मामला बड़ी रकम के गोंडोबल का है, जानिए क्या है पूरा मामला
खान आशु
भोपाल। संस्था एक, अधिकारी भी वही, वांछित पद भी नहीं बदला… बस बदला तो एक नियम। नियम के झोलझाल के पीछे छिपा एक मकसद है। जिसे पूरा करने के लिए सेंट्रल हज कमेटी ने सारा तंत्र फैलाया और उसमें कामयाबी हासिल कर ली।
मामला सेंट्रल हज कमेटी में होने वाली डिप्टी सीईओ से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक इस पद के लिए जनवरी 2023 में एक विज्ञापन प्रकाशित किया गया। अन्य अहर्ताओं के साथ आयु सीमा 56 वर्ष तय हुई। आवेदन पहुंचे। प्रक्रिया हुई। लेकिन परिणाम होल्ड पर रख दिए गए। करीब 8 महीने बाद फिर इस प्रक्रिया को दोहराया गया। फिर विज्ञापन, फिर वही अहर्ता, फिर आवेदन, फिर साक्षात्कार…. और पिछली बार की तरह इस बार भी परिणाम होल्ड पर। डिप्टी सीईओ के बिना ही कामकाज अपनी गति पर चलता रहा।
…और बदल गए नियम
सूत्रों का कहना है कि सेंट्रल हज कमेटी में डिप्टी सीईओ पद के लिए जुलाई 2024 में फिर विज्ञापन जारी किया गया। बाकी वांछित योग्यता पिछली बार की तरह ही रखी हैं। बदला सिर्फ एक नियम, आवेदक की अधिकतम आयु सीमा 56 से घटाकर 45 कर दी गई। सूत्रों के मुताबिक 9 अक्टूबर को इन पदों के लिए साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी करते हुए 3 लोगों को नियुक्ति दे दी गई है।
दो साल का इंतजार बेकार
सूत्रों का कहना है कि सेंट्रल हज कमेटी के इन पदों पर सेवाएं देने के ख्वाहिशमंद शासकीय अधिकारियों ने आवेदन किए थे। निर्धारित योग्यता, काम करने का जज्बा और कुछ बेहतर परिणाम देने की ललक रखने वाले अधिकारियों ने अपने मूल विभाग से प्रतिनियुक्ति से लेकर अन्य फॉर्मेलिटी भी पूरी कर ली थी। लेकिन करीब दो साल के इंतज़ार के बाद उनके हाथ महज निराशा ही लगी है। 56 की आयु सीमा में बंधे यह अधिकारी नए नियमों की जंजीर में इस तरह जकड़ दिए गए हैं कि भविष्य में होने वाली ऐसी रिक्तियों और नियुक्तियों के लिए योग्य ही नहीं रहे हैं।
इसलिए सारा घालमेल
सूत्रों का कहना है कि हज यात्रा से पहले सेंट्रल हज कमेटी भारत के हाजियों को ठहरने के होटल आदि के सिलेक्शन के लिए एक टीम सऊदी अरब भेजती है। बताया जाता है कि इस टीम में डिप्टी सीईओ स्तर के अधिकारी ही शामिल किए जाते हैं। इस टीम की तस्दीक पर ही सऊदी अरब में होटल आदि फाइनल किए जाते हैं। जिनमें हज के दौरान हाजियों को ठहराया जाता है।
मामला अरबों रुपए का
जानकारी के मुताबिक करीब 42 दिन की हज यात्रा के लिए भारत से जाने वाले करीब डेढ़ लाख हाजियों के लिए सैकड़ों होटल किराए पर लिए जाते हैं। हाजियों से किराए के रूप में वसूल किया जाने वाला प्रति व्यक्ति 2200 रियाल के लिहाज से सऊदी अरब को करीब 8 अरब रुपए अदा किए जाते हैं। सूत्रों का कहना है सेंट्रल हज कमेटी द्वारा बिल्डिंग सिलेक्शन टीम द्वारा सऊदी से मिलकर दूरस्थ, कम सुविधा वाले और छोटे कमरों वाले होटल पर सहमति जता दी जाती है। जिसके चलते भारतीय हाजियों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस मामले में हज कमेटी ऑफ इंडिया के सीईओ लियाकत अली से चर्चा करना चाही तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
Category: देश
अभिमन्यु अभियान के अंतर्गत बच्चों को जागरूक कर रही पुलिस
अभिमन्यु बनकर महिलाओं की रक्षा करना उनके सम्मान की रक्षा करने की दिलाई शपथ
अमित सेन
8085661177
भोपाल। जिले के देहात क्षेत्र में आने वाले थाना सूखी सेवनिया के पुलिस अधिकारियों द्वारा लगातार बच्चों को उनके अधिकारों और कानून के बारे में बताया जा रहा है। एलएस मेमोरियल स्कूल चोपड़ा कला के कक्षा 1 से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं सहित शिक्षकों को सूखी सेवानिया थाना प्रभारी निरीक्षक रामबाबू चौधरी , उपनिरीक्षक स्वाती दुबे, द्वारा अभिमन्यु 2 अभियान के तहत गुड टच, बेड टच ,महिला संबंधी अपराध , छेड़खानी अपहरण ह्यूमन ट्रैफिकिंग आदि व साइबर अपराध ,मोबाइल से होने वाले अपराध ,इंस्टाग्राम, फेसबुक, हाउस अरेस्ट, यातायात नियम, नशे के दुष्प्रभाव नशे से दूर रहने एवं नशा मुक्ति, महिला समानता आदि के संबंध में विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई।

इसके साथ हीं उपनिरीक्षक स्वाति द्वारा बच्चों को अभिमन्यु बनकर महिलाओं की रक्षा करना उनके सम्मान की रक्षा करने की शपत दिलाई !

एवं थाना प्रभारी रामबाबू चौधरी ने बताया की यह कार्यक्रम अभिमन्यु 2 अभियान के तहत किए जा रहें है जिसमें बच्चों को और उनके परिजनों को क़ानून सबंधी जानकारी भी दी जा रहीं है तथा स्कूल में पोस्टर लगाए गए हैं। इस मुहिम का मक़सद बाल संबंधित अपराधों पर अंकुश लगाना और कानून की आवश्यक जानकारी जन जन तक पहुंचाना है।


Bhopal News : पुलिस से मिला सिर्फ आश्वासन, अब अदालत की शरण में मुस्लिम समुदाय, 21 को भोपाल न्यायालय में सुनवाई
भोपाल। पैगंबर हजरत मुहम्मद (सअस) को लेकर की गई अनर्गल टिप्पणी को लेकर अब मामला अदालत की दहलीज पर पहुंच गया है। राजधानी भोपाल से इस मामले को लेकर याचिका दायर की गई है। जिसपर 21 अक्टूबर को सुनवाई होगी। इससे पहले भोपाल समेत प्रदेशभर में पुलिस शिकायतें की गईं थीं। लेकिन जांच का हवाला देते हुए पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की है।
राजधानी भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने बुधवार को पत्रकारवार्ता के दौरान कहा कि हमारा देश संविधान के साथ चल रहा है। जहां सभी धर्म के लोगों को रहने और अपने मजहब की आस्थाओं के साथ जीने का अधिकार है। किसी भी व्यक्ति को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी दूसरे धर्म या उसके आराध्य को बुरा कहे। मसूद ने कहा कि हमारे देश की संस्कृति भी कभी इस तरह की नहीं रही। सर्वधर्म संभव पर रहने वालों ने हमेशा एक दूसरे के धर्म का सम्मान भी किया है और उनमें आस्था भी रखी है।
महंत नहीं इस ग्रह के
विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि महंत यति नरसिंहानंद इस ग्रह के नजर नहीं आते। उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य नफरत फैलाना है। अपनी इसी प्रवृत्ति के चलते वे हमेशा दूसरे मजहब का तिरस्कार करते रहते हैं। इस्लाम की आस्थाओं को आघात पहुंचाकर नरसिंहानंद खुद को सनातनी कहते हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि वे सनातन को भी बदनाम कर रहे हैं।
21 को सुनवाई
मसूद ने बताया कि न्याय की उम्मीद के साथ मुस्लिम समुदाय ने जगह जगह पुलिस शिकायत की हैं। उन्होंने खुद भी पुलिस कमिश्नर से मिलकर इस बारे में शिकायत दर्ज कराई थी। मसूद ने कहा कि जांच का हवाला देते हुए अब तक किसी भी शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की गई है। इस स्थिति को देखते हुए भोपाल न्यायालय में महंत यति नरसिंहानंद के खिलाफ वाद दायर किया गया है। जिसपर पहली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी। शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक बुंदेला इस मामले की पैरवी कर रहे हैं। मसूद ने कहा कि न्याय पालिका में हमारी पूरी आस्था और भरोसा है। निश्चित ही वहां से नरसिंहानंद को उनके कर्मों की सजा मिलेगी। साथ ही ऐसी तहरीर भी अदालत स्थापित करेगी, जिससे भविष्य में कोई भी सिरफिरा इस तरह की गुस्ताखी न करे।
MP News : राजधानी से निकलेगी शिक्षा की नई तहरीर, तीन दिन का आयोजन नवंबर में, जानें क्या है पूरा आयोजन
भोपाल। झीलों, पहाड़ियों, हरियाली और सुकून भरे वातावरण के लिए पहचाने जाने वाले शहर भोपाल की एक तस्वीर इसकी संस्कृति और सभ्यता की भी है। शिक्षा को लेकर भी कई नवाचार इसके खाते में जमा हैं। अब एक नई तहरीर इस शहर के नाम लिखी जाने वाली है। शिक्षा के नए अध्याय के साथ यहां एक आयोजन किया जा रहा है। नवंबर माह में होने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन को “सुतून ए इल्म” नाम दिया गया है।
आयोजक संस्थाओं ने में शामिल भोपाल सर्विंग ह्यूमैनिटी ने बताया कि शिक्षा को किया जाने वाला यह आयोजन शहर के लिए पहला भी होगा और नया भी। 9 से 11 नवंबर तक होने वाले इस आयोजन के दौरान सेमिनार, कांफ्रेंस, शैक्षिक प्रदर्शनी समेत कई सत्र होंगे। शिक्षा के क्षेत्र में शहर को उपलब्धियों से सजाने वाले लोगों का सम्मान भी इस दौरान किया जाएगा। “सुतून ए इल्म” नाम से आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर की शिक्षा से जुड़ी हस्तियां शामिल होंगी। शहर के स्कूल, कॉलेजों के अलावा कोचिंग संस्थान से जुड़े स्टूडेंट्स के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं भी इस दौरान होगी।
राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर राजधानी से नजराना
यह शिखर सम्मेलन भारत के राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य शिक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के अगुवाओं, नवाचारकों और पेशेवरों को एक मंच पर लाना है। सम्मेलन का एक व्यापक एजेंडा है। जिसमें प्रदर्शनी, सम्मेलन, शैक्षिक कार्यक्रम और शिक्षा में उत्कृष्टता को मान्यता देने के लिए पुरस्कार समारोह शामिल हैं। प्रतिभागियों को नेटवर्किंग सत्रों, B2B बैठकों में भाग लेने और शिक्षा के भविष्य को आकार दे रहे अत्याधुनिक उत्पादों और सेवाओं की खोज करने का अवसर मिलेगा।
इनका है सहयोग
भोपाल सर्विंग ह्यूमैनिटी, पेेस करियर प्लानर्स, ज़िस्ट4, PPE, और फॉस्टर ट्यूटोरियल के संयुक्त सहयोग से “सुतून-ए-इल्म” आयोजित किया जा रहा है।
घोटालों की राजधानी बनी नर्सिंग काउंसिल, वरीयता सूची दरकिनार कर बनाया रजिस्ट्रार
भोपाल। मप्र नर्सिंग काउंसिल और घोटाले एक दूसरे के पर्यायवाची होते दिखाई देने लगे हैं। कुछ दिनों पहले यहां आई सीबीआई जांच की आंच अब तक ठंडी भी नहीं हुई है। यहां एक और नया घोटाला सामने आ गया है। यह घोटाला नर्सिंग काउंसिल में रजिस्ट्रार की नियुक्ति को लेकर सामने आया है।
जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश नर्सिंग काउंसिल में वर्तमान रजिस्ट्रार अनिता चांद को लेकर भारी बवाल मचा हुआ है।
काउंसिल के रिकॉर्ड को देखें तो रजिस्ट्रार अनिता चांद सीनियर्टी लिस्ट में 46 वे स्थान पर आती हैं। वरीयता सूची में मौजूद 45 लोगों को दरकिनार करते हुए हुई उनकी नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
रजिस्ट्रार अनिता चांद की नियुक्ति पर उठ रहे सवालों में एक और प्रश्न यह भी शामिल है कि विगत सत्र 2021-22 में नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देने के लिए जो काउंसिल को निरीक्षण टीम बनाई गई, उनमें से एक टीम में खुद अनिता चांद शामिल रही हैं।
काउंसिल से जुड़े सूत्रों की मानें तो रजिस्ट्रार अनिता चांद ने भोपाल के कालेजों का निरक्षण किया और उनकी रिपोर्ट के आधार पर उनकी मान्यता वृद्धि की गई और जब उच्च स्तरीय जांच में उन्ही कालेजों का निरीक्षण किया गया तो वह अनियमितता वाले अनफिट निकले।
अब ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ऐसे दोषी और गैर जिम्मेदार को रजिस्ट्रार जेसे पद पर नियुक्त करने की क्या वजह रही है।
हालाकि इस मामले में जहां एक और विभागीय शिकायतें हो रही है वही उक्त मामले में हाईकोर्ट में भी याचिका लगी हुई है।
जब इन सभी सवालों और आरोप के सम्बन्ध में रजिस्ट्रार अनिता चांद से उनका पक्ष जानना चाह तो उन्होंने कहा की रजिस्ट्रार की नियुक्ति शासन स्तर पर हुई है आप को जो पूछना है समझना शासन से पूछिए।
बहरहाल अब देखना यह है की आने वाले दिनों में काउंसिल पर लगे घोटाले के दाग धुलते है या फिर और कोई एक नया घोटाला सामने आता है।
गाजी वली बोले, महंत की गिरफ्तारी इंसाफ नहीं, बल्कि उन्हें राहत देने का एक तरीका है…
भोपाल। पैगंबर हजरत मुहम्मद सअस के लिए अनर्गल टिपण्णी करने वाले महंत यति नरसिंहानंद को महज गिरफ्तार कर लिया जाना इस मामले का पटाक्षेप नहीं कहा जा सकता। बल्कि इस तरह उप्र सरकार ने देश में अशांति का माहौल बनाने वाले व्यक्ति को राहत दे दी है। भारतीय संविधान में प्रावधान मौजूद हैं, इनका इस्तेमाल किया जाए और महंत को सख्त सजा से नवाजा जाए।
जमीयत उलेमा हिंद मप्र के उपाध्यक्ष मौलाना गाजी वली अहमद ने रविवार को भोपाल में यह बात कही। उन्होंने कहा कि हमारा देश हमेशा से भाईचारे और आपसी सौहाद्र की मिसाल रहा है। दुनिया में इसकी यही पहचान हमें सबसे आगे रखती है। महंत यति नरसिंहानंद मौजूदा दौर की सियासत की एक कठपुतली भर है। असल ताकतें पर्दे के पीछे हैं, जो यति जैसे लोगों को आगे रखकर अपनी नफरत की दुकानें चला रहे हैं। मौलाना ने कहा कि महंत ने उस शख्सियत को लेकर बदकलामी की है, जिन्हें अल्लाह ने रहमतुल आलेमीन बनाकर भेजा है। हजरत मुहम्मद सअस न सिर्फ मुसलमानों के पैगंबर हैं, बल्कि उन्हें सारी दुनिया को मुहब्बत और भलाई का संदेश देने के लिए भेजा गया था। मौलाना गाजी ने कहा कि महंत की अशिक्षा, अज्ञानता, संकीर्ण मानसिकता है, जो पैगंबर हजरत मुहम्मद सअस को न पढ़ पाए और न उन्हें जान पाए। महंत ने अगर मुहम्मद साहब को पढ़ा होता, अध्ययन किया होता तो वे इस तरह की गुस्ताखी की जुर्रत न करते।
गिरफ्तारी नहीं, तय हो सजा
मौलाना गाजी ने कहा कि नबी की शान में गुस्ताखी करने वाले की गिरफ्तारी हो जाने की बात कही जा रही है। लेकिन महज गिरफ्तारी उनके कर्मों के लिए पर्याप्त नहीं है। होना यह चाहिए कि महंत के खिलाफ फास्ट ट्रैक पद्धति पर कार्यवाही होना चाहिए। भारतीय संविधान के लिहाज से किसी दूसरे धर्म को आहत करने वाले के तय सजा उन्हें दी जाना चाहिए। मौलाना ने कहा कि महंत का प्रयास देश की एकता, अखंडता, सद्भाव और सौहाद्र तथा शांति भंग करने का था। इस क्रिया के लिए महंत के खिलाफ देशद्रोह की सजा मुकर्रर की जाना चाहिए।
प्रदेश में न बनें ऐसे हालात
मौलाना गाजी वली अहमद ने कहा कि हमारा प्रदेश हमेशा से शांति का गहवारा रहा है। उन्होंने प्रदेश के संवेदनशील सीएम डॉ मोहन यादव से मांग की है कि इस बात पर सख्त नजर रखी जाए कि यहां महंत जैसे लोग न पनपने पाएं। मौलाना ने सीएम से अपेक्षा की है कि प्रदेश में पहले ही ऐसे प्रावधान तय कर दिए जाएं कि कोई सिरफिरा ऐसा कुत्सित प्रयास करने की हिम्मत न कर पाए।
बाल विरुद्ध अपराध में घर जाकर रिपोर्ट दर्ज करेगी पुलिस, अभियान के दौरान लोगों को मिली जानकारी
कार्यक्रम में मौजूद रहीं एसडीओपी प्रिया सिंधी
अमित सेन
8085661177
भोपाल। अमोनी गड़मुर्रा ग्राम पंचायत स्थित मयूर होम्स कॉलोनी में विराजित दुर्गा पांडाल में “मैं भी अभिमन्यु” अभियान के अंतर्गत जन संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बाल विरुद्ध अपराध, महिला संबंधी अपराध और सायबर फ्रॉड से बचाव की गंभीर जानकारी रहवासियों को दी गई। कार्यक्रम में सूखी सेवनिया थाना प्रभारी रामबाबू चौधरी ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि बच्चों की बेहतर परवरिश एक बेहतरीन समाज का निर्माण करती है। उन्होंने कहा कि बाल विरुद्ध अपराधों से बचने के लिए उन्हें अपने आसपास ही खेलने को कहें और उन्हें अकेले कहीं सामान लेने न भेजा जाए।

टीआई चौधरी ने युवाओं से अपराध में शामिल न होने की अपील करते हुए भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के उदाहरण देकर समझाइश दी। इसके साथ ही झांकी पांडाल में प्रोजेक्टर स्क्रीन पर मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा बनाई गई लघु फिल्मों के माध्यम से भी महिला सशक्तिकरण और छेड़छाड़ के विरुद्ध सख्त होने के लिए प्रेरित किया गया।

टीआई रचना मिश्रा ने महिला संबंधी अपराध पर चर्चा करते हुए कहा यदि हर नौजवान को अभिमन्यु की भांति शिक्षा मिल जाये तो समाज अपराध रहित हो जाएगा। इसके साथ ही मयूर होम्स कॉलोनी में छोटे बच्चों द्वारा नुक्कड़ नाटक एवं चित्रकारी के माध्यम से भी सशक्त संदेश दिया गया। कार्यक्रम में एसडीओपी प्रिया सिंधी ने सायबर अपराध पर बोलते हुए कहा कि यदि किसी की सोशल मीडिया अकाउंट हैक कर कोई आपत्तिजनक सामग्री अपलोड की जा रही है तो तत्काल पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराएं इसके साथ ही मोबाइल पर उपलब्ध ऑनलाइन लोन से बचने की सलाह दी।

आयोजन में एसडीओपी बिलखिरिया प्रिया सिंधी, सूखी सेवनिया थाना प्रभारी रामबाबू चौधरी, टी आई रचना मिश्रा, सब इंस्पेक्टर स्वाति दुबे, अमोनी गड़मुर्रा ग्राम पंचायत के सरपंच किशन यादव सहित आयोजन समिति “युवा एकता उत्सव समिति” के सभी सदस्य एवं मयूर होम्स कालोनी के रहवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।




पीवीटीजी बहुल 24 जिलों में पीएम पोषण योजना से बच्चों को मिल रहा पका हुआ पोषण आहार
भोपाल! केन्द्र सरकार की प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण या कहें पीएम पोषण योजना से प्रदेश के जनजातीय वर्ग के बच्चों को पके हुये पोषण आहार का भरपूर लाभ मिल रहा है। विशेष रूप से कमजोर व पिछड़े जनजातीय समूह (पीवीटीजी) की बहुलता वाले मध्यप्रदेश के 24 जिलों के बच्चे पीएम पोषण योजना से अधिक लाभान्वित हो रहे हैं।
प्रदेश में बैगा, भारिया एवं सहरिया तीन जनजातियां पीवीटीजी में आती हैं। अनूपपुर, अशोकनगर, बालाघाट, छिंदवाड़ा, दतिया, डिण्डोरी, गुना, ग्वालियर, कटनी, मंडला, मुरैना, नरसिंहपुर, सतना, शहडोल, श्योपुर, शिवपुरी, सीधी, विदिशा, भिण्ड, जबलपुर, रायसेन, उमरिया, सिंगरौली एवं सिवनी जिले में पीवीटीजी जनजातियां निवास करती हैं।
पीएम पोषण योजना में प्रदेश के 24 पीवीटीजी जिलों में सतत् रूप से खाद्यान्न (गेहूं एवं चांवल ) जारी किया जा रहा है। इस खाद्यान्न से बच्चों को पका हुआ गर्म पोषक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। गत वित्त वर्ष 2023-24 में इन 24 पीवीटीजी जिलों को 30184.01 मीट्रिक टन गेहूं एवं 26519.96 मीट्रिक टन चांवल, कुल 56703.97 मीट्रिक टन खाद्यान्न जारी किया गया। वर्तमान वित्त वर्ष 2024-25 में (30 सितम्बर 24 तक) इन्हीं पीवीटीजी जिलों को 13552.89 मीट्रिक टन गेहूं एवं 12941.77 मीट्रिक टन चांवल, कुल 26494.66 मीट्रिक टन खाद्यान्न जारी किया जा चुका है।
बच्चों के लिये खाना पकाने रखे गये रसोईयों के मानदेय एवं भोजन पकाने पर होने वाले अन्यान्य व्ययों के लिये भी इन 24 पीवीटीजी जिलों को समुचित राशि जारी की गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में (31 अगस्त 24 तक) अनूपपुर जिले को 5 करोड़ 50 लाख 29 हजार 567 रूपये, अशोकनगर को 4 करोड़ 99 लाख 65 हजार 544 रूपये, बालाघाट को 8 करोड़ 91 लाख 93 हजार 618 रूपये, भिण्ड को 5 करोड़ 87 लाख 82 हजार 958 रूपये, छिंदवाड़ा को 10 करोड़ 44 लाख 3 हजार 7 रूपये, दतिया को 4 करोड़ 58 लाख 95 हजार 88 रूपये, डिण्डोरी को 7 करोड़ 9 लाख 69 हजार 783 रूपये, गुना को 4 करोड़ 73 लाख 70 हजार 935 रूपये, ग्वालियर को 6 करोड़ 2 लाख 28 हजार 357 रूपये, जबलपुर को 8 करोड़ 86 लाख 50 हजार 669 रूपये, कटनी को 7 करोड़ 98 लाख 12 हजार 942 रूपये, मंडला को 9 करोड़ 5 लाख 65 हजार 39 रूपये, मुरैना को 11 करोड़ 39 लाख 79 हजार 640 रूपये, नरसिंहपुर को 5 करोड़ 47 लाख 76 हजार 99 रूपये, रायसेन को 7 करोड़ 40 लाख 18 हजार 55 रूपये, सतना (मैहर जिला शामिल) को 11 करोड़ 60 लाख 97 हजार 834 रूपये, सिवनी को 8 करोड़ 90 लाख 65 हजार 250 रूपये, शहडोल को 5 करोड़ 89 लाख 5 हजार 698 रूपये, श्योपुर को 4 करोड़ 90 लाख 15 हजार 447 रूपये, शिवपुरी को 9 करोड़ 87 लाख 24 हजार 589 रूपये, सीधी को 8 करोड़ 66 लाख 16 हजार 304 रूपये, सिंगरौली को 8 करोड़ 90 लाख 39 हजार 910 रूपये, उमरिया को 4 करोड़ 66 लाख 42 हजार 12 रूपये तथा विदिशा जिले को 9 करोड़ 36 लाख 34 हजार 41 रूपये का आवंटन जारी किया गया है।
योजना का उद्देश्य
पीएम पोषण योजना का प्राथमिक उद्देश्य बच्चों में बौनेपन, कुपोषण, एनीमिया और जन्म के समय कम वजन और इससे उपजने वाली समस्याओं को कम करना है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं की पोषण संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने में भी यह योजना अत्यंत सहायक है। कुपोषण भारत में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जो देश के लाखों बच्चों और महिलाओं को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। यह योजना जीवन-चक्र के सार्वभौमिक दृष्टिकोण पर आधारित है, जो शिशु के जीवन के पहले 1,000 दिनों पर विशेष ध्यान केंद्रित करती है, जो गर्भाधान से लेकर शिशु की दो वर्ष की आयु तक होता है। यह योजना राष्ट्र के सभी नागरिकों के स्वास्थ्य और कल्याण को आकार देने में मां की गर्भावस्था और शिशुवस्था के दौरान पर्याप्त पोषण व देखभाल के महत्व पर केन्द्रित है। इस योजना से देश की सभी प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं के बच्चों को सीधा लाभ मिलता है। इसमें पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं के बच्चे भी शामिल हैं।
छिंदवाड़ा जिले के 66 प्रतिशत से अधिक परिवारों को अपने घर में मिल रहा नल से जल
“जल जीवन मिशन” से जल संकट से मिली मुक्ति
भोपाल! कुछ बातें कही नहीं जातीं, पर उनकी आहट महसूस हो जाती है। जैसे बिना शोर-शराबे के छिंदवाड़ा जिले में एक बढ़िया काम हुआ है। छिंदवाड़ा जिले में कुल 3 लाख 53 हजार 326 परिवार रहते हैं। चूंकि जल सबके जीवन से जुड़ा विषय है, इसलिये पीएचई विभाग ‘जल जीवन मिशन’ (योजना) के जरिये इन सभी परिवारों को ‘हर घर नल से जल’ उपलब्ध कराने के लिये पूरी शिद्दत से प्रयास कर रहा है। इस काम में पीएचई को बड़ी सफलता मिल रही है। जिले के 466 से अधिक गांवों में पीएचई ने स्थायी नल कनेक्शन दे दिये हैं। सितम्बर 2024 तक लक्षित परिवारों में से 2 लाख 33 हजार 158 से अधिक परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन देकर घर-घर जल मुहैया कराया जा रहा है। तय लक्ष्य के 66 प्रतिशत से अधिक परिवारों को यहां नल से जल मिल रहा है। यह एक बड़ी उपलब्धि है। इससे छिंदवाड़ा जिले के उन गांवों के लोगों को, जो पहले शुद्ध जल के लिये खासे हैरान-परेशान रहते थे, उन्हें जल संकट से हमेशा के लिये मुक्ति मिल गई है। अब ग्रामीणों को जल के लिये भटकना नहीं पड़ता। सिर्फ नल खोलने भर की बात है, पानी की धार से यहां सबके घर गुलज़ार हैं।

छिंदवाड़ा जिले में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) की भारिया जनजाति निवास करती है। जिले में जल जीवन मिशन की सफलता का सबसे ज्यादा लाभ महिलाओं को हुआ है। जिले की आधी आबादी (महिलाओं) को अब पानी की किल्लत से पूरी आजादी मिल गई है।
छिंदवाड़ा जिले के कचरिया गांव में भी जल जीवन मिशन से हर घर नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाया जा रहा है। इसी गांव की निवासी कविता सूर्यवंशी बताती हैं “हमारे गांव में पानी की बड़ी किल्लत थी। हम दूर-दूर से पानी लाते थे, जो हमारे लिए बेहद कठिन होता था। लेकिन अब हमें घर पर ही नल से साफ और शुद्ध पानी मिल रहा है। इससे न सिर्फ हमारे समय की बचत हो रही है, बल्कि उस समय में हम दूसरे जरूरी काम भी कर पा रहे हैं। यह योजना हमारे जैसी लाखों महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव और खुशहाली का नया दौर लेकर आई है।”
MP हाई कोर्ट की तीखी टिप्पणी सरकार गुंडागर्दी से किसी की जमीन बिना मुआवजा दिए नहीं हड़प सकती।
जीतेन्द्र सेन
जबलपुर:- MP हाई कोर्ट ने ओपन कोर्ट में मौखिक रूप से तल्ख टिप्पणी में कहा कि सरकार गुंडागर्दी से किसी की जमीन बिना मुआवजा नहीं हड़प सकती। इसी के साथ सरकार को आदेश दिए कि याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी शशि पांडे को उसकी जमीन के बदले वर्ष 1988 से अभी तक का मुआवजा 10 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से भुगतान करें।
कोर्ट ने कहा कि मुआवजे की उक्त राशि इस दौरान पदस्थ रहे सभी कलेक्टरों से वसूल की जाए। याचिकाकर्ता को यह राशि दो माह के भीतर भुगतान की जाए। न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह अहलूवालिया की एकलपीठ ने प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि आदेश का पालन सुनिश्चित कर हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष रिपोर्ट पेश करें।
बायपास से लगी जमीन ले ली थी याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी शशि पांडे की ओर से अधिवक्ता आरके संघी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि राज्य शासन ने पांच फरवरी, 1988 को याचिकाकर्ता की अधारताल बायपास से लगी 29 हजार 150 वर्गफुट जमीन ले ली थी।
इतने वर्षों में मुआवजा भी नहीं दिया गया।
इस जमीन के बदले याचिकाकर्ता को मुआवजा नहीं दिया गया और इतने वर्षों में अधिग्रहण की कार्रवाई भी नहीं की गई। इसके पहले भी एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें हाई कोर्ट ने 2006 में याचिकाकर्ता के प्रकरण का निराकरण करने के निर्देश कलेक्टर को दिए थे। वर्ष 2007 में तत्कालीन कलेक्टर ने आदेश तो पारित किया, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। याचिकाकर्ता ने पुन: 2016 में याचिका दायर कर मुआवजे की मांग की।
