चकरघिन्नी.कॉम
खान आशु
आदत बरसों की… न बदली है, न बदल पाएगी… सब एक बराबर, न कोई छोटा, न बड़ा…! करने पर आए तो साहेब के वाहन को भी निशाना बना डाला…! एक नहीं, दो नहीं, पूरे नौ वाहन…! सबमें नकली माल…! दिक्कत यह है कि असली हो तो डाला जाए…! जो था, वह परोस दिया…! पता इसलिए चल गया कि वाहन में साहेब खुद साक्षात मौजूद थे…! परेशान भी हुए और लेट भी…! मालिक ए पंप को सजा मिली, सील कर दिए गए…! यह सजा तो हुई साहेब के परेशान होने की, जो बरसों से परेशान हो रहे हैं, इस पंप से ठगा रहे हैं, पानी का मोल पेट्रोल जितना दाम चुका रहे हैं, उनका क्या…? और उनका क्या जो पूरे प्रदेश में इसी तरह लूटे जा रहे हैं…?
नियम, कायदा, कानून, व्यवस्था बने तो सबके लिए बनना चाहिए, किसी बड़े और अहम इंसान के ठगने, लुटाने का इंतजार क्यों…? राजधानी भोपाल हो या प्रदेश के किसी कोने में बसा गांव, सब जगह पंप पर पेट्रोल पूरा और गुणवत्ता वाला मिल जाए तो लेने वाले की किस्मत…! वरना चोरी और मिलावट की मिकदार तो यह है कि बिना वेतन पंप पर सेवाएं देने के लिए लोग तैयार बैठे हैं..!
पुछल्ला
नफरत की जीत
राजधानी के एक कॉलेज की प्राचार्या इन दिनों चर्चा में हैं। वजह नफरत का प्रसार करने में इनकी अगुवाई। किसी धार्मिक क्रिया से इन्हें दिक्कत है। शाबाशी देने के लिए सियासत, सत्ता, प्रशासन और नफरती चिंटू तैयार बैठे हैं।
27/जून/2025
