अपने शायर के लिए दीवाना शहर, जश्न ने छुई बुलंदियां, याद आया राहत के दौर का आयोजन

खान आशु
भोपाल। शहर इंदौर ने एक जश्न चंद सालों मनाया था, जिसकी कामयाबी की पताकाएं इतने ऊंचे तक लहरा गईं थीं कि उनका मुकाबला अब तक किसी मुशायरा महफिल से नहीं हो पाया। यह दुनिया के मकबूल शायर डॉ राहत इंदौरी की 70वीं सालगिरह का जश्न था, जो उनके जीवनकाल में मनाया गया था। इसके पांच बरस बाद जब जब अमृत महोत्सव मनाने का मौका आया, तो राहत अपने। चाहने वालों के बीच मौजूद नहीं हैं। लेकिन शहर ए इंदौर ने अपनी मुहब्बत का परचम लहराए रखा और शायर की याद में मनाए जाने वाले आयोजन को यादगार कार्यक्रम का तमगा थमा दिया।
राहत इंदौरी फाउंडेशन और इंदौर शहर के साथ पूरे प्रदेश एवं देश की मिलीजुली कोशिशों का नतीजा था, जश्न ए राहत : बात राहत की। राहत साहब से जुड़ी और उनकी पसंद की विभिन्न गतिविधियों से सजे इस आयोजन का हिस्सा बनने की लोगों की ललक वैसी ही थी, जैसे राहत साहब के दौर वाले जश्न में रही थी। तब राहत साहब को सुनने की होड थी, अब उनके बारे में बातें सुनने, जानने, समझने और अपने मन मस्तिष्क में सहेजने की कसक ने उन्हें कार्यक्रम स्थल तक पहुंचा दिया था।

सोशल मीडिया प्रचार ने बढ़ाया उत्साह
नए साल की पहली शाम को होने वाले आयोजन के लिए सोशल मीडिया प्रचार लंबे समय से जारी था। राहत इंदौरी फाउंडेशन के इस आयोजन को एप्रिशिएट करने के लिए जहां बड़े साहित्यकारों, शायरों और राहत को जानने वालों ने अपनी गुड विशेज सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर शेयर की, वहीं फिल्मों, टीवी और रंगकर्म से जुड़ी बड़ी हस्तियों ने भी राहत साहब के लिए अपने मन की बात कही और इस प्रोग्राम का हिस्सा बनने की अपील की। शहर इंदौर से आगे चलकर प्रदेश के कई शहरों तक इस कार्यक्रम के पोस्टर्स की मौजूदगी ने भी लोगों में उत्साह भर दिया। यही वजह रही कि पहले आओ, पहले जगह पाओ की आसानी के बावजूद एंट्री पास हासिल करने की होड मच गई। आयोजकों को हॉल की सीटिंग क्षमता से अधिक पास बांटने की मजबूरी तक बन गई। लाभ मंडपम के बैठक हॉल के अलावा बाहर भी बड़े स्क्रीन और बैठक व्यवस्था भी करने की स्थिति बन गई।

शाम से रात तक चलीं महफिलें
जश्न ए राहत अपने नियत समय शाम चार बजे से थोड़ी देर से शुरू हुआ। प्रसिद्ध उद्घोषक संजय पटेल की सुरमई आवाज के साथ पहला बातचीत सत्र शुरू हुआ। शमा रौशन करने की रस्म अदायगी के बाद राहत साहब के बड़े भाई एमए कुरैशी ने अतिथियों का शॉल, स्मृति चिन्ह और पुष्प गुच्छ से मेहमानों का इस्तकबाल किया। डॉ अजीज इरफान, डॉ दीपक रूहानी और हिदायत उल्लाह की इस स्वागत बेला में राहत साहब के दोनों बेटे फैसल राहत और सतलज राहत भी शामिल रहे। इस दौरान डॉ राहत इंदौरी पर पीएचडी करने वाले डॉ अजीज इरफान की किताब ख्वाब की खेतियां का विमोचन भी किया गया।

राहत जानते थे लोगों तक कैसे पहुंचे शायरी : डॉ दीपक रूहानी
जश्न ए राहत के पहले चरण में डॉ राहत इंदौरी की शख्सियत और फन पर बात हुई। कार्यक्रम के सूत्रधार बने सतलज राहत को जवाब देते हुए डॉ दीपक रूहानी ने कहा कि राहत साहब ने यह फन था कि अपने श्रोताओं तक शायरी कैसे पहुंचाई जाए। उन्होंने राहत इंदौरी को राहत ए दुनिया बनने में शहर इंदौर की बड़ी भूमिका बताई। उन्होंने कहा कि राहत साहब की शायरी को साम्प्रदायिक सौहाद्र वाली शायरी कहा जा सकता है। डॉ दीपक का मानना है कि जो भी शख्स राहत साहब से दो मिनट भी मिल लेता तो उनका होकर रह जाता था। अपने से छोटों को सम्मान देने का हुनर भी उनमें खूब रहा है। डॉ इरफान अजीज और हिदायत उल्लाह ने भी डॉ राहत इंदौरी की कई अनछुई बातों को साझा किया।

हिमांशु ने सुनाई दास्तां
दुनिया के मशहूर दास्तानगो डॉ हिमांशु वाजपेई ने राहत साहब की जिंदगी के विभिन्न पहलुओं को रोचक दास्तान में पिरोकर सुनाया। उन्होंने राहत साहब के पहले मुशायरे से लेकर शिखर सम्मान तक से जुड़े किस्से सुनाए।

और मिला यह बड़ा तोहफा
डॉ राहत इंदौरी के शायरी जीवन में कागज से उतरी पंक्तियों से लेकर मंचों पर सुनाई गजलों के बीच कुछ सुखद और अनकहे पढ़े शेर ऐसे भी हैं, जो मंजर ए आम पर नहीं आ पाए। राहत इंदौरी फाउंडेशन ने इन सभी बचे हुए लम्हों को एक किताब की शक्ल दी है। जश्न ए राहत के दौरान रेखता पब्लिकेशन की इस किताब “मैं जिंदा हूं” का विमोचन भी किया गया। इस नई किताब से राहत साहब के कई नए कलाम उनके चाहने वालों को पढ़ने को मिलेंगे।

सूफियाना महफिल और गजलों की बारिश
जश्न ए राहत के दौरान कलाम ए राहत के दौरान आफताब कादरी और साथियों ने राहत साहब की ग़ज़लों को सूफियाना अंदाज़ में पेश किया।  जश्न के आखिरी रंग में महफिल ए मुशायरा सजाई गई। जिसमें देश दुनिया के नामवर शायरों ने अपने कलाम पेश किए।

बात राहत की है… नए साल की पहली शाम जुटेंगे राहत के खैरख्वाह, होंगी उनके मिजाज की बातें

इंदौर। दुनियाभर में मकबूल शायर डॉ राहत इंदौरी की सालगिरह का दिन है। उनकी याद करने के मुफीद इस दिन को यादगार बनाने के प्रोग्राम की एक श्रृंखला तैयार की गई है। इसमें शामिल की गई कड़ियों में वह सब कुछ है, जो डॉ राहत इंदौरी अपने आसपास पसंद किया करते थे। मुशायरा, सूफियाना महफिल, दास्तानगोई, किताबों का विमोचन जैसे लम्हों को संजोकर तैयार किया गया प्रोग्राम नए साल की पहली शाम को राहत साहब के शहर इंदौर में ही होगा।
राहत इंदौरी फाउंडेशन ने इस कार्यक्रम की तैयारी की है। फाउंडेशन के फैसल राहत और सतलज राहत इंदौरी ने बताया कि राहत साहब की 75वीं सालगिरह का जश्न उसी मिजाज और वकार के साथ मनाया जा रहा है, जिस गरिमा के राहत साहब तमाम उम्र प्रोग्राम सजाते रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बहु आयामी कार्यक्रम में डॉ राहत इंदौरी की शख्सियत और फन पर बात होगी, दास्तान ए राहत भी होगी,
सूफियाना महफिल भी सजेगी और मुशायरे का रंग भी छाएगा। इस दौरान  कुल्लियात ए राहत इंदौरी “मैं जिंदा हूं” का विमोचन भी किया जाएगा। फैसल राहत और सतलज ने बताया कि कार्यक्रम इंदौर के लाभ मंडपम में होगा। यह सभी राहत प्रेमियों के लिए खुला रहेगा।

ऐसा होगा प्रोग्राम :
शाम 4 बजे – डॉ. राहत इंदौरी की शख्सियत और फ़न पर सतलज राहत बात करेंगे डॉ. अज़ीज़ इरफान, डॉ. दीपक रूहानी और हिदायतुल्लाह खान से… साथ ही डॉ. अज़ीज़ इरफान की किताब “ख्वाब की खेतियाँ” का विमोचन।

5 बजे – दास्तानगोई – दास्तान-ए-राहत में डॉ. राहत इंदौरी की कहानी, डॉ. हिमांशु बाजपई की जुबानी।

6 बजे – कलाम-ए-राहत में आफ़ताब क़ादरी और साथियों की तरफ़ से राहत साहब की ग़ज़लों को सूफियाना अंदाज़ में पेश किया जाएगा।

7 बजे से – कुल्लियात-ए-राहत इंदौरी “मैं ज़िंदा हूँ” का विमोचन और उसके बाद ऑल इंडिया मुशायरा।

मुख्यमंत्री की उपस्थिति में होगा कोलार दानिश चौराहे  का नया नामकरण – सौरभ गर्ग

दानिश चौराहे का नाम बदलकर होगा अग्रसेन चौराहा, वृंदावन के कलाकार देंगें प्रस्तुति

भोपाल। राजधानी भोपाल के दानिश चौराहे का नाम बदलकर अग्रसेन चौराहा होने जा रहा है। 5 जनवरी को होने वाले कार्यक्रम के लिए भोपाल का अग्रवाल समाज तेजी से तैयारी में जुटा हुआ है। गुरुवार को गोविंदपुरा स्थित एक निजी कार्यालय में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अग्रवाल समाज कोलार के अध्यक्ष शरद अग्रवाल ने बताया कि सीएम डॉ मोहन यादव एवं हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा की मौजूदगी में दानिश चौराहा’ कोलार रोड़,भोपाल का नाम बदलकर ” अग्रसेन चौराहा” किया जा रहा है। इस मौके पर कार्यक्रम में वृंदावन की समिति द्वारा श्रीकृष्ण लीला, फूलों की होली एवं भोजन प्रसादी का आयोजन किया गया है। उन्होंने बताया कि पहली बार संपूर्ण अग्रवाल समाज मिलकर कार्यक्रम का आयोजन करने जा रहा है। वही युवा समाज सेवी गौरव गर्ग एवं अग्रवाल समाज कोलार से विशाल गोयल, शैलेश अग्रवाल, सौरभ गुप्ता, सोनू मंगल, सौरव गर्ग, मनोज अग्रवाल, संदेश अग्रवाल एवं साथियों ने जानकारी दी के समाज के सभी लोगों के अथक प्रयासों एवं एकजुटता की वजह से अग्रवाल समाज का युवा जागरूक हो पा रहा है। और उसी जागरूकता और एकजुटता के चलते भोपाल के अग्रवाल समाज द्वारा की जा रही मांग 5 जनवरी को पूरी होने जा रही है।

अब तक खरीदी गई 21 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान !

समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी 20 जनवरी तक

भोपाल । खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अभी तक 3 लाख 22 हजार 89 किसानों से 21 लाख 22 हजार 901 मीट्रिक टन धान की खरीदी उपार्जन केन्द्रों में हो चुकी है। धान की खरीदी के लिये 1393 उपार्जन केन्द्र बनाये गये हैं। धान का उपार्जन 20 जनवरी 2025 तक किया जायेगा। धान कॉमन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2300 रूपये और धान ग्रेड-ए का 2320 रूपये है।
धान की खरीदी जिला पन्ना में 58,454, दमोह 39,670, सागर 7459, शहडोल 1 लाख 1 हजार 43, अनूपपुर 46,208, उमरिया 62,732, रीवा 2 लाख 17 हजार 77, सतना 2 लाख 35 हजार 687, सिंगरौली 80,259, सीधी 60,754, मऊगंज 54,919, मैहर 79,120, सीहोर 13,100, रायसेन 17,536, विदिशा 676, नर्मदापुरम 78,046, बैतूल 20,725, हरदा 349, कटनी 2 लाख 21 हजार 154, बालाघाट 2 लाख 75 हजार 776, मंडला 1 लाख, 9 हजार 759, नरसिंहपुर 45,363, सिवनी 1 लाख 13 हजार 95, जबलपुर एक लाख 60 हजार 922, डिंडोरी 17,699, छिंदवाड़ा 4719, भिण्ड 398, शिवपुरी 138, अलीराजपुर 47 और झाबुआ जिले में 17 मीट्रिक टन की जा चुकी है।

Bhopal News :इजरायल की जल तकनीक आएगी भारत, मैपकास्ट ने की पहल, हुई कार्यशाला

भोपाल। एक छोटा सा देश इजराइल अपने आधुनिक तकनीकी विकास का दुनिया में लोहा मनवा चुका है। चाहे वो डिफेंस का क्षेत्र हो, जल प्रबंधन का क्षेत्र हो अथवा कृषिका यह देश कई विकसित देशों से बहुत आगे है। जब भी विश्व में कही आधुनिक विज्ञान और उन्नत तकनीक की बात हो तो आकार में छोटे और प्राकृतिक संसाधनों के मामले में भारतसे काफी पीछे होने के बावजूद इजरायल समूचे विश्व में अग्रणी देशों में गिना जाता है। इस विचार को संज्ञान में रखते हुए आज मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकॉस्ट) ने भारत में इजरायल एंबेसी(दूतावास) में पदस्थ “वाटर अटैची” सुश्री नोआ को आमंत्रित किया औरमध्य प्रदेश राज्य में जल क्षेत्र में कार्य करने वाले सभी शासकीय और केंद्र शासनके विभागों को उनसे रूबरू होने का अवसर प्रदान किया। इजरायल एंबेसी, इंडिया की वाटर अटैची मिस नोएल के आजभोपाल प्रवास पर परिषद द्वारा एक बैठक आयोजित कर जल के क्षेत्र में कार्य करनेवाले सभी स्टेकहोल्डर्स को जल प्रबंधन में अपने विभाग की तकनीकी पक्ष को रखने और आ रही समस्याओं के उचित समाधान हेतु आमंत्रित किया । इस अवसर पर परिषद की गतिविधियों पर संक्षिप्त प्रस्तुतीकरण तस्नीम हबीब द्वारा किया गया, जबकि परिषद के जल संसाधन प्रमुख डॉ कपिल खरे द्वारा जल के क्षेत्र में अब तक पूर्ण किए गए प्रोजेक्ट्स की जानकारी प्रस्तुत की गई। पिछले3 वर्षोंमें जल क्षेत्र में परिषद द्वारा रिमोट सेंसिंग और जीआईएस तकनीक के प्रयोग से किएगए करो के साथ आगामी योजनाओं पर भी प्रकाश डाला। मेपकॉस्ट एवं नर्मदा समग्र की संयुक्त पहल पर आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में वाटर सेक्टर परकाम करने वाले सभी गवर्नमेंट डिपार्टमेंट और स्टेकहोल्डर्स उपस्थित हुए, जिनमें प्रदेश शासन के लोकस्वास्थयांत्रिकी विभाग, जलसंसाधन विभाग, राष्ट्रीयजल विज्ञान विभाग (एनआईएच), आईसरभोपाल, केंद्रीयजल आयोग, केंद्रीयभूजल प्राधिकरण, AIGGPA एवंEPCO, केविभाग प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित हुए। अपने अपने विभाग द्वारा प्रदेश के जलसंरक्षण, संवर्धनऔर प्रबंधन पर हुई सार्थक चर्चा उपरांत सभी ने इजरायल द्वारा जल क्षेत्र में डेवलपकी गई नई तकनीक पर प्रदेश में 2 दिनके कार्यक्रम हेतु प्रस्ताव दिया, जिसपरसुश्री नोआ ने सहमति जताई । उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि यदि किसी विभाग कोइसराइली विशेषज्ञों की मदद चाहिए तो उस पर कल वो पृथक से तकनीकी दल के साथ चर्चा करेंगी और भोपाल में एक कंसल्टेशन कार्यक्रम की संभावनाएं तलाशेंगी। सभी को सततसंपर्क में रखने का आह्वान इजरायल एंबेसी से आए श्री नीरज गहलावत ने दिया।कार्यक्रम के आरंभ में परिषद महानिदेशक द्वारा अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छभेंट कर किया गया। अंत में परिषद केवरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ रविशंकर भारद्वाज ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

Bhopal News : जश्न ए बाब में साहित्य के कई रंग खिले… किताबों का विमोचन, अफ़सांचे, बातें और मुलाकातें….!

खान आशु
भोपाल। दौर बदल रहा है… मिजाज बदल रहा और शौक भी बदल रहे हैं…! बदलाव ने लंबी अवधि की मूवी का आकार छोटा कर दिया… क्रिकेट के स्वरूप को ट्वेंटी ट्वेंटी और सीमित ओवर तक समेट दिया…! साहित्य भी इस बदलाव से अछूता कैसे रखता…! लंबी तहरीरें, नॉवेल और मोटे ग्रंथों की जगह अफ़सांचे(लघु कथाओं) ने ले लिया…! इसी जरूरत और इसकी अहमियत को देखते और समझते हुए आकार लिया बज़्म ए अफसांचा ने। चार बरस के इस सफर में कई बड़े आयोजनों की दहलीज सजा चुके इसी बज्म ए अफसांचा ने अपने सालाना कार्यक्रम की महफिल सजाई। जिसमें कई रंग सजाए गए।
बज्म ए अफसांचा का सालाना कार्यक्रम राजधानी भोपाल में हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मप्र उर्दू अकादमी की निदेशक डॉ नुसरत मेहदी थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता मशहूर शायर डॉ अली अब्बास उम्मीद ने की। मशहूर साहित्यकार इकबाल मसूद इस कार्यक्रम के मेहमान ए खास थे। कार्यक्रम की रूपरेखा बज्म ए अफसांचा के अध्यक्ष डॉ मोहम्मद आजम ने बताई। संचालन की जिम्मेदारी बद्र वास्ती ने पूरी की।

हुआ किताबों का विमोचन
बज़्म-ए-अफ़सांचा भोपाल के इस आयोजन में डॉ मोहम्मद आज़म की खोजपरक किताब “शायराना तअल्ली” का विमोचन हुआ। इस दौरान
नफीसा सुल्ताना अना की तीन किताबों का विमोचन भी किया गया। इनमें “सिरात” (सफ़र नामे “तुम्हारे नाम ” (मजमूआ नज़म और “दश्त-ए-ग़म”
(नावल) शामिल हैं।

इन्हें मिला खास एजाज
पिछले दिनों मशहूर-ओ-मारूफ़ शायर और नस्र निगार ज़िया फ़ारूक़ी साहब का इंतक़ाल हो गया था। उन की याद में बज़्म ने इस साल से “ज़िया फ़ारूक़ी ऐवार्ड” देने का फ़ैसला किया है। पहले अवार्ड से मप्र उर्दू अकादमी की निदेशक डॉ नुसरत मेहंदी को नवाजा गया।

सम्मान इन्हें भी मिला
इस दौरान अखबारों के जरिए साहित्य सेवा कर रहे मीडियाकर्मियों को भी एजाज से नवाजा गया। इनमें पत्रकार खान आशु, रिजवान शानू, जाहिद मीर, सलमान खान, शाहिद समर, सलमान गनी आदि शामिल थे।

MP News : “मास्टर पीसेस ऑफ मप्र” के लिए जुटे जानकार, साझा की अपनी विरासत की खूबियां, वेबिनार के माध्यम से हुईं कई जिज्ञासाएं पूरी

भोपाल। पुरातत्विक महत्व रखने वाली मूर्तियां प्रदेश के अलग अलग स्थानों पर मौजूद हैं। इनके इतिहास और महत्व के साथ इनसे जुड़े खास तत्वों को जन जन तक पहुंचाने के प्रयास जारी हैं। इसी धारणा को लेकर संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय ने एक वेबिनार का आयोजन किया। इस दौरान जहां विशेषज्ञों ने कई खास जगहों की बारीकियों से रूबरू कराया, वहीं इनसे जुड़ी लोगों की जिज्ञासाओं को भी पूरा किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में विभाग की आयुक्त उर्मिला शुक्ला ने कार्यक्रम का उद्देश्य बताया। उन्होंने वेबिनार में शामिल विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए उन्हें विषय पर बात के लिए आमंत्रित किया। “मास्टर पीसेस ऑफ मप्र” विषय पर आधारित इस कार्यक्रम के वक्ता के रूप में डेक्कन कॉलेज ऑफ आर्कियोलॉजी, पुणे के डॉ गोपाल जोगे, पुरातत्व विभाग के पूर्व अधीक्षक डॉ मैनुएल जोसेफ और वरिष्ठ पुरातत्वीय अधिकारी डॉ रमेश यादव मौजूद थे। वक्ताओं ने अलग अलग विषयों पर अपने उद्बोधन देते हुए प्रदेश की कई विरासत की विशेषताओं से अवगत कराया। इस दौरान शहडोल म्यूजियम की नरसिंहा प्रतिमा, स्टेट म्यूजियम की हरिहर कृति और देव बडला के मंदिरों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने इन धरोहरों को लेकर विस्तृत जानकारी देते हुए इनका पुरातात्विक महत्व बताया।

हुईं जिज्ञासाएं शांत
वेबिनार में अलग अलग शहरों और विभिन्न क्षेत्रों से संबद्ध करीब 80 से ज्यादा लोगों ने भागीदारी की। वक्ताओं के उद्बोधन के बाद कई प्रतिभागियों ने सवाल किए। जिनके जवाब देकर वक्ताओं ने उनकी जिज्ञासा शांत की।

बैरसिया के इजगिरी गांव में मिड-डे मील खाने के बाद सात बच्चे हुए फूड पॉइजनिंग के शिकार

एक बच्चे को किया हमीदिया अस्पताल रेफर आंगनवाड़ी में खाई थी दाल-रोटी लप्सी

जीतेन्द्र सेन
बैरसिया।। मिड-डे मील खाने के बाद सात बच्चे बीमार हो गए। जानकारी के अनुसार सभी की उम्र 3 से 5 साल के बीच है। बुधवार को दोपहर के करीब 6 बच्चों को बैरसिया और 1 बच्चे को हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मामला बैरसिया के इजगिरी गांव का है। गांव की आंगनवाड़ी में मिड-डे मील खाने वाले करीब 64 बच्चों की जांच कराई इनमें बीमार बच्चों ने मिड-डे मिल में दाल-रोटी और लप्सी खाई थी। वहीं पास की माध्यमिक शाला के बच्चों ने दाल-रोटी खाई थी। खाना खाने के कुछ देर बाद ही आंगनवाड़ी केंद्र के बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। वही जानकारी लगते ही बैरसिया एसडीएम आशुतोष शर्मा मौके पर पहुंचे और बच्चों की जांच करवाई इसके बाद सात बच्चों की हालत ठीक नहीं होने से इन्हें बैरसिया के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। यहां से एक बच्चे को हमीदिया अस्पताल भेजा गया।

उक्त मामले की जानकारी लगते ही भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य शिविर लगाकर सभी बच्चों की जांच कराई गई है। सभी बच्चों की हालत ठीक है। एहतियातन के तौर पर उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है। वही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैरसिया में मौजूद तहसीलदार करुणा दंडोतिया ने बताया कि सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी होगी।

बैरसिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती बच्चों के नाम जिन बच्चों की तबीयत बिगड़ी

कीर्तिका (4) पिता शिवनारायण, नायरा (3) पिता उधम सिंह, वैशाली (4) पिता भैयालाल, विराट (5) पिता रमेश,
परी (5) पिता धर्मेंद्र
प्रिंस (4) पिता धर्मेंद्र
ऋषभ (4) पिता विनोद
इनमें से प्रिंस को हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

MP News : सिंहस्थ 2028 : इस पर्व से श्रद्धालु लेकर जाएंगे विरासत की विशेष यादें, जानिए पुरातत्व विभाग क्या कर रहा है तैयारी


खान आशु
भोपाल। आस्थाओं का महापर्व सिंहस्थ 2028 इस बार कई नए रंग के साथ मनाया जाएगा। सरकारी व्यवस्थाएं इसके लिए अभी से जोर पकड़ने लगी हैं। देश दुनिया से आने वाले श्रद्धालु मेहमान इस पर्व से कुछ खास यादें और अनुभव लेकर जाएं, इसके लिए पुरातत्व विभाग ने भी खास तैयारियां अपने जिम्मे ली हैं। विभाग सिंहस्थ क्षेत्र के आसपास के कुछ हेरिटेज स्थलों का पूर्णोद्धार करने वाला है। करीब दस करोड़ रुपए से किए जाने इन कामों में जहां सौंदर्य को आगे रखा गया है, वहीं यहां आने वाले मेहमानों के लिए बुनियादी सुविधाओं का भी खाका बनाया गया है।
जानकारी के मुताबिक मप्र पुरातत्व विभाग ने इस सिंहस्थ पर्व से पहले उज्जैन शहर और इसके आसपास स्थित पांच विरासत स्थलों के जीर्णोद्धार की तैयारी शुरू कर दी है। इनमें वीर दुर्गादास की राजसी छतरी, राम जनार्दन मंदिर, श्री चौबीस खंबा मंदिर, प्राचीन चामुंडा माता मंदिर गजनी खेड़ी और विश्व चस्तिका शामिल हैं।

पुरातत्व विभाग की मंशा

पर्यटन और संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि एमपी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का खजाना है, जो कई प्राचीन स्मारकों से सुसज्जित है। हमने इन अमूल्य रत्नों को पुनर्स्थापित और संरक्षित करने का काम शुरू किया है। सिंहस्थ से पहले, हमने विशिष्ट विरासत स्थलों का चयन किया है, जिन्हें पर्यटकों के लाभ के लिए विकसित किया जाएगा।

होंगे कई बड़े काम
जानकारी के मुताबिक पुनर्स्थापना और संरक्षण परियोजना में कई बड़े काम शामिल हैं। यहां होने वाले कामों में बुनियादी सुविधाओं को शामिल किया गया है। जिनमें शौचालय, पीने के पानी की सुविधा, बेंच, कुशल जल निकासी प्रणाली और अन्य आवश्यक सुविधाएं शामिल हैं।

सांसद आलोक शर्मा ने लोकसभा में उठाया भोपाल का गौरवशाली इतिहास

राजा भोज शोध संस्थान बने, लोगों को उस दौर की समृद्ध संस्कृति, सभ्यता और परंपरा की जानकारी हो

दिल्ली/भोपाल/ सांसद आलोक शर्मा एक बार फिर भोपाल शहर को लेकर संसद में मुखर हुए। सोमवार को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान उन्होंने भोपाल में राजा भोज शोध संस्थान बनाए जाने का मामला प्रमुखता से उठाया। सांसद शर्मा ने कहा कि भोपाल का एक हजार साल का गौरवशाली इतिहास रहा है। यहां की समृद्ध संस्कृति, सभ्यता और परंपराएं अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने लोकसभा स्पीकर के माध्यम से संस्कृति मंत्री से पूछा कि सरकार की राष्ट्रीय संस्कृति निधि के अंतर्गत भोपाल में राजभोज के नाम पर शोध संस्थान बनाने का विचार है? यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है? और यदि नहीं, तो राजा भोज के नाम पर कब तक भोपाल में शोध संस्थान स्थापित किया जाएगा। सांसद शर्मा ने लोकसभा स्पीकर से निवेदन किया कि भोपाल की गौरवशाली संस्कृति है। हमारा भोपाल राजा भोज का भोपाल है। हमारा भोपाल सम्राट अशोक का भोपाल है। हमारा भोपाल चंद्रगुप्त मौर्य का भोपाल है। हमारा भोपाल प्रत्यारवंशों का भोपाल है। हमारा भोपाल रानी कमलापति, गोंडों का भोपाल है भोपाल की वास्तविक विरासत को विश्व पटेल पर लाने हेतु सरकार की कोई कार्य योजना है कृपया बताने की कृपा करें।

उल्लेखनीय है कि सांसद आलोक शर्मा पूर्व में भी विभिन्न मंचों से भोपाल की विरासत को संरक्षित करने और राजा भोज व रानी कमलापति के कालखंड के समृद्ध इतिहास को लेकर मामला उठाते रहे हैं। राजा भोज द्वारा बनवाया गया बड़ा तालाब शहर की जीवन रेखा है। तालाबों का संरक्षण हो। यहां राजा भोज की विशाल प्रतिमा लगाई गई है। वहीं जिस स्थान पर रानी कमलापति ने अपनी अस्मिता और सम्मान की रक्षा के लिए जौहर किया था। छोटे तालाब के उस स्थान पर आलोक शर्मा ने भोपाल महापौर रहते ही रानी कमलापति की विशाल प्रतिमा की स्थापना के साथ खूबसूरत आर्च ब्रिज का निर्माण कराया था।
संभावनाओं की राजधानी भोपाल राजा भोज और रानी कमलापति का शहर है। इसकी ऐतिहासिक और सामाजिक पहचान है। यह शहर विरासतों को संरक्षित करते हुए नवाचार, प्रगति और अवसरों का केंद्र बनने का सपना देखता है। यह शहर की सांस्कृतिक समृद्धि और ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए इसे वैश्विक पहचान दिलाने की संभावनाओं को उजागर करता है।

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