समय सीमा पत्रों की समीक्षा बैठक संपन्न
जीतेन्द्र सेन
भोपाल।। संभागायुक्त संजीव सिंह ने सभी विभागों को सीएम हेल्पलाइन पर लंबित शिकायतों का प्राथमिकता से निराकरण करने एवं शासन की मंशा अनुसार समस्त कार्यालयीन कार्य ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए।
संभागायुक्त संजीव सिंह ने शुक्रवार को आयुक्त कार्यालय सभाकक्ष में समय – सीमा पत्रों की समीक्षा बैठक की। बैठक में राजस्व उपायुक्त किरण गुप्ता संयुक्त आयुक्त विनोद यादव एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। सिंह ने समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम हेतु चिन्हित सीएम हेल्पलाइन पर लंबित शिकायतों के संतुष्टिपूर्वक निराकरण करने एवं आगामी बैठक में प्रगति लाने के निर्देश दिए।
संभागायुक्त संजीव सिंह ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग अंतर्गत लंबित सीएम हेल्पलाइन शिकायतों की समीक्षा कर अधिकारियों को समन्वय से शिकायतों के निराकरण करने के निर्देश दिए। बैठक में चिकित्सा शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी कौंसिल, नर्सेस रजिस्ट्रेशन कौंसिल, पैरामेडिकल कौंसिल के अधिकारी उपस्थित रहे।
संभागायुक्त संजीव सिंह ने स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी को स्कूली विद्यार्थियों के नेत्र परीक्षण तथा जिन विद्यार्थियों को सहायक उपकरण या इलाज की आवश्यकता है,उन्हें उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। सिंह ने कहा इस कार्य को प्राथमिकता से करें तथा सभी विद्यार्थियों को यह सुविधा उपलब्ध कराएं।
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बैरसिया स्थित बचपन एंड निरोग्य क्लीनिक का लाइसेंस निरस्त।
प्राइवेट क्लीनिक में ली जा रही थी सरकारी चिकित्सक की सेवाएं
जीतेन्द्र सेन
भोपाल।। बैरसिया में संचालित बचपन एंड निरोग्य क्लीनिक के संचालन की अनुमति मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय भोपाल द्वारा निरस्त की गई है। इसके पूर्व क्लीनिक संचालक को सीएमएचओ कार्यालय की ओर से नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। संतोषजनक जवाब नहीं देने पर नर्सिंग होम एंड क्लीनिक एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के प्रावधानों के तहत लाइसेंस एवं पंजीयन निरस्त किया गया है।
पूर्व में इस क्लीनिक का निरीक्षण मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. मनीष शर्मा द्वारा किया गया था। इस दौरान यहां पर सिविल अस्पताल बैरसिया के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.पुष्पेंद्र चौकीकर प्रैक्टिस करते हुए पाए गए थे। सीएमएचओ द्वारा गंभीर आपत्ति लेते हुए बिना अनुमति एवं सूचना के निजी संस्था में प्रैक्टिस करने पर डॉ.चौकीकर को नोटिस जारी किए थे। निजी क्लीनिक को भी शासकीय चिकित्सक की सेवाएं लिए जाने पर मध्यप्रदेश उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण एवं अनुज्ञापन) अधिनियम 1973 एवं अधिनियम 1997 (यथा संशोधित ) 2021 के तहत नोटिस जारी किया गया था।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि क्लीनिक का लाइसेंस निरस्त किया गया है। यहां पर कोई भी चिकित्सकीय गतिविधियां नहीं की जा सकेगी। इस मामले में डॉ. पुष्पेंद्र चौकीकर को भी नोटिस दिया गया है। विभागीय नियमों के अनुसार उन पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की प्रक्रिया प्रचलन में है।
मिट्टी के गणेश निर्माण “मेरे माटी के गणेश” कार्यशाला भोपाल में
भोपाल। पिछले कई वर्षों से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गणेश प्रतिमाओं को मिट्टी से बनाने की परंपरा को अभियान का रूप दिया गया है। इसी दिशा में संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, मध्यप्रदेश द्वारा 25 अगस्त 2025 को “मेरे माटी के गणेश” शीर्षक से एक दिवसीय मिट्टी गणेश निर्माण कार्यशाला का आयोजन बाणगंगा रोड स्थित मुख्यालय परिसर में किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण अनुकूल पर्व मनाने को बढ़ावा देना है, जिसके अंतर्गत प्रतिभागियों को मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागी स्वयं प्रतिमा बनाएंगे और उसे अपने साथ घर ले जा सकेंगे। संचालनालय की ओर से मिट्टी उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही, कार्यशाला में संचालनालय के प्रतिकृति-निर्माण कार्य की जानकारी भी दी जाएगी।
प्रतिभागी शुल्क ₹100 प्रति व्यक्ति निर्धारित किया गया है। इच्छुक व्यक्ति विभागीय वेबसाइट (https://archaeology.mp.gov.in) से पंजीकरण प्रपत्र डाउनलोड कर 24 अगस्त 2025, शाम 6:00 बजे तक mparchaeology@gmail.com पर भेज सकते हैं। पंजीकरण 25 अगस्त 2025 को प्रातः 10:00 बजे तक संचालनालय कार्यालय स्थल पर भी स्वीकार किए जाएंगे। प्रवेश पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर सुनिश्चित किया जाएगा।
म.प्र.में तहसीलदारों के विरोध पर सख्त हुआ शासन,अनुपस्थिति पर गिरेगी गाज
विरोध में कार्यस्थल छोड़ने वालों पर कलेक्टर कमिश्नर करेंगे कार्यवाही, आदेश हुआ जारी
जीतेन्द्र सेन
भोपाल। मध्य प्रदेश शासन ने तहसीलदारों और अन्य राजस्व अधिकारियों की कार्यस्थल से अनुपस्थिति और विरोध प्रदर्शनों पर सख्त रुख अपनाया है। आदेश में कहा गया है कि ऐसे अधिकारी/कर्मचारी जो ड्यूटी छोड़कर विरोध में शामिल होंगे, उनके खिलाफ मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम 1965 के तहत तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
आपको बता दें कि 3 जून 2025 के मंत्रि-परिषद निर्णय के आधार पर आदेश जारी किया गया जिसमें कार्यस्थल छोड़कर विरोध, हड़ताल,धरना, अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है जिसके तहत नियम 1965 के तहत इसे कदाचार माना जाएगा। इसके लिए सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को निर्देश जारी हुए हैं कि राजस्व अधिकारी कर्मचारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। क्योंकि इनके विरोध से राजस्व कार्य बाधित हो रहे है। आपको बता दे कि हाल ही में कई जिलों में तहसीलदार और नायब तहसीलदार अपनी मांगों को लेकर विरोध कर रहे थे। इससे जमीन संबंधी कार्य, नामांतरण और अन्य राजस्व सेवाएं प्रभावित हुई। अब शासन के इस आदेश के बाद ऐसे कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई तप मानी जा रही है।
राज्य शासन के राजस्व विभाग से 14 अगस्त 2025 को जारी आदेश में कहा गया है कि जो भी राजस्व अधिकारी अपने कार्यस्थल से अनुपस्थित रहेंगे और शासन के आदेशी/घोजनाओं के विरुद्ध विरोध या आंदोलन करेंगे, उनके खिलाफ मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मध्यप्रदेश शासन ने स्पष्ट किया है कि 3 जून 2025 को लिए गए मंत्रि-परिषद निर्णय के अनुसार, इस तरह की गतिविधियां अनुशासनहीनता की श्रेणी में आती हैं और इन पर कोई डील नहीं दी जाएगी। आदेश में सामान्य प्रशासन विभाग के स्थाई निर्देश (22 नवम्बर 2006) का हवाला देते हुए कहा गया है कि सरकारी सेवकों के हड़ताल, धरना, सामूहिक अवकाश और कामकाज में बाधा डालने वाले कृत्य सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत कदाचार माने जाते हैं।
पत्र में यह भी निर्देश दिया गया है कि अनुपस्थित रहकर शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के नाम, पद और कृत्यों का ब्यौरा तत्काल विभाग की ओर भेजा जाए, ताकि बिना देरी के कार्रवाई की जा सके।
बात में कुछ दम है, यूंही कोई दीवाना नहीं होता, सारणी के वकील के हिस्से एक मिलियन व्यूवर्स का रिकॉर्ड
भोपाल। वह कुछ कहते हैं तो अफसाना बन जाता है। हर कोई उनका दीवाना बन जाता है। बात कुछ इस सलीके से कही गई कि देखते ही देखते अकेले शुरू हुए सफ़र के साथ कारवां जुड़ गया। मप्र के सारणी के अय्यूब मंसूरी के साथ अब एक मिलियन व्यूवर्स जुड़ गए हैं। पेशे से एक अधिवक्ता जितने अपने कार्य के लिए समर्पित हैं, उससे ज्यादा उनमें रिश्ते निभाई की कला है। यही वजह है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से लेकर हर सामाजिक क्षेत्र में उनके नाम की पुकार है।
वरिष्ठ अधिवक्ता व वरिष्ठ पत्रकार अय्यूब मंसूरी ने फेसबुक क्रिएटर के रूप में एक मिलियन व्यूवर्स का रिकॉर्ड अपने नाम किया है। इसके पहले भी एक मिनट से ऊपर देखने वाले दर्शकों की संख्या में 10 लाख प्रतिशत की बढ़ोतरी का रिकॉर्ड भी उनकी झोली में आया है, जो बैतूल जिले के लिए गौरव की बात है। मोक्षधाम में कई अंत्येष्टि के मौन धारण करने, गाय का सफल रेस्क्यू करने, तुलसी विवाह वाली रात में पंडित के न मिलने पर गायत्री मंत्र से विवाह रचाने, रामनवमी और धार्मिक जुलूस में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेकर पुष्प वर्षा करने, माइक पर हनुमान चालीसा पढ़ने, रामसत्ता के मंच संचालन करने, गरीबों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करने, हरिद्वार में हर की पौड़ी के दर्शन करने, गरीब बच्ची की शादी का खर्च उठाकर कन्यादान करने, रंगारंग कार्यक्रम करने, सारनी में कॉलेज खोलने में अहम भूमिका निभाने, सारनी में ईटीवी चैनल में मिसेज भाग्यशाली के 6,6, एपिसोड की शूटिंग कराने, प्रदेश स्तरीय प्रेमपत्र प्रतियोगिता कराने, शहर को पर्यटक स्थल बनाने के लिए प्रयास करने के अलावा सभी के सामाजिक धार्मिक कार्यों में आगे आ कर बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। जब मंसूरी से उनकी सफलता के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा मैं सभी को चाहता हूं, इसलिए सभी धर्म समाज के लोग भी मुझे चाहते हैं। इसलिए मेरी फेसबुक आईडी में मुझे लगातार दर्शक देख रहे हैं।
आ गया फरमान : हज कमेटी की नजर हाजियों के 30 अरब रुपए पर
कुर्रे के साथ ही जारी कर दी पहली किस्त की मांग,मई 2026 में होगा हज सफर
खान आशु
भोपाल। मई 2026 में होने वाली हजयात्रा के लिए सेंट्रल हज कमेटी को पैसा 8 महीने पहले चाहिए़। इस मांग की तैयारी उसने प्रदेशों का हज कोटा और इसके मुताबिक कुर्रा करने से पहले ही कर ली थी। दरअसल उसकी नजर हाजियों से मिलने वाले करीब 30 अरब रुपए पर है। जिसका बैंक ब्याज उसे 8 महीने तक मिलता रहेगा। इस राशि का उपयोग कमेटी क्या करती है, इसका जवाब भी किसी के पास नहीं है।
हज कमेटी ऑफ इंडिया ने हज कुर्रा के तुरंत बाद 13 जुलाई की शाम को चयनित हाजियों से पहली किस्त की रकम मांग ली है। यह रकम 20 अगस्त की समय सीमा में डीडी के जरिए जमा करने के लिए कहा गया है। 1 लाख, 52 हजार, 300 रुपए से 300/रुपए नॉन रिफंडेबल बताए गए हैं। इस प्रक्रिया से पूरे देश से करीब 30 अरब रुपए जमा होने की उम्मीद की जा रही है।
8 महीने होगा उपयोग
देश भर से करीब 2 लाख हाजी मुकद्दस सफर पर जाते हैं। इन चयनित हाजियों से पहली किस्त के रूप में 1 लाख, 52 हजार, 300 रुपए की राशि मांगी गई है। इसके मुताबिक हज कमेटी को 30 अरब, 460 लाख रुपए जमा होंगे। इसका इस्तेमाल मई माह में होने वाले हज के लिए किया जाएगा। तब तक यह राशि हज कमेटी के बैंक खाते में जमा रहेगी। इस पर मिलने वाला ब्याज भी हज कमेटी को मिलेगा, जिसका कोई हिसाब नहीं है।
कमेटी कर रही गैर शरई काम
मजहब ए इस्लाम में ब्याज का लेना और यहां तक कि लेना भी गैर शरई माना जाता है। हज कमेटी मिलने वाले बैंक ब्याज से क्या काम कर रही है, यह नहीं बताया गया है। लिए हज जैसे मुकद्दस सफर में अगर यह राशि शामिल होती है तो किसी अकीदतमंद के हज खर्च में ब्याज का घालमेल होने की संभावना रहेगी।
कैसे जमा होंगे 20 तक
हज कमेटी ऑफ इंडिया ने पहली किस्त 20 अगस्त तक जमा कराने के लिए कहा है। लेकिन 13 अगस्त की शाम आए इस फरमान की सूचना चयनित हाजियों को 14 अगस्त को दी गई है। इसके बाद 15, 16 और 17 को बैंक बंद रहेंगे। इसके बाद उन्हें पहली किस्त की राशि जमा करने के लिए महज तीन दिन का समय मिलेगा।
इनका कहना है
हज कमेटी ऑफ इंडिया किस्तों में राशि की मांग करती है। पैसा भी उनके खाते में ही जमा होता है। अंतिम तारीख बढ़ाने के लिए पत्र लिखा जाएगा।
रफत वारसी
अध्यक्ष, प्रदेश हज कमेटी
हर जिले में फहराए हज कमेटी तिरंगा, जारी हुआ आदेश
भोपाल। प्रदेश में हर घर तिरंगा फहराने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इस राष्ट्रीय पर्व में हज कमेटी की जिला इकाईयां भी शामिल हों, इसके लिए प्रदेश कार्यालय से आदेश जारी किए गए हैं।
प्रदेश हज कमेटी के अध्यक्ष रफत वारसी ने पत्र जारी किया है। इसमें सभी जिला कमेटियों और सामाजिक संगठन तथा हर नागरिक को स्वतंत्रता दिवस पर्व में शामिल होने की ताकीद दी गई है। रफत ने अपने पत्र में तिरंगा अभियान में अनिवार्य रूप से शामिल होने के लिए कहा है।
हर घर तिरंगा
हर तिरंगा अभियान में शामिल होते हुए रफत वारसी ने हज हाउस, सिंगारचोली पर तिरंगा लगाया। इस दौरान कमेटी अधीक्षक मसूद अख्तर, फाजिल कैफ, अजहर खान, अब्दुल कलाम और अन्य कमेटी कर्मचारी मौजूद थे।
हज में होगा झंडावंदन
स्वतंत्रता दिवस पर सारे देश के साथ हज कमेटी भोपाल में भी झंडावंदन कार्यक्रम होगा। कमेटी अध्यक्ष रफत वारसी, सीईओ फरजाना गजाल और अन्य कर्मचारी इस अवसर पर मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में को लेकर अध्यक्ष ने कहा कि यह हमारी अस्मिता का पर्व है। आजादी के इस पर्व पर हम अपने वीर जवानों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के प्रति कृतज्ञता जताते हैं। राष्ट्रीय ध्वज को अपने माथे सजाकर उसके सामने अदब से सिर झुकाते हैं।
मसखरे ने मसखरी की, अधिकारी ने बिना जांचे कर दिए हस्ताक्षर
बना दिया 3 रुपए सालाना आमदनी का प्रमाण पत्र शिकायतों के बाद मची खलबली
भोपाल। दुनिया का अनोखा आय प्रमाण पत्र बनाने के बाद विभाग में अब हड़कंप का माहौल है। इस प्रमाण पत्र में आवेदक की सालाना आमदनी मात्र 3 रुपए दर्शाई गई थी। अब विभाग की सफाई यह है कि यह प्रमाण पत्र महज मजाक के लिए किसी ऑनलाइन वाले ने बना दिया है। विभाग अब इस बात से भी बचता नजर आ रहा है कि इस प्रमाण पत्र को सिग्नेचर करने से पहले जांचने की जिम्मेदारी उसकी थी।
जानकारी के मुताबिक यह अनोखा प्रमाण पत्र सतना जिले के नयागांव तहसील से जारी हुआ है। कहा जा रहा है कि ग्राम कोठी के रहने वाले एक व्यक्ति रामस्वरूप के नाम पर एक आय प्रमाण पत्र जारी किया गया है। इस प्रमाण पत्र के अनुसार रामस्वरूप की वार्षिक आय मात्र 3 रुपए दर्शाई गई है। इसके अनुसार रामस्वरूप की महीने की आमदनी मात्र 25 पैसे है।
अब मचा हड़कंप
मात्र 3 रुपए का आय प्रमाण पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। साथ ही इसको लेकर यहां से वहां तक शिकायतें भी की जा रही हैं। जिसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्यवाही भी की गई है।
गलती, जो अधिकारियों ने की
इस मामले में वास्तविक त्रुटि तहसीलदार और पटवारी की है। पटवारी ने अपनी तरफ से बिना जांच किए प्रमाण पत्र आगे बढ़ा दिया। जबकि तहसीलदार ने बिना देखे ही इस गलतियों से भरे प्रमाण पत्र पर दस्तखत कर दिए। हालांकि मामला उजागर होने के बाद आवेदक रामस्वरूप का मोबाइल बंद आ रहा है। जबकि पटवारी और तहसीलदार इसे किसी ऑनलाइन वाले की शरारत करार दे रहे हैं। जिसके लिए प्रारंभिक तौर पर शिकायत भी दर्ज कराई गई है।
सात महीने बाद भी पद का तमगा, पोस्ट DIG की काम SP का!
भोपाल। राज्य सरकार ने एक जनवरी 2025 से चार पुलिस अधीक्षकों को पदोन्नत कर डीआइजी बनाया और चार डीआइजी को आइजी के पद पर पदोन्नत किया। डीआइजी के पद पर पदोन्नत चारों अधिकारियों की पदस्थापना को लेकर सात माह बाद भी सरकार निर्णय नहीं ले पाई है।इन अधिकारियों का पदनाम तो बदल गया, पर काम वही कर रहे हैं। जिन्हें डीआइजी बनाया गया था, उनमें एसएसपी रेडियो विजय कुमार खत्री, एसपी धार मनोज कुमार सिंह, पुलिस मुख्यालय में एआइजी राकेश कुमार सिंह और विनीत जैन शामिल हैं।
इसके बाद राजेश चंदेल और शचींद्र चौहान को पदोन्नत कर डीआइजी बनाया है। इनमें चंदेल को रीवा डीआइजी बना दिया गया है, पर चौहान को अभी उच्च्च पद पर पदस्थापना की प्रतीक्षा है। वह अभी 32वीं वाहिनी उज्जैन में सेनानी हैं।
इसी तरह सचिन अतुलकर,
कृष्णावेनी, कुमार सौरभ और जगत सिंह राजपूत को डीआइजी से आईजी के पद पदोन्नत किया गया था। इनमें जगत सिंह राजपूत को छोड़ सभी को नई जगह पदस्थापना मिल गई राजपूत पुलिस मुख्यालय में योजना शाखा में डीआइजी थे। उनका सिर्फ पदनाम बदला काम नहीं। अगस्त में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इन कृष्णावेनी को छोड़ दें तो सचिन अतुलकर और कुमार सौरभ को जून में नई पदस्थापना मिली। दतिया एयरपोर्ट के उद्घाटन में आइजी सुशांत सक्सेना और एसपी वीरेंद्र मिश्रा बीच कहासुनी के बाद इन दो अधिकारियों के अतिरिक्त कुम्म सौरभ को हटाकर पुलिस मुख्याल में आइजी और अतुलकर को सक्सेना की जगह चंबल आइजी बनाया गया।
हां और न के बीच झूल रहे कई फैसले…
राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर उप राष्ट्रपति की नियुक्ति है बाकी
भोपाल। अब भी बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो पाया है। एक तरफ उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हैं तो वहीं बीजेपी संगठन की फाइनल रूपरेखा अभी तैयार नहीं हो पाई है। इसी बीच चर्चा थी कि अध्यक्ष पद के लिए नाम पर बीजेपी और आरएसएस के बीच सहमति नहीं बन पाई। अब ख़बर मिली है कि एक नए नाम को लेकर संघ ने हरी झंडी दे दी है। बस अब पीएम नरेंद्र मोदी की मंजूरी का इंतजार है।
भाजपा के सामने फिलहाल दो बड़े काम रखे हैं। हालांकि इन पर अंतिम मोहर पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की लगना है। बावजूद इसके प्रक्रिया पूरी करने की मजबूरी बनी हुई है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर संघ और भाजपा संगठन में जूतमपेजार के हालात बने हुए हैं। जहां संघ इस पद पर अपनी पसंद का व्यक्ति बैठाना चाहता है, वहीं मोदी और शाह की जोड़ी इसके सूत्र अपने हाथ में रखना चाहती है। यही वजह है कि अध्यक्षीय घोषणा अब तक अटकी हुई है। संघ इस पद पर कोई सॉफ्ट नाम सामने लाकर सबका साथ और सबका विकास का नारा बुलंद करना चाहता है। उसने नितिन गडकरी या शिवराज सिंह चौहान जैसे नाम पर अंतिम मोहर लगाने का मन बना रखा है। जबकि मोदी और शाह एक ऐसा चौंकाने वाला नाम सामने लाने के पक्ष में है, जिसकी किसी को कल्पना भी नहीं है। मप्र का सीएम और प्रदेश अध्यक्ष वाला फार्मूला यहां भी अपनाया जा सकता है।
बीच कार्यकाल पद से निवृत्त होने वाले उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के बाद इस पद पर भी नियुक्ति की तैयारी है। मोदी और शाह की जोड़ी इसके लिए भी किसी वफादार का नाम तय करने की फिक्र में हैं। धनखड़ की रुखसत के बाद कई नामों पर चर्चा है, कई नाम उछाले जा रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला दरबार से ही होगा। फिलहाल इंतजार किया जा रहा है।
