अवैध प्लाटिंग बेखौफ जारी, चार सौ से 4 हजार रुपये प्रति वर्गफीट तक बेचे जा रहे प्लाट

Share :

भारत भूषण ।
7400794801

भोपाल । राजधानी के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि पर आवासीय प्लाटों और भूखंडों को बेचने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। गौर करने वाली बात यह है कि जिला प्रशासन, टीएनसीपी और रेरा की नाक के नीचे अवैध प्लाटिंग का कारोबार अपने चरम पर है। भोपाल जिले के ग्रामीण इलाकों की बात करें तो यहां दर्जनों नहीं बल्कि सैकड़ों कॉलोनाइजर और प्रॉपर्टी डीलर्स रेरा, टीएनसीपी समेत अन्य आवश्यक अनुमतियों के बिना बेखौफ प्लाट बेच रहे हैं। स्थिति यह है कि शहर के मुख्य मार्गों पर ही कैनोपी लगाकर 51 हजार रुपये की डाउन पेमेंट पर आसान किश्तों में प्लॉट उपलब्ध होने का प्रचार किया जा रहा है। यही नहीं, कई कालोनाइजरों द्वारा तो निवेशकों एवं ग्राहकों को रिझाने के लिए आसपास के बड़े या शासकीय प्रोजेक्ट के पास होने के फायदे भी दिखाए जा रहे हैं। कृषि भूमि पर अविकसित कालोनी में 600 से एक हजार रुपये प्रति वर्गफीट में प्लाट बेचे जा रहे हैं, शहरी भोपाल के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध प्लाटिंग का गोरखधंधा पूरे शबाब पर है। आलम ये है कि जरूरी अनुमतियों के बिना भी 4 सौ रूपये से 4 हज़ार रुपये वर्ग फिट तक प्लॉट बेचे जा रहे हैं। अवैध तरीके से बिना अनुमति प्लॉट और फॉर्म हाउस बेचे जाने की बात को एसडीएम आशुतोष शर्मा ने गंभीरता से लेने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अवैध प्लॉटिंग कारोबार की जानकारी एकत्रित करने के लिए मैदानी अमले को निर्देशित किया गया है, जानकारी प्राप्त होते ही नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।

न सुविधाओं की चिंता, न वादों की फिक्र
प्लाटिंग के कार्य से जुड़े कई कॉलोनाइजर और बिल्डर्स प्लॉट बेचने के लिए अपनी प्रचार प्रसार सामग्री में लुभावने वादे करते नज़र आते हैं, लेकिन भव्य गेट, रोड, सीवेज ड्रेनेज सिस्टम, पार्क, मंदिर बनाने जैसे कई वादे पूरे नहीं किये जाते।

सुविधाओं को तरस रहे रहवासी
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सालों पहले कृषि भूमि में बनाई गई कई कालोनियों की स्थिति आज भी खेतों जैसी ही है, और तो और आने जाने के लिए पक्के रोड़ों तक की व्यवस्था कॉलोनाइजरों द्वारा नहीं की गयी। इसके अलावा कई कालोनियों में बिजली पानी जैसी आवश्यक सुविधाओं के अभाव में रहवासी नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। क्योंकि शासकीय अनुमतियां न होने के कारण रहवासियों को मूलभूत सुविधाएं सुविधाएं मिलने में काफी समय लग जाता है।

गरीब वर्ग कैसे बनता है भू माफिया का शिकार
भोपाल में एक आशियाने का सपना संजोने वाला कम आमदनी में गुज़र बसर करने वाला गरीब वर्ग सस्ते दामों में या कुछ पैसे जमाकर किश्तों में प्लाट खरीदने के झांसों में आसानी से आ जाता है। अपनी मेहनत और बचत की कमाई को प्लाट खरीदने में खर्च करने के बाद ग्राहक को अपने साथ हुए धोखे की जानकारी तब लगती है, जब कालोनाइज़र द्वारा बुनियादी और जरूरी सुविधाएं देने में आनाकानी की जाने लगती है। जिसके बाद अपने को ठगा सा महसूस करते ग्राहकों के पास कालोनाइजरों के चक्कर लगाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu