हिमालय से निकली नदियों का कचरा नहीं आएगा अपने देश तक…

प्रदेश की योजना को अंतरराष्ट्रीय मंच ने सराहा

भोपाल। हिमालय के तराई क्षेत्र में सक्रिय पर्यटकों से निकलने वाला प्लास्टिक वेस्ट न सिर्फ इन इलाकों की स्वच्छता को प्रभावित कर रहा है। बल्कि यह नदियों के रास्ते अपने देश के कई शहरों तक भी पहुंच कर नुकसान के हालात बना रहा है। अब इस स्थिति से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विमर्श शुरू हुआ है। जिसके बेहतर परिणाम जल्दी ही सामने आने लगेंगे। स्वच्छता मिशन को आगे बढ़ाने वाली इस योजना को मप्र की राजधानी भोपाल से आकार मिलने वाला है।
पड़ोसी मुल्क नेपाल के काठमांडू में आयोजित तीन दिवसीय सेमिनार के दौरान यह निष्कर्ष निकल आया है। सेमिनार में देश विदेश के तकनीकी विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कचरा प्रबंधन पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। सेमिनार में भारत, नेपाल, म्यांमार, बांग्लादेश आदि देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं।

सराही गई मप्र की कवायद
काठमांडू में आयोजित इस तीन दिवसीय संगोष्ठी में मप्र के भोपाल से पर्यावरणविद सैयद इम्तियाज अली भी मौजूद हैं। इम्तियाज इससे पहले कश्मीर, नैनीताल, हिमाचल आदि प्रदेशों में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर अपना प्रेजेंटेशन दे चुके हैं। जिसपर कार्य करते हुए इन प्रदेशों ने प्लास्टिक वेस्ट की समस्या से छुटकारा पाया है। काठमांडू सेमिनार के दौरान सैयद इम्तियाज ने हिमालय की तराई से निकलने वाले प्लास्टिक वेस्ट के मैनेजमेंट की कार्ययोजना प्रसूत की। उनके इस पेपर प्रेजेंटेशन को इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में मौजूद स्पीकर्स, रिसर्चर्स, एकेडमिक और डिप्लोमेटिक लोगों ने सराहा भी और इस भोपाल मॉडल में रुचि भी दिखाई।

समस्या से निजात भी, रोजगार भी मिलेगा
पर्यावरणविद सैयद इम्तियाज अली ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सेमिनार भारत के स्वछता अभियान को सराहा गया है।  इसमें होने वाले नवीन अभिनव प्रयोग को भी सेमिनार में शामिल देशों ने अपनाने में रुचि दिखाई है। इम्तियाज ने कहा कि प्लास्टिक वेस्ट, मनुष्य के बालों  से निर्मित तरल खाद, गोकाष्ट, प्लास्टिक से रोड़ निर्माण तकनीक को पड़ोसी देश नेपाल ने अपनाने पर भी अपनी सहमति दी है। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट के लागू होने से जहां प्लास्टिक वेस्ट से निजात मिलेगी, वहीं रोजगार के साधन भी विकसित होंगे।

सुरक्षा, सुविधा, स्वतंत्रता पर हुई बात, मुंबई अधिवेशन में अवार्ड से नवाजे गए प्रदेश के कई पत्रकार

अमित सेन
8085661177

भोपाल। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ डगमगाया हुआ भी है और लड़खड़ाया हुआ भी। मजलूमों और पीड़ितों की आवाज बनकर खड़ा होने वाला मीडिया अब खुद ही शोषित, पीड़ित और दमन चक्र का शिकार है। सियासत से लेकर प्रशासनिक दबाव ने कलम को या तो कैद कर लिया है या फिर दबाव बनाकर उसकी धार को बोथरा दिया है। कलम के पुजारियों के हाथ से छिटक कर तिजोरी वाले लोगों के हाथों पहुंच चुके मीडिया संस्थान भी इन स्थितियों के लिए जिम्मेदार हैं।
प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट द्वारा मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान वक्ताओं ने यह बात कही। एक दिवसीय इस अधिवेशन में देशभर के पत्रकार जुटे थे। इस मौके पर पत्रकार सुरक्षा, उनके हित और सुविधाओं के लिए बात उठाई गई। प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट की राष्ट्रीय महासचिव शशि दीप ने बताया कि एक दिवसीय इस अधिवेशन के दौरान पत्रकारों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई। पत्रकार सुरक्षा कानून आदि को लेकर सरकारों के सामने पुख्ता तरीके से प्रस्ताव रखने और इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाए जाने की रणनीति भी इस दौरान बनाई  गई है। शशि ने बताया कि कार्यक्रम में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ खालिद कैस भी खास तौर पर मौजूद थे। कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के कई विधायक एवं मंत्रियों को भी आमंत्रित किया गया था।

खान आशु को मिला पत्रकार भूषण सम्मान
मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान देशभर से आए नामवर पत्रकारों को सम्मानित किया गया। जिनमें भोपाल सीनियर रिपोर्टर खान आशु को भी शामिल किया गया। संस्था द्वारा खान को पत्रकार भूषण सम्मान से नवाजा गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बॉलीवुड में संगीत निर्देशक दिलीप सेन ने उन्हें ट्रॉफी, प्रशस्ति पत्र और शॉल श्रीफल देकर सम्मानित किया। इस मौके पर सैयद रिजवान अली, जफर आलम खान, सुनील योगी, निशा खान, रेखा सोलंकी, मुईन अख्तर, अरविंद शर्मा, सरस्वती दास, लेखराज जोगी, नूर मोहम्मद शेख, सैयद अखलाक अली आदि को भी विभिन्न सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम संयोजक शशि दीप ने कहा कि पत्रकार हित की मंशा के साथ किया गया यह अधिवेशन निश्चित तौर से एक नई तहरीर के साथ संपन्न होगा। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ खालिद कैस ने सभी मेहमानों और देशभर से आए पत्रकारों का आभार व्यक्त किया।

MP News : पत्रकार सुरक्षा के लिए होगी आवाज बुलंद,  PCWJ का राष्ट्रीय अधिवेशन मुंबई में

खान आशु को मिलेगा पत्रकार भूषण सम्मान

भोपाल। पत्रकार सुरक्षा, उनके हित और सुविधाओं के लिए आवाज बुलंद करने वाली संस्था प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट इस बार अपना वार्षिक अधिवेशन मुंबई में आयोजित करेगी। 14 सितंबर को होने वाले इस आयोजन के दौरान देशभर के पत्रकार जुटेंगे। इस मौके पर प्रदेश के कई पत्रकारों को उनकी उत्कृष्ठ पत्रकारिता के लिए सम्मानित किया जाएगा। इनमें भोपाल से संचालित न्यूज डायरी डिजिटल के संपादक तथा मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार खान आशु को भी शामिल किया गया है। संस्था द्वारा उन्हें पत्रकार भूषण सम्मान से नवाजा जाएगा।


मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान देशभर से आए नामवर पत्रकारों को सम्मानित किया जाएगा। जिनमें न्यूज डायरी डिजिटल के संपादक खान आशु को भी शामिल किया गया है। संस्था द्वारा खान को पत्रकार भूषण सम्मान से नवाजा जाएगा। उनके अलावा सैयद रिजवान अली, सुनील योगी, निशा खान, रेखा सोलंकी, मुईन अख्तर, अरविंद शर्मा, सरस्वती दास, लेखराज जोगी, नूर मोहम्मद शेख, सैयद अखलाक अली आदि को भी विभिन्न सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम संयोजक शशि दीप ने कहा कि पत्रकार हित की मंशा के साथ किया जा रहा यह अधिवेशन निश्चित तौर से एक नई तहरीर के साथ संपन्न होगा।

प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट की राष्ट्रीय महासचिव शशि दीप ने बताया कि एक दिवसीय इस अधिवेशन के दौरान पत्रकारों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की जाएगी। पत्रकार सुरक्षा कानून आदि को लेकर सरकारों के सामने पुख्ता तरीके से प्रस्ताव रखने और इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाए जाने की रणनीति भी इस दौरान बनाई जाएगी। शशि ने बताया कि कार्यक्रम में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ खालिद कैस भी खास तौर पर मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के कई विधायक एवं मंत्रियों को भी आमंत्रित किया गया है। साथ ही देशभर के वरिष्ठ पत्रकारों का समागम भी इस मौके पर होगा।


खान आशु को मिलेगा पत्रकार भूषण सम्मान

जानना जरूरी है….
क्या है वक्फ, क्यों है वक्फ संशोधन बिल पर बवाल…?

जफर आलम खान
भोपाल। वक्फ और वक्फ की संपत्तियों को लेकर हिंदुस्तान में गाहे ब गाहे चर्चा होती रहती है। आपको वो विवाद याद होगा ही, जब ये बहस चल पड़ी थी कि ताजमहल वक्फ की संपत्ति है या नहीं। यदा-कदा किसी मुस्लिम धर्मस्थल को लेकर होने वाले विवादों में भी सबसे पहले यही तय किया जाता है कि अमुक इमारत वक्फ की है या नहीं। अब तो वक्फ बोर्ड एक्ट में ही बदलाव की बात चल पड़ी है। कहा जा रहा है कि भारत सरकार जल्द एक कानून लाने वाली है, जिसके तहत वक्फ बोर्ड एक्ट को बदल दिया जाएगा। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा है कि अब महिलाएं भी बोर्ड में शामिल की जाएंगी, वक्फ संपत्तियों का ज़िला प्रशासन के यहां रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाएगा। अदालतों को ये हक दिया जाएगा कि वो तय कर सकें कि अमुक संपत्ति वक्फ है या नहीं।
हममें से ज़्यादातर लोगों ने वक्फ सुना तो है, लेकिन जानते नहीं कि वक्फ होता क्या है। किसी मस्जिद या दूसरे धर्मस्थल के वक्फ होने का मतलब क्या है? और क्या वक्फ बोर्ड में तब्दीली का असर मुस्लिम धर्मस्थलों के स्टेटस पर पड़ सकता है? चूंकि भारत में रेलवे और रक्षा मंत्रालय के बाद सबसे बड़ा भूस्वामी वक्फ बोर्ड ही है। इसलिए हम इन सारे सवालों का जवाब जानने की कोशिश करेंगे।

क्या है वक्फ
वक्फ अरबी भाषा के वकुफा शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है ठहरना। इसी से बना वक्फ। वक्फ एक ऐसी संपत्ति होती है, जो जन-कल्याण को समर्पित हो। इस्लाम के मुताबिक वक्फ दान का ही एक तरीका है। देने वाला, चल या अचल संपत्ति दान कर सकता है। माने एक साइकिल से लेकर एक बहुमंज़िला इमारत, कुछ भी वक्फ हो सकता है, बशर्ते वो जनकल्याण के मकसद से दान कर दिया गया हो। ऐसे दानदाता को कहा जाता है ‘वाकिफ’। वाकिफ ये तय कर सकता है कि जो दान दिया गया है, मिसाल के लिए इमारत, उसका या उससे होने वाली आमदनी का इस्तेमाल कैसे होगा। उदाहरण के लिए कोई वाकिफ ये कह सकता है कि अमुक वक्फ से होने वाली कमाई गरीबों पर ही खर्च होगी।
मान्यता है कि पैगंबर मोहम्मद के समय 600 खजूर के पेड़ों का एक बाग बनाया गया था, जिससे होने वाली आमदनी से मदीना के गरीब लोगों की मदद की जाती थी। ये वक्फ के सबसे पहले उदाहरणों में से एक है। अरब संस्कृति और भाषा की पढ़ाई के लिए सबसे उम्दा माना जाता है, मिस्र की राजधानी काहिरा में स्थित अल अज़हर यूनिवर्सिटी को। ये 10वीं सदी में बनी थी और ये भी एक वक्फ है।
भारत में इस्लाम की आमद के साथ यहां भी वक्फ के उदाहरण मिलने लगे। दिल्ली सल्तनत के वक्त से वक्फ संपत्तियों का लिखित ज़िक्र मिलने लगता है। उस ज़माने में क्योंकि ज़्यादातर संपत्ति बादशाह के पास ही होती थी, इसीलिए प्रायः वही वाकिफ होते और वक्फ कायम करते जाते। जैसे कई बादशाहों ने मस्जिदें बनवाईं, वो सारी वक्फ हुईं और उनके प्रबंधन के लिए स्थानीय स्तर पर ही इंतज़ामिया कमेटियां बनती रहीं।

भारत में कब बना वक्फ बोर्ड
1947 में आज़ादी के बाद पूरे देश में पसरी वक्फ संपत्तियों के लिए एक स्ट्रक्चर बनाने की बात हुई। इसी तरह साल 1954 में संसद ने वक्फ एक्ट 1954 पास किया। इसी के नतीजे में वक्फ बोर्ड बना। ये एक ट्रस्ट था, जिसके तहत सारी वक्फ संपत्तियां आ गईं। 1955 में यानी कानून लागू होने के एक साल बाद, इस कानून में संशोधन कर राज्यों के लेवल पर वक़्फ बोर्ड बनाने का प्रावधान किया गया। इसके बाद साल 1995 में नया वक्फ बोर्ड एक्ट आया और 2013 में इसमें संशोधन किये गए। फिलहाल जो व्यवस्था है, वो इन्हीं कानूनों और संशोधनों के तहत चल रही है। प्रायः मुस्लिम धर्मस्थल वक्फ बोर्ड एक्ट के तहत ही आते हैं। लेकिन इसके अपवाद भी हैं। जैसे ये कानून अजमेर शरीफ दरगाह पर लागू नहीं होता। इस दरगाह के प्रबंधन के लिए दरगाह ख्वाजा साहिब एक्ट 1955 बना हुआ है।

मैनेजमेंट कैसे होता है?
वक्फ संपत्तियों के एडमिनिस्ट्रेशन के लिए सेंट्रल वक्फ कॉउंसिल है। ये भारत सरकार को वक्फ से जुड़े मुद्दों पर सलाह देती है। राज्यों के स्तर पर राज्य सरकारें वक्फ बोर्ड्स को नोटिफाई करती हैं। इसमें दो तरह के बोर्ड्स बनाने का अधिकार दिया गया है। एक सुन्नी वक्फ बोर्ड और दूसरा शिया वक्फ बोर्ड। आदर्श स्थिति में वक्फ बोर्ड की संरचना कुछ ऐसी होती है। इसके एक चेयरमैन होते हैं। दो मेंबर राज्य सरकार नियुक्त करती है। इसके अलावा इसमें मुस्लिम विधायक, मुस्लिम सांसद, मुस्लिम टाउन प्लानर, मुस्लिम एडवोकेट और मुस्लिम बुद्धिजीवी भी शामिल होते हैं। बोर्ड में एक सर्वे कमिश्नर भी होता है, जो संपत्तिओं का लेखा-जोखा रखता है। बोर्ड के सभी मेंबर्स का टेन्योर 5 साल का होता है।
इसके अलावा राज्य सरकार एक मुस्लिम IAS अधिकारी को भी बोर्ड का मेंबर बनाती है। ये बोर्ड का CEO यानी चीफ एक्सक्यूटिव ऑफिसर होता है। ये बोर्ड के फैसलों को इम्प्लीमेंट करता है और बोर्ड के अधीन आने वाली प्रॉपर्टी का इंस्पेक्शन भी करता है। कानून ये कहता है कि ये अधिकारी न्यूनतम डिप्टी सेक्रेटरी रैंक का IAS अधिकारी होना चाहिए।

वक्फ ट्रिब्यूनल
वक्फ बोर्ड एक्ट के जरिये वक्फ से जुड़े मामलों के लिए कोर्ट भी बनवाया गया है। इसे वक़्फ़ बोर्ड ट्रिब्यूनल कहते हैं। इसमें वक्फ प्रॉपर्टी से जुड़े मसलों पर सुनवाई होती है।

यह हैं वक्फ बोर्ड की जिम्मेदारियां
वक्फ के जरिये आए दान से एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स, कब्रिस्तान, मस्जिद और शेल्टर होम्स बनाए जाते हैं। वक्फ बोर्ड वक्फ के जरिये हुई आमदनी का सोर्स, कुल आमदनी और उससे किन लोगों का भला किया गया, उसका लेखा-जोखा रखता है। वह ये सुनिश्चित करता है कि सेंट्रल वक्फ काउन्सिल के नियमों का ठीक से पालन हो।

बोर्ड से जुड़े विवादित क्लॉज
वक्फ बोर्ड एक्ट 1995 के सेक्शन 40 के मुताबिक अगर वक्फ बोर्ड को लगता है कि किसी सम्पत्ति पर वक्फ बोर्ड का हक़ है तो वक्फ बोर्ड स्वतः संज्ञान लेते हुए उसके बारे में जानकारी इकट्ठी कर सकता है। वक्फ बोर्ड खुद सम्पति की इंक्वायरी करता है और इसपर फैसला सुनाता है। अगर किसी को वक्फ बोर्ड के फैसले से दिक्कत हो, तो वो वक्फ बोर्ड ट्राइब्यूनल में आवेदन दे सकता है लेकिन ट्राइब्यूनल का फैसला फाइनल होगा। माने उस फैसले के खिलाफ अपील करने का प्रॉसेस काफी कॉम्प्लेक्स है। आप हाईकोर्ट जा तो सकते हैं, लेकिन एक जटिल कानूनी प्रक्रिया के बाद ही।

सरकार एक्ट में क्या बदलाव चाहती है?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मौजूदा वक़्फ बोर्ड एक्ट में केंद्र सरकार करीब 40 संशोधन करना चाहती है। कई रिपोर्ट्स के मुतबिक सरकार का जोर वक्फ में महिलाओं का पार्टिसिपेशन बढा़ने पर है। साथ ही सरकार की वक्फ बोर्ड की सम्पति से जुडी ताकत पर भी कंट्रोल करने की बात कही जा रही है। सबसे ज़्यादा विवाद इसी बात को लेकर है।

क्या वक्फ बोर्ड पर नियंत्रण बढ़ाना जरुरी है?
अगर हां, तो किन प्रावधानों में बदलाव की जरुरत है और सरकार को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इसको लेकर हमने फैक्ल्टी ऑफ लॉ, डीयू के रिसर्च स्कॉलर विजय त्यागी से बात की। विजय त्यागी ने बताया कि दो चीजें हैं, जो काफी ज्यादा प्रॉब्लमेटिक है और उसके उदाहरण हमने देखे हैं। सबसे पहला जो सेक्शन 40 है, वह बोर्ड को पावर देता है कि अगर उसके पास रिजन टू बिलीव है कि कोई प्रॉपर्टी वक्फ की प्रॉपर्टी है तो वो खुद से एक इंक्वायरी करके ये कह सकते हैं कि ये उनकी प्रॉपर्टी है। उसके बाद उस जमीन पर जो करेंटली ओनरशिप क्लेम कर रहा है उसको कोई आपत्ति है तो वो ट्रिब्यूनल के पास जाए।
पहली समस्या तो ये है कि मान लीजिए किसी सामान्य आदमी की संपत्ति है तो उसके पास टाइटल सूट लड़ने के लिए उतनी पावर या वक्फ बोर्ड जितना संसाधन नहीं हो पाता है।
दूसरा ये है कि बर्डेन ऑफ प्रूफ शिफ्ट हो जाता है, उस पर कि वो ये प्रूफ करे कि ये उसकी संपत्ति है, वक्फ की संपत्ति नहीं है। दूसरा प्वाइंट ये है कि इनका सेक्शन 14 वक्फ की कंपोजिशन की बात करता है। तो कंपोजिशन में विविधता आनी चाहिए। ये मांग मुस्लिम समाज के अलग-अलग सेक्शन से आती रही है। जिसमें शिया एक सेक्ट है, बोहरा एक सेक्ट है और मुस्लिम महिलाओं का प्रतिनिधित्व तो होना ही चाहिए।

लाखों करोड़ की प्रॉपर्टी
वक्फ बोर्ड चाहे सालाना 200 करोड़ ही कमाता हो, लेकिन उसके पास पूरे देश में अकूत संपत्तियां हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में वक्फ बोर्ड के पास कुल 8 लाख 72 हज़ार 292 संपत्तियां हैं, जो 8 लाख एकड़ से ज्यादा में फैली हुई हैं। इनमें से कई इमारतें भारत के लिए सांस्कृतिक धरोहर की तरह हैं। कुछ वक्फ संपत्तियों को लेकर विवाद भी चले आ रहे हैं। ऐसे में सरकार वक्फ बोर्ड में जो भी बदलाव करेगी, उसे बहुत बारीक नज़र से देखा जाएगा।

Whatsapp पर आया नया फीचर, अब लाइक कर सकेंगे Status

नई दिल्ली। मैसेज, वीडियो या फोटो भेजने के लिए बड़ी संख्या में लोग व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं। समय बदला तो लोगों को इसके जरिए कॉल और वीडियो कॉल की सुविधा भी मिली। इसी बीच व्हाटसअप के बढ़ते यूजर्स को देखते हुए कंपनी एक से एक नए फीचर लेकर आ रही है। इसी कड़ी में व्हाट्सएप ने स्टेटस में एक और फीचर जोड़ा है, ताकि यूजर्स का एक्सपीरियंस और भी बेहतर हो सके।

दरअसल, पहले आप किसी के व्हाट्सएप स्टेटस को देख सकते थे या मन होने पर उस पर रिप्लाई कर देते थे। अब कंपनी ने इसमें एक नया फीचर ऐडऑन किया है। जिससे अब आप किसी के व्हाट्सएप स्टेटस को लाइक कर सकते हैं। यह फीचर पहले से मौजूद रिप्लाई बटन के बगल में एक दिल के आकार के आइकन के रूप में दिखाई देगा।

व्हाटसअप स्टेटस के नीचे रिप्लाई के ऑप्शन के बगल में एक दिल का इमेज बना होगा, जहां क्लिक करके आप किसी के व्हाटसअप स्टेटस को लाइक कर पाएंगे। व्हाटसअप स्टेटस को लाइक करते ही दिल का कलर ग्रीन हो जाएगा। इसके साथ ही जिस यूजर के स्टेटस को आप लाइक करेंगे, वह जब अपना स्टेटस पर यह देखने के लिए क्लिक करेगा कि उसका स्टेटस किस-किस ने देखा तो उसके स्टेटस पर ग्रीन कलर में दिल का इमोजी फ्लोट होते हुए नजर आएगा।

सूचना और संचार प्रौद्योगिकी का ज्ञान देने प्रदेश में 3390 आईसीटी लैब स्थापित

लैब की मॉनिटरिंग के लिये विमर्श पोर्टल

प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में डिजिटल लिटरेसी को विकसित करने के उद्देश्य से आईसीटी (इन्फार्मेशन एण्ड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी) लैब स्थापित की जा रही हैं। प्रदेश में अब तक 3390 आईसीटी लैब स्थापित की जा चुकी हैं। केन्द्र सरकार की इस योजना में स्कूल में कम्प्यूटर लैब स्थापित की जा रही हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से कम्प्यूटर लैब की स्थापना का कार्य विकेन्द्रीकृत तरीके से जिलों द्वारा किया जा रहा है।
आईसीटी लैब की नियमित मॉनिटरिंग एवं मासिक समीक्षा गतिविधियों के लिये विमर्श पोर्टल में एक इंटीग्रेटेड मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया गया है। डिटिजल लिटरेसी से संबंधित कौशल आज के तकनीकी युग की आवश्यकता बन चुकी है। जिसमें भविष्य में विद्यार्थियों को अच्छे करियर ऑप्शन हो सकें। इसको ध्यान में रखते हुए आईसीटी लैब के अध्यापन से संबंधित पाठयवस्तु का निर्धारण किया गया है। कक्षा 6 से 12 के विद्यार्थियों के लिये आईसीटी से संबंधित विषयवस्तु तैयार की गई है। आईसीटी लैब के माध्यम से विद्यार्थियों को कम्प्यूटर, इंटरनेट और अन्य डिजिटल साधनों का उपयोग करने का प्रशिक्षण भी मिल रहा है, जिससे विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की आईसीटी के प्रति रूचि बढ़ी है।

सरकारी स्कूलों में डिजिटल साक्षरता पर जोर

प्रदेश में सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार के लिये स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। इस कार्य में अनेक स्वयंसेवी संगठन शिक्षा से जुड़ी योजनाओें के क्रियान्वयन में राज्य सरकार की मदद कर रहे हैं। इसी तरह का एक संगठन श्रीराम फाइबर फाउण्डेशन (एसआरएफ) कार्य कर रहा है।

700 युवाओं का किया गया प्लेसमेंट

भिण्ड एवं धार जिले में बेसिक इलेक्ट्रीशियन ट्रेनिंग सेंटर चलाये जा रहे हैं। इन सेंटर में 18 वर्ष से अधिक के युवाओं को 4 माह का इलेक्ट्रिक से संबंधित कोर्स कराया जा रहा है। कोर्स पूरा होने पर इलेक्ट्रिक किट भी प्रदान की जा रही है। इन सेंटर्स के माध्यम से अभी तक 1200 से अधिक युवाओं को इलेक्ट्रिक ट्रेनिंग दी गई है। फाउण्डेशन द्वारा 700 से अधिक युवाओं का रोजगार के मकसद से प्लेसमेंट भी कराया गया है।

डिजिटल साक्षरता

ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों को डिजिटल साक्षर बनाने की कोशिश की जा रही। फाउण्डेशन ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल बस भेजकर विद्यार्थियों को कम्प्यूटर संबंधी जानकारी दे रहा है। डिजिटल बस “आईसीटी लैब ऑन द व्हील’’ नाम से चलायी जा रही है। बस में 20 कम्प्यूटर और 2 एलसीडी स्क्रीन प्रिंटर लगाये गये हैं। छात्रों में नेतृत्व क्षमता बढ़ाने के लिये चयनित स्कूल परिसर में स्वच्छ विद्यालय कमेटी का गठन किया गया है। इसमें 20 छात्र शामिल किये गये हैं। सभी को अलग-अलग दायित्व सौंपे गये हैं। शिक्षकों में टीचिंग स्किल बढ़ाने के लिये चयनित शिक्षकों को दूसरे राज्यों में एक्सप्लोजर विजिट पर भी भेजा गया है।

अन्य कार्य

भिण्ड जिले के 10, धार जिले के 15 और भोपाल जिले के 10 स्कूलों में पिछले 3 वर्षों से विकास कार्य किये जा रहे हैं। फाउण्डेशन द्वारा स्कूल भवन का मरम्मतीकरण, रंग-रोगन और बाउण्ड्री-वॉल का निर्माण किया गया है। आकदमिक रूपांतरण के अंतर्गत विज्ञान प्रयोगशाला और पुस्तकालय के अपग्रेडेशन पर भी काम किया जा रहा है। चयनित स्कूलों में विद्यार्थियों को पीने का पानी साफ मिले, इसके लिये ड्रिंकिंग वॉटर स्टेशन का निर्माण और स्कूलों के शौचालयों की मरम्मत कार्य को प्राथमिकता दी गई है। चयनित स्कूलों में छात्रों के बैठने के लिये बैंच-डेस्क और ग्रीन बोर्ड भी प्रदान किये गये हैं।

MP News : हिमालय की चोटियों पर लहराएगी प्रदेश की तकनीक,

वेस्ट मैनेजमेंट पर नेपाल में व्याख्यान देंगे इम्तियाज

खान आशु
भोपाल। मप्र से निकली वेस्ट मैनेजमेंट की तकनीक अब तक दुनिया के कई देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करवा चुकी है। इसको लेकर पर्यावरण संरक्षण में नए आयाम भी स्थापित किए जा रहे हैं। अब इसी तकनीक का फायदा हिमालय की वादियों में पसरे वेस्ट से निजात पाने के लिए किए जाने की कवायद शुरू हो रही है। इसी माह नेपाल में आयोजित होने वाले खास सेमिनार में हिमालय की सरहदों से लगे देश, प्रदेश, शहरों के जिम्मेदार जुटेंगे। इस कार्यक्रम में प्लास्टिक कचरा निपटान के खास तरीकों पर व्याख्यान देने के लिए मप्र की राजधानी भोपाल से ताल्लुक रखने वाले सैयद इम्तियाज अली भी मौजूद रहेंगे।

प्लास्टिक कचरा अब वैश्विक समस्या का रूप धारण करती जा रही है। इसको लेकर फिक्र और निदान के कदम भी उठाए जा रहे हैं। समस्या की जद में हिमालय की पहाड़ियों से लेकर इसके तराई वाले इलाके भी आए हैं। इन इलाकों में पर्यटकों की आवाजाही ज्यादा होने से समस्या यहां तेजी से विकराल रूप धारण करती जा रही है। इस मानवजनित समस्या से निजात पाने के लिए प्रयासों का दौर शुरू हो गया है।

काठमांडू में बैठेंगे फिक्रमंद
नीति अनुसंधान प्रतिष्ठान, नेपाल इसी माह तीन दिन का एक सेमिनार आयोजित कर रहा है। 13 से 15 सितंबर तक आयोजित इस सेमिनार में देश दुनिया के विषय विशेषज्ञ अपने अपने तकनीकी और समाधानपरक व्याख्यान देंगे। इस कड़ी में राजधानी भोपाल के पर्यावरणविद सैयद इम्तियाज अली भी वक्ता के तौर पर मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में नेपाल के विदेश मंत्री डॉ आरजू राणा देवबू भी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा आयोजकों ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को भी आमंत्रित किया है। इस विशेष कार्यक्रम में इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च, नेशनल ट्रस्ट फॉर नेचर कन्वर्सेशन, सेंटर फॉर नेपाल एंड एशियन स्टडीज, त्रिभुवन यूनिवर्सिटी, क्लाइमेट एलायंस ऑफ नेचर, इंटरनेशनल यूनियन फॉर कन्वेजेशन ऑफ नेचर आदि संस्थाएं मौजूद रहेंगी।

देश में भी, विदेशों में भी इम्तियाज का फॉर्मूला
राजधानी भोपाल की स्वयंसेवी संस्था सार्थक से जुड़े सैयद इम्तियाज अली लंबे समय से प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े हुए हैं। उन्होंने प्लास्टिक कचरे से सड़क निर्माण की तकनीक विकसित की है। उनकी इस तकनीक से प्रदेश में इंदौर समेत कई शहरों में सड़कें निर्मित की गई हैं। देशभर में भी कई जगह उसका इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा सैयद इम्तियाज ने अमेरिका, भूटान समेत कई देशों में भी इस तकनीक का प्रेजेंटेशन दे चुके हैं। दुनिया भर से कई देशों के प्रतिनिधि भी यहां आकर इम्तियाज अली से वेस्ट मैनेजमेंट की इस तकनीक पर आधारित अध्ययन कर चुके हैं।

पत्रकार जब कविता लिखता है तो वह कुछ अलग साहित्य होता है… पुस्तक का विमोचन

भोपाल। सारादिन खबरों को लपकने की होड़ में जुटे रहने वाले पत्रकारों के मन का एक कोना साहित्य से भी सजा ही होता है। मन इसी हिस्से से निकलकर कागजों पर बिखरने वाले शब्द कभी कविता, गीत, गजल का रूप भी ले लेते हैं। राजधानी के दुष्यंत संग्रहालय के राजुस्कर राज स्मृति सभागार में ऐसे ही पत्रकारों की रचनाओं को लेकर उकेरी गई पुस्तक का लोकार्पण किया गया। बुधवार को सजी इस महफिल खास का आयोजन संस्था हम विक्रम ने किया था।
अष्ठाछाप के अर्वाचीन कवि शीर्षक से प्रकाशित इस पुस्तक को संजोने में वरिष्ठ पत्रकार पंकज पाठक ने मशक्कत की है। उन्होंने समंदर से चुने हुए मोतियों की तरह खबरों से ताल्लुक रखने वाले राजधानी भोपाल के आठ पत्रकारों की काव्य रचनाओं को इसमें शामिल किया है। इन पत्रकारों में शिल्पा शर्मा, उमेश त्रिवेदी, पंकज पाठक, डॉ वंदना शुक्ला, अजय बोकिल, कौशल किशोर चतुर्वेदी, आरिफ मिर्जा और आरती शर्मा शामिल हैं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ समाजसेवी हेमंत मुक्तिबोध थे। अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार उमेश त्रिवेदी ने की। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार महेश श्रीवास्तव मौजूद थे। इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी भी खासतौर से मौजूद थे। इस मौके पर एक लघु काव्य पाठ का आयोजन भी किया गया।

विक्रम से जुड़े पत्रकार और कवि
कार्यक्रम संयोजक डॉ नजर मेहमूद ने बताया कि पत्रकार और कवि/शायर की दोहरी भूमिका निभाने वालों की बड़ी फेहरिस्त है। इस पुस्तक में शामिल सभी पत्रकारों का संबंध उज्जैन की विक्रम यूनिवर्सिटी से रहा है। उन्होंने कहा कि यह एक शुरुआत मात्र है, प्रयासों का यह सिलसिला सतत रहने वाला है।

बुलडोजर मामला : हाजी शहजाद की बेटी फातिमा ने उठाई आवाज, बोली बड़े आकाओं के इशारे पर हुई कार्यवाही

खान आशु
भोपाल। बुलडोजर के कर्कश पैरों के तले कुचला गया एक आलीशान मकान… यहां वहां बिखरे इसका मलबा और अवशेष… इन्हीं के बीच पड़ा उन कारों का भंगार, जो कुछ दिन पहले लक्जरी कहलाती थीं… इन्हीं के किनारे पर खड़ी फातिमा… फातिमा, हाजी शहजाद की बेटी…! गम, गुस्से, दर्द और आंखों में किसी भूचाल की बजाए एक ठहराव और शांत भाव…! सधे, ठहरे और संतुलित लेकिन आत्मविश्वास भरे लहजे में उसने वह कहा, जो इस पूरे मामले के मामले को एक नई दिशा दे रहा है…! फातिमा ने कह डाला, बुलडोजर कार्यवाही में लिप्त अफसरों पर “दबाव” था, जिसकी वजह से विध्वंस की यह कार्यवाही अंजाम दी गई। दबाव इन अफसरों के आकाओं का था… यह आका कौन हैं, इसको लेकर फातिमा खुलासा करने से कुछ गुरेज कर गईं, लेकिन इशारों में उसने बहुत कुछ कह डाला।
छतरपुर बुलडोजर कार्यवाही के करीब 6 दिन की खोज के बाद भी इस मामले के मुख्य आरोपी करार दिए गए हाजी शहजाद अली ने खुद को अदालत में सरेंडर करने की तैयारी कर ली थी। लेकिन सूत्रों का कहना है कि ऐन इससे पहले थाना कोतवाली के टीआई अरविंद कुजूर से उनकी मुलाकात हो गई। सरेंडर की कहानी अरेस्टिंग में बदल गई। पुलिस द्वारा कथित रूप से गिरफ्तार किए गए हाजी शहजाद को अदालत में पेश किया गया। जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

अब बेटी आई सामने
हाजी शहजाद अली की बेटी फातिमा खातून ने हाल ही में मीडिया के सामने आकर अपनी बात पूरी बेबाकी से रखी है। उसका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। फातिमा ने कहा कि उसके पिता हाजी शहजाद, सदर जावेद अली के बुलाने पर कोतवाली पहुंचे थे। वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों ने उनसे निवेदन किया कि आपके सदर की बात लोग नहीं मान रहे हैं। इसलिए आप इन्हें समझाने की कोशिश कीजिए। पुलिस अधिकारियों की रिक्वेस्ट पर उन्होंने लोगों को समझाने की कोशिश की भी। लेकिन भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता है, वह विकृत रूप लिए होता है, इस दिन भी यही हालात बने थे। फातिमा ने कहा कि यह बातें उनके पिता ने उन्हें उस समय बताई थीं, जब पुलिस रिमांड की अवधि में पुलिस उन्हें लेकर घर आई थी।

हुआ नहीं, करवाया गया…
फातिमा ने अपने पिता को पूरी तरह बेकुसूर बताते हुए कहा कि उनके शहर में पहली बार ऐसी घटना हुई है। उन्होंने दावे के साथ कहा कि यह मामला हुआ नहीं, बल्कि करवाया गया है। उन्होंने कहा कि उनके पिता शहजाद को पूरे मामले में फंसाने की एक साजिश के तहत यह पूरा कांड करवाया गया है। फातिमा ने कहा कि यह पूरा कर्मकांड प्रशासनिक अधिकारियों की साजिश है। साथ ही इसमें इन अधिकारियों के आकाओं की भी पूरी भूमिका है। उन्होंने कहा कि इन आकाओं में बहुत बड़े और छिपे लोग हैं। फातिमा ने इस पूरे मामले का दोषी साजिश को रचने वाले इन लोगों को ही बताया है।

न नोटिस, न समय, सीधे कार्यवाही
हाजी शहजाद की बेटी फातिमा ने कहा कि करीब 7 साल से बन रहे उनके मकान को अचानक अवैध घोषित कर दिया गया। इसके लिए ना तो कोई समय दिया गया और न ही न ही कोई नोटिस ही जारी किया। फातिमा ने कहा कि उनके मकान के अवैध होने की सूचना देने के लिए भी नगरीय प्रशासन का कोई अधिकारी या कर्मचारी की बजाए दो पुलिस जवान पहुंचे थे। इनमें एक लेडी कॉन्स्टेबल थी और दूसरा सिविल ड्रेस में जवान। इन्होंने ही मकान को अवैध होने के फैसले पर मुहर लगा दी। कार्यवाही भी इतनी आनन फानन में की गई कि मकान के साथ लक्जरी गाडियां भी बुलडोजर से कुचल दी गईं हैं।

आकाओं तक पहुंच रही थीं वीडियो
फातिमा ने कहा कि जब पुलिस वाले उनका घर देखने आए थे तो वे वीडियो बनाकर लगातार किसी को भेज रहे थे। इस बीच वे यह बातें भी कर रहे थे कि अब आएगा असली मजा… अब बनेगी असली न्यूज… फातिमा ने कहा कि उन लोगों की मंशा अब समझ आ रही है कि यह वीडियो किन लोगों तक भेजे जा रहे थे और इनकी न्यूज वाली बातों का तात्पर्य क्या था…!

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के चाचा चैन सिंह चौहान का निधन, शाम 4 बजे होगा अंतिम संस्कार

शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पर साझा की जानकारी

भोपाल | मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के चाचा चैन सिंह चौहान का निधन हो गया है। वह बीते कुछ समय से अस्वस्थ थे और उनका इलाज बंसल अस्पताल भोपाल में चल रहा था, उन्होंने अस्पताल में ही अपनी अंतिम सांस ली। गौरतलब है कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कक्षा चौथी से लेकर ग्यारवी तक की पढ़ाई अपने चाचा चैन सिंह चौहान के घर रहकर ही पूरी की थी।

छलक गयी शिवराज सिंह चौहान की भावनाएं
चाचा के निधन पर प्रदेश के पूर्व मुखिया ने X पर भावनात्मक पोस्ट कर इसकी जानकारी साझा की, उन्होंने लिखा की “मेरे प्रिय चाचाजी श्री चैन सिंह चौहान जी, जिनके पास भोपाल में रहकर चौथी से लेकर ग्यारहवीं कक्षा तक पढ़ा, जिनका आशीर्वाद सार्वजनिक जीवन में मेरी प्रेरणा रहा, जो सदैव मेरे ऊपर प्रेम की वर्षा करते रहे, वह आज हमें छोड़कर अनंत यात्रा पर चले गए।” इसके आगे उन्होंने लिखा कि “वो मेरी शक्ति थे, भावनात्मक सहारा थे, प्रेरणा थे। आज वो साथ छूट गया, सहारा टूट गया, हृदय-घट सूना हो गया। पूज्य चाचाजी के चरणों में प्रणाम!” जानकारी के अनुसार स्वर्गीय चैन सिंह चौहान का अंतिम संस्कार गृह ग्राम जैत में शाम 4 बजे किया जाएगा।

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