बाल विद्यार्थियों के बीच मनाया त्यौहार, भेंट किये कंबल, खूब हुई आतिशबाजी
भोपाल। क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य और वरिष्ठ भाजपा नेता चेतन सिंह ने बजरिया स्टेशन क्षेत्र बालक छात्रावास में विद्यार्थियों के साथ देवउठनी एकादशी का त्यौहार मनाया। बता दें कि चेतन सिंह विगत कई वर्षों से बाल विद्यार्थियों के साथ दीपोत्सव मनाते आ रहे हैं। कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए चेतन सिंह ने देवउठनी एकादशी को शुभता और मंगल का वाहक पर्व बताया, इसके साथ ही उन्होंने तुलसी शालिग्राम विवाह प्रसंग पर भी विस्तृत व्याख्या की। कार्यक्रम में बाल विद्यार्थियों ने जमकर आतिशबाजी की और एक दूसरे को देवउठनी एकादशी की शुभकामनाएं दीं वहीं कार्यक्रम में चेतन सिंह द्वारा जरूरतमंद विद्यार्थियों को कंबल भेंट किये गए।
खान आशु भोपाल। अकीदत के सफर पर जाने के ख्वाहिशमंदों को हज खर्च की पहली किस्त जमा करने के लिए दिया गया तीसरा मौका भी पूरा हो गया है। 11 नवम्बर की आखिरी तारीख तक कई आवेदक राशि जमा करने से चूक गए हैं। हालांकि इनका एग्जेक्ट डेटा 14 नवम्बर को डॉक्यूमेंट्स जमा करने की आखिरी तारीख को ही स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल यह माना जा रहा है कि समय से बहुत पहले मांग ली गई राशि और हज खर्च में हुई बढ़ोतरी ने कई आवेदकों के कदम रोक दिए हैं और वे निर्धारित समय पर पहली किस्त जमा नहीं कर पाए हैं। जानकारी के मुताबिक हज 2025 के लिए चुने गए आवेदकों से सेंट्रल हज कमेटी ने हज खर्च की पहली किस्त मांगी है। पूर्व में दो बार निर्धारित की जा चुकी तारीख के बाद इसके लिए 11 नवम्बर तक की अंतिम तारीख तय की गई थी। सूत्रों का कहना है कि सेंट्रल हज कमेटी ने प्रदेश हज कमेटियों को भेजे पत्र में स्पष्ट कर दिया है कि इस अंतिम तारीख के बाद अब किस्त जमा करने के लिए समय की बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। इस बीच सूत्रों का यह भी कहना है कि आखिरी तारीख तक बड़ी तादाद में आवेदक किस्त की राशि जमा करने से चूक गए हैं। इसके चलते यह आवेदक अब हज सफर पर नहीं जा जाएंगे। इन बची हुई सीटों पर उन आवेदकों को मौका मिल सकता है, जिनके नाम आवेदक चयन के दौरान प्रतिक्षा सूची में रखा गया है।
14 तक जमा होंगे डॉक्यूमेंट हज खर्च की पहली किस्त जमा करने की आखिरी तारीख गुजरने के बाद अब हज आवेदकों को अपने डॉक्यूमेंट्स हज कमेटी में जमा कराने हैं। 14 नवम्बर की आखिरी तारीख के साथ आवेदकों को अपना मूल आवेदन, पासपोर्ट की मूल प्रति, किस्त जमा करने की पे इन स्लिप, मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट, फोटो आदि जमा करना हैं। कहा जा रहा है कि डॉक्यूमेंट्स जमा करने की इस तारीख के साथ ही यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि चुने गए आवेदकों में से कितने लोगों ने अपनी किस्त जमा कराई है।
खान आशु भोपाल। प्रदेश के मुस्लिम मतदाताओं को सहेजने की कोशिश में जुटी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) पैर पसारने से पहले ही सिमट गई। इसकी बिखरी हुई छुटपुट टीम भी यहां वहां पलायन करती नजर आने लगी है। इसी बीच प्रदेश में एक नई आमद के तौर पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने अपनी जमावट शुरू कर दी है। AIMIM को प्रदेश और राजधानी भोपाल में खास पहचान देने वाले तौकीर निजामी के हाथों प्रदेश में अपनी बात रखने की जिम्मेदारी सौंपकर IUML ने अपनी नई और सफल पारी खेलने की तरफ कदम बढ़ा लिए हैं। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने हाल ही में अपने प्रदेश पदाधिकारियों का ऐलान किया है। राजधानी भोपाल में हुई एक बैठक के दौरान तौकीर निजामी को प्रदेश प्रवक्ता घोषित किया गया। पार्टी के ज्वाइंट सेक्रेटरी डॉ एम यासिर राज ने उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपते हुए इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग IUML का परचम थमाया। इस मौके पर तौकीर निजामी के साथ बड़ी तादाद में कार्यकर्ताओं ने अपनी आस्था इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग IUML के साथ दिखाते हुए पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। कार्यक्रम के दौरान डॉ राज ने डॉ आसिफ अली को प्रदेश के संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी सौंपी। बैठक में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग IUML के प्रदेश अध्यक्ष जावेद खान के अलावा कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे।
निजामी पर इसलिए भरोसा सूत्रों का कहना है कि AIMIM की प्रदेश में शुरुआती यात्रा के दौरान तौकीर निजामी ने महती भूमिका निभाई है। पार्टी मुखिया असद उद्दीन ओवैसी की प्रदेश की इकलौती आमसभा से लेकर प्रदेश के निकाय चुनावों में परिणाम लाने वाले प्रदर्शन का जिम्मा भी उन्होंने ही निभाया है। विपक्ष की भूमिका निभाते हुए सत्ता पक्ष को घेरने के लिए मुखर रहना भी तौकीर की खासियतों में शामिल है। सूत्रों का कहना है कि IUML पहले तौकीर को प्रदेश में किसी बड़े पद पर आसीन करने का मन बना चुकी थी, लेकिन उनकी क्षमताओं और पार्टी की जरूरत के लिहाज से उन्हें प्रवक्ता की भूमिका में उतारा गया है।
IUML का भविष्य दक्षिण भारत में कुछ सांसद, कई विधायक और राज्यसभा सांसद रखने वाली IUML प्रदेश के मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों में अपना वर्चस्व स्थापित कर सकती है। भाजपा से उपेक्षित और कांग्रेस से ठगे हुए मुस्लिम वोटर्स के लिए यह एक बेहतर विकल्प हो सकता है। प्रदेश की करीब 45 विधानसभा में अपना बाहुल्य रखने वाले मुस्लिम समुदाय को अपना वोट एकमुश्त दिखाकर अपनी ताकत दिखाने का मौका IUML के साथ मिल सकता है।
यहां है मुस्लिम बहुलता प्रदेश की कई विधानसभा सीटों पर मुस्लिम वोट प्रतिशत हार जीत का फैसला करने के हालत रखता है। इंदौर संभाग के धार, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन के अलावा इंदौर की आधी विधानसभा सीटों पर मुस्लिम समुदाय का वर्चस्व है। इसी तरह उज्जैन संभाग में रतलाम, मंदसौर, शाजापुर, शुजालपुर में भी बड़ी तादाद में मुस्लिम मतदाता मौजूद हैं। प्रदेश की राजधानी भोपाल की तीन विधानसभा मुस्लिम बहुल मानी जाती हैं। जबकि इस संभाग के राजगढ़, विदिशा, रायसेन, सीहोर, बैरसिया में भी मुस्लिम वोटर्स की बड़ी तादाद मौजूद है। इधर सागर, जबलपुर, सतना, ग्वालियर जैसे कई जिलों में भी मुस्लिम वोटर्स मौजूद हैं।
खान आशु भोपाल। केरल के राज्यपाल मोहम्मद आरिफ प्रदेश की यात्रा पर आए हुए थे। इस दौरान कुछ सरकारी और कई निजी कार्यक्रमों में उन्होंने शिरकत की। भोपाल में सोमवार को एक खास मुलाकात के दौरान कहा कि एकता का भाव सभी में होना चाहिए। हम सभी को एक होने की आवश्यकता है। “बंटोगे तो कटोगे” जुमला सिर्फ हिंदुओं धर्म, जाति या वर्ग विशेष के लिए नहीं है, बल्कि इसमें छिपी भावनाओं को समझने और आत्मसात करने की जरूरत है। राज्यपाल मोहम्मद आरिफ ने कहा कि “बंटोगे तो कटोगे”, को एक सियासी जामा पहना दिया गया है और एकता के इस पाठ को नफरत फ़ैलाने और बांटने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। जबकि इस देश की संस्कृति एकता, अखंडता, सद्भाव और सौहाद्र की रही है। कुछ सियासी मफ़ाद पूरा करने की चाहत में लोगों ने इसके गलत अर्थ निकाल लिए और इन्हीं को एक समुदाय विशेष में पसार कर बांटने की तरफ बढ़ गए हैं। राज्यपाल ने कहा कि नफरत और बंटवारे के नाम पर कई बरस देश पर सियासत की जाती रही। सत्ता सुख उठाया जाता रहा, लेकिन अब इस देश का हर व्यक्ति शिक्षित भी और समझदार भी, वह अब इन सियासी हथकंडों को बेहतर समझने भी लगा है और इस कॉकस से बाहर निकलने को आतुर एवं छटपटाया हुआ भी है।
कोई डरा हुआ नहीं… एक सवाल के जवाब में मोहम्मद आरिफ ने कहा कि देश के हालात दिनों दिन बेहतरी की तरफ बढ़ रहे हैं। यहां किसी को कोई परेशानी नहीं है और न ही कोई किसी से डरा हुआ है। अपने देश में, अपने लोगों के बीच किसी को किसी डर या खौफ हो सकता है। यह डर और डर की बातें सियासी जुमलों की तरह फैलाई जाती हैं, जिनका कोई अस्तित्व नहीं है। समय के साथ इनकी सच्चाई और हकीकत सामने आ जाएगी।
कौन हैं मोहम्मद आरिफ
मोहम्मद आरिफ केरल के राज्यपाल हैं। संघ विचारधारा से जुड़े आरिफ का नाम उप राष्ट्रपति के रूप में भी उछला था। लेकिन बाद में बदले समीकरण के बीच यह पद किसी और के हिस्से चला गया था। हालांकि इस कयास को जातिगत समीकरण से भी जोड़ा गया था लेकिन इसके जवाब में इस दलील को रखा गया था कि इस तरह का भेदभाव किया जाता तो डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को देश के प्रथम नागरिक होने का सम्मान न मिला होता।
खान आशु भोपाल। नजर और नजरिया बदलेगा तो नजारा खुद ब खुद बदला हुआ नजर आएगा। राजधानी भोपाल की एक साहित्यिक सामाजिक संस्था ने इसी धारणा के साथ एक आयोजन किया। दो दिवसीय इस आयोजन में अलग अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों को जुटाया गया। शिक्षा, साहित्य, संस्कृति और जन सरोकार से संबद्ध व्यक्तित्व को सराहने की बारी आई तो संबंधित क्षेत्र के जमीनी लोगों को भी इसमें शामिल किया गया। गंगा जमुनी तहजीब को जिंदा रखने के प्रयास भी इस दौरान बढ़ाए गए। शिक्षा और भाषा के लिए समर्पित यह कार्यक्रम बेनजीर अंसार एजुकेशन एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी ने आयोजित किया था। कार्यक्रम की रूपरेखा बनाने वाले रिटायर डीजीपी एमडब्ल्यू अंसारी अपने कार्यकाल में न तो शिक्षा से संबंधित रहे, न ही भाषा, साहित्य या संस्कृति से उनका कोई ताल्लुक था। सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक समरसता और सरोकार से जुड़े कामों के दौरान वे राजधानी को बहु आयामी और परिणाम मूलक आयोजन देने की महारत समेटते जा रहे हैं। इसी कड़ी में विश्व शिक्षा दिवस और उर्दू दिवस की परिकल्पना के बीच अंसारी ने कई नए आयाम स्थापित किए। कार्यक्रम के विषय, शामिल किए जाने वाले मेहमानों से लेकर सम्मानित किए जाने वाले व्यक्तियों तक में उन्होंने कुछ नयापन लाने और प्रचलित परिपाटी को मिटाने की कोशिश कर डाली।
एक मंच शहर के साहित्यकार राजधानी में साहित्यिक कार्यक्रमों की सफलता की गारंटी कहे जाने वाले प्रो नौमान खान, इकबाल मसूद, डॉ अली अब्बास उम्मीद जैसे नाम यहां मौजूद थे तो आजम अली खान, डॉ हस्सान उद्दीन फारूखी, डॉ सैयद इफ्तिखार अली जैसी शख्सियतों ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। कार्यक्रम को सूत्रों में पिरोने की जिम्मेदारी राजधानी भोपाल से ताल्लुक रखने वाले अंतर्राष्ट्रीय शायर डॉ अंजुम बाराबंकवी और डॉ महताब आलम ने सम्हाल रखी थी।
उर्दू मंच पर माही और सुनील आमतौर पर हिंदी और उर्दू की दीवारों में बंट चुके साहित्यिक मंचों में नामों को लेकर भी परहेज रखा जाने लगा है। संस्था बेनजीर ने अदब की इस बेअदबी को दूर करने की कोशिश भी की। आयोजन के दौरान जहां मंच साझा करने के लिए कई हिंदी साहित्यकारों को जोड़ा गया तो सम्मान की श्रेणी में कई महत्वपूर्ण नामों को जोड़ा गया। गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए अग्रणीय और रेखांकित किया जाने जैसा काम करने वाली माही भजनी को इस दौरान ऐजाज से नवाजा गया। डॉ अजय त्रिपाठी और सुनील व्यास, अभिषेक वर्मा, शशांक त्यागी, डॉ अम्बरीष त्रिपाठी भी अलग अलग क्षेत्रों की अपनी सेवाओं के लिए सम्मान मंच पर मौजूद थे।
सिर्फ नाम नहीं, काम पर फोकस आमतौर पर नामवर लोगों को सम्मान, शॉल, श्रीफल और फूलों से सम्मानित किए जाने की परम्परा बनी हुई है। संस्था बेनजीर ने इस कड़ी को निचले पायदान से सहेजते हुए उन लोगों को भी सम्मान देने की पहल की, जिनके नाम अक्सर भुला दिए जाते हैं। दैनिक उर्दू नदीम के सर्कुलेशन से जुड़े सैयद महफूज अली को उनकी बरसों की सेवाओं के लिए सम्मान दिया गया। कहा गया कि यह न हों तो अखबार छप कर प्रेस में ही पड़े रह जाएं। इनकी मेहनत से लोगों को अपनी चौखट पर अखबार मिल पा रहा है। इसी तरह कंप्यूटर ऑपरेटर हाफिज असद नदवी को भी सम्मान से नवाजा गया। इसके अलावा अखबारों को खिदमत देने वाले मोहम्मद जावेद खान, रिजवान अहमद शानू, नवेद इशरत, फरहान खान, सलमान खान और खान आशु को भी पत्रकारिता क्षेत्र में दिए गए योगदान के लिए सम्मान किया गया।
लगा शायरों का मेला
संस्था बेनजीर अंसार एजुकेशन एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी के दो दिन के आयोजन के दौरान मुशायरा महफिल भी सजी। इनमें शहर के कई नामवर शायरों ने अपने कलाम पेश किए।
खान आशु भोपाल। तेजी से बदल रही मान्यताएं, धारणाएं, व्यस्तताएं और दिनचर्या ने इंसान को मशीन बना दिया है। जरूरी कामों में गैर जरूरी बातें शामिल हैं। शिक्षा और उर्दू को लेकर खत्म हो रही गतिविधियों के बीच राजधानी भोपाल में दो दिवसीय एक आयोजन किया जा रहा है। जिसमें इन दोनों क्षेत्रों के कद्दावरों की मौजूदगी में शिक्षा के महत्व को डिस्कस किया जाएगा। साथ ही उर्दू भाषा की हिफाजत की फिक्र भी इस दौरान की जाएगी। सामाजिक संस्था बेनजीर अंसार एजुकेशन एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी इस कार्यक्रम को आयोजित करेगी। संस्था के अध्यक्ष एमडब्ल्यू अंसारी ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा दिवस और राष्ट्रीय उर्दू दिवस के तारतम्य में कार्यक्रमों की यह श्रृंखला की जा रही है। इनका मकसद शिक्षा के लिए विशेष फिक्र लोगों में जागृत करना है। लोगों के व्यवहार और समाज में अन्य भाषाओं से पिछड़ती जा रही उर्दू जुबान को प्रोत्साहन देने की मंशा भी है।
यह होने आयोजन पहले दिन 9 नवंबर को विश्व उर्दू दिवस मनाया जाएगा। इस दौरान “उर्दू जुबान का तहफ्फुज और हमारी जिम्मेदारी” विषय पर सेमिनार आयोजित किया जाएगा। कमला पार्क स्थित रजा दुर्रानी हॉल में होने वाले इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ अली अब्बास उम्मीद करेंगे। कार्यक्रम में एडवोकेट हाजी मोहम्मद हारून, इकबाल मसूद, अज़म अली खान, डॉ हस्सान उद्दीन फारूखी, डॉ सैयद इफ्तिखार अली मेहमान ए खास के रूप में मौजूद रहेंगे। अंसारी ने बताया कि इसी दिन शाम को कार्यक्रम की दूसरी कड़ी में एक मुशायरा महफिल सजेगी। जिसमें डॉ अली अब्बास उम्मीद, काजी मलिक नवेद, खलील कुरैशी, अभिषेक वर्मा, इकबाल मसूद, हुमा कानपुरी, मुबारक शाहीन, भूषण दिलशाद, आरिफ अली आरिफ, साजिद प्रेमी, अजीम अशर, प्रो गौसिया खान, मकबूल वाजिद, रमेश नंद, एस एम सिराज, नौमान गौरी आदि शायर अपना कलाम पेश करेंगे। दूसरे दिन शिक्षा पर जोर कार्यक्रम के दूसरे चरण में 10 नवंबर को शिक्षा को समर्पित आयोजन होंगे। इस दौरान “तालीम तरक्की की जामिन” विषय पर बात होगी। कार्यक्रम के मेहमानों में कौसर सिद्दीकी, पीर अजहर पाशा, रईस सिद्दीकी शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ मोहम्मद नौमान करेंगे। इस कार्यक्रम का संचालन डॉ महताब आलम करेंगे। इस दिन समापन सत्र में भी एक मुशायरा महफिल सजेगी। जिसमें शहर और प्रदेश के कई नामवर शायर अपना कलाम पेश करेंगे।
सम्मान सत्र भी होगा
कार्यक्रम के दूसरे दिन रविवार को एक सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, पत्रकारिता और विभिन्न क्षेत्रों में अपने काम से विशेष सहयोग देने वाले व्यक्तियों का सम्मान किया जाएगा। कार्यक्रम में मध्य विधायक आरिफ मसूद मुख्य अतिथि होंगे। जबकि सैयद जलाल उद्दीन, सैयद ताहा पाशा, डॉ कमर अली शाह और डॉ नजर मेहमूद कार्यक्रम के मेहमान ए खास के तौर पर मौजूद रहेंगे।
खान आशु भोपाल। महंगी शादियां, बड़े दिखावे, दहेज के नाम पर बड़ा लेनदेन और दहेज की अपेक्षा तथा फरमाइश। नतीजा कई गरीब लड़कियों के निकाह में आने वाली मुश्किलों के रूप में सामने हैं। समाज में फैली इन बुराइयों से बचने के लिए एक फिक्र के साथ राजधानी भोपाल में एक आयोजन किया जाएगा। खासतौर से महिलाओं को केंद्रित इस आयोजन में देश के कई नामवर उलेमा शामिल होकर तकरीर करेंगे। राजधानी की मस्जिद मदारुल मुहाम में शनिवार 9 नवंबर को यह आयोजन होगा। दोपहर 2 से शाम 4 बजे तक यह कार्यक्रम चलेगा। इस दौरान हैदराबाद के इस्लामिक स्कॉलर डॉ अलीम फलकी साहब खास बयान करेंगे। वे महंगी शादियों के कारण समाज में फैल रही बुराइयों और मुश्किलों से अवगत कराएंगे। कार्यक्रम आयोजकों ने बताया कि इस्लाम की तालीम और आसमानी किताब में शादियों को आसान बनाने की ताकीद की गई है। इसमें कहा गया है कि शादियों में फिजूलखर्ची और दिखावे से बचा जाए, ताकि हर तबके की लड़कियां आसानी से ब्याही जा सकें। लेकिन बदलते दौर में शादियां खर्चीली होती जा रही हैं। महंगे मैरिज गार्डन और हॉल, मेहमानों की बड़ी फेहरिस्त और दहेज के नाम किए जाने वाले बड़े लेनदेन अब प्रचलन में हैं। इसकी वजह से गरीब परिवार की बेटियां ब्याहने में कई मुश्किलें पसरने लगी हैं। इन्हीं मुश्किलों से निजात पाने की कोशिशों के बीच यह आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम खासतौर से महिलाओं पर केंद्रित रखा गया है। इसमें पर्दा व्यवस्था के साथ पुरुषों की भी सहभागिता रहेगी।
एक संबोधन यहां भी होगा
डॉ अलीम फलकी 8 नवंबर को भी भोपाल में रहेंगे। इस दिन वे शाम 6 से रात 9 बजे कमला पार्क स्थित मस्जिद फैज बहादुर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। डॉ अलीम फलकी इस दौरान 60+ रिटायर्ड पर्सन ए बर्डन ऑर ए ब्लेसिंग? विषय पर विचार प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम में शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी भी खास तौर से मौजूद रहेंगे।
एक फरवरी से 31 अक्टूबर 25 तक दर्शकों के लिए रात 8 बजे तक खुला रहेगा जनजातीय संग्रहालय
मध्यप्रदेश की सभी जनजातियों के जीवन, रहन-सहन, देशज ज्ञान, कला परम्परा और सौन्दर्यबोध की विशिष्टता को स्थापित करने का कार्य जनजातीय संग्रहालय, भोपाल में किया गया है। यहां जनजातियों की बहुरंगी एवं बहुआयामी देशज संस्कृति को बेहतरीन स्वरूप में संयोजित किया गया है।
जनजातीय संग्रहालय के निदेशक ने बताया कि हर साल संग्रहालय में अवलोकन का समय परिवर्तन किया जाता है। इसके तहत इस वर्ष एक नवंबर, 24 से आगामी 31 जनवरी 25 (मंगलवार से रविवार) तक जनजातीय संग्रहालय दोपहर 12 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहेगा। एकं फरवरी से 31 अक्टूबर 25 तक जनजातीय संग्रहालय दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक दर्शकों एवं पर्यटकों के लिये खोला जाय़ेगा।
उन्होंने बताया कि संग्रहालय की विभिन्न दीर्घाओं में प्रदेश के जनजातीय समुदायों के घरों की वास्तुगत, शिल्पगत और व्यवहारगत रूपों को प्रदर्शित किया गया है। संग्रहालय में 6 अलग-अलग कलाओं, शिल्प माध्यमों की दीर्घाएं हैं, जिनमें जनजातीय जीवन की झलक, उनके परिवेश, खेल, संस्कृति, देवलोक आदि देखने को मिलते हैं। यहां हर दीर्घा में आगंतुकों, जिज्ञासुओं व शोधार्थियों के लिए कियोस्क भी स्थापित किए गए हैं, जिससे उस दीर्घा विशेष के बारे में हिंदी अथवा अंग्रेजी में विस्तार से जाना-समझा जा सकता है।
हितग्राहियों ने दिया प्रधानमंत्री को धन्यवाद, मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
ज्ञान (GYAN या कहें जीवायएएन)…, अर्थात गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी कल्याण। मध्यप्रदेश में जीवायएएन के तहत लक्षित परिवारों और हितग्राहियों के समग्र कल्याण के लिये विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। इन सबके विकास के लिये राज्य सरकार मिशन मोड में कार्य कर रही है। प्रदेश में तीन विशेष रूप से कमजोर एवं पिछड़ी जनजातियां (पीवीटीजी) बैगा, भारिया एवं सहरिया निवास करती हैं। केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा जीवायएएन में गरीबों के कल्याण और इन्हें समर्थ बनाने के लिये पीएम जन-मन के अंतर्गत महती प्रयास किये जा रहे है। इन सभी विशेष पिछड़ी जनजातियों को पक्का घर, हर घर बिजली, हर घर नल से स्वच्छ पेयजल, इनकी बसाहटों/गांव तक पहुंच रोड, सभी के आधार कार्ड बनवाकर सबके जन-धन बैंक खाते खुलवाकर इनकी बसाहटों में मोबाईल कनेक्टिविटी के विस्तार के लिये भी निरंतर कार्य किये जा रहे है। इन पिछड़ी जनजातियों के प्रत्येक पात्र परिवार को पक्का घर प्रदान करना सरकार का प्राथमिक लक्ष्य है और इस दिशा में प्रदेश में बेहद उम्दा काम हो रहा है।
दीपावली पर सरकार ने 20 बैगा परिवारों को पक्के घर की सौगात दी। शहडोल जिले के सोहागपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत बधवाबड़ा में बीते दिनों गृह प्रवेश उत्वस मनाया गया। यहां बैगा जनजाति के 20 परिवारों को एक ही दिन, एक ही वक्त और एक ही स्थान पर पूजन कर गृह प्रवेश कराया गया। क्षेत्रीय विधायक मनीषा सिंह ने पीएम जन-मन योजना के तहत नवनिर्मित 20 पक्के आशियानों की पूजा-अर्चना कर बैगा परिवारों को गृह प्रवेश करवाकर इन्हें दीपपर्व की सौगात दी। इस अवसर पर बबलू बैगा, डब्लू बैगा, रामभुवन बैगा, राहुल बैगा, रामकरण बैगा, विप्पा बैगा, बुली बैगा, श्यामदास बैगा, घनश्याम बैगा, मनोज बैगा, श्रीमती दुखनी बैगा, श्रीमती सम्पतिया बैगा, श्रीमती नानबाई बैगा, श्रीमती पार्वती बैगा व अन्य बैगा परिवारों के सदस्यों को पक्के घर का उपहार मिला।
गौरतलब है कि पीएम जन-मन योजना के तहत पिछड़ी जनजातियों को सभी जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं, खाद्यान्न वितरण, विशेष पोषण आहार जैसी अन्य योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। शहडोल जिले में बैगा हितग्राहियों को प्राथमिकता के साथ इस योजना से जोड़कर इनके जीवन स्तर में सुधार लाने के प्रयास किये जा रहे हैं।
*रमुन बैगा को मिला पक्का घर*
शहडोल जिले के बुढ़ार ब्लॉक के ग्राम भमला निवासी रमुन बैगा को पीएम जन-मन योजना के तहत पक्का घर मिल गया है। पक्का घर मिलने के बाद रमुन बैगा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद देते हुए कहा कि अब मै अपने परिवार के साथ सुरक्षित और बेहतर तरीके से जीवन जी सकूंगा। उन्होंने कहा कि पहले कच्चे घर में कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब पक्का घर मिलने से उसका जीवन पहले से बेहतर हो गया है।
*जवाहर लाल बैगा को भी मिली पक्की छत*
पीएम जन-मन योजना से ही शहडोल जिले के बुढ़ार ब्लॉक के मेहरौडी गांव के निवासी जवाहर लाल बैगा को भी पक्की छत मिल गयी है। जवाहर लाल इन दिनों बेहद खुश है और पक्के घर की सौगात देने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बार-बार आभार जताते हैं।
खान आशु भोपाल। कला या अन्य सभी विद्याओं को सीखने के लिए शिष्य में शरणागति का भाव जरूरी है। नवधा भक्ति, नारद भक्ति सूत्र सहित शास्त्रों में भी शरणागति की विशेष महिमा बताई गई है। शैव सिद्धांत में भी शरणागति महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे ही हम उपासना के सबसे निकट होते हैं। यह बात वरिष्ठ नृत्यांगना डॉ. पद्मजा सुरेश ने नृत्य में अद्वैत कार्यशाला में आयोजित शरणागति सत्र में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कही। डॉ. पद्मजा ने कहा कि नृत्य एक सहज साधना है। साधना हमें आंतरिक रूप से प्रकाशित करती है। नाट्य साधना के द्वारा ही चेतना की उच्चतम अवस्था तक पंहुचा जा सकता है। चर्चा के सत्र को आगे बढ़ाते हुए डॉ. पद्मजा ने कहा कि नृत्य के माध्यम से स्थूल से सूक्ष्म शरीर की ओर बढ़ते है। इस दौरान उन्होंने नाट्य में अभय मुद्रा का उदारहण देते हुए कहा कि अभय अद्वैत का प्रतीक है और कला महामाया का चिन्मय विलास है। अंत में डॉ. पद्मजा ने रसामृत में कृष्ण को शक्ति बताते हुए नृत्य के सभी रूपों में नृतक तथा नायिका के भावों को विस्तार दिया। उल्लेखनीय है कि आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, मप्र पर्यटन निगम और भारत भवन न्यास, संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चल रही तीन दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन नृत्य में अद्वैत विषय पर विभिन्न सत्र हुए।
मंच पर कलाकार सृष्टिकर्ता की भूमिका में होता है सत्र में अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए भरतनाट्यम नृत्यांगना, कोरियोग्राफर डॉ. रेवती रामचंद्रन ने कहा कि इस तरह के आयोजन मन को विस्तारित करते हैं। यह हमारे आंतरिक एवं आध्यात्मिक विकास में उपयोगी है। उन्होंने कहा कि जब तक हम नृत्य करते हैं तो देह भाव से ऊपर उठकर अपनी पहचान को विलोपित कर देते हैं। कलाकार मंच पर सृष्टिकर्ता की भूमिका में होता है, जो अपनी रचनात्मकता से कला का निर्माण करता है। डॉ. रेवती ने कहा कि भारत में कला परम्परा दर्शकों के उत्थान के लिए है और कलाकार की यही प्राथमिकता भी होना चाहिए।जैसी दृष्टि होती है, वैसी सृष्टि दिखाई देती है।
नृत्य भी एक साधना है कार्यशाला के अगले सत्र में चिन्मय मिशन कोयंबटूर की प्रमुख स्वामिनी विमलानंद सरस्वती ने कहा कि कला का सौन्दर्य आनंद में है। कला की विशेषता है कि उसमें सदैव नवीनता विद्यमान होती है। उन्होंने कहा कि भगवान आसन पर बैठे तो कला है और चलें तो नृत्य है। स्वामिनी ने कहा कि नृत्य भी एक साधना है। जिससे मन परिष्कृत होता है। चर्चा सत्र को आगे बढ़ाते हुए स्वामिनी विमलानंद ने वेदांत का उदारहण देते हुए कहा कि आत्मज्ञान के लिए मन की शुद्धता, सूक्ष्मता एवं एकाग्रता आवश्यक है। आत्मज्ञान की प्राप्ति ज्ञान मात्र से होती है, इसलिए आवश्यक है कि मन राग, द्वेष से मुक्त हो।
शोधार्थियों, नृत्य अध्येता और छात्र-छात्राओं के साथ संवाद वहीं, शाम को हुए ओपन सत्र में पद्मविभूषण डॉ पद्मा सुब्रमण्यम, स्वामिनी विमलानंद सरस्वती, डॉ कुमकुमधर ने शोधार्थियों, नृत्य अध्येता और छात्र-छात्राओं के साथ संवाद किया। डॉ.पद्मा सुब्रमण्यम ने कहा कि गुरु के प्रति आत्म-समर्पण करने से संसार की हर वस्तु प्राप्त हो सकती हैं। गुरु ईश्वर के समान है। जब आप सार्थक दिशा में बढ़ते हैं तो गुरु का आशीष स्वाभाविक रूप से प्राप्त होता है। गुरु करुणा के सागर के समान होता है, शिष्य को इसी भाव में रहकर स्वयं को समर्पित करना चाहिए।
डॉ. पद्मा सुब्रमण्यम ने दी नृत्य प्रस्तुति बहुकला केंद्र के अंतरंग सभागार में बैठे सैकड़ों कला प्रेमी उस समय विलक्षण प्रस्तुति के साक्षी बने जब स्वयं डॉ. पद्मा सुब्रमण्यम मंच पर भरतनाट्यम की प्रस्तुति देने पहुंचीं। 81 वर्षीय डॉ सुब्रमण्यम ने शंकराचार्य विरचित भजन गोविन्दम्, भज गोविन्म्… की मनोहारी प्रस्तुति दी। लगभग 15 मिनट की इस प्रस्तुति के दौरान पद्ममा जी ने आंगिक, वाचिक, कदमताल और भाव भंगिमाओं का एक ऐसा संसार रचा जिसमें दर्शक पूरी तरह सहभागी बने। मन को छू जाने वाली इस प्रस्तुति के अंत में दर्शकों ने लगभग 5 मिनट तक पदमा जी को स्टेंडिंग ओवियेशन दिया।
भक्ति गीतों पर झूम उठे श्रोता कार्यशाला के दूसरे दिन का समापन संकीर्तन की प्रस्तुति के साथ हुआ। इसमें प्रसिद्ध गायक हर्षल पुलेकर ने भक्ति गीतों के माध्यम से सभी को भाव विभोर किया। एक के बाद एक मंत्रमुग्ध कर देने वाले संकीर्तनों को सुन श्रोता भक्ति रस में झूमते नजर आये। पुलेकर ने जय-जय राधा रमण…, कौन कहता है भगवान आते नहीं…. सहित कई भक्ति गीतों को पेश किया।
तीन दिवसीय कार्यशाला का समापन बहुकला केन्द्र भारत भवन में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला के अंतिम दिन बुधवार को सुबह 9 बजे से विभिन्न सत्र शुरू हुए। शाम को ओपन सत्र तथा संकीर्तन के साथ कार्यशाला का समापन होगा।