शिक्षा और उर्दू के नाम दो दिन, राजधानी में होगा बड़ा आयोजन, जानें क्या है पूरा प्रोग्राम

खान आशु
भोपाल। तेजी से बदल रही मान्यताएं, धारणाएं, व्यस्तताएं और दिनचर्या ने इंसान को मशीन बना दिया है। जरूरी कामों में गैर जरूरी बातें शामिल हैं। शिक्षा और उर्दू को लेकर खत्म हो रही गतिविधियों के बीच राजधानी भोपाल में दो दिवसीय एक आयोजन किया जा रहा है। जिसमें इन दोनों क्षेत्रों के कद्दावरों की मौजूदगी में शिक्षा के महत्व को डिस्कस किया जाएगा। साथ ही उर्दू भाषा की हिफाजत की फिक्र भी इस दौरान की जाएगी।
सामाजिक संस्था बेनजीर अंसार एजुकेशन एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी इस कार्यक्रम को आयोजित करेगी। संस्था के अध्यक्ष एमडब्ल्यू अंसारी ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा दिवस और राष्ट्रीय उर्दू दिवस के तारतम्य में कार्यक्रमों की यह श्रृंखला की जा रही है। इनका मकसद शिक्षा के लिए विशेष फिक्र लोगों में जागृत करना है। लोगों के व्यवहार और समाज में अन्य भाषाओं से पिछड़ती जा रही उर्दू जुबान को प्रोत्साहन देने की मंशा भी है।

यह होने आयोजन
पहले दिन 9 नवंबर को विश्व उर्दू दिवस मनाया जाएगा। इस दौरान “उर्दू जुबान का तहफ्फुज और हमारी जिम्मेदारी” विषय पर सेमिनार आयोजित किया जाएगा। कमला पार्क स्थित रजा दुर्रानी हॉल में होने वाले इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ अली अब्बास उम्मीद करेंगे। कार्यक्रम में एडवोकेट हाजी मोहम्मद हारून, इकबाल मसूद, अज़म अली खान, डॉ हस्सान उद्दीन फारूखी, डॉ सैयद इफ्तिखार अली मेहमान ए खास के रूप में मौजूद रहेंगे। अंसारी ने बताया कि इसी दिन शाम को कार्यक्रम की दूसरी कड़ी में एक मुशायरा महफिल सजेगी। जिसमें डॉ अली अब्बास उम्मीद, काजी मलिक नवेद, खलील कुरैशी, अभिषेक वर्मा, इकबाल मसूद, हुमा कानपुरी, मुबारक शाहीन, भूषण दिलशाद, आरिफ अली आरिफ, साजिद प्रेमी, अजीम अशर, प्रो गौसिया खान, मकबूल वाजिद, रमेश नंद, एस एम सिराज, नौमान गौरी आदि शायर अपना कलाम पेश करेंगे।
दूसरे दिन शिक्षा पर जोर
कार्यक्रम के दूसरे चरण में 10 नवंबर को शिक्षा को समर्पित आयोजन होंगे। इस दौरान “तालीम तरक्की की जामिन” विषय पर बात होगी। कार्यक्रम के मेहमानों में कौसर सिद्दीकी, पीर अजहर पाशा, रईस सिद्दीकी शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ मोहम्मद नौमान करेंगे। इस कार्यक्रम का संचालन डॉ महताब आलम करेंगे। इस दिन समापन सत्र में भी एक मुशायरा महफिल सजेगी। जिसमें शहर और प्रदेश के कई नामवर शायर अपना कलाम पेश करेंगे।

सम्मान सत्र भी होगा

कार्यक्रम के दूसरे दिन रविवार को एक सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, पत्रकारिता और विभिन्न क्षेत्रों में अपने काम से विशेष सहयोग देने वाले व्यक्तियों का सम्मान किया जाएगा। कार्यक्रम में मध्य विधायक आरिफ मसूद मुख्य अतिथि होंगे। जबकि सैयद जलाल उद्दीन, सैयद ताहा पाशा, डॉ कमर अली शाह और डॉ नजर मेहमूद कार्यक्रम के मेहमान ए खास के तौर पर मौजूद रहेंगे।

31 जनवरी तक शाम सात बजे तक खुलेगा जनजातीय संग्रहालय

एक फरवरी से 31 अक्टूबर 25 तक दर्शकों के लिए रात 8 बजे तक खुला रहेगा जनजातीय संग्रहालय

मध्यप्रदेश की सभी जनजातियों के जीवन, रहन-सहन, देशज ज्ञान, कला परम्परा और सौन्दर्यबोध की विशिष्टता को स्थापित करने का कार्य जनजातीय संग्रहालय, भोपाल में किया गया है। यहां जनजातियों की बहुरंगी एवं बहुआयामी देशज संस्कृति को बेहतरीन स्वरूप में संयोजित किया गया है।

जनजातीय संग्रहालय के निदेशक ने बताया कि हर साल संग्रहालय में अवलोकन का समय परिवर्तन किया जाता है। इसके तहत इस वर्ष एक नवंबर, 24 से आगामी 31 जनवरी 25 (मंगलवार से रविवार) तक जनजातीय संग्रहालय दोपहर 12 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहेगा। एकं फरवरी से 31 अक्टूबर 25 तक जनजातीय संग्रहालय दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक दर्शकों एवं पर्यटकों के लिये खोला जाय़ेगा।

उन्होंने बताया कि संग्रहालय की विभिन्न दीर्घाओं में प्रदेश के जनजातीय समुदायों के घरों की वास्तुगत, शिल्पगत और व्यवहारगत रूपों को प्रदर्शित किया गया है। संग्रहालय में 6 अलग-अलग कलाओं, शिल्प माध्यमों की दीर्घाएं हैं, जिनमें जनजातीय जीवन की झलक, उनके परिवेश, खेल, संस्कृति, देवलोक आदि देखने को मिलते हैं। यहां हर दीर्घा में आगंतुकों,  जिज्ञासुओं व शोधार्थियों के लिए कियोस्क भी स्थापित किए गए हैं, जिससे उस दीर्घा विशेष के बारे में हिंदी अथवा अंग्रेजी में विस्तार से जाना-समझा जा सकता है।                          

दीपावली पर पक्के मकानों की सौगात से खिले 20 बैगा परिवारों के चेहरे

हितग्राहियों ने दिया प्रधानमंत्री को धन्यवाद, मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

ज्ञान (GYAN या कहें जीवायएएन)…, अर्थात गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी कल्याण। मध्यप्रदेश में जीवायएएन के तहत लक्षित परिवारों और हितग्राहियों के समग्र कल्याण के लिये विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। इन सबके विकास के लिये राज्य सरकार मिशन मोड में कार्य कर रही है। प्रदेश में तीन विशेष रूप से कमजोर एवं पिछड़ी जनजातियां (पीवीटीजी) बैगा, भारिया एवं सहरिया निवास करती हैं। केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा जीवायएएन में गरीबों के कल्याण और इन्हें समर्थ बनाने के लिये पीएम जन-मन के अंतर्गत महती प्रयास किये जा रहे है। इन सभी विशेष पिछड़ी जनजातियों को पक्का घर, हर घर बिजली, हर घर नल से स्वच्छ पेयजल, इनकी बसाहटों/गांव तक पहुंच रोड, सभी के आधार कार्ड बनवाकर सबके जन-धन बैंक खाते खुलवाकर इनकी बसाहटों में मोबाईल कनेक्टिविटी के विस्तार के लिये भी निरंतर कार्य किये जा रहे है। इन पिछड़ी जनजातियों के प्रत्येक पात्र परिवार को पक्का घर प्रदान करना सरकार का प्राथमिक लक्ष्य है और इस दिशा में प्रदेश में बेहद उम्दा काम हो रहा है।

दीपावली पर सरकार ने 20 बैगा परिवारों को पक्के घर की सौगात दी। शहडोल जिले के सोहागपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत बधवाबड़ा में बीते दिनों गृह प्रवेश उत्वस मनाया गया। यहां बैगा जनजाति के 20 परिवारों को एक ही दिन, एक ही वक्त और एक ही स्थान पर पूजन कर गृह प्रवेश कराया गया। क्षेत्रीय विधायक मनीषा सिंह ने पीएम जन-मन योजना के तहत नवनिर्मित 20 पक्के आशियानों की पूजा-अर्चना कर बैगा परिवारों को गृह प्रवेश करवाकर इन्हें दीपपर्व की सौगात दी। इस अवसर पर बबलू बैगा, डब्लू बैगा, रामभुवन बैगा, राहुल बैगा, रामकरण बैगा, विप्पा बैगा, बुली बैगा, श्यामदास बैगा, घनश्याम बैगा, मनोज बैगा, श्रीमती दुखनी बैगा, श्रीमती सम्पतिया बैगा, श्रीमती नानबाई बैगा, श्रीमती पार्वती बैगा व अन्य बैगा परिवारों के सदस्यों को पक्के घर का उपहार मिला।

गौरतलब है कि पीएम जन-मन योजना के तहत पिछड़ी जनजातियों को सभी जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं, खाद्यान्न वितरण, विशेष पोषण आहार जैसी अन्य योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। शहडोल जिले में बैगा हितग्राहियों को प्राथमिकता के साथ इस योजना से जोड़कर इनके जीवन स्तर में सुधार लाने के प्रयास किये जा रहे हैं।

*रमुन बैगा को मिला पक्का घर*

शहडोल जिले के बुढ़ार ब्लॉक के ग्राम भमला निवासी रमुन बैगा को पीएम जन-मन योजना के तहत पक्का घर मिल गया है। पक्का घर मिलने के बाद रमुन बैगा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद देते हुए कहा कि अब मै अपने परिवार के साथ सुरक्षित और बेहतर तरीके से जीवन जी सकूंगा। उन्होंने कहा कि पहले कच्चे घर में कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब पक्का घर मिलने से उसका जीवन पहले से बेहतर हो गया है।

*जवाहर लाल बैगा को भी मिली पक्की छत*

पीएम जन-मन योजना से ही शहडोल जिले के बुढ़ार ब्लॉक के मेहरौडी गांव के निवासी जवाहर लाल बैगा को भी पक्की छत मिल गयी है। जवाहर लाल इन दिनों बेहद खुश है और पक्के घर की सौगात देने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बार-बार आभार जताते हैं।        

Bhopal News : MLB कॉलेज में हुआ प्लेसमेंट ड्राइव, कल की छात्रा आज बन गई बैंक मैनेजर, जानिए किसे मिली उपलब्धि

खान आशु
भोपाल। शिक्षा अनवरत सीख का माध्यम है तो सेल्फ कॉन्फिडेंस, सतत कोशिश और जीत की प्रबल इच्छा कामयाबी की अंतिम सीढ़ी। MLB कॉलेज की छात्राओं ने इस बात को साबित कर दिखाया है। यहां अध्ययनरत एक छात्रा ने ऊंची छलांग लगाते हुए खुद को सफलता की मंजिल तक पहुंचाया है। यह छात्रा कॉलेज में आयोजित प्लेसमेंट ड्राइव के दौरान बैंक के सहायक प्रबंधक पद पर चयनित हुई हैं।
राजधानी भोपाल के महारानी लक्ष्मीबाई स्वशासी कन्या महाविद्यालय में आयोजित प्लेसमेंट ड्राइव में देशभर की ख्यात कंपनियों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। इस दौरान कई स्टूडेंट्स ने अपना भाग्य आजमाया और योग्यता के अनुसार जॉब से खुद को शोभित किया। इस प्लेसमेंट ड्राइव के दौरान महाविद्यालय की छात्रा पलक बिल्लौरे का चयन एक्सिस बैंक में सहायक प्रबंधक के पद पर किया गया है। उन्हें अपनी पहली सैलरी के रूप में सालाना 4.54 लाख रुपए ऑफर किए गए हैं। पलक की इस उपलब्धि पर प्राचार्य डॉ राजेश अग्रवाल, प्रो एनवीके प्रभाकर, जिला नोडल अधिकारी डॉ सुधीर कुमार शर्मा आदि ने बधाई दी। प्राचार्य डॉ अग्रवाल ने कहा कि सिर्फ शिक्षा और शैक्षिक गतिविधियों से संतुष्ट न रहकर हम विद्यार्थियों में सेल्फ कॉन्फिडेंस, हर स्पर्धा को फेस करने की हिम्मत देने और सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक, सियासी समझ देने के भी सतत प्रयास कर रहे हैं। इसी धारणा के साथ कॉलेज में सांस्कृतिक, साहित्यिक और स्पोर्ट्स एक्टिविटीज पर भी उतना ही ध्यान दे रहे हैं, जितना किताबी ज्ञान पर। डॉ अग्रवाल ने कहा कि पलक बिल्लौरे जैसी सभी स्टूडेंट्स हमारा गुरूर भी हैं और पीछे आ रही विद्यार्थी पीढ़ी के लिए प्रेरणा भी हैं।

Bhopal News : 81 वर्षीय डॉ पदमा सुब्रमण्यम ने दी भरतनाट्यम की मनमोहक प्रस्तुति, भारत भवन में आयोजित ‘नृत्य में अद्वैत’ कार्यशाला

खान आशु
भोपाल। कला या अन्य सभी विद्याओं को सीखने के लिए शिष्य में शरणागति का भाव जरूरी है। नवधा भक्ति, नारद भक्ति सूत्र सहित शास्त्रों में भी शरणागति की विशेष महिमा बताई गई है। शैव सिद्धांत में भी शरणागति महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे ही हम उपासना के सबसे निकट होते हैं। यह बात वरिष्ठ नृत्यांगना डॉ. पद्मजा सुरेश ने नृत्य में अद्वैत कार्यशाला में आयोजित शरणागति सत्र में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कही। डॉ. पद्मजा ने कहा कि नृत्य एक सहज साधना है। साधना हमें आंतरिक रूप से प्रकाशित करती है। नाट्य साधना के द्वारा ही चेतना की उच्चतम अवस्था तक पंहुचा जा सकता है। चर्चा के सत्र को आगे बढ़ाते हुए डॉ. पद्मजा ने कहा कि नृत्य के माध्यम से स्थूल से सूक्ष्म शरीर की ओर बढ़ते है। इस दौरान उन्होंने नाट्य में अभय मुद्रा का उदारहण देते हुए कहा कि अभय अद्वैत का प्रतीक है और कला महामाया का चिन्मय विलास है। अंत में डॉ. पद्मजा ने रसामृत में कृष्ण को शक्ति बताते हुए नृत्य के सभी रूपों में नृतक तथा नायिका के भावों को विस्तार दिया। उल्लेखनीय है कि आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, मप्र पर्यटन निगम और भारत भवन न्यास, संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चल रही तीन दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन नृत्य में अद्वैत विषय पर विभिन्न सत्र हुए।

मंच पर कलाकार सृष्टिकर्ता की भूमिका में होता है
सत्र में अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए भरतनाट्यम नृत्यांगना, कोरियोग्राफर डॉ. रेवती रामचंद्रन ने कहा कि इस तरह के आयोजन मन को विस्तारित करते हैं। यह हमारे आंतरिक एवं आध्यात्मिक विकास में उपयोगी है। उन्होंने कहा कि जब तक हम नृत्य करते हैं तो देह भाव से ऊपर उठकर अपनी पहचान को विलोपित कर देते हैं। कलाकार मंच पर सृष्टिकर्ता की भूमिका में होता है, जो अपनी रचनात्मकता से कला का निर्माण करता है। डॉ. रेवती ने कहा कि भारत में कला परम्परा दर्शकों के उत्थान के लिए है और कलाकार की यही प्राथमिकता भी होना चाहिए।जैसी दृष्टि होती है, वैसी सृष्टि दिखाई देती है।

नृत्य भी एक साधना है
कार्यशाला के अगले सत्र में चिन्मय मिशन कोयंबटूर की प्रमुख स्वामिनी विमलानंद सरस्वती ने कहा कि कला का सौन्दर्य आनंद में है। कला की विशेषता है कि उसमें सदैव नवीनता विद्यमान होती है। उन्होंने कहा कि भगवान आसन पर बैठे तो कला है और चलें तो नृत्य है। स्वामिनी ने कहा कि नृत्य भी एक साधना है। जिससे मन परिष्कृत होता है। चर्चा सत्र को आगे बढ़ाते हुए स्वामिनी विमलानंद ने वेदांत का उदारहण देते हुए कहा कि आत्मज्ञान के लिए मन की शुद्धता, सूक्ष्मता एवं एकाग्रता आवश्यक है। आत्मज्ञान की प्राप्ति ज्ञान मात्र से होती है, इसलिए आवश्यक है कि मन राग, द्वेष से मुक्त हो।

शोधार्थियों, नृत्य अध्येता और छात्र-छात्राओं के साथ संवाद
वहीं, शाम को हुए ओपन सत्र में पद्मविभूषण डॉ पद्मा सुब्रमण्यम, स्वामिनी विमलानंद सरस्वती, डॉ कुमकुमधर ने शोधार्थियों, नृत्य अध्येता और छात्र-छात्राओं के साथ संवाद किया। डॉ.पद्मा सुब्रमण्यम ने कहा कि गुरु के प्रति आत्म-समर्पण करने से संसार की हर वस्तु प्राप्त हो सकती हैं। गुरु ईश्वर के समान है। जब आप सार्थक दिशा में बढ़ते हैं तो गुरु का आशीष स्वाभाविक रूप से प्राप्त होता है। गुरु करुणा के सागर के समान होता है, शिष्य को इसी भाव में रहकर स्वयं को समर्पित करना चाहिए।

डॉ. पद्मा सुब्रमण्यम ने दी नृत्य प्रस्तुति
बहुकला केंद्र के अंतरंग सभागार में बैठे सैकड़ों कला प्रेमी उस समय विलक्षण प्रस्तुति के साक्षी बने जब स्वयं डॉ. पद्मा सुब्रमण्यम मंच पर भरतनाट्यम की प्रस्तुति देने पहुंचीं। 81 वर्षीय डॉ सुब्रमण्यम ने शंकराचार्य विरचित भजन गोविन्दम्, भज गोविन्म्… की मनोहारी प्रस्तुति दी। लगभग 15 मिनट की इस प्रस्तुति के दौरान पद्ममा जी ने आंगिक, वाचिक, कदमताल और भाव भंगिमाओं का एक ऐसा संसार रचा जिसमें दर्शक पूरी तरह सहभागी बने। मन को छू जाने वाली इस प्रस्तुति के अंत में दर्शकों ने लगभग 5 मिनट तक पदमा जी को स्टेंडिंग ओवियेशन दिया।

भक्ति गीतों पर झूम उठे श्रोता
कार्यशाला के दूसरे दिन का समापन संकीर्तन की प्रस्तुति के साथ हुआ। इसमें प्रसिद्ध गायक हर्षल पुलेकर ने भक्ति गीतों के माध्यम से सभी को भाव विभोर किया। एक के बाद एक मंत्रमुग्ध कर देने वाले संकीर्तनों को सुन श्रोता भक्ति रस में झूमते नजर आये। पुलेकर ने जय-जय राधा रमण…, कौन कहता है भगवान आते नहीं…. सहित कई भक्ति गीतों को पेश किया।

तीन दिवसीय कार्यशाला का समापन
बहुकला केन्द्र भारत भवन में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला के अंतिम दिन बुधवार को सुबह 9 बजे से विभिन्न सत्र शुरू हुए। शाम को ओपन सत्र तथा संकीर्तन के साथ कार्यशाला का समापन होगा।

याद ए अर्जुन : सतलज ने मंच से पढ़ा, जितने अपने थे मर गए हैं मेरे…. तो मंजर ने टोका, अभी हम जिंदा हैं, जानें कैसी सजी महफिल ए मुशायरा

खान आशु
भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री स्व अर्जुन सिंह की जयंती पर राजधानी भोपाल में मुशायरा महफिल की बरसों पुरानी रिवायत निभाई गई। लंबे समय तक शहर के इकबाल मैदान को आबाद करने वाली यह महफिल इस बार सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड पर सजी थी। बाहरी मुल्कों से आए शायरों, देश को गौरव दिलाने वाले फनकारों, दुनिया में अपने प्रदेश का परचम ऊंचा रखने वाले अदबी लोगों के अलावा शहर को अपने कलाम से पहचान देने वाले चेहरे इस महफिल की रौनक थे। देर रात तक चले मुशायरे के वातावरण को गुलाबी ठंड भी रंगत देती रही। शेर ओ गजल का सुरूर रात की गहराई पर भारी पड़ती दिखाई देती रही।
देश दुनिया से आए बड़े, नामवर और स्थापित शायरों की इस महफिल में मंच के नए चेहरे सतलज राहत ने खासा रंग जमाया। उन्हें “जितने अपने थे मर गए हैं मेरे, सारे हमदर्द डर गए हैं मेरे, आपसे दिल की बात कहना है,  आप दिल से उतर गए हैं मेरे…” जैसे शेर से महफिल में रंगत भरना शुरू की, और धीरे धीरे कई मजबूत और यादगार शेर मंच की नजर करते गए। सतलज के “कपड़े फट जाते हैं और बाल बिगड़ जाते हैं, अच्छे अच्छों के यहां हाल बिगड़ जाते हैं….” “नफ़रत का है दौर कहा जा सकता है,
झूठ का है ये शोर कहा जा सकता है…” भी खूब पसंद किए गए।

नवाजे गए मंजर
अर्जुन सिंह सद्भावना मंच के इस आयोजन में शहर भोपाल को दुनिया में खास पहचान देने वाले व्यक्तित्व नागरिक सम्मान से नवाजे गए। इस दौरान अंतर्राष्ट्रीय शायर मंजर भोपाली को भी सम्मान दिया गया। मुशायरा महफिल के जरिए दुनिया नाप चुके मंजर इस दौर में मुशायरों की सफलता की गारंटी कहे जाने लगे हैं। इनके अलावा ढाई लाख से ज्यादा हार्ट सर्जरी कर रिकॉर्ड स्थापित कर चुके डॉ वायके मिश्रा, एवरेस्ट विजेता मेघा परमार, कन्हैया कुमार आदि भी मंच से सम्मानित किए गए।

शबीना की शुरुआत को विजय ने दी रवानी
रसिक श्रोताओं की गीत, गजल, शेर पिपासा पूरी करने के लिए मुशायरा महफिल में देश के नामवर शायर जुटाए गए थे। महफिल का आगाज कानपुर से आईं शहरा शबीना अदीब के कौमी तराने से हुई। इसके बाद मुशायरे को सूत्र में बांधने की जिम्मेदारी शायर ए शहर विजय तिवारी ने संभाली। उनके सफल संचालन में प्रो वसीम बरेलवी, अरुण जैमिनी, डॉ नवाज देवबंदी, मंजर भोपाली, चरण सिंह बशर जैसे दिग्गज शायरों ने अपने कलाम से महफिल को बांध रखा। कार्यक्रम में बाहरी मुल्कों से आए अनवर कमाल (बहरीन) और डॉ वला जमाल (मिस्र) की खास मौजूदगी से भी महफिल रौशन हुई।

MP News : जुगत नहीं आई काम, पहुंचाया वक्फ को नुकसान, बरसों बाद आएंगे कानून के घेरे में, जानें क्या है पूरा मामला

खान आशु
भोपाल। अध्यक्ष तय है… अधिकारी, कर्मचारी और यहां तक कि चपरासी या चौकीदार भी तयशुदा आदेश के तहत काम कर रहे हैं। लेकिन मप्र वक्फ बोर्ड में हर कार्यालयीन दिवस(कई बार छुट्टियों में भी) पाबंदी से दिखाई देने वाले एक रिटायर्ड सीईओ की मौजूदगी लोगों के लिए जिज्ञासा का विषय बनी हुई है। सेवानिवृत्ति के बरसों बाद भी उनकी दफ्तर आवाजाही को लेकर अब लोगों को जवाब मिलने लगे हैं। दरअसल सेवाकाल में उनके हाथों हुए एक बड़े करोड़ी घोटाले की फाइलें ठिकाने लगाना उनकी वक्फ बोर्ड कार्यालय में पहुंच का कारण बताया जा रहा है। हालांकि उनके इन प्रयासों को अब ठेस लगती नजर आ रही है, जब इस वक्फ नुकसान को लेकर अदालत जाने की तैयारी कर ली गई है।
सूत्रों का कहना है कि मप्र वक़्फ़ बोर्ड क़ी सम्पति पंजीयन क्रमांक-165/192 पर रजिस्टर्ड होकर मध्यप्रदेश असाधारण  राजपत्र दिनांक 25/8/1989 में प्रकाशित एवं अधिसूचित 40 खसरो वाली वक़्फ़ सम्पति रकबा 16.235 हेक्टयर वक़्फ़ इस्लामिया मदरसा व स्कूल कुरवाई ज़िला विदिशा क़ी सम्पति सर्वे नंबर  कुल 19 किता रकबा 4.633 हैक्टेयर 7 करोड़, 77 लाख, 92 हजार 400 क़ी लागत क़ी वक़्फ़ क़ी ज़रखेज़, सिंचित, उपजाऊ ज़मीन को देकर उसके बदले में बंजर बेकार ऊबड़ खाबड़, असिंचित ज़मीन वक़्फ़ के खाते में डाल दी गई।मुतवल्ली ज़फर अली खान को दिनांक 26/06/2010 को विनिमय का आदेश करते मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी दाऊद अहमद खान
ने अपने कार्यकाल में यह कारनामा किया था।

अधिनियम के खिलाफ फैसला
सूत्रों का कहना है कि दाऊद अहमद खान द्वारा वक़्फ़ अधिनियम 1995 संशोधित अधिनियम 2013 क़ी धारा 51 के अनुसार  बोर्ड क़ी अनुज्ञा के बिना वक़्फ़ सम्पति का अन्य संक्रांमण (Alienation) शून्य  होगा। धारा-51 के अनुसार वक़्फ़ विलेख  में अंतर निहित किसी बात के होते हुए भी किसी अचल सम्पति का हिबा, विक्रय, विनिमय अथवा बंधक जो वक़्फ़ सम्पति है शून्य होगा, जब तक कि ऎसी हिबा, विक्रय, विनिमय अथवा बंधक वक़्फ़ बोर्ड क़ी पूर्व अनुज्ञा के बिना प्रभावी नहीं किया जा सकता। वक़्फ़ अधिनियम क़ी धारा 51 व 32 में विनिमय के सम्बन्ध में स्पष्ट प्रावधान है, जिसके अनुसार ऐसे निर्णय दो तिहाई बहुमत से पारित होना चाहिये व बिना बोर्ड क़ी अनुमति के विनिमय नहीं किया जाना चाहिये। परन्तु इस प्रकरण में प्रथम विनिमय बिना बोर्ड के अनुमति के पद का दुरूपयोग करते और अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर अवैध रूप से कर दिया गया।

किया पद का दुरुपयोग
तत्कालीन वक़्फ़ बोर्ड सीईओ दाऊद अहमद खान द्वारा पत्र क्रमांक 10/4777-78 भोपाल दिनांक 22/6/2010 को उपरोक्त वक़्फ़ इस्लामिया मदरसा स्कूल कुरवाई के मुतवल्ली ज़फर अली खान वल्द नवाब सरदार अली खान को अच्छी और घटिया दोनों किस्म क़ी भूमियों  क़ी अदला-बदली क़ी स्वीकृति प्रदान करते हुए अपने पदीय हैसियत का दुरूपयोग किया। उन्होंने क्षेत्रधिकार से बाहर जाते वक़्फ़ अधिनियम क़ी धारा 51-(1) एवं धारा 32 (जे) के सुसंगत प्रावधानो का उल्लंघन  करते हुए वक़्फ़ सम्पति को खुर्द -बुर्द करते वक़्फ़ बोर्ड को 8 करोड़ क़ी राजस्व हानि पंहुचाई  है।
  
जारी हुई विभागीय जांच
इसी श्रृंखला में पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, मंत्रालय वल्लभ भवन पत्र क्रमांक-एफ- 4-3/2014/54-1 भोपाल दिनांक 09 जून 2014 को अपर सचिव  मध्यप्रदेश शासन द्वारा दाऊद अहमद खान को वक़्फ़ बोर्ड को 8 करोड़ रुपये क़ी भारी भरकम राशि का नुकसान पहुँचाने पर विभागीय जाँच का आरोप पत्र जारी करते हुए जहां पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 12 (2) एवं 13 (1) के अधीन अनुशासनिक प्राधिकारी यथा राज्य शासन उक्त नियमों के नियम 14 (3) के अन्तर्गत आरोप अधिरोपित करने के साथ साथ पत्र में निर्देशित किया गया है। दाऊद अहमद खान के उपरोक्त अवैध एवं क्षेत्रधिकार विहीन कृत्य से मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड को गंभीर आर्थिक हानि पहुंची, जिसके लिये आपने अपने आप को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण नियम) 1965 के नियम -3 के विपरीत कदाचरण करते हुए मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 14 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्यवाही का भागी बना लिया है।
    
मामला EOW में लंबित
वक़्फ़ भूमि क़ी अदला-बदली कर वक़्फ़ बोर्ड को 8 करोड़ का नुक्सान पहुँचाने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ द्वारा जाँच उपरांत यह प्रकरण मध्यप्रदेश शासन  क़ी मंज़ूरी न मिलने से अभी प्रतीक्षारत है। 22 दिसम्बर 2014 को अपर मुख्य सचिव मध्यप्रदेश शासन पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने सामान्य प्रशासन  विभाग से अभियोजन चलाने की स्वीकृति हेतु पत्र लिखा था। इसकी अभियोजन क़ी मंज़ूरी में रूकावट इसलिए भी आ रही है कि दाऊद अहमद के साथ इस प्रकरण में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और तत्कालीन विदिशा कलेक्टर योगेंद्र शर्मा के साथ साथ मरहूम गुफरान ए आज़म पूर्व वक़्फ़ बोर्ड अध्यक्ष एवं मोईन खान सहित तत्कालीन वक़्फ़ बोर्ड संचालक मंडल पर आरोप कारित किये गये है। अभियोजन क़ी स्वीकृति 10 साल से प्रतीक्षारत है। 

दाखिल हुई पिटिशन
वक़्फ़ के जानकार 10 साल से रुके इस प्रकरण में अभियोजन क़ी स्वीकृति करवाने माननीय मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष पिटीशन दायर करते वक़्फ़ को 8 करोड़ का नुकसान पहुँचाने वाले आरोपियों क़ी जल्द से जल्द सलाखो के पीछे जेल भेजनें योजना क़ी अमली जामा पहनाते इसी माह में अमल में लाते पिटीशन दायर करने क़ी तैयारी में जुट  गए हैं।

लगे हैं बचने की जुगत में
कई वर्षों पहले सेवानिवृत्त हो चुके पूर्व सीईओ दाऊद अहमद मप्र वक्फ बोर्ड गठन में अहम भूमिका निभा चुके हैं। शुरुआती दौर में उन्हें इस चुनाव के लिए रिटर्निंग अफसर भी बनाया गया था, लेकिन इस पर उठी आपत्ति के बाद अदालत ने उन्हें इस जिम्मेदारी से हटा दिया था। सूत्रों का कहना है कि बोर्ड गठन के बाद से ही दाऊद अहमद लगातार बोर्ड दफ्तर में सेवाएं दे रहे हैं। बिना किसी अधिकृत आदेश या स्वीकृत पद के वे बोर्ड के जरूरी फैसलों में दखल रखने के अलावा कई विशेष फाइलों की ड्राफ्टिंग में भी भूमिका निभा रहे हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि वे बिना अधिकार कई फाइलों पर मौजूदा सीईओ के फर्जी हस्ताक्षर करने से भी नहीं चूक रहे हैं। सेवानिवृत्त अधिकारी के बोर्ड में बैठने और कामों में दखल रखने को लेकर बोर्ड जिम्मेदारों के पास भी कोई माकूल जवाब मौजूद नहीं है। हालांकि उनकी मौजूदगी को उनके कार्यकाल में हुए घोटालों की फाइलों को ठिकाने लगाने की जुगत माना जा रहा है।

Iztima News : छुट्टी का सदुपयोग, श्रमदान के लिए पहुंच रहे युवा, आकार लेने लगा इज्तिमागाह, जानें कैसी चल रही तैयारी

खान आशु
भोपाल। इसी माह के अंत में राजधानी में होने वाले मजहबी समागम आलमी तबलीगी इज्तिमा की तैयारियां तेज हो गई हैं। दिवाली और अन्य सरकारी छुट्टियों में इज्तिमागाह पर जमावड़ा लग रहा है। यहां जारी कामों में हाथ बंटाते हुए युवा और बुजुर्गों ने कई बड़े काम पूरे कर दिए हैं। रविवार को भी यहां बड़ी संख्या में खिदमतगारों के पहुंचने की उम्मीद है।
करीब 300 एकड़ में बनने वाले शामियाना और जमातियों के बैठने एवं आराम करने की जगह का प्रारंभिक स्ट्रक्चर लगभग तैयार कर दिया गया है। सुबह से शाम तक उत्साह से काम में जुटे वालेंटियर्स ने जमीन के समतलीकरण और पंडाल के स्ट्रक्चर के अलावा पार्किंग के जोन तैयार करने पर भी मेहनत करना शुरू दिया है। इज्तिमगाह के आसपास करीब 300 एकड़ में पार्किंग तैयार किए जा रहे हैं। छोटे, मध्यम और बड़े वाहनों के पार्क करने के लिए यहां अलग अलग पार्किंग तैयार किए जा रहे हैं।

जोश से जुट रहे वालेंटियर

आलमी तबलीगी इज्तिमा के जनसंपर्क अधिकारी डॉ उमर हफीज खान ने बताया कि पंडाल का स्ट्रक्चर लगभग तैयार हो चुका है। वजूखाने भी तैयार हो गए हैं। अब टॉयलेट और बॉथरूम बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। डॉ उमर ने बताया कि इज्तिमागाह की सफाई का काम भी तेजी से चल रहा है। उन्होंने बताया कि वालेंटियर्स के साथ विभिन्न सरकारी एजेंसियां भी जरूरी कामों को अंजाम दे रही हैं। उन्होंने कहा कि छुट्टियों में यहां बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं। इसके अलावा भी श्रमदान करने वालों का मजमा लगा हुआ है।

इस बार बैन रहेगा सिंगल यूस प्लास्टिक
डॉ उमर ने बताया कि आलमी तबलीगी इज्तिमा के दौरान स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का खास ख्याल रखने की कोशिश की जाती है। इसके चलते हर साल एक नया प्रयोग किया जाता है। इस कड़ी में इस बार इज्तिमागाह पर सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पाबंदी रहेगी। महज पानी की बॉटल के लिए रियायत दी जाएगी। डॉ उमर ने बताया कि इससे पहले गीला और सुखा कचरा अलग अलग रखने, बचे खाने से खाद बनाने, वाटर ट्रीटमेंट आदि के सफल प्रयोग किए जा चुके हैं, जो इस बार भी निरंतर रहेंगे।

29 से समागम, 2 को दुआ
आलमी तबलीगी इज्तिमा का आगाज 29 नवंबर से से होगा। इस 4 दिन के आयोजन का समापन 2 दिसंबर को दुआ ए खास के साथ होगा। पिछले सालों की जमातों की आमद को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि इस बार इज्तिमा में 10 लाख से ज्यादा लोग जुटेंगे। इज्तिमा में शामिल होने के लिए जमातों की आमद का सिलसिला अगले हफ्ते से होने की संभावना है। फिलहाल यह जमाते शहर की विभिन्न मस्जिदों में रहेंगी।

खास खास
=आलमी तबलीगी इज्तिमा 29 नवंबर से 2 दिसंबर तक
=300 एकड़ में पंडाल
=पार्किंग के लिए 300 एकड़ में जोन
=सिंगल यूज प्लास्टिक पर पाबंदी रहेगी
=वाटर ट्रीटमेंट और बचे हुए खाने से खाद
=जिला प्रशासन के नेतृत्व में कई सरकारी एजेंसियां जुटी काम में
=छुट्टी के दिन पहुंच रहे वालेंटियर, कर रहे श्रमदान

आजादी की उम्र का हुआ इज्तिमा
भोपाल में आलमी तबलीगी इज्तिमा की शुरुआत वर्ष 1947 में हुई थी। पहला इज्तिमा मस्जिद शकूर खान में हुआ, जिसमें महज 13 लोग शामिल हुए थे। इसके अगले बरस से यह आयोजन ताजुल मसाजिद में आयोजित किया जाने लगा। वर्ष 2005 में जमातों की बड़ी तादाद को देखते हुए इज्तिमा ईंटखेड़ी शिफ्ट कर दिया गया। तबसे यह  आयोजन लगातार यहीं पर हो रहा है।

Bhopal News : क्विज़ मास्टर लेंगे इम्तेहान, बच्चों के जवाब और इनामों की बौछार…  मीकैप्स का आयोजन 3 को, जानें पूरा कार्यक्रम

खान आशु
भोपाल। शिक्षा की सार्थकता जांचने समय समय पर परीक्षा लिया जाना जरूरी है। परीक्षा के सफल किरदारों को इनाम और तोहफे मिल जाएं तो यह स्टूडेंट्स का उत्साहवर्धन का कारण बन जाता है। शिक्षा को बढ़ावा देने में सक्रिय संस्था मीकैप्स इसी धारणा के साथ एक आयोजन करने वाली है। इस आयोजन में क्विज मास्टर आमिर महबूब विद्यार्थियों का IQ टेस्ट लेंगे। इसी दौरान जरूरतमंद बच्चों को स्कॉलरशिप के चैक भी वितरित किए जाएंगे।
मीकैप्स अध्यक्ष प्रो हसन मसूद और सचिव डॉ जफर हसन ने बताया कि मीकैप्स अपना वार्षिक आयोजन 3 नवम्बर को रविन्द्र भवन में आयोजित करेगा। कार्यक्रम के मेहमानों में खासतौर से रिटायर डीजीपी अरुण गुट्टरु और मप्र वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ सनव्वर पटेल शामिल रहेंगे। उन्होंने बताया कि मीकैप्स लंबे अरसे से शिक्षा की सरलता, आसानी और इसके हर जरूरतमंद तक पहुंचने के रास्ते प्रशस्त करने में लगा है। छोटी क्लासों से लेकर तकनीकी एजुकेशन तक के स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप देने की एक लंबी परम्परा मीकैप्स ने निभाई है। डॉ जफर हसन ने कहा कि इस साल भी बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप प्रदान की जाएगी। इसके अलावा कार्यक्रम के दौरान बच्चों की सार्थक शिक्षा को परखने के लिए एक क्विज कंपीटिशन भी किया जाएगा। क्विज मास्टर आमिर महबूब इस दौरान बच्चों का टेस्ट लेंगे। इसमें सफल होने वाले स्टूडेंट्स कार्यक्रम के मेहमानों के हाथों से पुरस्कारों से नवाजे जाएंगे। मीकैप्स क्विज एंड मेरिटोरियस अवार्ड सेरेमनी नाम से आयोजित किया जा रहा यह आयोजन 3 नवम्बर की सुबह 10.30 बजे से शुरू होगा। शहर के विभिन्न स्कूल, कॉलेजों, शिक्षण संस्थाओं से जुड़े लोग, शहर के गणमान्य नागरिक, सियासत से जुड़ी हस्तियां और नामवर उलेमा इस दौरान मौजूद रहेंगे।

Possitive News : एक कदम सकारात्मकता की ओर… राजधानी में एक नया अभियान, जानें क्या है यह अपील

खान आशु
भोपाल। त्योहारों के धार्मिक आधार पर बंटवारे से आगे बढ़कर व्यापार और कारोबार में भी विभाजन के प्रयासों पर अब सकारात्मकता की कोशिशें चल पड़ी हैं। राजधानी भोपाल में युवाओं ने एक मुहिम चलाई है। इसमें हर क्रिया पर प्रतिक्रिया देने की आदत पर अंकुश लगाने की बात कही जा रही है। लोगों से अपील की जा रही है कि चंद नफरत फ़ैलाने वालों को दरकिनार और नजर अंदाज करके शिक्षा, सफलता, विकास और समाज में सौहाद्र एवं सद्भावना के प्रयास किए जाएं।
राजधानी भोपाल में सोशल मीडिया पर यह सकारात्मक पहल चलाई जा रही है। शहर के सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट आबिद मोहम्मद खान ने इसकी शुरुआत की है। उन्होंने अपनी इस मुहिम को “आओ कुछ ऐसा करें कि मुद्दा मुर्दा बन जाए!” शीर्षक दिया है। एडवोकेट आबिद ने लिखा है कि कोई खाने की लाइन से बाहर निकाले, कोई बड़े-बड़े होर्डिंग लगवाए और उस पर आपकी टिप्पणी आए, ये जरूरी तो नहीं। आबिद ने कहा कि हर नकारात्मक बात पर आपकी नकारात्मक प्रतिक्रिया आए, ये भी जरूरी तो नहीं!
हर मुद्दा हवा में उछाला जाए, ये जरूरी तो नहीं! छोटे लोगों की छोटी सोच पर आप बड़े लोग बोलें, ये भी जरूरी तो नहीं!
कुछ मुद्दों को आप मुर्दा भी बना सकते हैं; उसका जिक्र करना छोड़ दें, तो मुद्दा खुद-ब-खुद मुर्दा बन जाएगा!

वक्त आगे बढ़ने का
सकारत्मक मुहिम में कहा जा रहा है कि ये वक्त आगे बढ़ने का है। जब आप छोटी छोटी बातों और छिछोरी क्रियाओं पर प्रतिक्रिया देना बंद कर देंगे और अपना वक्त आगे बढ़ने में लगाएंगे, तो आपके आस-पास का माहौल सकारात्मक बनने लगेगा। पिछली बातों को भूलकर आगे बढ़ना ही समझदारी है। मिसाल के तौर पर जापान, जिसने हिरोशिमा-नागासाकी पर बम के धमाके के बाद अपने जख्मों पर रोते हुए नही बैठा रहा। वह उठा, फिर चला, फिर दौड़ा और इतना आगे निकल गया कि आज दुनिया उसकी मोहताज हो गई। अपील की जा रही है कि छोटी सोच पर लानत भेजें और तरक्की करें ताकि आपका समाज तरक्की करे, आपका मुल्क तरक्की करे। यही वक्त का तकाजा है !

इसलिए चली मुहिम
पिछले दिनों नवदुर्गा उत्सव के दौरान कुछ संगठनों ने गरबा पंडाल में मुस्लिम समुदाय की एंट्री पर प्रतिबंध की घोषणा की थी। इसको लेकर प्रदेश भर में मुस्लिम युवाओं के साथ मारपीट की घटनाएं भी हुईं। दिवाली के दौरान पूरे प्रदेश में मुस्लिम कारोबारियों से सामान न खरीदने की घोषणा से भी विकट हालात बनाने के प्रयास किए गए। इसके बाद अब दिल्ली से चला एक अस्पताल के बाहर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें जरूरतमंद मरीज परिजनों को खाना वितरण करने वाले एक व्यक्ति द्वारा धार्मिक नारा लगाने की बाध्यता लगाई जा रही है। इस वीडियो के वायरल पर एक और वीडियो बाजार में है, जिसमें दूसरे धर्म की बेहतर छवि दिखाई जा रही है।

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