल पर “आचार्य जी संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं” के गगनभेदी नारों से वातावरण उत्साह और आत्मविश्वास से भर गया। आचार्य के पदभार ग्रहण करते ही प्रदेशभर से उनके शुभचिंतकों, समाजजनों और युवाओं की बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व ने उन्हें युवा प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपते हुए समाज और संगठन में सकारात्मक परिवर्तन की उम्मीद जताई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रेलवे भोपाल मंडल के सदस्य कमलेश सेन रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता डी.एस. राजौरिया ने की। मंच का सफल संचालन नव नियुक्त युवा प्रदेश अध्यक्ष सुरेश आचार्य ने किया तथा आभार प्रदर्शन प्रदेश अध्यक्ष रामरतन सेन ने किया।

इस अवसर पर प्रदेश संरक्षक रमेश सेन (सतना) ने संगठन के विकास और भविष्य की दिशा पर प्रकाश डाला। वहीं युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक बंदेवार ने संगठन में एक सशक्त राजनीतिक प्रकोष्ठ के गठन पर जोर देते हुए कहा कि समाज के योग्य और सक्षम लोगों को राजनीतिक क्षेत्र में भी आगे आना चाहिए।

राष्ट्रीय अध्यक्ष डी.एस. राजौरिया ने अपने संबोधन में संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने और समाज की अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति तक सहयोग पहुँचाने का आह्वान किया।

नव नियुक्त युवा प्रदेश अध्यक्ष सुरेश आचार्य ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा,
“मैं यहाँ केवल भाषण देने नहीं, बल्कि एक संदेश, एक आह्वान और एक ललकार लेकर आया हूँ। हमारा समाज मेहनती, ईमानदार और योग्य है, लेकिन हमें और अधिक संगठित होने की आवश्यकता है। हमारे बच्चे प्रतिभावान हैं, पर उन्हें अवसर नहीं मिल पाते, हमारी बेटियाँ सक्षम हैं, लेकिन उनके सपनों को पूरा करने के लिए मजबूत सिस्टम का अभाव है। अब समय आ गया है बदलाव का, और यह बदलाव आप और हम मिलकर लाएँगे।”



इस प्रांतीय महाधिवेशन में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में युवाओं और नारी शक्ति की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिसने कार्यक्रम को ऐतिहासिक और प्रेरणादायक बना दिया।

ली सुशासन की शपथ, अटल जी के आदर्शो पर चलने का संकल्प

भोपाल। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा स्थापित सुशासन के उच्चतम मापदण्डों के महत्व को प्रतिपादित करते हुए उनके जन्म दिवस 25 दिसम्बर 2025 के एक दिन पूर्व 24 दिसम्बर 2025 को संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय भोपाल के पुरालेख अधिकारी पदम सिंह मीणा द्वारा समस्त अधिकारी एवं कर्मचारियों को सुशासन की शपथ दिलाई गई।

GI टैग उल्लंघन का मामला: धार सभा में नकली मशीन से बने बाग प्रिंट स्टॉल जेपी नड्डा-सीएम को भेंट, शिल्पियों में रोष

भोपाल। मध्य प्रदेश के धार जिले में आयोजित भव्य सभा में GI टैग प्राप्त बाग प्रिंट हस्तशिल्प कला का गंभीर उल्लंघन हुआ। बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उप मुख्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल, कैलाश विजयवर्गीय, सावित्री ठाकुर सहित अन्य गणमान्य अतिथियों को मंच पर मशीन से बने नकली बाग प्रिंट स्टॉल भेंट किए गए। इस घटना से पारंपरिक शिल्पियों में भारी रोष व्याप्त है।
सभा के दौरान मुख्य मंत्री डॉ. मोहन यादव ने जे.पी. नड्डा को और अन्य अतिथियों को भी ये स्टॉल भेंट किए गए, जो हाथ की ठप्पा छपाई की बजाय मशीन/स्क्रीन प्रिंटिंग से तैयार किए गए थे। बाग प्रिंट कला GI टैग प्राप्त होने के बावजूद इस तरह के नकली उत्पादों का प्रचार सरकारी मंच पर होना एक गंभीर अपराध है, जो शिल्पियों की आजीविका पर सीधा प्रहार है।

शिल्पियों की चिंता: कला लुप्त होने का खतरा
राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बाग प्रिंट शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री ने बताया, “यदि नकली मशीन से बने बाग प्रिंट उत्पादों का यह चलन बढ़ता रहा, तो असली हाथ की ठप्पा छपाई कला और इससे जुड़े हजारों शिल्पी लुप्त हो जाएंगे। बाग प्रिंट शिल्पियों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी। सरकार एक तरफ GI टैग का गुणगान कर रही है, वहीं नकली उत्पादों को बढ़ावा देकर शिल्पियों का अपमान कर रही है।”
बिलाल खत्री ने मांग की है कि नकली स्टॉल सप्लाई करने वाले अपराधियों पर GI टैग उल्लंघन के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई हो, जिसमें जुर्माना और जेल की सजा शामिल हो। उन्होंने कहा, “मशीन एवं स्क्रीन प्रिंट बाग प्रिंट नहीं हो सकता। प्राकृतिक रंगों, हाथ के ठप्पों और महीनों की मेहनत से बनने वाली यह कला ग्राम बाग की पहचान है।”

GI टैग का महत्व और उल्लंघन के परिणाम
बाग प्रिंट GI टैग प्राप्त होने से केवल धार जिले के विशिष्ट शिल्पियों द्वारा ही इसका उत्पादन और बिक्री वैध है। मशीन से बने नकली उत्पाद बाजार में सस्ते दामों पर बिकते हैं, जिससे असली कारीगरों को आर्थिक नुकसान होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी आयोजनों में नकली उत्पादों का सम्मान मिलना इस कला के लिए घातक साबित होगा।
शिल्पी समुदाय ने सरकार से तत्काल जांच, नकली उत्पाद सप्लायरों पर FIR और असली बाग प्रिंट को संरक्षण देने की मांग की है। इस घटना ने ODOP (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) योजना और हस्तशिल्प संरक्षण प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिल्पी समुदाय आशावान है कि सरकार इस मामले में त्वरित कार्रवाई करेगी, ताकि बाग प्रिंट की सांस्कृतिक धरोहर बची रहे।

‘राहत की बात’ ; एक नाम नहीं, एक दौर, आयोजन नए साल की पहली शाम

भोपाल। कुछ लोग दुनिया से चले जाते हैं तो उनके साथ उनकी आवाज़, उनके क़दमों की आहट और उनके लफ़्ज़ भी ख़ामोश हो जाते हैं लेकिन कुछ लोग दुनिया से जाते नहीं, वो दुनिया के अंदर उतर जाते हैं। लोगों की सोच में, उनके सवालों में, उनके हौसलों में और उनके इंकार में। डॉ. राहत इंदौरी उसी दूसरी क़िस्म के इंसान थे। वो मिट्टी में नहीं उतरे बल्कि ज़हनों में बस गए।
उनकी आवाज़ आज भी कानों में गूंजती है, उनका लहजा आज भी सवाल करता है और उनकी शायरी आज भी डरती नहीं है। राहत साहब ने कभी महफ़िल के हिसाब से शेर नहीं पढ़े, उन्होंने वक़्त के हिसाब से बात की।
इंदौर की गलियों, चौराहों और दिलों में ही नहीं बल्कि दुनिया में जहाँ भी उर्दू बोली और सुनी जाती है, वहाँ आज भी राहत साहब ज़िंदा हैं। कभी किसी शेर की शक्ल में, कभी किसी नारे की तरह और कभी किसी नौजवान की बेबाक ज़ुबान पर।
‘राहत की बात’ असल में किसी एक शाम या किसी एक मंच का नाम नहीं है। यह उस जुर्रत का नाम है जो राहत साहब की पहचान थी। यह उस बेबाकी का नाम है जो उन्होंने शायरी को दी और यह उस एहसास का नाम है जिसे उन्होंने अपने बाद भी मरने नहीं दिया।
आज के दौर में जहाँ शायरी भी एक महफ़ूज़ खेल बनती जा रही है, जहाँ लफ़्ज़ बोलने से पहले तराज़ू पर तौले जाते हैं और सच को मुलायम काग़ज़ में लपेटकर पेश किया जाता है, वहाँ राहत साहब की याद एक चेतावनी नहीं बल्कि एक ज़रूरी दख़ल की तरह सामने आती है।
वो याद दिलाते हैं कि शेर महज़ ताली बजवाने का हथकंडा नहीं होता, वो सजावट की भी कोई चीज़ नहीं होता बल्कि शेर आईना होता है और वक़्त से किया गया बेबाक सवाल भी।
राहत साहब ने शायरी को किताबों से निकालकर आम आदमी की सांसों में रख दिया। उन्होंने सिखाया कि लफ़्ज़ अगर सच्चे हों तो माइक की ऊँचाई मायने नहीं रखती और अगर बात दिल से निकली हो तो वो दिल तक पहुँच ही जाती है।
‘राहत की बात’ दरअसल उस रूह को ज़िंदा रखने की एक कोशिश है जिसने शायरी को सिर्फ़ लफ़्ज़ नहीं दिए बल्कि जसारत दी। यह एक याद है जो बताती है कि राहत साहब को महज़ किताबों में बंद नहीं किया जा सकता क्यूंकि वो सिर्फ़ पढ़े नहीं जाते बल्कि हर उस जगह महसूस किए जाते हैं जहाँ सच बोलने की ज़रूरत पड़ती है।
आज जब हम उन्हें याद करते हैं तो सिर्फ़ उनका माज़ी नहीं दोहराते। हम अपने आज को कसौटी पर रखते हैं, उसे थोड़ा और मज़बूत बनाते हैं। हम अपने लफ़्ज़ों को आईना दिखाते हैं और ख़ुद से सवाल करते हैं कि क्या हम भी सच बोलने का वही हौसला रखते हैं जो राहत साहब ने हमें सिखाया था क्योंकि राहत साहब का जाना, किसी एक शायर का जाना नहीं था बल्कि वो एक पूरे दौर का जाना था और ‘राहत की बात’ दरअसल उसी दौर को फिर से ज़िंदा करने की एक संजीदा कोशिश है।
राहत सिर्फ़ एक नाम नहीं थे। राहत एक आवाज़ थे और आवाज़ें अगर बेबाक हों, ज़मीर से निकली हों और सच का बोझ उठाने का हौसला रखती हों तो वो कभी ख़ामोश नहीं होतीं। वो वक़्त से टकराती हैं, हर दौर को अपना पता देती हैं और ज़हनों में गूंजती रहती हैं।
‘राहत की बात’ दरअसल उसी गूंज की एक कड़ी है जो बताती है कि राहत साहब आज भी हमारे बीच हैं, अपने लफ़्ज़ों में, अपने असर में और हमारी ज़ुबान पर।

पहली जनवरी की शाम, राहत के नाम
डॉ. राहत इंदौरी की विरासत को संजोने के लिए ‘राहत इंदौरी फाउंडेशन’ नए साल की पहली किरण के साथ एक बार फिर अदबी रवायतों का परचम लहराने जा रहा है। डॉ. राहत इंदौरी की 76 वीं जयंती के उपलक्ष्य में फाउंडेशन द्वारा लगातार छठे वर्ष भव्य अखिल भारतीय मुशायरा एवं कवि सम्मेलन ‘राहत की बात’ का आयोजन किया जा रहा है। 1 जनवरी की शाम, आनंद मोहन माथुर ऑडिटोरियम देश के नामचीन रचनाकारों की आवाज से गुंजायमान होगा। इस महफ़िल में सम्पत सरल (जयपुर), व्यंग्य की धार से व्यवस्था पर प्रहार करेंगे। शकील आज़मी (मुंबई), सलीम सिद्दीकी (बाराबंकी) व खुर्शीद हैदर (मुजफ्फरनगर), आदिल राशिद (नई दिल्ली), डॉ. संदीप शर्मा (धार) शब्दों के शिल्पी, पूर्व पुलिस अधिकारी महेंद्र सिंह सिकरवार (इंदौर), तबरेज़ मुनव्वर राना (लखनऊ), अनवर कमाल (मधुबनी) व रिजवान मलिक (नई दिल्ली) की शायरी पेश करेंगे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध कव्वाल रईस अनीस साबरी अपनी टीम के साथ डॉ. राहत इंदौरी की कालजयी शायरी को सूफियाना रंग में रंगकर एक रूहानी समां बांधेगे।

अटल स्मृति वर्ष : विचार जो अटल थे, संकल्प जो मोदी जी ने साकार किए
-हेमन्त खण्‍डेलवाल

25 दिसंबर केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की वैचारिक यात्रा का स्मरण दिवस है। यह वह दिन है, जब राष्ट्र अटल बिहारी वाजपेयी जी जैसे युगद्रष्टा नेता की जन्मजयंती मनाता है। उनका जन्मशताब्दी वर्ष हमें उनके विचारों, संकल्पों और सपनों को और गहराई से आत्मसात करने का अवसर देता है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा अटल स्मृति वर्ष के रूप में इस कालखंड को मनाना, अतीत के गौरव को वर्तमान की जिम्मेदारी और भविष्य के संकल्प से जोड़ने का सशक्त प्रयास है।

अटल जी का व्यक्तित्व विचार और संवेदना का दुर्लभ संगम था। वे दृढ़ राष्ट्रवादी थे, किंतु संवाद और सहमति के पक्षधर भी। सत्ता में रहते हुए भी उनकी भाषा में मर्यादा और व्यवहार में विनम्रता रही। कविता उनकी आत्मा थी और राष्ट्रसेवा उनका जीवन-संकल्प। यही कारण है कि वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि लोकतंत्र की गरिमा के प्रतीक के रूप में स्मरण किए जाते हैं।

प्रधानमंत्री के रूप में अटल जी ने सुशासन को व्यवहार में उतारा। पोखरण परमाणु परीक्षणों से भारत की सामरिक आत्मनिर्भरता स्थापित हुई, तो कारगिल जैसे कठिन समय में उन्होंने पूरे देश को एकजुट नेतृत्व दिया। स्वर्णिम चतुर्भुज, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और दूरसंचार क्षेत्र में किए गए सुधार-ये सभी उस विकसित भारत की आधारशिला बने, जिसकी दूरदृष्टि अटल जी ने वर्षों पहले देख ली थी।

अटल बिहारी वाजपेयी जी का मध्यप्रदेश से रिश्ता केवल राजनीतिक नहीं, ऐतिहासिक और भावनात्मक भी था। ग्वालियर को कर्मभूमि बनाकर उन्होंने इस प्रदेश से आत्मीय संबंध स्थापित किया। ग्वालियर की जनता ने उन्हें लोकसभा में भेजा, तब यह केवल एक चुनावी विजय नहीं थी, बल्कि कठिन समय में दिया गया वह विश्वास था जिसने अटल जी को राष्ट्रीय नेतृत्व की नई ऊर्जा प्रदान की।

श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्मभूमि ग्वालियर को यह भी गौरव प्राप्त है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी द्वारा प्रतिपादित “एकात्म मानवदर्शन” की वैचारिक धारा को यहीं प्रथम स्वर मिला। अटल जी की विचारशील राजनीति और एकात्म मानवदर्शन की यह संगति ग्वालियर को भारतीय लोकतंत्र की वैचारिक चेतना का विशेष केंद्र बनाती है।

अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्मशताब्दी के अवसर पर ग्वालियर की धरती का पुनः राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बनना कोई संयोग नहीं, बल्कि वैचारिक निरंतरता का प्रतीक है। 25 दिसंबर को माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी का ग्वालियर आगमन और “अभ्युदय एमपी ग्रोथ समिट–2025” जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उनकी सहभागिता, अटल जी की विकास-दृष्टि को वर्तमान भारत से जोड़ने वाला सशक्त संदेश है। जिस ग्वालियर ने अटल जी को राष्ट्रनेतृत्व की नई दिशा दी थी, वही ग्वालियर आज उनके विचारों के अनुरूप विकास,सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के नए अध्याय का साक्षी बन रहा है।

अटल जी का सपना था-एक ऐसा भारत जो मजबूत भी हो और संवेदनशील भी; जो विकास करे, पर मूल्यों से विमुख न हो; जो आत्मनिर्भर बने, पर विश्व के साथ संवाद बनाए रखे। आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में आगे बढ़ता राष्ट्र उसी अटल दृष्टि का आधुनिक और सशक्त विस्तार है। डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, मजबूत आधारभूत संरचना और वैश्विक मंच पर भारत की निर्णायक भूमिका ये सभी अटल जी के स्वप्न को साकार करते हुए दिखाई देते हैं।

अटल जी के विचारों की दृढ़ता को यदि किसी ने निकट से जिया है, तो वह हमारी पीढ़ी है। मुझे स्मरण है वर्ष 1980 का वह समय, जब मैं मात्र 16 वर्ष का था। उसी वर्ष मेरे पिताजी स्वर्गीय विजय खंडेलवाल जी बैतूल जिले के पहले निर्वाचित भाजपा जिला अध्यक्ष बने। जनता पार्टी से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई थी। संख्या बल सीमित था,कार्यकर्ताओं पर दबाव था,सत्ता का आकर्षण त्याग कर हम एक कठिन वैचारिक यात्रा पर निकले थे।

उसी दौर की एक स्मृति आज भी मन में ताज़ा है। अटल बिहारी वाजपेयी जी हमारे घर आए थे,साधारण माहौल, खाने की मेज़ पर बातचीत, कभी हल्की मुस्कान, कभी आत्मीय ठहाका। अटल बिहारी वाजपेयी जी कभी बोझिल नहीं दिखते थे। चुनौतियाँ थीं,लेकिन उनके चेहरे पर निराशा नहीं होती थी। वे बड़े सहज भाव से कहते थे कि आज हम कम ज़रूर हैं, पर हमारा भरोसा मजबूत है,और यही भरोसा आगे चलकर ताक़त बनेगा। उनका विश्वास यही था कि यह रास्ता भले कठिन हो, पर सही है-क्योंकि यह सत्ता का नहीं, राष्ट्रसेवा का मार्ग है।
उनकी वही सहजता, आत्मबल और भविष्य पर अडिग भरोसा हम जैसे युवाओं के लिए उस समय सबसे बड़ा संबल बन गया।

आज पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो लगता है कि अटल जी की वही अडिग दृष्टि आज यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में पूर्ण सिद्धि को प्राप्त हुई है। भारतीय जनता पार्टी आज विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। यह केवल संगठनात्मक विस्तार नहीं, बल्कि विचार की विजय है। भाजपा आज सत्ता की राजनीति नहीं, बल्कि जनकल्याण, लोककल्याण और सेवा-आधारित सुशासन का पर्याय बन चुकी है। अटल जी का वह विश्वास, जो 1980 में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में व्यक्त हुआ था, आज विकसित भारत के संकल्प के रूप में साकार खड़ा है-आत्मविश्वास से भरा, संकल्पबद्ध और राष्ट्रहित को समर्पित।

अटल स्मृति वर्ष हम सभी के लिए अवसर है अपने सार्वजनिक जीवन,सामाजिक आचरण,और राष्ट्रीय कर्तव्यों में उन मूल्यों को अपनाने का ,जिनका प्रतिनिधित्व अटल जी करते थे।
उनके विचारो को स्मरण में नहीं आचरण में उतारना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

लेखक भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश के अध्यक्ष हैं।

हमारे अटलजी: राष्ट्र सेवा और सुशासन के युगपुरुष।
देश के लिए जीने वाले अटल इरादों वाले नेता- हितानंद शर्मा

भारत ने करवट ले ली है। देश अब अतीत की कमियों को दूर कर स्वाकभिमान और स्वाेवलंबन के साथ ‘विकसित भारत’ के संकल्पि को पूर्ण करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र  मोदी वर्ष 2047 तक भारत को विकसि‍त राष्ट्रद बनाने के संकल्पर के साथ पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की विरासत को और आगे ले जा रहे हैं। अटलजी के स्वशप्नोंक का लोक-कल्यावणकारी, शक्ति संपन्न, अडिग, अजेय, समर्थ और विश्व् का मार्गदर्शन करने वाले राष्ट्रश का उत्था‍न होते दुनिया देख रही है।
भारतीय लोकतंत्र के लिए 25 दिसंबर एक जननायक की जन्मतिथि मात्र नहीं है। यह उस विचार,  संस्कार और राजनीतिक परंपरा का स्मरण दिवस है, जिसने सत्ता को सेवा, राजनीति को मर्यादा और राष्ट्रनीति को नैतिक बल प्रदान किया है। राष्ट्रीवय स्वरयंसेवक संघ के प्रचारक से लेकर जनसंघ और फिर भाजपा की उनकी राजनैतिक यात्रा सर्वसमावेशी व्यैक्तित्वव की प्रतीक रही है। यही कारण है कि विश्वा ने उन्‍हें अजातशत्रु के रूप में जाना। अटल जी का जन्मदिवस आज अटल स्मृति वर्ष के रूप में मना जा रहा है। यह इस बात का संकेत है कि भारत केवल व्यक्तियों को नहीं बल्कि  उनके विचारों और मूल्यों का भी स्मरण करता है। 
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के उन दुर्लभ नेताओं में थे जिनका व्यक्तित्व सत्ता से बड़ा और समय से आगे दिखाई देता था। वे ऐसे राजनेता थे जो विचारधारा में अडिग रहते हुए भी संवाद में उदार थे। अटल जी के लिए राजनीति लोकतांत्रिक विमर्श की साधना की भांति रही। संसद में भले ही विषय कितना ही संवेदनशील क्यों न हो अटलजी का वक्तव्य कभी कटु नहीं होता था। वे शब्दों से आघात नहीं करते थे, बल्कि तर्क, तथ्य और भाव से अपनी बात रखते थे। संसदीय परंपरा में अटल बिहारी वाजपेयी का आचरण एक आदर्श की तरह दिखाई देता है। उनकी यह विशेषता भारतीय लोकतंत्र को एक नैतिक ऊँचाई प्रदान करती है जि‍समें असहमति शालीनता से व्य क्तक की जा सकती है और विरोध भी गरिमामय तरीके से किया जा सकता है।
25 दिसम्बहर 1924 को ग्वाीलियर में जन्मेंक अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रीेय स्वकयंसेवक संघ के प्रचारक फि‍र जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के माध्यनम से राष्ट्रा सेवा करते हुए एक प्रकाशवान नक्षत्र की तरह भारतीय लोकतंत्र में प्रेरणा की तरह स्थायपित हो गए। अटल जी को भाजपा का प्रथम अध्यएक्ष होने का गौरव भी प्राप्त् है। मुंबई अधिवेशन में दिया गया उनका वह भाषण प्रत्येीक कार्यकर्ता के लिए मानों संकल्पक और संबल बन गया जिसमें उन्होंरने कहा था – अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा। और उनकी वाणी सत्यि हुई, आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व  में सूर्य अपनी छंटा बिखेर रहा है, कमल खिल रहा है और अंधेरा छंट चुका है।
अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वैचारिक परंपरा से आए थे। उन्होंने राजनीति में रहते हुए विचारधारा को समावेशी राष्ट्रीयता  का स्वरूप दिया। वे जानते थे कि राष्ट्रनिर्माण के लिए संवाद, विश्वास और सहभागिता आवश्य क तत्वा हैं। उनकी राजनीति में राष्ट्र सर्वोपरि था और  राष्ट्र का अर्थ केवल सीमाएँ नहीं बल्कि जनता, संस्कृति और मानवीय संवेदना भी थी। यही कारण है कि वे दृढ़ निर्णय लेने वाले नेता थे और करुणा से भरे कवि भी थे।
प्रधानमंत्री के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी का कार्यकाल आज के भारत के विकास की नींव का कालखंड माना जाता है। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना ने देश को भौगोलिक रूप से जोड़ा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने गाँवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा, किसान फसल बीमा योजना ने किसानों को संबल प्रदान किया, दूरसंचार क्रांति ने भारत को डिजिटल भविष्य की ओर अग्रसर किया। अटलजी जब 1996 में देश की पहली गैर कांग्रेसी सरकार के प्रधानमंत्री बने तो भारत की जनता ने महसूस किया कि लोकतंत्र की अवधारणा के अनुसार जनता के द्वारा, जनता के लिए, जनता की सरकार सही अर्थों में क्याक होती है। जनता से जाना कि दीनदयाल जी और डॉ. श्याजमाप्रसाद मुखर्जी की वैचारिक विरासत का सुशासन सही अर्थों में क्या। होता है।
अटलजी गठबंधन की सरकार के प्रधानमंत्री थे। इससे पूर्व राजनीतिक दलों के गठबंधन इसलिए सफल नहीं हो पाते थे क्यों कि आशंकाएं, अविश्वा स, महत्वांकांक्षाएं और संवाद की कमी उन्हें मजबूत नहीं होने देती थी। परिणामस्वेरूप गठबंधन की सरकारें अस्थिर रहती थीं। यह अटलजी की ऐतिहासिक सफलता थी कि उन्हों ने गठबंधन की राजनीति को स्थायित्व दिया और यह भी सिद्ध किया कि सहयोग से चलने वाली सरकारें भी निर्णायक और प्रभावी हो सकती हैं। यह भारतीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण मोड़ था।
एक समर्थ, सक्षम और शक्ियह शाली भारत उनके स्व प्नोंर में रहता था। वे जानते थे कि राष्ट्रहित में कठोर निर्णय भी आवश्यक हैं और मानवीय पहल भी जरूरी हैं। राष्ट्रश प्रथम की नीति पर चलते हुए पोखरण परमाणु परीक्षण-2 का निर्णय लेकर अटलजी ने भारत की सामरिक क्षमता को वैश्विक मंच पर दमदार तरीके से स्थापित किया। यह निर्णय साहस, आत्मविश्वास और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक था। अटलजी ने लाहौर बस यात्रा कर यह संदेश भी दिया कि भारत की नीति में शक्ति का उद्देश्य युद्ध नहीं बल्कि। शांति है। वहीं करगिल घाटी से दुश्मसन की सेनाओं को खदेड़ने की उनकी दृढ़ इच्छा्शक्ति के लिए उन्हेंब युगों-युगों तक याद किया जाएगा।
केवल राजनीतिक निर्णयों के माध्यम से अटल बिहारी वाजपेयी के पूरे व्यकक्तित्वि को नहीं समझा जा सकता। वे एक संवेदनशील कवि थे, जिनकी कविताओं में राष्ट्र गुनगुनाता था। उनकी रचनाओं में आशा, विश्वा।स, दृढ़ता के साथ राष्ट्रव के पुनर्निर्माण का संकल्प भी है। वे शब्दों के माध्यम से समाज का जागरण करते थे तो भारत के स्वसर्णिथम भविष्यस के प्रति आश्वस्त भी करते थे। आज भी उनकी कविताएँ भारतीय चेतना को जागृत करती हैं और यह याद दिलाती हैं कि राष्ट्र केवल वर्तमान नहीं बल्कि इतिहास की स्मृति और भविष्य के संकल्पोंक दोनों का सम्मिलित स्वरूप है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जिस दृढ़ संकल्प  के साथ देश को एक सक्षम और निर्णायक नेतृत्व‍ प्रदान करते हुए सच्चेन अर्थों में अटल जी के 21 सदी भारत की सदी बाने के स्व प्नृ को साकार कर रहे हैं। निर्णायक  और पारदर्शी शासन, भ्रष्टाीचार मुक्ती अर्थव्येवस्थाय और तकनीकि आधारित पारदर्शी लोक कल्याकणकारी योजनाएं अटल जी की विरासत को संभालने और उसे आगे ले जाने के महत्व पूर्ण प्रयास हैं। आज भारत का जो चित्र सामरिक, आर्थिक और सांस्कृेतिक रूप से विश्वी पटल पर उभर रहा है।
अटल स्मृति वर्ष और 25 दिसंबर हमें यह विचार करने का अवसर देते हैं कि हम अटल जी के बताए मार्ग पर कितनी दृढ़ता से चलते हुए उनसे प्रेरणा प्राप्तृ कर रहे हैं। उनका जीवन यह सिखाता है कि लोकतात्रिक परंपराओं, राष्ट्री यता, व्यरक्तिगत जीवन में शुचिता, सकारात्माकता और धैर्य के साथ राष्ट्रन व समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन किस प्रकार करना है। अटल जी किसी एक दल या कालखंड के नहीं, बल्कि समूचे भारतीय लोकतंत्र की धरोहर हैं। उनका स्मरण केवल अतीत की ओर देखने का नहीं, बल्कि भविष्य के लिए मार्गदर्शन लेने का अवसर है। 25 दिसंबर और अटल स्मृति वर्ष हमें यह संकल्प दिलाते हैं कि राजनीति राष्ट्रसेवा और लोककल्याण का साधन है।

लेखक भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश के प्रदेश संगठन महामंत्री हैं।

रोज़नामा नया नज़रिया के सिलसिला अदब ने मेरी 50 साल पुरानी साहित्यिक यादों को ताज़ा कर दिया: उमेश त्रिवेदी

नया नज़रिया और महमूद ज़की वेलफेयर फाउंडेशन ने सिलसिला अदब कार्यक्रम आयोजित किया

भोपाल, सिलसिला अदब जैसे आयोजनों का चलन कम हो गया है, नया नज़रिया इस बात के लिए बधाई का पात्र है कि उसने पुरानी परंपरा को मजबूती के साथ आगे बढ़ाने का काम किया है। ऐसी साहित्यिक परंपराएं हमारी साझी विरासत को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं। ये विचार जाने-माने पत्रकार और कार्यक्रम अध्यक्ष उमेश त्रिवेदी ने  नया नज़रिया और महमूद ज़की वेलफेयर फाउंडेशन के संयुक्त बैनर तले आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उमेश त्रिवेदी ने कहा कि नया नज़रिया ने जिस तरह सिलसिला अदब के माध्यम से भारतीय सभ्यता और संस्कृति को पुनर्जीवित किया है, वह सराहनीय है। यहां आकर मेरी 50 साल पुरानी साहित्यिक यादें ताज़ा हो गई हैं। प्रोग्राम के मेहमान खास सीनियर जर्नलिस्ट और शायर इनामुल्लाह खान लोधी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि मैंने महमूद ज़की साहब के साथ मुशायरा पढ़ा है और मुझे यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि महमूद ज़की की तरबियत रंग ला रही है। उनके बेटे डॉ. मज़हर महमूद, डॉ. ज़फ़र महमूद, डॉ. इशरत नाहिद और डॉ. नज़र महमूद भाषा और साहित्य के रक्षक के तौर पर अपना फ़र्ज़ निभा रहे हैं।

नया नज़रिया और महमूद ज़की वेलफ़ेयर फ़ाउंडेशन के बैनर तले साहित्य सीरीज़ का लगातार आयोजन इस बात का सबूत है कि नई पीढ़ी अपनी भाषा और संस्कृति को लेकर कितनी फिक्रमंद है। जिस भाषा और संस्कृति के रक्षक ऐसे दिग्गज हों, वह कभी खत्म नहीं हो सकती। इससे पहले, डॉ. मेहताब आलम ने प्रोग्राम के मकसद और उद्देश्यों पर रोशनी डालते हुए कहा कि डॉ. नज़र महमूद के पिता महमूद ज़की  ने कई अख़बारों और मैगज़ीनो के संपादन का काम किया। उन्होंने शायरी, पत्रकारिता और आलोचना के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई। महमूद ज़की ने कई सामाजिक, साहित्यिक और धार्मिक संगठनों में भी अहम पदों पर काम किया। डॉ नजर महमूद को पत्रकारिता अपने पूज्य पिता से पत्रकारिता विरासत में मिली है।  डॉ. नज़र महमूद ने दिल्ली में दो केंद्रीय मंत्रियों के मीडिया सलाहकार के तौर पर काम किया उसके बाद उन्होंने उर्दू में नया नज़रिया शुरू किया, यह मध्य प्रदेश का पहला उर्दू अख़बार है जो एक साथ पाँच जगहों से छपता है।

इसके बाद रोज़नामा नया नज़रिया के एडिटर और पब्लिशर डॉ. नज़र महमूद ने मेहमानों का स्वागत तोहफ़े देकर किया। प्रोग्राम के अध्यक्ष सीनियर जर्नलिस्ट उमेश त्रिवेदी का स्वागत पंकज पाठक ने, मुख्य अतिथि सीनियर जर्नलिस्ट इनामुल्लाह खान लोधी का स्वागत ज़फ़र सेहबाई ने, अयाज़ कमर का स्वागत सैयद नुसरत अली ने, सीनियर जर्नलिस्ट अजय बोकिल का स्वागत इकबाल मसूद ने, राजेश चंचल का स्वागत डॉ. एहसान आज़मी ने, शाहिद कामिल का स्वागत प्रकाश गांधी ने, और लघु कथा लेखक खान आशु का स्वागत डॉ. नज़र महमूद और डॉ. मेहताब आलम ने किया। नया नज़रिया और महमूद ज़की वेलफेयर फाउंडेशन के सिलसिला अदब प्रोग्राम की खास बात यह थी कि प्रोग्राम में जर्नलिज़्म, पोएट्री और लिटरेचर से गहरा नाता रखने वाले उर्दू और हिंदी के जाने-माने जर्नलिस्ट शामिल हुए। प्रोग्राम की शुरुआत सीनियर जर्नलिस्ट शाहिद कामिल की शायरी से हुई। शाहिद कामिल ने अपने शायरी से महफ़िल की शान बढ़ाई। शाहिद कामिल के बाद सीनियर जर्नलिस्ट राजेश चंचल ने अपनी गज़लें और कविता पेश की और महफ़िल से तारीफ़ें बटोरीं। खान आशु ने अपनी लघु कथा से महफ़िल को कामयाब बनाया। खान आशु ने अपनी चुनी हुई छोटी कहानियां पेश कीं और सब से तारीफ़ पाई। सीनियर जर्नलिस्ट अजय बोकिल ने मां पर कविताएं पेश करके लोगों का ध्यान खींचा, जबकि सीनियर जर्नलिस्ट अयाज़ कमर ने अपनी अलग-अलग कविताओं के साथ ग़ज़लें भी पेश कीं, जिन्हें मौजूद लोगों ने खूब पसंद किया और सराहा। प्रोग्राम के  मुख्य अतिथि इनामुल्लाह खान लोधी और अध्यक्ष उमेश त्रिवेदी ने भी अपनी ग़ज़लों और कविताओं से  महफिल  की शान  में इज़ाफ़ा किया।

कार्यक्रम के अंत में दैनिक नया नज़रिया के संपादक और प्रकाशक डॉ नज़र महमूद ने आभार व्यक्त किया। डॉ नज़र महमूद ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि दैनिक नया नज़रिया और महमूद ज़की वेलफेयर फाउंडेशन सिलसिला ए अदब के तहत हर महीने एक काव्य गोष्ठी का आयोजन करता है। इस बार हमने पत्रकारों को शामिल करके एक अनूठी गोष्ठी आयोजित करने का फैसला लिया था जो कामयाब रहा जिसके लिए मै आप सब का शुक्रिया अदा करता हूं।

मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद का विस्तार जारी, आचार्य उपाध्यक्ष और मनीष राठौर महासचिव मनोनीत

प्रदेश में लगातार विस्तार से मिल रहा संगठन को बल, राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जताई प्रसन्नता

भोपाल। राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद रजि० का मध्यप्रदेश में निरंतर विस्तार हो रहा है। संगठन विस्तार के इस क्रम में चर्चित चेहरे संगठन से जुड़ रहे हैं। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद द्वारा सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है, जिसके फलस्वरूप कई जिलों के सक्रिय पत्रकार संगठन से जुड़ चुके हैं। वहीं प्रदेश कार्यसमिति में भी ऐसे सशक्त पत्रकार जुड़ रहे हैं जो प्रदेश में खासी साख रखते हैं। प्रदेश अध्यक्ष अमित द्विवेदी ने बताया कि अभियानी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले दैनिक प्राइम संदेश समाचार पत्र के संपादक मनीष राठौर को प्रदेश महासचिव नियुक्त किया गया है। मनीष राठौर अपनी खोजी खबरों से कई बार पत्रकारिता का लोहा मनवा चुके हैं। प्रदेश अध्यक्ष अमित द्विवेदी के अनुसार प्रदेश के कई विभागों की अंदरूनी नब्ज़ को जानने वाले दैनिक खुलासा जगत अखबार के संपादक सुरेश श्रीवास “आचार्य” भी प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में संगठन से जुड़े हैं। ज्ञात हो कि आचार्य लगातार मुखरता से सरकार को आईना दिखाने में कोई कसर बाकी नहीं रखते। मनीष राठौर और सुरेश श्रीवास “आचार्य” को दायित्व मिलने पर उनसे जुड़े हुए आंचलिक पत्रकारों में जबरदस्त हर्ष का माहौल है। इसके साथ ही राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा बधाईयां प्रेषित की जा रही हैं।

सुरेश श्रीवास “आचार्य”

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दी बधाई, जताई खुशी
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र मिश्रा ने प्रदेश उपाध्यक्ष तथा महासचिव नियुक्त होने पर सुरेश श्रीवास आचार्य व मनीष राठौर को बधाई दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि चर्चित पत्रकारों के प्रदेश कार्यकारिणी में जुड़ने से संगठन विस्तार को और अधिक गति मिलेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र मिश्रा ने राष्ट्रीय कमेटी की ओर से शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश अध्यक्ष अमित द्विवेदी के चयन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मप्र में अमित द्विवेदी के नेतृत्व में संगठन द्रुत गति से विस्तार कर रहा है, नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण होते ही पत्रकार सुरक्षा कानून लागू कराने हेतु हर स्तर पर कार्य किया जाएगा।

मनीष राठौर

पत्रकार हितों की रक्षा के संकल्प के साथ जताया आभार
नवनियुक्त प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेश श्रीवास आचार्य और महासचिव मनीष राठौर ने संगठन के वरिष्ठ नेतृत्व के मार्गदर्शन में पत्रकारों के हित की हर लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय तथा प्रदेश नेतृत्व के प्रति आभार ज्ञापित किया।

SRF फाउंडेशन ने “सेवन वॉन्डर्स, पीपल्स मॉल” में आयोजित की एक्सपोज़र विज़िट

भोपाल- SRF फाउंडेशन ने वोकेशनल एजुकेशन प्रोग्राम के तहत प्रेमपुरा के सरकारी मिडल स्कूल के छात्रों के लिए “सेवन वॉन्डर्स, पीपल्स मॉल” में एक एक्सपोज़र विज़िट आयोजित की। इस एक‑दिन के कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों में आर्कियोलॉजी, सिविल इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, हॉस्पिटैलिटी और डिफेंस जैसे व्यावसायिक क्षेत्रों में रुचि उत्पन्न करना था।

विजिट का उद्देश्य

रिप्लिका निरीक्षण – छात्रों ने ताज महल, लोटस टेम्पल, रेड फोर्ट, एफ़िल टॉवर और होटल ताज के विस्तृत मॉडल देखे। उन्होंने इन स्मारकों की वास्तुशिल्प डिजाइन, उपयोग किए गए सामग्री और ऐतिहासिक महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की।
सिविल इंजीनियरिंग एवं आर्किटेक्चर अंतर्दृष्टि – विशेषज्ञों ने ताज महल, रेड फोर्ट और एफ़िल टॉवर की संरचनात्मक विशेषताओं पर प्रकाश डाला और बड़े‑बड़े निर्माण कार्यों में सिविल इंजीनियरों व आर्किटेक्टों की भूमिका को समझाया।
होटल ताज मॉडल एवं डिफेंस मार्गदर्शन– छात्रों को रतन टाटा के आर्थिक योगदान के बारे में बताया गया और होटल ताज के मॉडल को देखा। 2008 के आतंकी हमले में ताज की रक्षा करने वाले सैनिकों की बहादुरी की कहानियाँ साझा की गईं तथा डिफेंस फोर्स में भर्ती, कमांडो बनने के मार्ग पर भी चर्चा हुई।
हॉस्पिटैलिटी कौशल अवलोकन – मॉल के विभिन्न दुकानों में जाकर छात्रों ने ग्राहक सेवा के तरीकों को देखा और समझा कि हॉस्पिटैलिटी कौशल विभिन्न उद्योगों में कैसे लागू किया जा सकता है।
रिफ्रेशमेंट – छात्रों को पॉपकॉर्न, जूस और बर्गर जैसे हल्के नाश्ते का आनंद दिया गया, जिससे माहौल सहज बना।

परिणाम

व्यावसायिक रुचि का उदय– आर्कियोलॉजी, सिविल इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर और डिफेंस क्षेत्रों में स्पष्ट रुचि उत्पन्न हुई।
हॉस्पिटैलिटी जागरूकता– ग्राहक सेवा के व्यावहारिक पहलुओं को समझते हुए छात्रों ने हॉस्पिटैलिटी कौशल की महत्वता को पहचाना।
करियर प्रेरणा – कई छात्रों ने वोकेशनल शिक्षा के विभिन्न ट्रैक को आगे बढ़ाने और संबंधित करियर विकल्पों को तलाशने की इच्छा व्यक्त की।

निष्कर्ष

SRF फाउंडेशन द्वारा आयोजित यह एक्सपोज़र विज़िट प्रेमपुरा के सरकारी मिडल स्कूल के छात्रों के लिए एक समृद्ध और शैक्षिक अनुभव साबित हुआ। वास्तविक दुनिया के पेशेवर क्षेत्रों की झलक प्रदान कर, इस कार्यक्रम ने छात्रों को नए करियर मार्गों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया। फाउंडेशन भविष्य में भी ऐसे ही कार्यक्रम आयोजित कर छात्रों के दृष्टिकोण को विस्तृत करने का प्रयास जारी रखेगा।

पुलिस ने बताई अपराध की परिभाषा , बच्चों ने सीखे सुरक्षा के गुर

भोपाल – राजधानी भोपाल में आने वाले थाना छोला मंदिर के पुलिस अधिकारियों द्वारा लगातार बच्चों को उनके अधिकारों और कानून के बारे में बताया जा रहा है। बता दें कि विवेक जागृति स्कूल के समस्त छात्र-छात्राओं को मुस्कान अभियान एवं अभिमन्यु अभियान के तहत गुड टच, बेड टच , महिला संबंधी अपराध , छेड़खानी, अपहरण , ह्यूमन ट्रैफिकिंग आदि व मोबाइल से होने वाले अपराध , साइबर अपराध इंस्टाग्राम, फेसबुक, हाउस अरेस्ट, यातायात नियम, नशे के दुष्प्रभाव नशे से दूर रहने एवं नशा मुक्ति, महिला समानता आदि के संबंध में विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई साथ हीं थाना प्रभारी सरस्वती तिवारी ने बताया की यह कार्यक्रम मुस्कान अभियान और अभिमन्यु अभियान के तहत किए जा रहें है जिसमें बच्चों को और उनके परिजनों को क़ानून सबंधी जानकारी भी दी जा रहीं है तथा स्कूल में पोस्टर लगाए गए हैं। इस मुहिम का मक़सद बाल संबंधित अपराधों पर अंकुश लगाना और कानून की आवश्यक जानकारी जन जन तक पहुंचाना है।

2 किलोमीटर लंबी रैली निकालकर किया आमजन को जागरूक

छोला मंदिर पुलिस द्वारा स्कूल के छात्र छात्राओं के साथ रैली निकालकर भ्रमण किया गया रैली को छोला मंदिर दशहरा मैदान से प्रारंभ कर नवजीवन कॉलोनी प्रेम नगर अर्चना गैस एजेंसी चाँदवाड़ी गरीब नगर उड़िया बस्ती शंकर नगर से होते हुए छोला मंदिर दशहरा मैदान में समापन किया गया !

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