पहले अस्पताल स्टॉफ ने गुंडों को बुलाकर पिटवाया फिर पुलिस ने भी अपनी मर्जी से लिखी एफआईआर

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पीड़ित के आरोप से उठ रहे थाने की कार्यशैली पर सवाल

भारत भूषण विश्वकर्मा
7400794801

भोपाल। किसी भी सभ्य समाज में चिकित्सीय पेशे को बेहद सम्मानजनक नजर से देखा जाता है, चिकित्सकों की तारीफ में तो उन्हें जीवित भगवान भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि चिकित्सक अपने परिश्रम से जिंदगी और मौत से लड़ रहे मरीजों को नया जीवन देते हैं, इसके साथ ही उच्च शिक्षित चिकित्सकों के विचार तथा व्यवहार से भी समाज को नई दिशा मिलती है। लेकिन बीते कुछ समय में चिकित्सा क्षेत्र के सम्मान का हास हुआ है, और कई लोग अपने आचरण से इस सम्मानित पेशे को कलंकित करते दिख रहे हैं। ताजा मामला राजधानी के थाना ईंटखेड़ी के अंतर्गत आने वाले लीलावती अस्पताल का है जहां के डॉक्टर स्टॉफ समेत मालिक पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इतना ही नहीं पीड़ित ने उच्च अधिकारियों से शिकायत करते हुए स्थानीय पुलिस थाने के कर्मचारी पर भी “स्वयं की मर्जी के मुताबिक” एफआईआर दर्ज करने के आरोप लगाए हैं। पीड़ित मलखान मीणा के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों से उन्हें न्याय मिलने का आश्वासन मिला है।

क्या है पूरा मामला
अस्पताल में भर्ती अपने भाई से मिलने जाना पीड़ित मलखान  को उस समय बेहद भारी पड़ गया जब अस्पताल के डॉक्टर ने पीड़ित के साथ बिना वज़ह गाली गलौज और मारपीट कर दी। पीड़ित का शिकायती आवेदन बताता है कि इसके बाद भी डॉक्टर गोलू धाकड़ द्वारा लगभग एक दर्जन से अधिक गुंडो को बुलाकर उनके साथ दोबारा मारपीट कराई गई। पीड़ित मलखान मीणा के अनुसार उनके साथ लगभग दर्जनभर से अधिक बदमाशों द्वारा मारपीट की गई है। वहीं लीलावती अस्पताल के मालिक वीरेंद्र सैनी और उनकी पत्नी पर भी धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं। पीड़ित मलखान मीणा ने जैसे तैसे पुलिस को बुलाकर अपनी जान बचाई, लेकिन इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन के माफिया रूप को उजागर कर दिया है।

क्या, वाकई अपनी मर्जी से रिपोर्ट लिख रही पुलिस
पीड़ित के अनुसार मारपीट के बाद उसने पुलिस को बुलाया और उसी पुलिसकर्मी के साथ रिपोर्ट लिखाने थाना ईंटखेड़ी पहुंचा। वरिष्ठ अधिकारियों को दिए शिकायती आवेदन में मलखान ने स्पष्ट आरोप लगाए हैं कि पुलिस ने उनके बताए विवरण की जगह खुद की मर्जी से एफआईआर दर्ज की है। पीड़ित का कहना है कि लीलावती अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों में उसके साथ हुई मारपीट के साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें स्थानीय पुलिस द्वारा अभी तक बरामद नहीं किया गया है। इसके साथ ही पीड़ित का कहना है कि अस्पताल मालिक वीरेंद्र सैनी की कार से ही आए बदमाशों द्वारा उनपर हमला किया गया, जबकि पीड़ित द्वारा उपलब्ध कराए जाने के बाद भी पुलिस ने रिपोर्ट में न तो वीरेंद्र सैनी का जिक्र किया है और न ही उनकी कार का का। एक तरफ पीड़ित के गंभीर आरोप पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं वहीं दूसरी ओर पीड़ित मलखान वरिष्ठ अधिकारियों से न्याय की आस लगाए हुए है।


इनका कहना है

पीड़ित की शिकायत के अनुसार हर बिंदु पर जांच कराई जाएगी।

मंजू चौहान, एसडीओपी ईंटखेड़ी

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